All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

लंड को पहली बार मिली चूत-6


दोस्तों अभी तक अपने लंड को पहली बार मिली चूत-5 में जो पढ़ा अब उसके आगे लिख रहा हु : शीतल के जाने के बाद ममता ने गेट बंद किया…..और अंदर आई तो देखा अभी और पिंकी दोनो विनय के साथ खेल रहे थे…..ममता ने टेबल पर से बर्तन उठाए, और बर्तन सॉफ करने के बाद घर की सफाई की, बच्चे टीवी पर चल रहे प्रोग्रॅम्स को देखने मे मगन थे… सफाई करने के बाद ममता भी किरण के रूम मे चली गयी……जहाँ पर तीनो टीवी देख रहे थे…पिंकी अभी और विनय तीनो टीवी के सामने चटाई बिछा कर बैठे हुए थे…..

ममता रूम मे आई, और उन के पीछे बेड पर करवट के बल लेट गयी…..वो भी टीवी देखने लगी…..पर उसका ध्यान विनय मे था….जो अभी भी बच्चों की तरह उस कार्टून शो को देखने में इतना मगन था….जैसे उसको सेक्स वासना का पता ही ना हो….ममता वही लेटे हुए, इंतजार कर रही थी कि, कब विनय पलट कर उसकी तरफ देखे….पर विनय खुद ही ममता से नज़रें चुराता फिर रहा था….15 मिनिट बीत चुके थे…..ममता समझ चुकी थी कि ये तोता अभी नादान है…..इसको सब कुछ खुद ही सिखाना पड़ेगा……

ममता: विनय……

विनय: (पलट कर ममता की तरफ देखते हुए)जी

ममता: मेरे लिए एक ग्लास पानी ला दोगे….?

विनय: जी…….

विनय उठ कर किचन मे चला गया….और एक ग्लास पानी लेकर वापिस रूम मे आया तो देखा ममता उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा रही थी….उसने अपने सर को झुका लिया और ममता के पास आकर खड़ा हो गया….”दीदी पानी”

ममता: नीचे रख दो…..

विनय ने पानी का ग्लास नीचे रख दिया…..और फिर सीधा खड़ा हुआ….”यहाँ बैठो मेरे पास….” ममता ने धीरे से कहा…..तो विनय ने एक बार चटाई पर बैठो पिंकी और अभी की तरफ देखा…और फिर ममता की तरफ देखने लगा…..”बैठो ना…..” ममता ने उसका हाथ पकड़ कर उसे बैठाते हुए कहा…..विनय थोड़ा डर तो गया ही था…..

वो नीचे पैर लटका कर बैठ गया….उसकी पीठ ममता के पेट के साथ लग रही थी….क्योंकि ममता करवट के बल लेटी हुई थी….थोड़ी देर ममता भी चुप रही…..शायद वो बोलने से पहले तय कर लेना चाहती थी कि, उसका हर एक शब्द तीर की तरह एक दम निशाने पर जाकर लगे, ताकि विनय कुछ गड़बड़ ना कर सके……


ममता: तुम ने उस रात मुझे यहाँ पर क्यों हाथ लगाया……(ममता ने अपनी चुचि पर हाथ रखते हुए कहा….)


ममता की बात सुन कर तो जैसे विनय का मूत निकलने वाला हो गया…..वो इतने दिनो से सोच रहा था कि, शायद ममता वो सब भूल गयी है, तभी उसने किसी को बताया नही “मैं क्या पूछ रही हूँ….” ममता ने धीरे से टीवी की ओर देखते हुए कहा…..

विनय: वो वो ग़लती से हाथ चला गया…..

ममता: झूट बोल रहे हो तुम…तुम उस रात को जाग रहे थे…….है ना….सच बोलो…..

विनय को अब अपनी जान जंजाल में फँसती हुई नज़र आ रही थी….उसने हां में सर हिला दिया.

ममता: फिर क्यों छुआ तूने मुझे वहाँ पर…..?

विनय चुप…..

ममता: बोल ना अब……?

चुप…..

ममता: देख मेने अभी तक किसी को बताया नही है….इसका ये मतलब नही कि मैं तुम्हारी उस हरक़त से नाराज़ नही हूँ…….तुम्हे ये सब करना अच्छा लगता है…..

चुप….

ममता: बोल ना तुझे इन्हे छूना अच्छा लगता है…..?

इस बार विनय ने डरते हुए हां मे सर हिला दिया……

ममता: तुम्हे पता है ना ये कितनी ग़लत बात है गंदी बात है….

विनय:जी…..

ममता: फिर भी तुमने मुझे यहाँ पर हाथ लगाया…..

चुप….

ममता: अब तुमने ग़लती की है तो सज़ा तो तुम्हे मिलेगी ही….

विनय: आप चाहे मुझे जो मर्ज़ी सज़ा दे दो….पर प्लीज़ मामी मामा को ना बताना…..

ममता: ठीक है नही बताती….पर तुमने मुझे ग़लत जगह पर टच किया है तो, मैं भी तुम्हारी ऐसी जगह पर टच करूँगी यहाँ पर नही करना चाहिए…..

ममता की ये बात सुनते ही, विनय का दिल जोरो से धड़कने लगा….इससे पहले कि विनय कुछ बोलाता जान समझ पाता…ममता ने अपना एक हाथ उठा कर विनय की जाँघ के ऊपेर रख दिया. वो लगतार सामने टीवी और बच्चों पर नज़र बनाए हुए थी….कुछ देर बाद उसने अपना हाथ धीरे-2 उसके शॉर्ट्स के ऊपेर से उसके लंड की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया….

विनय के बदन पर झुरजुरी सी दौड़ गयी….आँखे ऐसी हो गयी…..मानो उसने पूरी बॉटल दारू की पी लो हो….होन्ट और गला सुख गये थे….और जैसे ही ममता ने विनय के लंड को शॉर्ट्स के ऊपेर से पकड़, विनय का पूरा बदन ऐसे कांप गया….जैसे उसके बिजली का झटका लगा हो… उस समय, विनय का लंड एक दम सिकुडा हुआ था….पर जैसे ही ममता के नरम हाथ का स्पर्श विनय को अपने लंड पर महसूस हुआ, उसमे जान आनी शुरू हो गयी….अभी ममता ने तीन चार बार ही विनय के लंड को मुट्ठी में भर कर दबाया था कि, विनय का लंड एक दम हार्ड हो गया.. और अपने पूरे आकर मे आ गया…जैसे ही ममता को विनय के लंड की लंबाई और मोटाई का अंदाज़ा हुआ, तो उसका दिल धक करके रह गया….उसके हाथ पैर मानो सुन्न पड़ गये हों….”हाए इतना मोटा लंड है इसका…..इतना लंबा..” उसे अपनी चूत में तेज खेंचाव सा महसूस होने लगा…..जांघे आपस मे खुद ब खुद सटाती चली गयी….

तभी सामने चटाई पर बैठे अभी ने पीछे मूड कर कहा…..”भैया यहाँ आओ ना…” दोनो अभी की आवाज़ सुन कर जैसे आसमान से गिर कर ज़मीन पर आए हो…दोनो एक दम चोंक गये… ममता ने अपना हाथ जल्दी से पीछे किया…और विनय उठ कर आगे जाकर चटाई पर बैठ गया. ममता गहरी साँसे लेते हुए बेहद हैरान हो रही थी…..उसने कभी सोचा भी नही था कि, मासूम से दिखने वाले इस बच्चे का हथियार इतना तगड़ा हो सकता है…..वो अपनी सांसो पर काबू पाने की कोशिस कर रही थी…….

उसका दिल बहुत बेचैन हुआ जा रहा था……काश कि ये बच्चे आज ना आए होते…..पर इस विनय ने कॉन सा कही भाग जाना है……रहना तो यही है ना इसने…..दोपहर का वक़्त हो चला था. ममता उठ कर किचन मे चली गयी…..और दोपहर के खाने का इंतज़ाम करने लगी….करीब 30 मिनिट में उसने दोपहर का खाना तैयार कर लिया….फिर वो किरण के रूम मे गयी….जहाँ पर तीनो बच्चे बैठे टीवी देख रहे थे……”चलो बच्चो खाना तैयार है…..आकर खा लो. टीवी बंद कर दो….कब से ऑन कर रखा है तुम लोगो ने……”

ममता की बात सुन कर सब उठ कर बाहर आ गये….विनय ने बाहर जाते हुए, टीवी बंद कर दिया. और फिर बाहर हाल में आकर खाना खाने लगा….खाना खाने के बाद अभी ने विनय से कहा. “भैया चलो ना हाइड & सीक खेलते है……”

ममता: (बीच में टोकते हुए) कोई हाइड & सीक नही खेलेगा……मुझे नींद आ रही है तुम लोग शोर मचाओगे…….

पिंकी: नही मासी हम शोर नही मचाएँगे…..

ममता: एक बार मना कर दिया ना तो नही खेलना…..जाकर लुडो खेल लो….और हां आवाज़ मत करना…..

अभी: ओके मासी…..

तीनो विनय के रूम की तरफ जाने लगी…..”अपने आप मे बनती क्या है…..हिट्लर” पिंकी ने मूह बनाते हुए ममता के बारे मे विनय से कहा…….

विनय: चुप ऐसा नही बोलते बड़ी है ना वो हम से…..

पिंकी: बड़ी है तो क्या हम पर रोब जमाएगी…….

विनय: अब चल चुप कर जा अम्मा…..चल लुडो खेलते है…….mastaram (22)तीनो विनय के रूम मे जाकर लुडो खेलने लगे…..उधर ममता ने झूठे बर्तन उठा कर किचन मे लेजा कर धोए…..और फिर अपने रूम में आकर लेट गयी…..बेड पर लेटते ही उसे नींद आ गयी……दूसरी तरफ तीनो बच्चे लुडो खेल रहे थे….और धीरे-2 उन तीनो को भी नींद आने लगी…..तभी बाहर डोर बेल बजी तो, विनय ने बाहर जाकर गेट खोला तो, देखा सामने उसकी मासी शीतल खड़ी थी……शीतल विनय को देख कर खुश हो गयी…..और उसे गले से लगाते हुए बोली…….”आ गया मेरा बच्चा वापिस……”

विनय: जी मासी……

शीतल: वो पिंकी और अभी कहाँ है बेटा…..

विनय: जी मेरे रूम मे है……

शीतल: जाओ उन्हे बुला लाओ…..बोलना कि मम्मी आई है लेने के लिए…..

विनय: आप अंदर नही आओगे…..

शीतल: नही बेटा अभी मुझे कुछ ज़रूरी काम है…..तुम शाम को घर आना…..ठीक है…

विनय: जी मासी……मैं अभी अभी और पिंकी को बुला कर लाता हूँ……

विनय रूम मे गया और पिंकी और अभी को लेकर वापिस आ गया……शीतल दोनो को लेकर घर चली गयी…..विनय ने गेट लॉक किया और अपने रूम मे आ गया…..एक बार जब फिर से उसे तनहाई मिली तो, उसे वो याद आ गया……जब ममता ने उसके लंड को उसके शॉर्ट्स के ऊपेर से पकड़ा था….उसका लंड कैसे कुछ ही सेकेंड्स मे खड़ा हो गया था….ममता के हाथ कितने नरम और मुलायम है……कितना मज़ा आया था…..जब उसने मेरे लंड को पकड़ा था…..काश अभी ना बुलाता तो, ममता मासी कुछ देर और मेरे लंड को पकड़ कर रखती…….


ये सोचते हुए, विनय बेड पर लेटा था…..उसके हाथ खुद ब खुद शॉर्ट्स के ऊपेर से उसके लंड पर चला गया……और वो उसे धीरे-2 सहलाने लगा…..उसकी आँखे अपने आप बंद होती चली गयी….नज़ाने क्यों उसकी कल्पना में ममता की छवि उभर कर आ गयी……कि ममता उसके नंगे लंड को हाथ मे पकड़ कर धीरे -2 हिला रही है……ये सब सोचते हुए उसके लंड की नसें और फूलने लगी……

6-7 मिनिट हो गये थे….अचानक से विनय को लगने लगा जैसे उसे बहुत तेज पेशाब आ रहा है…..उसने अपने लंड को हिलाना छोड़ दिया…..और उठ कर बाथरूम में चला गया…..बाथरूम में जाकर उसने अपने शॉर्ट्स को नीचे उतारा और अपने लंड को बाहर निकाल लिया….पर ये क्या, उसके लंड से पेशाब तो निकल ही नही रहा था……फिर उसे क्यों ऐसा लग रहा था कि, वो बेड पर ही पेशाब कर देगा…..अजीब से सवाल उसके जेहन में हड़कंप मचाए हुए थे…..

जल्दी-2 में वो अपने बाथरूम के डोर को बंद करना भी भूल गया था……कुछ देर वही खड़ा रहा….और फिर उसने सोचा क्यों ना वो फिर से अपने लंड को हिला कर देखे कि, पेशाब आता है कि नही…..और ये सोचते ही उसने फिर से अपने लंड को धीरे-2 हिलॅना शुरू कर दिया. ठीक मूठ मारने वाले अंदाज़ मे….क्योंकि वो अपने स्कूल के लड़के मनीष और पीयान को मूठ मारते हुए देख चुका था……

धीरे-2 अपने लंड को सहलाते हुए, उसके आँखे फिर से बंद होने लगी…..अजीब सी सरसराहट उसे अपने लंड के सुपाडे पर होने लगी थी…..विनय एक दम गरम हो चुका था….अब उसे फिर से लगने लगा था कि, उसका पेशाब आने वाला है….और ये महसूस करते ही उसने अपने लंड को और तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया…धीरे-2 अपने लंड को सहलाते हुए, उसकी आँखे फिर से बंद होने लगी…..अजीब सी सरसराहट उसे अपने लंड के सुपाडे पर होने लगी थी…..विनय एक दम गरम हो चुका था….अब उसे फिर से लगने लगा था कि, उसका पेशाब आने वाला है….और ये महसूस करते ही उसने अपने लंड को और तेज़ी से हिलाना शुरू कर दिया……

अब आगे:-“ये क्या हो रहा है विनय…….” तभी एक आवाज़ उसके कानो में गूँज उठी…..ऐसा लगा जैसे किसी ने कोई बॉम्ब फोड़ दिया हो……अगले ही पल उसका लंड मुरझाने लगा…..खोफ़जदा आँखो से उसने पीछे मूड कर देखा तो, ममता बाथरूम के डोर पर खड़ी उसे ही देख रही थी….विनय अभी भी अपने लंड को मुट्ठी में पकड़े खड़ा था…..पर अब उसका हाथ हिल नही रहा था….कुछ पलों के लिए मानो वो बुत बन गया हो…..

ना कुछ कहने को बन रहा था….और ना कुछ करने को……”मैने क्या पूछा…..? क्या कर रहे हो तुम ये……?” ममता ने आगे बढ़ कर थोड़ा सा गुस्से में कहा,

तो विनय का मानो सतंभन टूटा हो……”वो मैं वो वो मैं पेशाब करने आया था……” विनय ने घबरा कर हकलाते हुए कहा……

ममता: झूट बोल रहे हो तुम…..मेने सब देखा जो तुम कर रहे थे……

विनय: नही साची मे वो वो हां मुझे पेशाब आया था…..पर वो जब मैं यहाँ आया तो पता नही क्यों वो बाहर नही निकला….

ममता: बाहर नही निकला….अगर पेशाब आया था तो क्यों नही निकला…देखो मैने सब देख लिया है……तुम गंदा काम कर रहे थे…..है ना…..?

विनय: नही नही मैं सच कह रहा हूँ……

ममता: अब चुप बॅस……मुझे सब पता है तुम मूठ मार रहे थे…..

ममता के मूह से मूठ शब्द सुन कर विनय को झटका सा लगा…..उसे तो लगता था कि, ये वर्ड औरतों को पता ही नही होता…..”क्यों मूठ मार रहे थे ना तुम……”

विनय: वो मासी मैं वो…….

ममता: ये वो वो क्या लगा रखा है……मेने अपनी आँखो से देखा है…..तुम अब मुकर नही सकते…..(ममता चोर नज़रो से सिकुड चुके विनय के लंड को देख रही थी….जिसे विनय ने अभी भी मुट्ठी में पकड़ रखा था……और उसने मुस्कुराते हुए कहा…..) बेशर्म…..

विनय को अपनी ग़लती का अहसास हुआ, तो उसने अपने लंड को छोड़ कर जैसे ही, शॉर्ट्स को ऊपेर करना चाहा तो, ममता ने बीच में टोक कर उसे रोक दिया……”जैसे खड़े हो वैसे ही खड़े रहो…..” ममता विनय की तरफ बढ़ी, तो विनय का गला सूख गया…..उसे लगा कि ममता अब उससे पीटने वाली है…..पर अगले ही पल ममता ने नीचे बैठ कर विनय के लंड को हाथ में पकड़ लिया…..

विनय: ये ये आप क्या कर रही है…..छोड़िए प्लीज़…..

ममता: (मुस्कुराते हुए ) क्यों अच्छा नही लग रहा…..या फिर मुझसे शरम आ रही है….


विनय: वो मासी जी मुझसे ग़लती हो गयी…..मुझे माफ़ कर दीजिए….आइन्दा ऐसे कभी नही करूँगा….प्लीज़ छोड़ दीजिए…….

ममता: मैं क्या पूछ रही हूँ…..पहले उसका जवाब दो…..(ममता ने विनय के लंड को मुट्ठी में पकड़ कर दबाते हुए कहा…..जो अभी सिकुडा हुआ था…..)

विनय: (एक दम से सिसकते हुए) जी…..

ममता: फिर बोलो अच्छा नही लग रहा या शरम आ रही है…..

विनय: जी शरम आ रही है……

ममता: इसका मतलब तुम्हे अच्छा लग रहा है…..कि मेने तुम्हारा लंड पकड़ा हुआ है…..

विनय: (ममता के मूह से लंड सुन कर विनय एक दम भौचक्का रह गया…..) आह नही वो मेरा मतलब……(ममता ने फिर से दो बार लंड को हिलाते हुए दबाया…..)

तो विनय के लंड में थोडा -2 तनाव आने लगा…..”शीइ अह्ह्ह्ह” नही अच्छा नही लग रहा है…..” विनय ने सिसकते हुए कहा……

ममता: (विनय के लंड के सुपाडे की चमड़ी को पीछे हटा कर उसके पेशाब वाले छेद को अंगूठे से कुरेदने लगी…..) अच्छा अगर तुम्हे मज़ा नही आ रहा तो, तुम्हारा ये क्यों खड़ा होना शुरू हो गया…….

विनय: आह मुझे नही पता….प्लीज़ छोड़ दीजिए ना…….

ममता: (अब थोड़ी तेज़ी से विनय के लंड को हिलाते हुए) छोड़ दूं, मज़ा नही आ रहा….

विनय: नही ओह्ह्ह्ह मासी…..प्लीज़……

ममता: क्यों कुछ हो रहा है ना….

विनय: आह श्िीिइ हाँ मासी……

ममता: क्या हो रहा है…..(अब ममता पूरी तरह विनय के लंड को मुट्ठी में भर कर हिला रही थी….)

विनय: ओह उफफफफ्फ़ मुझे नही पता……..

ममता: (लंड हिलाते हुए विनय के चेहरे की तरफ देखते हुए, जिसकी आँखे अब मस्ती में बंद हो चुकी थी……) मैं बताऊं……तुम्हे मेरे हाथ से अपना लंड की मूठ मरवाने मे मज़ा आ रहा है ना…..बोलो सच बोलना…..मैं किसी से कुछ नही कहूँगी….कसम से……

जैसे ही विनय का लंड पूरी तरह खड़ा हुआ, तो ममता की आँखे उसके लंड को देख कर हैरानी से फेल गयी…..दिल जोरो से धड़कने लगा….हाई मैं मर जावां…..इतना बड़ा इतना मोटा लंड वो भी इसका कैसे मुझे तो यकीन ही नही हो रहा…..ममता ने अपने मूह में आए हुए थूक को गटकते हुए सोचा…..विनय के लंड का लाल सुपाडा एक दम दहक रहा था…. जिसे देखते ही उसकी चूत ने पानी छोड़ कर उसकी पेंटी को नम करना शुरू कर दिया था…..अगले भाग में पढ़िए आगे क्या हुवा |


दोस्तों जुड़े रहिये मस्तराम के साथ और पढ़ते रहिये मस्त मस्त कहानिया और कमेंट कर मुझे ये भी बताईये कहानी कैसी लग रही है |


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लंड को पहली बार मिली चूत-6

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