All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

प्लीज़ मुझे प्यार करो ना-2


प्रेषक : राजेश


मित्रो आप लोगो ने प्लीज़ मुझे प्यार करो ना-1 में अभी तक जो पढ़ा अब उसके आगे पढ़िए …एक दिन शाम के छः बजे विक्रम हमारे घर आया। उसने बताया कि वो ऑफिस के काम में काफी मशगूल था, इसलिए हम लोगों से नहीं मिल पाया। बातचीत के दौरान मैंने विक्रम को बताया कि अगले वीक-एंड पर मैं और रानी गोआ घूमने जा रहे हैं। मैंने विक्रम से कहा, “विक्रम तुम और रोशनी क्यों नहीं साथ चलते हो?”


विक्रम कुछ देर सोचते हुए बोला, “मैं तैयार हूँ… पर हम लोग आपस में एक शर्त लगाते हैं। जो शर्त हार जायेगा उसे घूमने का सारा खर्च उठाना पड़ेगा… बोलो मंजूर है?”


“पर शर्त क्या होगी?” मैंने विक्रम से पूछा।


“शर्त ये होगी कि अगले दस दिन तक हम सफ़र की तैयारी करेंगे। इन दस दिनों में हम चारों चुदाई के गुलाम होंगे। हम एक दूसरे से कुछ भी करने को कह सकते हैं, जो पहले काम के लिए मना करेगा वो शर्त हार जायेगा,” उसने कहा।


रानी ये बात सुनते ही उछल पड़ी “मुझे मंजूर है।” जब रानी हाँ बोल चुकी थी तो मैं कौन होता था ना करने वाला, बल्कि मैं तो तुरंत रोशनी के ख्यालों में खो गया कि मैं उसके साथ क्या-क्या कर सकता हूँ, और अगर उसने इनकार किया तो छुट्टियाँ फ़्री में हो जायेंगी, पर मुझे क्या मालुम था कि आगे क्या होने वाला है।


“ठीक है विक्रम हमें मंजूर है,” मैंने कहा।


“तो ठीक है हमारी शर्त कल सुबह से शुरू होगी,” कहकर विक्रम चला गया।


मुझमें और विक्रम में शर्त लग चुकी थी। अब हम अपनी ख्वाहिशें आजमाने का इंतज़ार करने लगे। दूसरे दिन विक्रम शाम को हमारे घर आया और शर्त को शुरू कर दिया। उसने रानी को अपने पास बुलाया, “रानी तुम अपने कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ।”


रानी ने अपने पूरे कपड़े उतारे और नंगी हो गयी। विक्रम ने उसकी चूत पे हाथ फिराते हुए कहा, “रानी पहले तुम अपनी झाँटें साफ़ करो, मुझे चूत पे बाल बिल्कुल भी पसंद नहीं है और उस दिन जैसे ही कोई सैक्सी से हाई हील के सैंडल अपने पैरों में पहन लो।”


रानी वहाँ से उठ कर बाथरूम में चली गयी। थोड़ी देर बाद रानी बाथरूम से बाहर निकल कर आयी। मैंने देखा कि उसकी चूत एक दम चिकनी और साफ लग रही थी। बालों का नामो निशान नहीं था। रानी ने लाल रंग के हाई हील के सैंडल भी पहन लिये थे। विक्रम ने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसे चूमते हुए उसकी चूत में अपनी अँगुली डाल दी।


“वाह क्या चूत है तुम्हारी,” कहकर विक्रम अपनी दूसरी अँगुली उसकी चूत में डाल अंदर बाहर करने लगा।


विक्रम ने रानी को खड़ा किया और खुद खड़ा हो अपने कपड़े उतारने लगा। उसका खड़ा लंड शॉट्‌र्स के बाहर निकल कर फुँकार रहा था। रानी आगे बढ़ कर उसके लंड को अपने हाथों में ले सहलाने लगी।


दोनों एक दूसरे के अँगों को सहला रहे थे, भींच रहे थे। कमरे में मेरी मौजूदगी का जैसे किसी को एहसास नहीं था। “आज मैं तुम्हें ऐसे चोदूँगी कि तुम ज़िंदगी भर याद करोगे?” इतना कहकर रानी विक्रम को खींच कर बिस्तर पे ले गयी।अभी आप लोग मस्तराम डॉट नेट पढ़ रहे है |


रानी ने विक्रम को बिस्तर पर लिटा दिया। उसका लंड पूरा तन कर एक दम तंबू के डंडे की तरह खड़ा था। रानी उसकी टाँगों को फैला कर बीच में आ गयी और उसके लंड को चूमने लगी। मैं पीछे खड़ा ये नज़ारा देख रहा था। रानी के झुकते ही उसकी गोरे चूत्तड़ ऊपर उठ गये थे और उसकी गुलाबी चूत साफ दिखायी दे रही थी।


मैं देख रहा था की रानी विक्रम के लंड को अपने हाथों से पकड़ कर उसके सुपाड़े को चाट रही थी। फिर उसने अपना पूरा मुँह खोल कर उसके लंड को अपने गले तक ले लिया।


इतना कामुक और उत्तेजित नज़ारा देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मेरा लंड मेरी पैंट में पूरा तन गया था। मैं भी अपने कपड़े उतार कर अपने लंड को सहलाने लगा। रानी एक कामुक औरत की तरह विक्रम के लंड की चूसाई कर रही थी। विक्रम ने जब मुझे अपने लंड से खेलते देखा तो कहा, “राजेश ऐसा करो, तुम अपनी बीवी को थोड़ी देर चोद कर उसकी चूत को मेरे लंड के लिये तैयार करो।”


मुझे एक बार तो बहुत बुरा लगा कि एक दूसरा मर्द मुझे ही मेरी बीवी को चोदने के लिये आज्ञा दे रहा है पर लंड की अपनी भूख होती है और ऊपर से हमारी शर्त। मैं झट से रानी के पास पहुँचा और उसके चूत्तड़ पकड़ कर एक ही झटके में अपना पूरा लंड उसकी बिना बालों की चूत में पेल दिया। मेरे लंड के अंदर घुसते ही रानी ने अपने चूत्तड़ और पीछे की और करते हुए मेरे लंड को और अंदर तक ले लिया। मैं जोर के धक्के लगा कर रानी को चोद रहा था और वो हर धक्के के साथ उतनी ही तेजी से विक्रम के लंड को चूस रही थी। “राजेश लगता है अब रानी तैयार हो गयी है।” विक्रम ने रानी की चूचियों को मसलते हुए मुझे हटने का इशारा किया। रानी ने अभी आखिरी बार उसके लंड को चूमा और उठ कर घूम कर बैठ गयी। रानी अपने दोनों पाँव विक्रम के शरीर के अगल बगल रख कर बैठ गयी। उसकी पीठ विक्रम की और थी और उसका चेहरा मेरे सामने था। रानी मुझे आँख मार कर थोड़ा सा उठी और विक्रम का लंड अपने हाथों में ले कर उसे अपनी चूत पे रगड़ने लगी। थोड़ी देर लंड को अपनी चूत पे रगड़ने के बाद वो एक हाथ से अपनी चूत का मुँह फ़ैलाते हुए नीचे की और बैठने लगी। विक्रम का पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा चुका था।


अब रानी अपनी दोनों चूचियों को पकड़ कर एक ब्लू फ़िल्म की अदाकारा की तरह उछल-उछल कर विक्रम को चोद रही थी। जैसे ही वो ऊपर की और उठती तो उसकी चूत थोड़ा सुकड़ जाती और जब वो जोर से उसके लंड पे बैठती तो चूत खुल कर लंड को अपने में समेट लेती। दोनों उत्तेजना में भर चुके थे, विक्रम के हाथ उसकी कमर पर थे और धक्के लगाने में सहायता कर रहे थे।


उनके शरीर की अकड़न देख कर मैं समझ गया कि दोनों का पानी छूटने वाला है। इतने में विक्रम ने रानी को रुकने के लिये कहा। रानी रुक गयी। विक्रम ने उसे खींच कर अपनी छाती पे लिटा लिया। रानी अब विक्रम की छाती पर पीठ के बल लेती थी। विक्रम ने रानी की टाँगों को सीधा कर के फैला दिया जिससे उसका लंड चूत में घुसा हुआ साफ दिखायी दे रहा था। “राजेश आकर अपनी बीवी की चूत को चूसकर उसका पानी क्यों नहीं छुड़ा देते?” कहकर विक्रम ने रानी की चूत को अपने हाथों से और फैला दिया। मैं अपने आपको रोक ना सका और उछल कर उन दोनों की टाँगों के बीच आ अपना मुँह रानी की चूत पे रख दिया। मैं जोर-जोर से उसकी चूत को चूस रहा था और चाट रहा था। मेरी जीभ की घर्षण ने दोनों के बदन में आग लगा दी। थोड़ी देर में विक्रम ने अपने चूत्तड़ ऊपर की और उठाये जैसे कि अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक समाना चाहता हो। मैं समझ गया कि उसका पानी छूटने वाला है। रानी ने भी अपनी चूत का दबाव विक्रम के लंड पर बढ़ा कर अपना पानी छोड़ दिया। विक्रम ने भी रानी की कमर को जोर से पकड़ अपने वीर्य को उसकी चूत में उड़ेल दिया। मैं रानी की चूत जोर से चूसे जा रहा था और साथ ही साथ अपने लंड को रगड़ रहा था। जब विक्रम के लंड ने अपना सारा पानी रानी की चूत में छोड़ दिया तो विक्रम ने रानी को अपने से नीचे उतार दिया और मेरी तरफ़ देखते हुए कहा,“राजेश अब तुम रानी को चोदो। रानी मेरे सामने अपनी टाँगें फ़ैलाये लेटी थी। उसकी गुलाबी चूत मेरे सामने थी और साथ ही मुझे उसकी चूत से टपकता विक्रम का वीर्य साफ दिखायी दे रहा था। दूसरे के वीर्य से भीगी अपनी बीवी की चूत में लंड डालने का मेरा कोई इरादा नहीं था। जब विक्रम ने मुझे हिचकिचाते हुए देखा तो इशारे से मुझे शर्त याद दिलायी। मेरे पास कोई चारा नहीं था, इसलिए मैं रानी की टाँगों के बीच आ गया और एक ही धक्के में अपने खड़े लंड को उसकी चूत में जड़ तक समा दिया। मैंने देखा कि मेरा लंड विक्रम के वीर्य से लिथड़ा हुआ रानी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था। रानी ने अपनी उखड़ी साँसों को संभाल कर अपनी आँखें खोलीं और मुझे देख कर मुस्कुरा दी। फिर उसने पलट कर विक्रम की और देखा। विक्रम उसकी और बढ़ कर उसके होंठों को चूसने लगा। मैं अपनी बीवी को कस के चोदे जा रहा था और वो दूसरे मर्द के होंठों का रसपान कर रही थी। विक्रम अब नीचे की और बढ़ कर उसकी एक चूँची को मुँह मे ले चूस रहा था। इतने में विक्रम झटके से उठा, “तुम दोनों मज़ा करो,” कहकर वो अपने कपड़े पहन वहाँ से चला गया। मैंने रानी की और देखा तो उसने अपनी टाँगें मोड़ कर अपनी छाती पर रख लीं और अपनी अँगुली मुँह में गीली कर के अपनी चूत में घुसा दी।


मैं और तेजी से उसे चोदने लगा और वो अपनी अँगुली से खुद को चोद रही थी। मुझे पता था कि थोड़ी ही देर में उसकी चूत फिर पानी छोड़ देगी और मेरा लंड उसकी चूत में पानी छोड़ देगा। थोड़ी ही देर में हम दोनों का शरीर अकड़ने लगा और रानी ने अपनी नसों के खींचाव से मेरे लंड को पूरा भींच लिया। उसकी चूत ने इतनी जोरों का पानी छोड़ा कि मुझे ऐसा लगा कि मेरे लंड पर कोई बाँध खुल गया है। मैंने भी उसे जोरों से भींचते हुए अपना वीर्य उगल दिया।


हम दोनों आपस में शर्त तो लगा चुके थे, पर इस शर्त की हद कहाँ तक हमें ले जायेगी, ये मुझे कुछ दिनों के बाद पता चला। मैंने और रानी ने विक्रम और रोशनी का अपने दोस्तों से परिचय कराने के लिए एक छोटी सी पार्टी रखी थी।


मैंने सोच लिया था कि मैं रोशनी को वो सब करने को कहुँगा जो वो नहीं करना चाहती। अगर उसने ना कहा तो मैं शर्त जीत जाऊँगा। पार्टी के दिन मैं ऑफिस में यही सोचता रहा और शाम तक मैंने सब कुछ सोच लिया था कि मुझे क्या करना है।


रोशनी के खयालों में खोया हुआ जब मैं शाम को घर पहुँचा तो मेरा लंड पूरा खंबे के  जैसे तना हुआ था। रानी ने मुस्कुराते हुए दरवाज़ा खोला और मुझे बांहों मे भर कर चूम लिया। मेरा लंड उसकी चूत पे ठोकर मार रहा था। रानी ने दरवाज़ा बंद किया और घुटनों के बल बैठते हुए मेरी पैंट के बटन खोलने लगी।


मैं दीवार का सहारा ले कर खड़ा हो गया और रानी मेरे लंड को बाहर निकल चूसने लगी। वो मुझे जोर-जोर से चूस रही थी और मैं उसके बालों को पकड़ अपने लंड पर उसके मुँह को दबा रहा था। थोड़ी देर में मेरे लंड ने उसके मुँह में वीर्य छोड़ दिया जिसे वो सारा गटक गयी।


अपने होंठों पे लगे मेरे वीर्य को अपनी जीभ से साफ करते हुए वो बोली, “राजेश जानते हो आज मैं बाज़ार से क्या लेकर आयी हूँ?” इतना कह वो मुझे घसीट कर बेडरूम मे ले गयी। बेडरूम मे पहुँच कर मैंने देखा कि बिस्तर पर एक बहुत ही काले रंग का नौ इंच लंबा और तीन इंच मोटा डिल्डो पड़ा था।


रानी ने बताया कि वो ये डिल्डो रोशनी के साथ बाज़ार से लायी है। ये बेटरी से चलता है। रानी इसे आजमाना चाहती थी। मैंने दराजेश से बेटरी निकाल कर उसमें लगा दी। रानी बिस्तर पर लेट गयी और अपने गाऊन को कमर तक उठा दिया और अपनी चूत को फैला दिया।


मैंने देखा की कई दिनों से रानी ने पैंटी पहनना छोड़ दिया था। “मैं चाहती हूँ कि तुम इसे मेरी चूत में डालकर मुझे इससे चोदो,” कहकर रानी ने डिल्डो मेरे हाथों में पकड़ा दिया। मैंने पहले उसकी सफ़ाचट चूत को चूमा और फिर डिल्डो को उसकी चूत के मुहाने पे रख दिया। डिल्डो मेरे लंड से भी मोटा था और मैं सोच रहा था कि वो रानी की चूत में कहाँ तक जायेगा।


मैंने डिल्डो उसकी चूत पे रखा और अंदर घुसाने लगा। रानी अपनी टाँगें हवा में उठाय हुए थी। थोड़ी देर में ही पूरा डिल्डो उसकी चूत में घुस गया और मैंने उसका का स्विच ऑन कर दिया। अब वो रानी को मज़े दे रहा था और उसके मुँह से सिस्करी निकल रही थी, “ओहहहहहहह आआआआआहहहहहह।”


इतने में ही फोन की घंटी बजी। रानी झट से बिस्तर पर से उठ कर फोन सुनने लगी। फोन पर उसकी फ्रेंड थी जो थोड़ी देर में हमारे घर आ रही थी। रानी ने अपने कपड़े दुरुस्त किए और डिल्डो को बेड के साईड ड्रावर (दराजेश) में रख दिया। दरवाज़े की घंटी बजी और रानी अपनी फ्रेंड को रिसीव करने चली गयी।


मैंने भी रात के कार्यक्रम को अंजाम देने की लिए रोशनी का फोन मिलाया। उसने पहली घंटी पर ही फोन उठाया और हँसते हुए पूछा, “रानी को अपना नया खिलोना कैसा लगा?” मैंने उसकी बातों को नज़र-अंदाज़ कर दिया। मैंने उसे बताया कि उसे रात की पार्टी में टाईट काले रंग की ड्रेस पहन कर आनी थी और उसे नीचे कुछ भी नहीं पहनना था। ना ही किसी तरह की ब्रा और न ही पैंटी। और साथ ही सैंडल भी एक दम हाई हील की होनी चाहिए। उसने बताया कि ऐसी ही एक ड्रेस उसके पास है। रोशनी ने पूछा कि उनके कुछ दोस्त उनके साथ रहने के लिये आ रहे हैं तो क्या वो उन्हें साथ में पार्टी में ल सकती है। मैंने उसे हाँ कर दी।


सबसे पहले पहुँचने वालों में विक्रम और रोशनी ही थे। वे करीब सात बजे पहुँच गये थे। उनके साथ उनके दोस्त अजय और शालिनी थे। दोनों की जोड़ी खूब जंच रही थी। अजय जिसे सब प्यार से अवी कहते थे, थ्री पीस सूट में काफी हेंडसम लग रहा था। और शालिनी का तो कहना ही क्या; उसने काले रंग की डीप-कट ड्रेस पहन रखी थी जो उसके घुटनों तक आ रही थी। गोरा रंग, पतली कमर, सुडौल टाँगें और पैरों में चमचमाते हुए काले रंग के स्ट्रैपी हाई हील के सैंडल। शालिनी काफी सुंदर दिखायी दे रहे।


पर रोशनी को देख कर तो मेरी साँसें ऊपर की ऊपर रह गयी। जैसे मैंने कहा था उसने लो-कट की काले कलर की टाईट ड्रेस पहन रखी थी। और वो शालिनी की ड्रेस से भी छोटी थी। उसके घुटनों से थोड़ा ऊपर की और तक। ड्रेस इतनी छोटी थी कि बिना ड्रेस को ऊपर किये उसकी साफ और चिकनी चूत दिखायी दे सकती थी। पता नहीं रोशनी ने कैसे हिम्मत की होगी बिना ब्रा और पैंटी के ये ड्रेस पहनने की।


रानी भी अपनी लाल ड्रेस ओर मैचिंग लाल सैंडलों में थी जो उसने इसी पार्टी के लिये नयी खरीदी थी। सबका परिचय कराने के बद मैं अपने काम में जुट गया। मैं रोशनी को इशारा कर के बार काऊँटर की और बढ़ गया, और ड्रिंक्स बनाने लगा। जब मैं ड्रिंक्स  बना रहा था तब रोशनी ने मेरे पीछे आ कर मेरे कान में कहा कि उसने वैसे ही किया जैसा मैंने उसे करने को कहा था।


वो मेरे सामने आकर अपनी टाँगें थोड़ी फैला कर खड़ी हो गयी, जैसे बताना चाहती हो कि वो सही कह रही है। मैंने जान बूझ कर अपने हाथ में पकड़ा बॉटल ओपनर नीचे जमीन पर गिरा दिया। जैसे ही मैं वो ओपनर उठाने को नीचे झुका तो रोशनी ने अपनी ड्रेस उठा कर अपनी बालों रहित चूत को मेरे मुँह के आगे कर दिया। उसके इस अंदाज़ ने मेरे लंड को तन्ना दिया। मैंने थोड़ा सा आगे बढ़ कर हल्के से उसकी चूत को चूमा और खड़ा हो गया। अच्छा हुआ मेरी इस हर्कत को कमरे में बैठे लोगों ने नहीं देखा।


धीरे-धीरे लोग इकट्ठे होते जा रहे थे। रोशनी मेरे साथ मेरे पीछे खड़ी मुझे ड्रिंक्स बनाने में सहायता कर रही थी। बार की आड़ लेकर मुझे जब भी मौका मिलता मैं उसके चूत्तड़ और उसकी गाँड पे हाथ फिरा देता। एक बार जब हमारी तरफ़ कोई नहीं देख रहा था तो उसने मेरा हाथ पकड़ अपनी चूत पे रख दिया और कहा, “राजेश मेरी चूत को अपनी अँगुली से चोदो ना।”


मेरा लंड मेरी पैंट में एक दम तन चुका था। अब मैं उसकी गर्मी शाँत करना चाहता था। पहले रानी को उसके नये डिल्डो के साथ और अब पिछले तीस मिनट रोशनी के साथ खेलते हुए मेरा लंड पूरी तरह से तैयार था।


मैंने रानी के तरफ़ देखा। वो अजय और शालिनी के साथ बातों मे मशगूल थी। विक्रम भी रानी के खयालों में खोया हुआ था। ये उप्युक्त समय था रोशनी को गेस्ट रूम में ले जाकर चोदने का। मैंने रोशनी से कहा, “तुम गेस्ट रूम मे चलो… मैं तुम्हारे पीछे आता हूँ।”


रोशनी बिना कुछ कहे गेस्ट रूम की और बढ़ गयी। मगर मेरा इरादा केवल रोशनी को चोदने का नहीं था बल्कि मैं चाहता था कि उसकी चुदाई विक्रम अपनी आँखों से देखे। मैं उसके पास गया और उसे साईड मे ले जाकर उससे कहा,“विक्रम आज मैं तुम्हारी बीवी की गाँड मारूँगा और मैं चाहता हूँ कि तुम ये सब अपनी आँखों से देखो। ऐसा करना तुम खिड़की के पीछे छिप कर सब देखो, मैंने खिड़की के पट थोड़े खुले छोड़ दिए हैं।” इतना कहकर मैं गेस्ट रूम की तरफ़ बढ़ गया।


मैं कमरे मे पहुँचा तो रोशनी मेरा इंतज़ार कर रही थी। मैंने दरवाज़ा बंद किया और उसे बांहों मे भर कर उसके होंठों को चूमने लगा। मैंने उसके बदन को सहलाते हुए उसकी पीठ पर लगी ज़िप खोल दी, “रोशनी अपनी ड्रेस उतार दो।”


रोशनी ने अपनी ड्रेस उतार दी। उसने नीचे कुछ नहीं पहना था। अब वो सिर्फ काले रंग के हाई हील के सैंडल पहने नंगी खड़ी मेरी और देख रही थी। रोशनी उन सैंडलों में नंगी इतनी सुंदर लग रही थी कि किसी भी मर्द को मदहोश कर सकती थी।


मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियाँ पकड़ कर उसे अपने नज़दीक खींच लिया, और उसके कान में फुसफुसाया, “रोशनी आज मैं तुम्हारी गाँड मारना चाहता हूँ।”


मेरी बात सुनकर वो मुस्कुरा दी और बोली, “राजेश मैं पूरी तरह से तुम्हारी हूँ। तुम्हारा जो जी चाहे तुम कर सकते हो।”


रोशनी अब घुटनों के बल बैठ कर मेरी पैंट के बटन खोलने लगी। बटन खुलते ही मेरा लंड फुँकार मार कर बाहर निकल आया। रोशनी बड़े प्यार से उसे अपने मुँह में ले कर चूसने लगी। वो इतने प्यार से चूस रही थी जैसे वो मेरे लंड को अपनी गाँड के लिये तैयार कर रही हो।


मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी किसी औरत की गाँड नहीं मारी थी। मैंने कई बार रानी को इसके लिए कहा पर हर बार उसने साफ़ मना कर दिया। एक बार मेरी काफी जिद करने पर वो तैयार हो गयी। पर मेरी किस्मत, जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी गाँड में घुसाया, वो दर्द के मारे इतनी जोर की चींखी, कि घबरा कर मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। उसके बाद मैंने दोबारा कभी इस बात की हिम्मत नहीं की।


मगर आज लग रहा था कि मेरी बरसों की मुराद पूरी होने वाली है। मैंने बिना समय बिताय अपने कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया और रोशनी से कहा, “बबिता अब तुम मेरे लंड को अपनी गाँड के लिए तैयार करो?”


वो खड़ी हो गयी और मेरे लंड को पकड़ कर मुझे बाथरूम की तरफ़ घसीटने लगी, “राजेश तुम्हारे पास कोई क्रीम है?”


बाथरूम में पहुँच कर मैंने स्टैंड पर से वेसलीन की शीशी उठा कर उसे दे दी। मैंने सब तैयारी कल शाम को ही कर ली थी। रोशनी मुस्कुराते हुए शीशी में से थोड़ी क्रीम ले कर मेरे लंड पर मसलने लगी। मेरे लंड को मसलते हुए वो मेरे सामने खड़ी बड़ी कामुक मुस्कान के साथ मुझे देखे जा रही थी।


रोशनी शायद समझ चुकी थी कि मैंने अपनी ज़िंदगी मे कभी किसी की गाँड नहीं मारी है। उसने हँसते हुए मुझे बताया कि गाँड मरवाने में उसे बहुत मज़ा आता है। उसने बताया कि विक्रम भी अक्सर उसकी गाँड मारता रहता है।


जब मेरा लंड क्रीम से पूरा चिकना हो चुका था तो वो क्रीम की शीशी मुझे पकड़ा कर घूम कर खड़ी हो गयी। शीशे के नीचे लगे शेल्फ को पकड़ वो नीचे झुक गयी और अपनी गाँड मेरे सामने कर दी।


रोशनी ने शीशे में से मेरी और देखते हुए अपने टाँगों को थोड़ा फैला दिया जिससे उसकी गाँड और खुल गयी। रोशनी मेरी और देखते हुए बोली, “राजेश अब इस क्रीम को मेरी गाँड पर अच्छी तरह चुपड़ कर मेरी गाँड को भी चिकना कर दो?”


मैंने थोड़ी सी क्रीम अपनी अँगुलियों पे ली और उसकी गाँड पे मलने लगा। जैसे ही मेरी अँगुलियों ने उसकी गाँड को छुआ, उसने एक मादक सिस्करी लेते हुए अपने सर को अपने हाथों पे रख दिया, “राजेश अब तुम अपनी एक अँगुली मेरी गाँड मे डाल दो और उसे गोल-गोल घुमाओ।”


मैंने अपनी एक अँगुली उसकी गाँड मे डाल दी और गोल-गोल घुमाने लगा। थोड़ी देर बाद उसने कहा, “अब तुम थोड़ी और क्रीम अपनी अँगुली पे ले कर अपनी दो अँगुलियाँ मेरी गाँड में डाल कर अंदर बाहर करने लगो।”


उसने जैसा कहा, मैंने वैस ही किया। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, एक तो किसी की  बीवी की गाँड मारने का मौका और ऊपर से वो ही मुझे सिखा रही थी कि गाँड कैसे मारी जाती है। काश विक्रम ये सब देख पता कि कैसे मेरी दो अँगुलियाँ उसकी बीवी की गाँड में अंदर बाहर हो रही थी।


थोड़ी देर बाद जब उसकी गाँड पूरी तरह से चिकनी हो गयी तो वो बोली, “राजेश अब तुम मेरी गाँड मार सकते हो, ये तुम्हारे लौड़े के लिए पूरी तरह से तैयार है।”


मैंने उसे सीधा किया और अपनी गोद मे उठा कर उसे बिस्तर पे ले आया। मैंने कनखियों से खिड़की की तरफ़ देखा तो मुझे विक्रम की परछाईं दिखायी दी। मैंने रोशनी को इस अंदाज़ में घुटनों के बल बिस्तर पर लिटाया कि उसकी गाँड खिड़की की तरफ़ हो और विक्रम को सब कुछ साफ नज़र आये। रोशनी बिस्तर पर पूरी तरह अपनी छातियों के बल लेट गयी जिससे उसकी गाँड और ऊपर को उठ गयी थी। मैं उसकी टाँगों के बीच आ गया और अपना खड़ा लंड उसकी गाँड के गुलाबी छेद पे रख थोड़ा सा अंदर घुसा दिया। जैसे ही मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी गाँड के छेद में घुसा, उसके मुँह से सिस्करी निकल पड़ी, “ऊऊऊऊऊईईईईईईई मर गयीईईईईई” रोशनी ने अपने दोनों हाथ पीछे कर के अपने चूत्तड़ पकड़ कर अपनी गाँड को और फैला लिया। उसकी गाँड और मेरा लंड पूरी तरह से क्रीम से लथे हुए थे। मैंने उसके चूत्तड़ को पकड़ कर अपने लंड को और अंदर घुसाया, पर उसकी गाँड इतनी कसी हुई थी कि मुझे अंदर घुसाने में तकलीफ़ हो रही थी। रोशनी ने अपने चूत्तड़ और फैला दिए, “राजेश थोड़ा धीरे और प्यार से घुसाओ।” मैंने अपने लंड को बड़े धीरे से उसकी गाँड में घुसाया तो मुझे लगा कि उसकी गाँड के दीवारें और खुल रही हैं और मेरे लंड के लिए जगह बन रही है। मुझे ऐसा लगने लगा कि मैं उसकी गाँड मे लंड नहीं डाल रहा हूँ बल्कि उसकी गाँड मेरे लंड को निगल रही है। थोड़ी ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी गाँड मे समाया हुआ था। अब मैं अपने लंड को उसकी गाँड में धीरे-धीरे अंदर बाहर कर रहा था। मैं अपने लंड को बाहर खींचता और जब सिर्फ़ सुपाड़ा अंदर रहता तो एक ही धक्के में अपना लंड उसकी गाँड मे पेल देता। रोशनी भी अपने चूत्तड़ों को पीछे की और धकेल कर मज़ा ले रही थी, “हाँआआआ राजेश डाल दो अपने लंड को मेरी गाँड में…. फाड़ दो इसे… लगाओ जोर के धक्के…।” मुझे भी जोश आता जा रहा था। मैंने रोशनी के कंधों को पकड़ कर उसे अपने से और चिपटा लिया। अब मेरा लंड और भी गहराइयों तक उसकी गाँड में जा रहा था। मैं जैसे ही अपना लंड और घुसाता, वो अपने को और मेरी बदन से चिपका लेती। मैं इसी अवस्था में अपने लंड को उसकी गाँड के अंदर बाहर कर रहा था कि मैंने उसके हाथों को अपने आँडकोश पे महसूस किया। वो धीरे-धीरे मेरे गोलों को सहला रही थी। उसके हाथों की गर्मी मुझमें और उत्तेजना भर रही थी। मेरा लंड अब तेजी से उसकी गाँड के अंदर बाहर हो रहा था। मुझे मालूम था कि मेरा छूटने का समय नज़दीक आता जा रहा है। पर शायद उसका पानी नहीं छूटने वाला था, वो अपना हाथ मेरे अँडों पे से हटा कर अपनी चूत को रगड़ने लगी। मैं और जोर से धक्के मार रहा था। जब उसका छूटने का समय नज़दीक आया तो वो अपनी दो अँगुलियाँ अपनी चूत मे डाल कर अंदर बाहर करने लगी और चींखने लगी, “हाँ मारो मेरी गाँड को… और जोर से… राजेश छोड़ दो अपना पूरा पानी मेरी गाँड में…।” मैं जोर से उसकी गाँड मे अपना लंड पेले जा रहा था। बहुत ही दिलकश नज़ारा था। जब मेरा लंड उसकी गाँड से निकलता तो उसका छेद सिकुड़ जाता और जब मैं अंदर पेलता तो और खुल जाता। मैं जोर के धक्के लगा रहा था। मैंने महसूस किया कि उसका शरीर अकड़ रहा था और उसकी गाँड ने मेरे लंड को अपनी गिरफ़्त मे ले लिया था। मैं समझ गया कि उसका पानी छूट रहा है। मैंने जोर का धक्का लगाया और मेरे लंड ने भी अपने वीर्य की पिचकारी उसकी गाँड मे छोड़ दी। जैसे  ही मेरा लंड वीर्य उगलता, मैं अपने लंड को और जड़ तक उसकी गाँड में समा देता। मुझे आज पहली बार एहसास हुआ कि गाँड मारने में कितना मज़ा आता है। मैं रोशनी की गाँड में अभी भी अपने लंड को अंदर बाहर कर रहा था। उसकी गाँड क्रीम और मेरे वीर्य से इतनी गीली हो चुकी थी कि मुझे अपना लंड जड़ तक घुसाने में कोई तकलीफ़ नहीं हो रही थी। पर हमें नीचे पार्टी में भी शामिल होना था, इसलिए मैंने अपना लंड धीरे-धीरे उसकी गाँड से निकालना शुरू किया। जब मेरा लंड उसकी गाँड से बाहर निकल आया तो रोशनी ने घूम कर मुझे चूम लिया, “मैं जानती हूँ तुमने आज पहली बार किसी की गाँड मारी है और तुम्हें खूब मज़ा आया है। मुझे भी मज़ा आया है, आज के बद तुम जब चाहो मेरी गाँड मार सकते हो।” रोशनी के इन शब्दों ने जैसे मेरे मुर्झाये लंड में जान फूँक दी। मेरा लंड फ़िर से तन कर खड़ा हो गया। मैं समझ गया कि मुझे रोशनी की गाँड मारने का और मौका भविष्य में मिलेगा। मैंने और रोशनी ने अपने आप को टॉवल से साफ़ किया और अपने कपड़े पहन लिए। मैं रोशनी से पहले पार्टी में पहुँचा तो मेरा सामना विक्रम से हो गया, “लगता है तुम्हारे और रोशनी में अच्छी खासी जमने लगी है। अब मेरा समय है कि मैं रानी के सैक्स ज्ञान को और आगे बढ़ाऊँ।” विक्रम अब रानी को खोज रहा था। रानी कमरे के एक कोने में खड़ी अजय और शालिनी से बातें कर रही थी। हकीकत में अजय बार स्टूल पे बैठा था और रानी उसके पास एक दम सट कर खड़ी थी। अजय के दोनों हाथ उसकी कमर पर थे। मैंने देखा कि विक्रम रानी के पास गया और उसके कान में कुछ कहा। रानी उसकी बात सुनकर अजय से बोली, “सॉरी, मैं अभी आती हूँ।” यह कहकर वो गेस्ट रूम की और  बढ़ गयी।


विक्रम मेरी तरफ़ आया और बोला, “अब तुम्हारी बारी है देखने की।” यह कहकर वो भी गेस्ट रूम की और बढ़ गया। एक बार तो मेरी समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूँ, फिर मैं भी उसके पीछे बढ़ गया। मैं भी देखना चाहता था कि वो मेरी बीवी के साथ क्या करता है। विक्रम के जाते ही मैं भी उसके पीछे जा खिड़की के पीछे वहीं छिप गया जहाँ थोड़ी देर पहले विक्रम खड़ा था। विक्रम और रानी कमरे में पहुँच चुके थे, और रानी उसे अजय और शालिनी के बारे में बता रही थी। रानी बता रही थी अजय कितना हँसमुख इन्सान था और वो उसे किस तरह के जोक्स सुना कर हँसा रहा था।


विक्रम ने रानी से पूछा, “क्या तुम्हें अजय अच्छा लगता है?”


“हाँ अजय एक अच्छा इंसान है और शालिनी भी। दोनों काफी अच्छे हैं।” रानी ने जवाब दिया।


“नहीं सच बताओ क्या तुम अजय से चुदवाना चाहती हो, मुझे और रोशनी को मालूम होना चाहिए। हम लोग पिछले साल भर से दोस्त हैं और तुम्हें नहीं मालूम कि अजय कितनी अच्छी चुदाई करता है,” विक्रम ने कहा।


रानी ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया पर वो इतना जरूर समझ गयी कि विक्रम और रोशनी आपस में अजय और शालिनी के साथ चुदाई करते हैं।


रानी ने विक्रम को बांहों में भर लिया और उसके होंठों को चूमने लगी। विक्रम ने भी उसे बांहों भर कर अपना एक हाथ उसकी ड्रेस के अंदर डाल दिया। “तो आज तुमने भी पैंटी नहीं पहन रखी है,” कहकर वो उसके चूत्तड़ सहलाने लगा।


हे भगवान! मैं रोशनी में इतना खोया हुआ था कि मुझे इस बात का पता ही नहीं चला कि मेरी बीवी बिना पैंटी के इतनी देर से पार्टी में घूम रही है।


“तो तुम्हें तुम्हारा नया खिलोना कैसा लगा। रोशनी के पास भी वैसा ही खिलोना है, और  उसे बहुत पसंद है। क्या तुम उसे ट्राई कर चुकी हो?” विक्रम ने उसके कुल्हों को भींचते हुए कहा।


“कुछ खास अच्छी तरह से नहीं।” रानी ने जवाब दिया। विक्रम ने उसे अपना नया डिल्डो लाने को कहा। रानी ने अपने बेडरूम से डिल्डो लाकर विक्रम को पकड़ा दिया।


विक्रम ने रानी को कमरे में रखी एक अराम कुर्सी पर बिठा दिया। विक्रम अब जोरों से उसे चूमने लगा। मैंने देखा कि उसका एक हाथ रोशनी की टाँगों को सहलाते हुए अब उसकी जाँघों पर रेंग रहा था। फिर उसने उसकी दोनों टाँगों को थोड़ा फैला दिया जिससे उसकी चूत पूरी तरह खुल कर नज़र आने लगी।


मेरी बीवी कुर्सी पर और पसर गयी और अपने टाँगें और फैला दीं जिससे विक्रम को आसानी हो सके। विक्रम ने उसकी टाँगों को ऊपर उठा कर कुर्सी के हथे पे रख दिया। जैसे ही विक्रम ने अपना मुँह उसकी चूत का स्वाद लेने के लिए बढ़ाया,रानी उसकी और कामुक नज़रों से देखने लगी।


कुर्सी ठीक खिड़की के बगल में थी। इसलिए मुझे अंदर का नज़ारा साफ दिखायी पड़ रहा था कि, किस तरह विक्रम मेरी बीवी की चूत को चाट रहा था। विक्रम चूत चाटने में माहिर था और थोड़ी ही देर में रानी के मुँह से सिस्करी गूँजने लगी।


विक्रम ने अब अपनी दो अँगुलियाँ अपनी जीभ के साथ रानी की चूत मे डाल दी, और अंदर बाहर करने लगा। करीब पंद्रह मिनट तक उसकी चूत को चाटने के बाद विक्रम उठा और डिल्डो को ले आया और उसका बटन ऑन करके उसे चालू कर दिया।


मेरी बीवी कुर्सी पर पसरी हुई कामुक नज़रों से विक्रम को देख रही थी। वो जानती थी कि एक दूसरा मर्द अब उसकी चूत में एक खिलौने को डालने वाला है। विक्रम घुटनों के बल बैठ कर रानी की टाँगों के बीच आ गया और उसकी गीली हो चुकी चूत में डिल्डो को डालने लगा। उसने धीरे-धीरे डिल्डो अंदर घुसाया और अब वो प्लास्टिक का खिलौना रानी की चूत में पूरा घुस चुका था।


डिल्डो की हर्कत का असर मेरी बीवी के चेहरे पे साफ दिखायी दे रहा था, वो अपनी टाँगों को पूरा भींच कर डिल्डो का मज़ा लेने लगी। मेरा लंड भी ये सब देख एक बार फ़िर तन चुका था, जबकि बीस मिनट पहले ही मैं रोशनी की गाँड में झड़ कर अलग हुआ था।


विक्रम अब खड़ा होकर अपनी पैंट के बटन खोलने लगा। उसने रानी के चेहरे के पास आकर अपना एक घुटना कुर्सी के हथे पे रख दिया। उसका लंड रानी के चेहरे पे झटके मार रहा था। रानी ने मुस्कुरा कर उसकी तरफ़ देखा और अपना मुँह खोल कर उसके लंड को अंदर ले लिया।


“रानी मैं चाहता हूँ कि तुम मेरा लंड ठीक उसी तरह चूसो जैसे तुमने पहली बार चूसा था। एक हाथ से मेरे लंड को चूसो और दूसरे हाथ से मेरी गोलाइयों को सहलाओ। सच में बहुत मज़ा आया था जब तुमने ऐसा किया था!” रानी वैसे ही उसके लंड को जोरों से चूस रही थी। दोनों की गहरी होती साँसें और बदन की हर्कत बता रही थी कि दोनों ही छूटने के करीब हैं।


एक तो रानी की चूत में डिल्डो की हर्कत, ऊपर से विक्रम का लंड। रानी उत्तेजित हो कर विक्रम के लंड को अपने गले में ले कर चूस रही थी। विक्रम भी उसके मुँह में लंड पूरा अंदर डाल कर चोद रहा था। अचानक बिना बताये विक्रम ने अपना लंड उसके मुँह से निकाला और अपना पानी रानी की चूचियों पर और चेहरे पे छोड़ दिया।


मैं तीन फ़ुट की दूरी पर खड़ा देख रहा था कि आपत्ति जताने की बजाये रानी उसके पानी को अपने पूरे चेहरे पे रगड़ने लगी। फिर उसके रस से भरी अपनी अँगुलियों को चाटने लगी। उसकी हर्कत ने मेरे लंड में जोश भर दिया और मैं अपने लंड को पैंट के ऊपर से रगड़ने लगा।


जब विक्रम का पूरा वीर्य झड़ गया तो वो उठ कर खड़ा हो गया। रानी अब भी कुर्सी पर लेटी हुई डिल्डो का मज़ा ले रही थी। विक्रम ने रानी का हाथ पकड़ कर उसे उठाया और बाथरूम मे ले गया। मैंने देखा कि वो एक दूसरे को साफ कर रहे थे। बाथरूम से बाहर आकर विक्रम ने अपने कपड़े ठीक किए पर जब रानी अपनी ड्रेस देखने लगी तो पाया कि विक्रम के वीर्य के धब्बे उसकी ड्रेस पर भी गिर पड़े थे।hindi sex kahaniya (www.mastaram (2)


रानी को उदास देख विक्रम ने कहा, “डीयर उदास नहीं होते, ऐसा करो जो उस रात तुमने ड्रेस पहनी थी वही पहन लो, तुम पर वो ड्रेस खूब जँच रही थी।”


रानी बेडरूम में गयी और अपनी टाईट जींस और टॉप लेकर आ गयी। विक्रम ने उसे बांहों में भर लिया और फिर रानी को ले जाकर उसी कुर्सी के पास खड़ा कर दिया।


विक्रम कुर्सी पर बैठ गया और मेरी बीवी उसके सामने नंगी खड़ी थी। उसकी चूत एक दम फुली हुई लग रही थी क्योंकि वो डिल्डो अभी भी उसकी चूत में घुसा हुआ था। जैसे ही रानी ने वो डिल्डो बाहर निकालने के लिए अपना हाथ बढ़ाया तो विक्रम बोला, “तुम्हें इसे बाहर निकालने की इजाजत किसने दी?” अब ये साफ हो गया था विक्रम चाहता था कि वो डिल्डो उसकी चूत मे ही घुसा रहे।


विक्रम ने अब उसकी जींस अपने हाथों मे ले ली। उसके बदन को सहलाते हुए वो उसे जींस पहनाने लगा। रानी ने भी अदा से पहले अपनी एक टाँग उसमें डाली और फिर दूसरी। इसी दौरान एक बार डिल्डो उसकी चूत से फिसलने लगा तो विक्रम ने वापस उसे पूरा अंदर घुसा दिया।


रानी ने अपनी टाईट जींस का ज़िपर खींचा और उसके बाद बटन बंद करने लगी। पर उसको काफी तकलीफ हुई क्योंकि डिल्डो जो उसकी चूत मे घुसा हुआ था। उसने अपना लाल टॉप भी पहन लिया। इतनी टाईट जींस में वो बहुत सैक्सी लग रही थी। फिर रानी ने अपने लाल सैंडल उतार कर दूसरे काले रंग के हाई हील के सैंडल पहन लिए। विक्रम और रानी पार्टी में जाने को तैयार हो गये।


मैं भी खिड़की से हटा और हाल में आ गया। शराब और शबाब जोरों से चल रही थी। किसी ने ध्यान नहीं दिया कि तीन लोग इतनी देर पार्टी से गायब थे। मैं रोशनी के पास आ गया जो अजय और शालिनी के साथ बातें कर रही थी। जैसे ही विक्रम और रानी हाल में आये, मैं अपने आपको रानी की चूत की तरफ़ देखने से नहीं रोक पाया। सिर्फ़ मैं जानता था कि उसकी चूत में एक डिल्डो घुसा हुआ है। उसकी जींस उस जगह से  थोड़ी उठी हुई थी, ये मुझे साफ दिखायी पड़ रहा था। पता नहीं आगे और किस किस का ध्यान इस बात की और जाता है।


रानी मेरे पास आयी और गले में बांहें डाल कर मेरे होंठों को चूम लिया। ऐसा वो सबके सामने करती नहीं थी पर शायद एक तो चूत में डिल्डो और दूसरा उसकी चूत ने अभी तक पानी नहीं छोड़ा था इसलिए उसके शरीर में उत्तेजना भरी हुई थी। फिर उसने विक्रम के साथ गेस्ट रूम में जाने से पहले शराब भी पी थी जिसके सुरूर उसकी मदहोश आँखों में साफ-साफ दिख रहा था। मैंने अंजान बनते हुए रानी से पूछा, “तुमने कपड़े क्यों बदल लिए?”


“बस कपड़ों पर कुछ गिर गया था।” रानी ने जवाब दिया। कम से कम वो झूठ तो नहीं बोल रही थी। इतने में विक्रम ने मेरी तरफ़ मुस्कुरा के देखा। उसकी आँखों मे एक शैतानी चमक थी। मैं समझ गया कि आज रात बहुत कुछ होने वाला है।


करीब एक घंटे तक रानी इस तरह पार्टी में चारों तरफ़ घूमती रही जैसे कुछ हुआ ही ना हो। चूत मे डिल्डो लिए एक अच्छे मेहमान नवाज़ की तरह सब से मिल रही थी। सबको ड्रिंक, स्नैक्स सर्व कर रही थी। मुझे पता थी कि उसकी चूत में आग लगी हुई है और वो कभी भी पानी छोड़ सकती है।


इतने में रोशनी मेरा हाथ पकड़ कर अपने साथ डाँस करने के लिए ले आयी। हम हाल के एक कोने में डाँस कर रहे थे जहाँ ज्यादा लोग हमारे पास नहीं थे। मैंने मौके का फ़ायदा उठा कर अपना हाथ उसकी ड्रेस में डाल दिया और उसकी चूत से खेलने लगा। रोशनी ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा, “राजेश मैं जानती हूँ कि विक्रम ने रानी के साथ क्या किया है। ये उसका पुराना खेल है। वो रानी की ऐसी हालत कर देगा कि वो अपनी चूत का पानी छुड़ाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जायेगी। पता नहीं विक्रम के दिमाग में क्या शरारत भरी हुई है।


इतने में अजय ने मेरी बीवी से डाँस करने के लिए कहा। रानी ने विक्रम की और देखा और विक्रम ने आँख से इशारा करते हुए उसे जाने को कहा। मैंने देखा कि रानी का बदन मारे उत्तेजना के काँप रहा था। वो बड़ी मुश्किल से अपने आपको रोक रही थी।


इतने में शालिनी ने भी मुझे डाँस करने के लिए कहा। मैं समझ गया कि ये इशारा विक्रम ने उसे किया है। अब हम चारों अजय के पास आकर डाँस करने लगे। मैं समझ गया कि विक्रम के मन में सामुहिक चुदाई का प्रोग्राम है। शालिनी इतनी सैक्सी और गरम थी कि मैंने उसे चोदने का पक्का मन बना लिया था, पर मुझे रानी का नहीं पता था कि वो अजय से चुदवायेगी कि नहीं।


पर मुझे इसकी चिंता नहीं थी। मुझे पता था कि रानी की चूत में इतनी देर से डिल्डो होने की वजह से उसकी चूत की हालत खराब हो चुकी होगी। रानी अपनी चूत का पानी छोड़ने के लिए अब किसी घोड़े से भी चुदवा सकती है।


शालिनी ने मेरी तरफ़ कामुक निगाह से देखा और कहा, “राजेश आज तक मैं विक्रम जैसे मर्द से नहीं मिली। वो चुदाई की कलाओं में इतना माहिर है कि वो किसी औरत को किसी भी मर्द से चुदवाने को उक्सा सकता है।” मैं समझ गया कि वो रानी की बात कर रही है। हम चार जने ही फ़्लोर पर डाँस कर रहे थे। शालिनी ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ कर अपनी चूत पे रख दिया। जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत को छुआ, मैं चौंक कर उछाल पड़ा। उसकी भी चूत में एक डिल्डो घुसा हुआ था। “ये ठीक वैसा ही है जैसा तुम्हारी बीवी की चूत में घुसा हुआ है।” उसने मेरे हाथों का दबाव अपनी चूत पे बढ़ाते हुए कहा। मैं समझ गया कि ये सब विक्रम का काम है। उसने दो औरतों को इतना उत्तेजित कर दिया था कि वो चुदाने के लिए कुछ भी कर सकती थीं। नाचते हुए मैंने रानी और अजय की और देखा। अजय का एक हाथ मेरी बीवी की चूत पर था और वो उस डिल्डो को और अंदर तक उसकी चूत में घुसा रहा था। फिर मैंने देखा कि रानी उसका हाथ पकड़ कर उसे हाल के बाहर ले जा रही है। मैं सोच रहा था कि पता नहीं अब आगे क्या होने वाला है? मैं भी शालिनी को अपने साथ ले उनके पीछे चल दिया। रानी और अजय कमरे में पहुँचे और उनके पीछे-पीछे विक्रम और रोशनी और फिर मैं और शालिनी भी कमरे में आ गये। अब ये बात सब पे खुलासा हो चुकी थी कि आज सब एक दूसरे की चुदाई करेंगे। शालिनी मेरे पास आकर मुझसे सट कर खड़ी हो गयी। उसकी आँखों में भी उत्तेजना के भाव थे। लगता था कि विक्रम ने उसे भी डिल्डो को छूने की मनाई की हुई थी। बेटरी पे चलता डिल्डो उसकी चूत में आग लगाये हुए था। पता नहीं विक्रम ने क्या जादू इन दोनों पे किया हुआ था।  मित्रो ये कहानी अभी जारी रहेगी पढ़ते रहिये मस्तराम डॉट नेट और मस्त रहिये | अपने विचार कमेंट बॉक्स में लिख कर दे | धन्यवाद


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प्लीज़ मुझे प्यार करो ना-2

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