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मेरी बीवी की चुदास-1


प्रेषक: अमरजीत


दोस्तों में यहाँ पहली बार कोई अपना एक निजी किस्सा बताने जा रहा हूँ ! ये घटना मेरे साथ आज से कोई ३ साल पहले हुई थी ! तब हम नोयडा की एक छोटी सी कालोनी में किराये के कमरे में रहते थे ! हम से मतलब में मेरी बीवी और मेरा एक साल का बेटा, हमारा एक कमरे का मकान था जिसमे किचन बाथरूम अलग थे ! दरअसल मुझे नोयडा कुछ समय के लिए रहना था क्योकि मेरा यहाँ ट्रांसफर १ साल के लिए हुआ था इसीलिए मैंने एक काम चलाऊ कमरा किराये पर लिया था हालाँकि वो जगह काफी साफ़ सुथरी थी ! मकान मालिक भी अच्छे लोग थे ! बस ये था की वो इलाका थोडा सा बदनाम था गुंडागर्दी के लिए ! कुछ शरारती लोग वहां बदमाशी किया करते थे ! जिस गली में मैंने कमरा लिया था उसी गली में ३ – ४ थोड़े हरामी किस्म के लोग थे उनकी उम्र कोई २६ – २७ साल के आसपास रही होगी खा पी कर तंदरुस्त बने हुए थे बस उनका कुछ काम नहीं था बस बदमाशी के अलावा ! वहां के लोकल नेता का हाथ उन पर था इसलिए कोई उनसे उलझता नहीं था ! मेरे मकान मालिक ने भी मुझे वहां आते की उनसे दूर रहने की हिदायत दे डाली थी ! वैसे भी मेरा क्या मतलब था उनके साथ रहने का में सुबह ऑफिस जाता और रात ९ – १० बजे से पहले घर नहीं आता था ! मेरी बीवी भी मकान मालिक की बीवी के साथ ही रहती थी बस एक संडे का ही दिन होता था तो में दिन भर घर पर या तो टी वी देख कर या फिर मकान मालिक के साथ बीअर पी कर निकाल देता था ! मेरा बेटा पास ही में एक प्ले स्कूल में जाता था !

ये तो हुई मेरी सामान्य बातें अब में काम की बात पर आता हूँ ! मेरा नाम अमर है लोग मुझे अमरजीत भी कहते है  मै हरियाणा का रहने वाला हूँ मेरी बीवी का नाम श्रेया चावला है ! हम दोनों की ही ज़िन्दगी बहुत अच्छे से कट रही थी ! एक दिन में रात को में अपने ऑफिस से घर आया तो श्रेया ने बताया की आज दिन में स्कूल से घर आते हुए मेरे बेटे को बहुत चोट लग गयी थी मेरा बेटा बहुत शरारती है सड़क पर दौड़ते हुए किसी बाइक वाले ने उसे टक्कर मार दी थी ! मेरी बीवी ने बताया के हमारी ही गली के कुछ लड़कों ने उसकी मदद की मेरे बेटे को हॉस्पिटल पहुचाने की और वो ही उसे वही घर पर भी लेकर आये ! मैंने सोचा हमारी गली में कौन ऐसा भला आदमी आ गया ! मैंने अपनी बीवी से उसका नाम पूछा तो वो बोली की उसके दोस्त उसे प्रवीन भाई कह रहे थे ! दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

मैंने कहा उसके दोस्त मतलब ! उसने बताया की उसके के साथ उसके दो दोस्त और थे ! चलो अच्छा है कम से कम कोई तो हमारी गली में है जो भला आदमी है !

“तुमने उसे चाय नाश्ता कराया या नहीं ” मैंने अपनी बीवी से पूछा

“मैंने काफी कहा पर वो रुके ही नहीं और चले गए और कह गए है आपके पति के साथ ही किसी दिन बैठेंगे”

मुझे बताओ कौन सा घर है में उन्हें जाकर थोडा अपने तरीके से धन्यवाद दे आता हूँ ! मेरी बीवी ने मुझे उनका घर बताया और में उनके घर की तरफ चल दिया

उनके घर पहुच कर पता चला वो घर पर नहीं है पूछने पर पता चला के वो पार्क में है में पार्क जो पास ही था वह चला गया

वह जाकर मुझे उन्हें तलाश करने में परेशानी नहीं हुई मैंने वह एक से पूछा तो उसने बता दिया

जब मैंने उसे देखा तो में थोडा सा परेशान हो गया ! वो वही गुंडे लोग थे जिनसे में सब डरते थे पर फिर मैंने सोचा एक बार इनको थोडा दारू पिला देता हूँ फिर कभी बात नहीं करूँगा !

मैंने उन्हें अपना परिचय दिया तो उन्होंने मुझे भी वही बैठा लिया ! वो सब दारू पी रहे थे ! ज़बरदस्ती मुझे भी पेग बना के पिला दिए !

वहां बातों ही बातों में मैंने उन्हें भी एक पार्टी का न्योता दे दिया ! वही उसी पार्क में !

अगले दिन मैंने वही पार्क में उन्हें दारू की पार्टी दी ! बातों से तो वो सब मुझे भले ही लगे हा बस गलियां ज्यादा दे रहे थे हर बात में माँ बहन की

पर मैंने कहा मेरा क्या जाता है वैसे भी में रात को घर आता हूँ तो अकेले पीने से अच्छा है इनके साथ पी ली जाये और टाइम पास भी हो जाएगा

फिर तो आम तौर पर में वही पार्क में उन तीनो के साथ पिने लगा !

उनमे एक प्रवीन था उसे सब प्रवीन भाई कहते थे दूसरा विनय और तीसरा विमल !

तीनो ही काफी लम्बे चौड़े थे ! उन्हें देख कर तो कोई वैसे ही डर जाये पर मैंने ये भी देखा की वो बिना बात के किसी को परेशान नहीं करते ! दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

अभी कुछ दिनों बाद होली का त्योंहार आने वाला था ! मेरे बेटे के प्ले स्कूल की भी छुट्टियाँ पड़ चुकी थी तो मैंने उसे उसके दादा दादी के पास भेज दिया !

होली के दिन में अपने घर पर सुबह सुबह ही बीअर पीना शुरू कर चूका था ! श्रेया ने आज पकोड़े तले थे ! मकान मालिक भी मेरे यहाँ आकर थोड़ी सी पी कर चला गया उसका परिवार भी होली पर अपने गाँव गया हुआ था उसने भी मेरे साथ पी और वो भी अपने किसी रिश्तेदार के यहाँ होली खेलने चला गया अब पुरे मकान पर में और मेरी बीवी रह गए थे

हम दोनों ने भी खूब जम कर होली खेली मेरी बीवी ने भी आज थोड़ी सी बीअर पी ली थी तो उसे भी सरुर चड़ा हुआ था ! वो भी आज मेरे साथ पूरी मस्ती कर रही थी !

उसने साड़ी पहनी हुई थी जिस पर बिना बाँहों का ब्लाउस था वो भी लो नेक का ! बहुत ही सेक्सी लग रही थी

हम दोनों ऐसे ही मस्ती करते रहे मैंने कुछ ज्यादा ही पी ली थी मेरा सर घूमने लगा था ! मिने सोचा थोडा सा नींद पूरी कर लीं !

ये सोच कर में सोने के लिए जा ही रहा था तभी दरवाजे पर दस्तक हुई ! मैंने सोचा अब कौन आया होगा !

मैंने दरवाज़ा खोला तो बहार प्रवीन खड़ा था !

उसने आते ही मुझे गले लगा लिया और मुझे रंग लगाने लगा ! मैंने भी उसे जवाब में रंग लगा दिया

वो अन्दर आया और वही बैठ गया वो अपने साथ एक दारू की बोतल लाया था ! वो खुद ही किचन में गया और वह से दो ग्लास उठा लाया ! मेरा वैसे ही सर घूम रहा था ऊपर से और दारू मुझे तो उलटी आने को हो रही थी पर उसने जबरदस्ती मुझे एक पेग पिला ही दिया अब तो मेरा बुरा हाल था ! में वही लेट गया ! प्रवीन ने श्रेया से कुछ खाने के कहा ! तो श्रेया किचन से पकोड़े ले आई ! दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

मैं नशे में तो था पर मेरा ध्यान प्रवीन की तरफ ही था ! आदमी चाहे जितना भी अच्छा हो दुसरे की बीवी को देखकर उसके मुह में लार टपकने लगती है ! मैंने ध्यान दिया की वो बार बार श्रेया के उरोजो की तरफ ही देख रहा था ! जब श्रेया उसे पकोड़े देने झुकी तो वो उसके ब्लाउस में दिखती उरोजो की लकीर को देख रहा था ! और जब श्रेया किचन की तरफ जाने लगी तब उसकी हिलते हुए कुलहो को घूरे जा रहा था ! मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था पर में कुछ नहीं बोला ! तभी उसका फोन बजा उसने बात करते करते कहा की वो भी अमर के घर आजाये ! मुझे फिर गुस्सा आया की वो बिना मुझसे पूछे किसी को ऐसे कैसे मेरे घर बुला सकता है. उसने बताया की विनय और विमल भी आ रहे है ! मैंने सोचा चलो वो तो जानं पहचान के ही है !

थोड़ी देर में वो दोनों भी आ गए मैंने उन दोनों को भी रंग लगाया और होली मुबारक की अब वो तीनो दारू पिने लगे और मुझे भी एक पेग पिला ही दिया अब तो में बिलकुल बेहोश होने लगा था ! में बाथरूम में गया और वहा से उलटी करके वापस आ गया ! अब थोडा सा राहत मिली ! दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

पर सर अब भी घूम रहा था !

मैं थोड़ी देर के लिए लेट गया ! अब वो श्रेया से बातें करने लगे !

बातें करते करते विनय बोला यार होली का मज़ा तो भाभी के साथ ही आता है जब तक होली पर किसी भाभी को रंग नहीं लगाया तो क्या खाक होली खेली !

श्रेया ने कहा आपने गुलाल लगाना है तो कोई बात नहीं पर अगर आपने कोई पक्का रंग लगाया तो अच्छा नहीं होगा !

उन्होंने कहा नहीं भाभी हम कोई पक्का रंग नहीं लगाएँगे ! प्रवीन सबसे पहले उठा और श्रेया के गलों पर रंग लगाने लगा उसने श्रेया का पूरा चेहरा गुलाल से रंग दिया ! अभी वो रंग लगा ही रहा था की विनय भी पीछे से आकर श्रेया के मुहं पर गुलाल मलने लगा श्रेया को इसकी उम्मीद नहीं थी तो वो विनय से बचने के लिए थोडा झुकी ! विनय ने उसके चेहरे को कस के पकड़ा हुआ था श्रेया ने जब अपना सर झुकाया तो विनय भी थोडा खीच कर आगे को हो गया और उसका अगला भाग श्रेया के कूल्हों के साथ सट गया ! श्रेया ने किसी तरह अपने आप को उन दोनों से छुड़ाया और अलग हुई ! मैंने लेते हुए देखा के विनय की पेंट का अगला हिस्सा उभरा हुआ था मतलब उसका लिंग उत्तेजित हो चूका था ! श्रेया ने सोचा होगा अब इनकी होली ख़तम हुई तो अब बस पर तभी विमल भी खड़ा हो गया और श्रेया की तरफ बदने लगा

उसके हाथ में एक पैकट श्रेया ने देखा तो वो चिल्ला पड़ी नहीं ये नहीं !!!! वो पक्का रंग था ! विमल बोला भाभी कोई बात नहीं एक बार नहाते ही ये सब उतर जाएगा ! वो श्रेया की तरफ बदने लगा ! मुझे गुस्सा तो आ रहा था पर एक चीज़ मैंने नोट की की ये सब देख कर में भी बहुत उत्तेजित हो रहा था ! और मेरा भी लंड बुरी तरह खड़ा हो चूका था !मैंने सोच चलो अब देखते है आगे ये क्या करते है मैं वैसे ही बिस्तर पर आँखें बंद करके पड़ा रहा !

विमल ने श्रेया को आखिर दबोच ही लिया और उसके चहरे पर रंग लगाने लगा ! श्रेया ने बहुत कोशिश की अपने आप को बचाने की पर विमल के आगे उसकी एक न चली ! उसने बुरी तरह उसका चेहरा रंग दिया ! ये देख कर विनय और प्रवीन भी विमल से रंग ले कर आ गए और श्रेया को रंग लगाने के लिए उसको घेरने लगे ! अब तो श्रेया ने वहा से भागने में ही भलाई समझी ! वो किचन की तरफ भागने लगी ! पर विनय ने उसका रास्ता रोक लिया और उसके हाथों पर रंग लगाने लगा इस धक्का मुक्की में कई बार उस का हाथ श्रेया के स्तनों को छू जाता ! अब प्रवीन और विमल भी श्रेया को रंग लगाने को उसके पास आ गए ! अब उन तीनो ने उसको घेर लिया था ! तीनो की आँखों में वासना साफ़ देखी जा सकती थी ! और उनका क्या हाल था ये उनकी फूली हुई पेंट बता रही थी ! मेरा भी लंड उत्तेजित होकर पजामा फाड़ कर बाहर आने को तैयार था !

श्रेया ने उन के बीच में से निकलने की कोशिश की तो विमल ने उसको पकड़ने की कोशिश की तो जल्दबाजी में उसने श्रेया की कमर में हाथ डाल दिया और दोनों हाथों से घेरा बना कर उसे पीछे से कस कर पकड़ लिया !

ओह ये क्या !!!! श्रेया के पीछे विमल बिलकुल उससे चिपक कर खड़ा हो गया और उसको अच्छी तरह से जकड लिया उसका फुला हुआ लंड श्रेया की गांड की दरारों के बिलकुल बीच में था !! श्रेया जितना अपने आप को विमल से छुड़ाने की कोशिश करती उतना ही वो विमल से रगड़ खाती और उतना ही विमल को मज़ा आता ! वो भी जान बुझ कर श्रेया को दबाये जा रहा था ! और अपने नीचे के हिस्से को श्रेया की गांड से रगड़े जा रहा था ! इधर विनय और प्रवीन ने श्रेया श्रेया के बदन का ऊपर का जो भी हिस्सा साफ़ देखा वहां वो कस कस के रंग लगाये जा रहे थे ! उसकी गरदन उसकी पीठ हाथों जहाँ भी नंगा हिस्सा था वहां उनका हाथ चलता जा रहा था ! श्रेया के साथ इस धक्कामुक्की में श्रेया की साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया !

अब तो उन तीनो के मुह में पानी आ गया ! श्रेया के ब्लाउस में झांकती उसकी दोनों स्तनों की लकीर उन तीनो के सामने थी ! ! मैंने सोचा अब ये क्या करेंगे ! कही कुछ ज्यादा ही न हो जाये ! श्रेया भी अब थोडा तेज़ चिल्लाने लगी थी !! पर उन पर तो अब वासना का भुत चढ़ चूका था ! प्रवीन ने एक रंग का पाकेट खोला और श्रेया के ब्लाउस की दरार को एक उंगली से हल्का सा उठाया और पूरा पाकेट अन्दर उड़ेल दिया ! पूरा रंग श्रेया के ब्लाउस में चला गया पर वो रंग सुखा हुआ था ! विनय भाग कर बाथरूम से एक जग में पानी ले आया और उसने भी ब्लाउस को थोडा सा उठा कर पूरा पानी अन्दर डाल दिया ! अब श्रेया का पूरा ब्लाउस गिला और रंग से सरोबार हो गया था ! ब्लाउस गीला होने से अब उसके अन्दर की ब्रा भी अब साफ़ चमकने लगी थी उसे देख कर तो अब तीनो की हवस और बढ गयी ! विमल का हाथ अब श्रेया की कमर से ऊपर आ कर उसके चूचो तक आ चूका था ! श्रेया ने थोडा सा चिल्ला कर कर कहा तो ! विमल ने उसे छोड़ दिया ! श्रेया बाथरूम की तरफ भागने लगी ! तभी विनय ने श्रेया का जो पल्लू जमीन की तरफ था उस पर पाँव रख दिया ! श्रेया जब भागी तो पल्लू बड़ा होने के कारण उसकी साड़ी खुल गयी श्रेया ने अपनी साड़ी उठाना जरुरी नहीं समझा होगा उसे लगा होगा अब तो ये मुझे रंग लगा ही चुके है अब सीधा बाथरूम जाकर नहा लेती हूँ तो वो अपनी खुलती हुई साड़ी को और उतर कर बाथरूम की तरफ भागी ! अब ये सीन देख कर तो तीनो मचल उठे भागते हुए श्रेया के बदन से चिपका हुआ उसका पेटीकोट उसकी गांड की शेप बता रहा था ! ३६ की गांड को देखते ही प्रवीन श्रेया के पीछे भागा और श्रेया के बाथरूम का दरवाज़ा बंद करने से पहले ही दरवाज़ा पकड़ कर खड़ा हो गया ! उसके पीछे दोनों भी श्रेया को धकेलते हुए अन्दर की तरफ आ गए ! अब श्रेया फिर से बाथरूम में उनसे घिर गयी ! अब श्रेया ने उनको डाटना शुरू किया तो विनय ने कहा देखो भाभी आज होली है ! और आज तो हम आप को तस्सली से रंग लगा कर ही रहेंगे अब चाहे अपनी मर्ज़ी से लगाने दो या फिर ज़बरदस्ती !!! बोलो क्या करना है ! श्रेया ने भी अब सोचा के अब ये मानने वाले नहीं है ! और वैसे भी इस रगडा रगड़ी में उसे भी जरुर मज़ा आया होगा ! उसने भी कहा ! देखो रंग लगा लो पर में चुपचाप नहीं लगवाने दूंगी ! तुम अपनी कोशिश करों रंग डालने की में अपनी कोशिश करुँगी अपने को बचाने की !! ठीक है !!!!

ठीक है भाभी अब आएगा न मज़ा ! तीनो ने कहा !! अब होली थोड़ी और गरम होने वाली थी क्योंकि श्रेया को भी अब मज़ा आने लगा था ! उसे तो लगा था के शायद ये तीनो उसके पति के दोस्त है और सच में वो सिर्फ होली खेलने आये है पर में जानता था क्या चल रहा है ! अब मेरी बीवी उन तीन मर्दों के सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउस में होली खेलने को बिलकुल तैयार हो चुकी थी ! विमल ने तुरंत एक जग पानी उठाया और श्रेया के वक्षस्थल की तरफ फ़ेंक दिया एक बार फिर श्रेया का उपरी हिस्सा गीला हो गया और उसकी ब्रा, ब्लाउस से झाकने लगी ! दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | फिर तो विमल ने लगातार ३ ४ बार श्रेया के ऊपर जग से पानी डाल दिया जिससे श्रेया बिलकुल तरबतर हो गयी !! उसका पेटीकोट भी उसकी बदन से बुरी तरह चिपक गया और उसके पुरे बदन की शेप साफ़ साफ़ दिखने लगी ! अब तो प्रवीन, विनय और विमल भी थोडा और श्रेया को हाथ लगाने लगे विनय ने जानबूझ कर श्रेया के कमर में हाथ डाल कर उसे उठा लिया और कहने लगा की अब तो आप को शावर के नीचे ही गीला करेंगे ! विनय ने श्रेया को आगे की तरफ से उठा लिया जिससे श्रेया के चुचे विनय के चहरे के सामने आ गए और उसके दोनों हाथ श्रेया के पीछे उसकी गांड के नीचे पहुच गए विनय ने श्रेया को कस कर पकड़ा और उसे उठा कर शोवर के नीचे ले आया ये देख कर विमल ने शोवर चालू कर दिया ! अब श्रेया और विनय दोनों भीगने लगे ! विनय ने जिस तरह से श्रेया को उठाया था उससे श्रेया का पेटीकोट थोडा सा ऊपर को हो गया था ! जिस से उसकी टांगों का पिछला हिस्सा नंगा हो गया था ! मतलब उसके टांगों का पिछला हिस्सा घुटनों तक दिख रहा था !!! प्रवीन से रहा नहीं गया और उसने थोडा सा रंग लेकर उसकी टांगों में मसलना शुरू कर दिया !!


कहानी जारी रहेगी …..


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