All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

रानी की पहली चुदाई-4


दोस्तों मैं यानी आपका दोस्त मस्तराम रानी की पहली चुदाई-4 यानि आखिरी पार्ट लेकर आपकी अदालत मैं हाजिर हूँ

रानी को इतनी गहरी नींद आई की वो शाम के 6 बजे तक सोती ही रही. जग्गा इसी समय घर लौटा तो उसके बुलेट की आवाज़ से रानी की नींद उच्छा. गयी. उसने आल्मिराह खोली तो देखा कई सारे ड्रेस उसके साइज़ के भरे पड़े थे. यह ड्रेस रंगा-जग्गा ने स्पेशली रानी और उस जैसी और लड़कियों के लिए ला कर रखे थे.रानी ने एक नेवी ब्लू कलर का सलवार-सूट निकाल कर पहन लिया और बाहर आ गयी. ड्रॉयिंग रूम में रंगा-जग्गा कुच्छ बातें कर रहे थे जो उन्होने रानी के आने पर बंद कर दी. जग्गा ने शरारत से पूछा – का रे गुड़िया!! इतना देर सो रही थी? इतना कौन सा थकने वाला काम किया था? रानी उसके इस सवाल पर झहेप. गयी और गाल शरम से लाल हो गये. उसका सारा बदन टूट रहा था और एक मीठा सा दर्द हो रहा था. . का छेद पर अभी भी दुख रहा था. रंगा बोला – अरे कुच्छ नही भाई, हम. तो बस थोड़ी पूजा की और दूसरे मंदिर की घंटी बजाई! यह सुन जग्गा हस्ने लगा और बोला – अकेले-अकेले पूजा कर लिए. हुमको भजन-कीर्तन में बैठने का मौका ही नही दिया? का रे रानी, ये दूसरा वाला पूजा का प्रसाद एक ही भवाँ. का क्यूँ खाया? रानी उनकी इस ठिठोली से शरम से ज़मीन में गाड़े जा रही थी. रंगा बोला – जाओ रानी, जाके रसोई में रात का खाना बना लो. पाँच आदमी का खाना बनाना. कुच्छ मेहमान आने वाले है. रानी के चेहरे पर 5 लोगों का खाना बनाना सुनकर जिग्यासा जाग उठी तो रंगा बोला – आज हमारे एक पुराने मित्रा अपनी लुगाई को लेके आ रहा है. उसकी लुगाई आजकल उसकी पूजा नही करती है ना ही उसका प्रसाद ग्रहण करती है. गाओं के मंदिर के पुजारी ने कहा की उसे हुमारे पास ले जाने से हम उसका अच्छा से इलाज करेंगे और कट्टर पुजारीन बना देंगे. रानी असमंजस से बोली – कैसी लुगाई है? अपने पति परमेश्वर का तन-मॅन से पूजा अर्चना करना ही तो उसका फ़र्ज़ है. ई भी नही करेगी तो उसका जीवन व्यर्थ है. जग्गा ये सुन गड़.-गड़ हो गया और बोला – एक्दुम सही बोली मेरी गुड़िया. पर सब तुम्रे जैसी आस्तवान नही होती है ना!! इसलिए आज हम उसका इलाज करेंगे. तुम भी हमारे साथ शामिल होके हमारी मदद करना! रानी खुश थी की दोनो उससे इतना प्यार और इज़्ज़त करते है की 1 ही दिन में उसे इतना मान दे रहे है. वाज़ शी राइट??? बिहार का ये इलाक़ा नॅडलाइट्स के लिए बहुत बदनाम था. इन्ही का सारगाना था राका. 7 फीट का वो दैत्या घानी. धाड़ी और बड़े बालों वाला एक दानव था. रंगा-जग्गा जैसा ही रंगीन और खूब पियाक्कड़. 2 लीटर रूम तो वो एक दिन में पीटा ही होगा. आँखें हमेशा लाल रहती थी.

उसका लंड 7-8“ ही होगा पर लॉड की चौड़ाई कम-से-कम 3“. ये जालिम रंगा-जग्गा जैसा किसी भी लड़कियों पर नरम नही था. जिसे भी उठाता उसकी मौत पक्की थी. इसका फौलादी लंड तो रंडियों के भी चूत से खून निकाल देता था.

गाओं के सबसे रईस साहूकार से उसने फिरौती माँगी थी करीब 15 लाख जो ना अदा करने की सूरत पे उसकी बेटी बिंदिया को उठा लेने की धमकी दी थी.

साहूकार अव्वल दर्जे का लालची था. वैसे भी उसकी दाल अब उस गाओं में नही ग़ालती थी इसलिए वो सहर जाने की सोच रहा था. राका की धमकी से उसकी और भी फॅट गयी और मियाद की तारीख के पहले वाली रात उसने बोरिया-बिस्तर समेत परिवार के साथ भागने की सोच ली.


बिंदिया 17-18 बरस की गोरी-चिटी गद्रायि जवानी थी. जावानी ने अपनी सारी बहार शायद उसपर ही लुटाई थी. कमसिन उमर में भी उसके चूची पाके पपीतों जैसा था. बॉल उसके भरे-भरे नितंबों तक आते थे और उसकी गोलाई की सुंदरता बढ़ाते थे. आँखें गोल-गोल और बड़ी-बड़ी, होठ मोटे और रसीले. गर्दन बिल्कुल सुरहीदार और छति और कमर एक समान.


5 फीट की हाइट और फिगर पूरी 36-26-36. जाँघ केले के ताने के समान चिकनी और मांसल थी. बानिए की बेटी को पढ़ाई से क्या करना इसलिए 4थ क्लास के बाद च्छुत गयी थी. वो बिल्कुल अनपढ़ और गवार थी पर हुस्न ऐसा पाया था की लॉंड भंवरों की तरह उसके इर्द-गिर्द घूमते रहते थे पर वो उनमे से किसी को घास नही डल्लती थी.


अपने बड़े भाई और भाभी को उसने 2-3 बार सेक्स करते हुए देखा था इसलिए कांगञान तो हो ही चुका था. कभी उंगली तो कभी पेन्सिल डालकर अपनी प्यास शांत कर लेती थी. एक दिन तो इसी क्रीड़ा में उसकी झिल्ली भी फॅट गयी ती. अब उसकी जवानी लूटने के लिए तैयार थी. राका को साहूकार के रातों रात फरार होने की बात की भनक लग गयी थी. वो लाव-लश्कर लेकर उसके घर पहुँचा तो देखा की घर लॉक था और सब नदारद थे.

गुस्से से आग बाबूला राका बस-स्टॅंड और रेल स्ट्न पर अपने आदमी दौड़ा दिए.

½ घंटे में ही उसे पता लगा की शेठ अपने परिवार के साथ पटना कोलकाता जाने वाली बस में अपने परिवार के साथ 1 घंटे पहले रवाना हुआ है.

राका ने ट्रक भरकर नॅडलाइट्स के साथ रास्ते में उस बस पर हुम्ला कर दिया.

शेठ को तो उसने लूटा ही पर साथ में पूरे बस के लोगों को भी नही बक्शा. बिंदिया के हाथ पैर बाँधा और मूह में कपड़ा थूस कर अपने जीप में डाला और च्चल पड़ा.mast chudasi bhbhi ki kahani (www.mastaram (19)रंगा-जग्गा से उसने वादा किया था की इस बार के शिकार को वो उनके साथ बाट कर खाएगा. उसने जीप जंगल के तरफ घुमा दी.

1 घंटे में उसकी जीप रंगा-जग्गा के दरवाज़े पर थी.

रात के करीब 10 बज रहे होंगे जब बाहर गाड़ी के एंजिन की आवाज़ सुन रंगा बाहर आ गया.

राका को देख वो आती प्रसन्न हो गया और गाले से लगा लिया. जीप की दूसरी सीट पर गठरी जैसी बँधी पड़ी बिंदिया को देख वो आनंदित हो गया और बोला – वाह दोस्त, खूब वादा निभाया तुमने.

इतने में जग्गा भी बाहर आ गया और राका के गाले लग गया. रंगा ने बिंदिया को उठाकर उपर वाले कमरे में ले गया और बिस्तर पर पटक दिया. वो अभी भी बेहोश थी.

रानी बाहर कमरे में जग्गा-राका की आवाज़ें सुन बेडरूम से निकल आई. राका को देख वो एक बार जग्गा की तरफ देखी और दुपट्टा अपने सर पर डाल राक के पाव छूने के लिए झुक गयी. राका जग्गा को देख मुस्कुराया और रानी के कंधे पकड़ उठाता हुआ बोला – दूधो नहाओ, पूतों फलो. का नाम है तोहार?

रानी नज़रें नीचे किए बोली – रानी!

अरे वाह, एकद्ूम सही नाम है! हुमरे दोस्तों की लुगाई का इससे अच्छा नाम हो ही नही सकता है? – राका बोला.

जग्गा ने रानी से कहा – जाओ जाके बॉटल और चखना बाहर बरामदे में लगा दो. थोड़ा देर वहीं यार लोग जसन मनाएँगे फिर पूजा करेंगे इसकी लुगाई का!

रानी ने मूक हामी भारी और रसोई की तरफ बढ़ गयी.

रानी बहुत गर्व महसूस कर रही थी की उसके पति का इतना सम्मान है की लोग उनसे अपने बीवियों का इलाज करने आते हैं.

बाहर दारू-चखना लगान एके बाद रानी ने खाना बनाया और टीवी देखने लगी.

कोई 1 घंटे के बाद जब 10 बजे होंगे, तीनो अंदर आ गये और रंगा ने रानी से कहा- चलो गुड़िया रानी थोड़ा खाना खिला दो फिर पूजा करेंगे.

रानी ने खाना परोसते हुए राका से पूछा – आपकी लुगाई खाना नही खाएँगी क्या?

राका हस्ते हुए बोला – अरे वो? वो तो थोड़ी देर में हम सबका प्रसाद ग्रहण करेगी तो अपने आप ही पेट भर जाएगा. उनके खाने के बाद रानी ने भी थोड़ा खा लिया और सॉफ-सफाई के लिए किचन में चली गयी.

तीनो उपर आ गये और बेड पे सोती हुई बिंदिया को देखने लगे. उस मदमस्त जवानी को देख उनके मूह से लार टपकने लगा.

राका बेड के करीब आया और झींझोर कर बिंदिया को उठाने लगा. रंगा ने इतने में 1 ग्लास पानी उठाकर बिंदिया के मूह पर दे मारा. बिंदिया हड़बड़ा कर उठ बैठी. तीन दानवों को अपने इर्द-गिर्द देख अनायास ही उसके मूह से चीख निकल पड़ी. राका की शकल पहचान उसे सारा वाक़या याद आया और व्हो बकरी की तरह मिन्मीनाते हुए राका को हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगी – प्लीज़ हुमको जाने दीजिए,…….उउउउ….मा-बाबूजी के पास जाना है…….उ लोग हमारा इंतेजार करते होंगे……….आपको हुम्से क्या मिलेगा……..हम बाबूजी को बोलेंगे, वो आपको खूब पैसा देंगे. हुमको जाने दो प्लीएzzzzzz!

उसके आँसू भारी आँखें और दर्द भारी गिड़गिडाहट का राका पर कोई असर ना हुआ और वो हस्ते हुए बोला – अरे तोहार बाप को पैसा ही देना होता तो उ गाओं छ्चोड़ के भागता थोड़े. और शाम को तो हम उसका सारा धन लूट ही लिए तो अब पैसा का कौनो चिंता नही. अब तो जसन मनाने की घड़ी है. और उ जसन में तुमको तो शामिल होना ही पड़ेगा!!!!


राका के इरादों को भाप बिंदिया सर-से-पाव तक सिहर गयी. उन दानव का आकर-विकार और बदनीयती का अंजाम उसे दिखाई देने लगा. शहम्ते और रोते हुए उसने पूछा – ह.ह..हुमरे साथ कककाअ करोगे आपलोग. ज्ज्ज्ज्ज्जने दीजीएना. हहूम तो आआअपके बेटी जैसे हैं???

तीनों एक साथ हस्ने लगे और जग्गा बोला – सच बोली तू, और हम सब हैं बेटीचोड़!!!!

ये कहके तीनों फिर से अट्टहास करने लगे.

बिंदिया इस वक़्त एक पीले कलर के सलवार कुर्ते में थी. बॉल बिखरे हुए और चेहरा सफेद फक़्क़ पड़ा हुआ था.

राका लपक कर बिंदिया के बाजू में बैठ गया और उसके इर्द-गिर्द अपनी बाहें डालने लगा. बिंदिया छटपटा उठी. दूसरे तरफ से रंगा ने हुम्ला किया और उसे बिस्तर पे लिटा दिया और अपने एक पैर से बिंदिया को जाट दिया.

बिंदिया उनके चंगुल में सिर्फ़ चीख और छॅट्पाटा ही पा रही थी.

जग्गा दूर खड़ा अपनी धोती ढीली कर रहा था. बिस्तर के करीब आते तक उसके बदन पर कपड़े का एक भी रेशा ना था. बिंदिया कसमसाते हुए जब कनखियों से जग्गा को देखा तो उसकी आँखें खुली की खुली रह गयी. भालू जैसे बॉल भरे विशालकाय नंगे बदन पे मोटे सोट जैसा लंड ने बिंदिया के होश उड़ा दिए. रंगा ने रोती-कलापति बिंदिया के होठों पर अपने मूछों वाले लब रख दिया और उसका लार पीने लगा. ऐसा करने से बिंदिया की आवाज़ गले में ही अटक गयी और वो गूऊव….गूऊऊऊ करने लगी. अब रंगा की राइट हथेली बिंदिया के लेफ्ट वक्ष स्थल पर था और पूर-ज़ोर मालिश कर रहा था.

उस दानव के मोज़बूत हथेली के मालिश से बिंदिया की छाती दुखने लगी पर होंठ बंद होने की वजह से सिर्फ़ अंदर से तड़प के रह गयी.

जग्गा को नंगा देख राका ने भी झट से अपने कपड़े उतार दिए और जनम जात अवस्था में आ गया.

रंगा के कलापों से बिंदिया छटपटा रही थी. पर उसके पैरों पर रंगा के वजनी जांघों के भार से वो सिर्फ़ तिलमिला के रह जा रही थी.

नग्न हो कर राका ने बिंदिया के पेट पर से कुर्ता चूची तक उठा दिया और उसके नाभि और मांसल पेट पर चूमने-चाटने लगा.

इस अप्रत्याशित क्रीड़ा से बिंदिया के बदन में एक सिरहन दौड़ गयी और उसका रोवा-रोआवा खड़ा हो गया. पेट पर हल्की गुदगुदी होने लगी जिस वजह से उसके छाती की पीड़ा कुछ कम हो गयी.

इतने में जग्गा बिंदिया के पैरों की तरफ आया और उसके पयज़ामे का नाडा खोलने लगा.

उसके इस हरकत से बिंदिया सहम गयी और अपना पूरा ज़ोर लगा कर रंगा को उपर की तरफ धक्का दिया और उसके होठों को अपने दातों से काट लिया.

रंगा इसके लिए तैयार ना था इसलिए सपकपाकर उठ बैठा.

उसके चंगुल से आज़ाद होते ही बिंदिया दहाड़ मारकर रोने लगी और अपने हाथ जोड़कर जग्गा को बोली – प्लीज़ ई मत कीजीएना, हम किसी को मूह दिखाने के लायक नही रह जाएँगे. बाबूजी हुमरा बियाह करने वाले है. ज़िंदगी खराब हो जाएगा मेरा. छ्चोड़ दीजीएना!!!


हालाकी बिंदिया के काटने से रंगा का होंठ कट गया था और हल्का खून भी निकल रहा था, और उसका गुस्सा सातवे आसमान पे था, फिर भी वो इस जवानी को मज़े से हलाल करना चाहता था, खून बहाकर नही.

उसने पहल की और बिंदिया के सर पे हाथ फिराते हुए प्यार से पुच्कार्ते हुए बोला- देखो बिटिया, तुंरा बदन तो आज रात हुमारा घर है. इसको तो लूटना ही है, अब मर्ज़ी तोहार की इसको प्यार से लुटाओ या बलात्कार से.

प्यार से करोगी तो तुमको कोई शारीरिक हानि नही होगी. बलात्कार से तुमको शारीरिक हानि तो होगी ही और मज़ा भी नही आएगा. हो सकता है कि मर भी जाओ. हुमरे हिसाब से तो जब बलात्कार से बचने का कोई रास्ता ना हो तो उसका मज़ा उठना चाहिए. अगर प्यार से मान जाती हो तो हम वादा करते है की तुमको मज़ा आएगा और कोई नुकसान नही पहुचेगा. सही सलामत तुमको घर भी छ्चोड़ आएँगे और कल को तुम्हारी शादी भी हो जाएगी. बोला का कहती हो???


बिंदिया अभी भी सिसक रही थी पर रंगा की बातों से उसे अपनी बेचारगी का क्लियर एहसास होने लगा. उसने गाओं के लड़कों को अपने लटके-झटकों से बहुत तडपया था और अपने दाने की खुजली भी उंगलियों से मिटाई थी पर ऐसे सांड़ों के मूसलों के बारे में कभी नही सोचा था. बाँवरी सेठ का बेटा सरजू जो 18-19 का होगा, उसके लंड का दर्शन भी एक बार उसने छुप कर किया था जब वो बरगद के पीछे हल्का हो रहा था. पर वो तो मिर्ची थी और ये मूला.

‘शायद ये उतना भी बूरा ना हो जैसा उसने रेप के बारे में सुना था. और फिर दूसरे शहर में बसने के बाद वहाँ लोगों को इस कांड की जानकारी नही होगी तो उसके शादी में भी बाधा नही पड़ेगी’. इस विचार से प्रेरित होकर बिंदिया ने आख़िरकार अपने हाथ बिस्तर पर निढाल कर दिए और सर झुकाते हुए लाचार स्वर में बोली – ठीक है, आप लोग जैसा बोलेंगे, हम वैसा करेंगे, पर सुबह होते ही हुमको घर छ्चोड़ दीजिएगा. और कृपया कर के हमको ज़्यादा दर्द मत दीजिएगा!!


उसकी ये बात सुनते तीनों के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान खिल गयी. रंगा ने एक राहत की साँस ली की अब उन्हे इस कली को प्यार से मसल्ने को मिलेगा. अब उसने भी अपने कपड़े उतार दिए.


पर राका को इस खेल में उतना मज़ा नही आया क्यूंकी उसे तो शिकार को तडपा कर मारने में मज़ा आता था. फिर भी यारों के फीलिंग्स और फेटिश का ख़याल कर वो मन मसोस कर रह गया. पर अंदर-ही-अंदर उसने ठान ली कि अपनी बारी आते ही वो इस लड़की को नानी याद दिला देगा.


शुरूवात रंगा ने की. सिसकती बिंदिया के करीब आकर वो उसके कुर्ते को उठाने लगा. बिंदिया ने तो सारे हथियार डाल दिए थे. लाचरगि में उसने अपने हाथ उपर कर दिए. रंगा ने उसके बाजुओं से कुर्ता निकाल फेका. कुर्ता निकलते ही बिंदिया ने लाज से अपने नंगी चूचियो को अपने हाथों से ढक लिया और सुबुक्ते हुए फिर रंगा की ओर फरियादी नज़रों से देखते हुए बोली – प्लीज़, ज़्यादा दर्द तो नही होगा ना??????

रंगा पूचकारते हुए उसे अपने पालती मरी हुई जांघों पर बैठते हुए उसके कानों में बोला – मर्द का वचन है बूछिया, दरद चाहे जितना हो पर मज़ा पूरा मिलेगा. अच्छा हुआ जो तुम खुद तैयार हो गयी, अब देखना तुम कभी घर जाने का बात नही करोगी!! आज रात हम तोहार फूल जैसा बदन का हर पंखुड़ी से खेलेंगे और तुमको सदाबहार फूल बना देंगे.


उसकी बातें सुन ना जाने क्यूँ बिंदिया के चूत के दानों में चिंचीनाहट दौड़ गयी.

वो रंगा की गोद में पीठ करके बैठी थी और रंगा की दोनों हाथेलि उसके दोनो चूचियों से खेल रही थी. घुंडीयों के मीसने से और कान के लाओं और गर्देन पर सरसरते रंगा के गरम लबों ने बिंदिया के पूरे जिस्म में खलबली मचा दी. उसके संतरे के किशमिश टाइट हो गये……पूरे 1” लूंबे. मस्ती से उसका गोरा चेहरा लाल तमतमा रहा था.


बिंदिया की आँखें बंद थी इसलिए उसे एहसास ना हुआ कि कब जग्गा ने उसकी अधखुली सलवार को आहिस्ते से उसके पैरों से निकाल दिया. जब उसके नंगी जांघों पर ठंडी हवा की सिरहन हुई तो उसकी आँखें खुल गयी. सामने जग्गा भूखे लार टपकते भेड़िए जैसा उसके मांसल जांघों को और लाल लेसस वाली चड्डी में बूँद पाव-रोटी जैसी चूत को ताक रहा था.

उसकी रक्त-पीपासु आँखों को देख बिंदिया सहम गयी. रंगा की तरफ ना जाने क्यूँ उसका थोड़ा सॉफ्टनेस होने लगा था. इसलिए जग्गा की नज़रों से बचने के लिए उसने मूह फेर्कर रंगा के छाती में छुपा लिया.

इधर जग्गा बेड पर पट लेटकर अपना सर बिंदिया के चूत के करीब लाया और सूंघने लगा. कौले अनछुए चूत की महक उसे बौरा गयी और उसने अनायास ही बिंदिया के जाँघ फैला दिए और चूत पर चड्डी के उपर से ही अपने होठ रख दिए और चूमने लगा.

बिंदिया इसके लिए तैयार ना थी. उसे 440वोल्ट का झटका सा लगा और उसके मूह से एक आआहह……… निकल गयी.

जवानी और ज़िंदगी ने उसके लिए इस रात मे क्या सॅंजो के रखा था ये तो वो कल्पना नही कर सकी थी पर अब तक जॉब ही हुआ ना जाने क्यूँ उसे कैसी भी भयानक कल्पना से परे एक मीठा एहसास दे रही थी. ……………. पर अभी राका तो बाकी था | समाप्त |


तो दोस्तो रानी की पहली चुदाई के साथ तब तक के लिए विदा आपको कहानी कैसी लगी बताना मत भूलना आपका दोस्त मस्तराम : gurumastaram@gmail.com


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