All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

मेरी चूत के लिप्स-7


लेखिका: किरन अहमद


मेरे प्यारे पाठको आप लोगो ने मेरी चूत के लिप्स भाग 6 में जो पढ़ा अब उसके आगे लिख रही रही हु … एक दिन मैं घर में ही थी और ऑफिस नहीं गयी थी। एक हफते से एस-के भी ऑउट ऑफ टाऊन था। अशफाक भी अपने टूर पे थे। सलमा आँटी से तो खैर मैं हर रोज़ मिलती थी लेकिन आज सुबह ही वो भी अपनी किसी मौसी के घर गयी हुई थीं। मैं बहुत ही बोर हो रही थी। शाम से एस-के की भी बहुत याद आ रही थी। मन कर रहा था कि कहीं से एस-के आ जाये और मुझे बड़ी बेदर्दी से चोद डाले और इतना चोदे कि मेरी चूत एक बार फिर से फट जाये और खून निकल आये। एस-के से चुदाई का सोचते ही मेरी चूत गीली होने लगी। मैं अब घर पर अकेली होती तो सिर्फ सैंडल पहने हुए बिल्कुल नंगी ही रहती थी। मैंने झट से व्हिस्की का पैग बनाया और एक झटके में नीट ही पी गयी और फिर दूसरा पैग लेकर एक-ब्लू फिल्म की सी-डी लगाकर बैठ गयी। सोफ़े पर बैठे-बैठे ही अपनी टाँगें खोल दीं और मेरा हाथ खुद-ब-खुद चूत में चला गया। मैं अपनी चिकनी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगी और मेरी आँखें बंद हो गयी। मैं अपनी उंगली अंदर-बाहर करने लगी और थोड़ी ही देर में झड़ गयी।


मुझे मार्केट से कुछ खाने का सामान भी लेना था तो सोचा कि मार्केट जाऊँगी तो शायद सैक्सी खयालात मेरे दिल से निकल जायेंगे। फिर खयाल आया कि चलो क्यों ना अपने सलवार कमीज़ का कपड़ा भी ले लूँ और सिलने के लिये दे दूँ। ये सोचते ही मैंने अपनी अलमरी से दो नये सलवार सूट के कपड़े निकाले और बैग में डाल कर बाहर निकल गयी। देर शाम हो चुकी थी। बाहर ठंडी-ठंडी हवा भी चलने लगी थी और लगाता था जैसे बारिश होगी पर हो नहीं रही थी। अनिल की दुकान तो बज़ार में जाते हुए पहले ही पड़ती थी तो मैं पहले वहीं चली गयी। उस वक़्त अनिल कहीं बाहर गया हुआ था। उसका कोई मुलाज़िम बैठा था। उसने बताया कि अनिल अभी दस मिनट में आ जायेगा…. तो मैंने कहा, “ठीक है…. ये कपड़े यहीं रहने दो…. मैं भी बाकी शॉपिंग के लिये जा रही हूँ, वापसी में आ जाऊँगी…. अनिल से कह देना कि किरन मैडम आयी थी और ये कपड़े रख कर गयी है…. अभी आ जायेगी।“ उसने कहा, “ठीक है” और कपड़े एक साईड में रख दिये।


मुझे बाकी शॉपिंग में एक घंटे से कुछ ज़्यादा ही लग गया। वापस आते वक्त तक तो रात के तकरीबन आठ बज गये थे। मैं सोच रही थी कि कहीं अनिल दुकान ना बंद कर दे, इसी लिये जल्दी से उसकी दुकान की ओर बढ़ी। अनिल दुकान में आ चुका था और उसकी दुकान भी खाली हो चुकी थी। वो भी बंद करने की तैयारी कर रहा था और साथ ही मेरा इंतज़ार भी कर रहा था। उसका दूसरा स्टाफ छुट्टी कर चुका था और अनिल दुकान में अकेला ही था। मुझे देख कर वो खुश हो गया और उसका चेहरा चमकने लगा। मैंने देखा कि वो रम पी रहा था। उसने मेरे लिये भी एक पैग बना दिया। हालांकि मैंने शाम को ही दो पैग व्हिस्की के पिये थे और बहुत हल्का सा असर मुझ पर बरकरार था लेकिन ठंडी हवा चल रही थी और मेरा मन पीने का कर रहा था। वैसे भी एस-के और सलमा आँटी के साथ रह कर मैं पीने की बहुत आदी हो गयी थी और जब कभी भी पीने का मौका मिले तो मना नहीं कर पाती थी। दिन भर में आम तौर पे चार-पाँच पैग हो हीजाते थे लेकिन ऐसा कभी-कभार ही होता था कि मैं नशे में बुरी तरह चूर हो जाऊँ। मैंने उसको थैंक्स कहा और अपना ड्रिंक सिप करने लगी जो ठंड में बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसने पूछा, “आपके कपड़े हैं मैडम?” तो मैंने कहा, “हाँ…. बहुत दिनों से सोच रही थी कि तुमसे कुछ ड्रेस सिलवाऊँगी तो आज चली आयी।“


मैं भी फ्री थी और कोई काम नहीं था। मुझे भी टाईम पास करना था तो दो पैग पीने तक हम इधर-उधर की बातें करते रहे। मेरे पूछने पर उसने बताया कि वो फैशन डीज़ाईनिंग का कोर्स भी कर रहा है तो मैंने उससे फैशन डीज़ाईनिंग के बारे में पूछा। उसने मुझे फैशन डीज़ाईनिंग के बारे में काफी कुछ बताया और बात-बात में बताया कि “मैडम कईं बार किसी खास डिज़ाईन के लिये जिस फैशन-मॉडल का नाप लेना होता है तो उसको नंगा करके नाप लिया जाता है ताकि फिटिंग सही बैठे।“ मैं हैरान रह गयी और पूछा कि “लड़कियाँ नंगी हो जाती हैं?” तो उसने कहा “हाँ मैडम…. अगर किसी को अच्छी तरह से और सही फ़िटिंग का ड्रेस सिलवाना हो तो बहुत अराम से नंगी हो जाती हैं लेकिन उस टाईम पे बस वही डिज़ाईनर अंदर होता है जो नाप ले रहा होता है ताकि फैशन-मॉडल बस एक ही डिज़ाईनर के सामने नंगी हो…. पूरी क्लास के सामने नहीं।“ मैंने कहा कि “ऐसे कैसे हो सकता है?” तो उसने कहा कि “मैं सच कह रहा हूँ मैडम…. हम ऐसे ही नाप लेते हैं!” तो मैंने हँसते हुए कहा कि “क्या मेरा भी ऐसे ही लोगे?” तो उसने कहा कि “अगर आप भी सही और परफेक्ट फिटिंग के डिज़ाईनर कपड़े सिलवाना चाहती हैं और अगर आपको कोई ऑबजेक्शन ना हो तो आप अपने कपड़े निकाल सकती हैं…. नहीं तो हम सैंपल साईज़ से ही काम चला लेते हैं।“ मैंने कहा कि “मैं तो सैंपल नहीं लेकर आयी” तो उसने कहा कि “मैं ऐसे ही ऊपर से आपका साईज़ ले लुँगा…. आप अंदर ड्रेसिंग रूम में चलिये।“ अभी मैं सोच ही रही थी कि क्या करूँ, इतने में हवा बहुत ही तेज़ी से चलने लगी और उसके काऊँटर पर रखे कपड़े उड़के नीचे गिरने लगे और नाप के रजिस्टर के पन्ने फड़फड़ाने लगे तो उसने अपनी दुकान का शटर जल्दी से गिरा दिया और नीचे गिरे हुए कपड़े उठाने लगा। मैंने देखा कि उसने लुँगी पहनी हुई है और टी-शर्ट। जब उसने देखा कि मैं उसकी लूँगी को हैरत से देख रही हूँ तो उसने बताया कि मार्केट में किसी दुकान से नीचे उतरते हुए कील लगने से उसकी पैंट फट गयी तो इसी लिये उसने पैंट चेंज कर के लुँगी बाँध ली थी।


दुकान का शटर बंद करने से दुकान में ठंडी हवा के झोंके नहीं आ रहे थे, वैसे बाहर तो अच्छी खासी सर्दी होने लगी थी। हम दोनों अंदर ड्रेसिंग रूम में आ गये, जहाँ वो मेरा नाप लेने वाला था। दुकान का शटर गिरते ही मुझे लगा जैसे हम एक सेपरेट रूम में अकेले हैं और मेरे खयाल में आया कि इस दुकान में मैं और अनिल अकेले हैं और हमें देखने वाला कोई नहीं। मेरे दिमाग में गर्मी चढ़ने लगी। नशा तो पहले ही चढ़ा हुआ था। जिस्म में खून तेज़ी से दौड़ने लगा साँस तेज़ी से चलने लगी और एक अजीब सा सुरूर महसूस होने लगा। खैर उसने अंदर की लाईट जला दी। ड्रेसिंग रूम बहुत बड़ा तो नहीं था लेकिन बहुत छोटा भी नहीं था। मीडियम साईज़ का था जहाँ पर एक तरफ़ बड़ा सा मिरर लगा हुआ था ताकि अगर कोई लड़की चेक करना चाहे तो कपड़े पहन कर मिरर में देख सकती थी। वो मेरे सामने खड़ा हो गया और पहले उसने सलवार का नाप लेने को कहा। जैसे टेलर्स की आदत होती है, नाप लेने से पहले वो थोड़ा सा झुका और मेरे सामने बैठते-बैठते उसने मेरी सलवार के सामने के हिस्से को पकड़ के थोड़ा सा झटका दिया जिससे सलवार थोड़ी सी सरक के नीचे हुई। मैंने जल्दी से सलवार को ऊपर से पकड़ लिया। उसने अब नाप लेना शुरू किया। साईड से कमर से पैर तक का नाप लेते हुए उसने पूछा कि “मैडम आप अधिकतर इतनी ही ऊँची हील पहनती हैं क्या….? मैं उसी हिसाब से नाप लेना चाहता हूँ।“ मैंने कहा, “हाँ यही चार-साढ़े चार इंच और कईं दफ़ा पाँच इंच तक!” उसके बाद वो फिर टेप का बड़ा वाला हिस्सा जिस पर मेटल लगा होता है, उसको जाँघों के अंदर पकड़ कर साईज़ लेने लगा तो वो मेटल का पीस मेरी चूत से टकराया और मेरे मुँह से एक सिसकरी सी निकल गयी। उसने पूछा, “क्या हुआ मैडम?” तो मैंने कहा, “कुछ नहीं…. तुम नाप लो।“ उसने उस मेटल के पीस को थोड़ा और अंदर किया तो मुझे लगा जैसे वो पीस मेरी चूत के लिप्स को खोल के अंदर घुस गया और क्लीटोरिस को टच करने लगा। जैसा कि मैं पहले ही बता चुकी हूँ कि जब से ऑफिस जाने लगी थी, मैंने अब पैंटी और ब्रा पहनना करीब- करीब छोड़ ही दिया था तो आज भी मैंने ना पैंटी पहनी थी और ना ब्रा ।


उसका हाथ मेरी जाँघों के अंदर वाले हिस्से में था और नाप ले रहा था जिससे मेरी आँखें बंद हो गयी और टाँगें अपने आप ही खुल गयी थी और मैं उसके हाथ को अपनी चूत से खेलने का आसान एक्सेस दे रही थी। मेटल पीस चूत के अंदर महसूस करते ही चूत गीली होना शुरू हो गयी और जिस्म में सनसनी दौड़ने लगी। वो खड़ा हो गया और मेरी कमर का नाप लेने लगा और बोला कि “मैडम कमीज़ को थोड़ा ऊपर उठा लीजिये” तो मैंने कमीज़ को थोड़ा उठाया जिससे मेरा पेट दिखायी देने लगा तो उसने कहा कि “मैडम आपका कलर तो क्रीम जैसा है और बहुत चिकना भी है।“ मैं शर्मा गयी पर कुछ नहीं बोली। जबसे मुझे उसका हाथ मेरी जाँघों के अंदर महसूस हुआ, उसी वक़्त से मुझे तो मस्ती छाने लगी थी और चूत में खुजली भी होने लगी थी। मैं सोचने लगी कि फैशन -मॉडल्स ऐसे कैसे नंगी हो कर नाप देती होंगी। ये सोचते ही मेरा भी मन करने लगा कि अनिल अगर मुझसे भी कहे तो मैं नंगी हो कर नाप दे सकती हूँ और फिर ये खयाल आते ही मैं और गीली हो गयी।


इतने में वो खड़ा हो गया और कमीज़ का नाप लेने लगा। लंबाई लेने के लिये कंधों से नीचे तक टेप लगाया। टेप मेरी चूचियों को टच करने लगा तो एक दम से मेरे निप्पल खड़े हो गये और साँसें तेज़ी से चलने लगी। फिर उसने मुझे हाथ सीधे रखने को कहा और मेरी बगल के अंदर से टेप डाल कर चूचियों के ऊपर से नाप लेना शुरू किया। उसी वक़्त पे पीछे से जब वो टेप ठीक कर रहा था तो उसकी गरम साँस मेरे नंगे कंधों पे महसूस होने लगी जिससे मैं और गरम हो गयी। वो भी करीब मेरी ही हाईट का था। जब वो खड़ा हुआ तो मेरे हाथ को ऐसा लगा जैसे उसका लंड मेरे हाथ से टच हुआ हो। बस ऐसा महसूस होते ही मेरे ज़हन में एस-के का लंड घूमने लगा। वो थोड़ा और आगे आया और टेप पीछे से ठीक करने लगा तो इस बार सही में उसका लंड मेरे हाथ पे लगा। उसका लंड एक दम से खड़ा हो चुका था। शायद वो भी गरम हो गया था। उसका लंड मेरे हाथ से टच होते ही मेरी चूत समंदर जैसी गीली हो गयी और मुझे यकीन हो गया कि उसे भी एहसास था कि उसका लंड मेरे हाथ से टकराया है पर वो पीछे नहीं हटा और अपने लंड को मेरे हाथ पे ही रखे-रखे टेप ठीक करने लगा। मेरी साँसें तेज़ी से चलने लगी और मेरे ज़हन में जो शाम से चुदाई का भूत सवार था वो अब ज़ोर पकड़ने लगा और मैं हवस की आग में जलने लगी। ऊपर से शाम की व्हिस्की और अभी अनिल के साथ पी हुई रम का नशा मेरी हवस को और भड़का रहा था और मैं सोचने लगी कि अगर अनिल ने मुझे नहीं चोदा तो मैं खुद ही उसको चोद डालुँगी आज। नशे भरे मेरे दिमाग में आया कि उसके अकड़े हुए लंड को पकड़ कर अपनी गीली गरम चूत में घुसेड़ डालूँ पर बड़ी मुश्किल से अपने आप को कंट्रोल कर पायी और चाहते हुए भी उसके लंड को अपनी मुट्ठी में ले कर नहीं दबाया।


नशे से मेरी हिम्मत खुल रही थी और अब मैंने फ़ैसला कर लिया कि मैं भी नंगी हो कर ही नाप दुँगी। मैंने कहा, “अनिल! क्या तुम मेरे लिये भी डिज़ाईनर और परफेक्ट फिटिंग की सलवार कमीज़ बना सकते हो?” तो उसने कहा कि “मैडम उसके लिये आपको…।“ मैंने कहा, “कोई बात नहीं यहाँ सिर्फ़ हम दो ही तो हैं…. क्या हुआ, कोई बात नहीं….. जैसा तुम चाहोगे मैं नाप दे दुँगी” तो उसके चेहरे से खुशी छलकने लगी। उसने कहा कि “ओके मैडम, आप अपने कपड़े उतार लीजिये” तो मैंने कमीज़ के अंदर हाथ डाल के कमीज़ को ऊपर उठा कर निकाल दिया जिससे मेरी गोल-गोल चूचियाँ हिलने लगीं। उसके मुँह से ‘वोव वंडरफुल’ निकल गया। अब मैं उसके सामने आधी-नंगी खड़ी थी। उसने कहा कि “अब सलवार भी निकाल दीजिये मैडम, ताकि मैं नाप ले सकूँ” तो मैंने सलवार का स्ट्रिंग खोल दिया और मेरी सलवार फरमान बरदार कनीज़ की तरह से मेरे कदमों में गिर पड़ी। मैंने अपने सैंडलों के स्ट्रैप खोल कर सलवार को अपने पैरों से निकाल कर एक तरफ़ हटा दिया। फिर उसने कहा कि “मैडम आप सैंडल पहन लीजिये ताकि आपके सैंडल की ऊँचाई के अनुसार मैं आपका नाप ले सकुँ और क्योंकि हाई-हील से आपकी चेस्ट और हिप्स का पोसचर भी पर्फेक्ट रहेगा और मैं ठीक से आपकी ड्रेस बना सकुँगा।“


अब मैं सिर्फ हाई-हील सैंडल पहने, उसके सामने बिल्कुल ही नंगी खड़ी थी। मेरी उसी दिन की शेव की हुई चिकनी चमकदार चूत देख कर उसने कहा “आप बहुत ही खूबसूरत हैं मैडम। इतनी खूबसूरत मैंने किसी को नहीं देखा…. आप एक दम से परफेक्ट फिगर की हो… आपको तो मॉडलिंग करनी चाहिये।“ उसके मुँह से अपनी तारीफ सुन कर मुझे बेहद अच्छा लग रहा था। बाहर हवा तेज़ी से चलने लगी थी और लाईट बार-बार जलने-बुझने लगी जैसे कहीं लूज़ कनेक्शन हो गया हो तो उसने साईड में रखी हुई एक केंडल जला दी। नशे और हवस में मेरा रहा-सहा पश-ओ-पेश भी हवा हो गया था और मैंने हँसते हुए पूछा कि “क्या नाप लेते वक्त तुम सिर्फ़ मॉडल्स को ही नंगा करते हो या तुम भी नंगे हो जाते हो?” तो वो शर्मा गया और बोला कि “अगर मॉडल चाहे तो मैं भी नंगा हो कर ही नाप लेता हूँ।“ मैंने फिर हँसते हुए कहा कि “अब क्या इरादा है?” तो उसने कहा कि “मैडम अगर आप चाहें तो मैं भी आपकी तरह ही नंगा हो कर नाप ले सकता हूँ।“ मैंने कहा, “तुम्हारी मर्ज़ी” और अपनी टाँगें थोड़ी खोल दी ताकि वो नाप लेना शुरू कर सके। उसने मेरा इशारा शायद समझ लिया था और बैठे-बैठे ही अपनी टी -शर्ट निकाल दी। अब वो सिर्फ़ लुँगी में बैठा हुआ था और नाप लेना शुरू किया। एक बार फिर से उसके हाथ मेरे जाँघों के अंदर वाले हिस्से पे लगने लगे और मेटल का पीस चूत के अंदर महसूस होने लगा। उसने भी शरारत में मेटल पीस चूत के अंदर घुसा दिया और मैंने अपनी टाँगें खोल दीं। मेटल पीस चूत के अंदर लगते ही मेरे मुँह से मस्ती भरी सिसकरी निकल गयी। उसकी अँगुलियाँ मेरी चूत से टकरा रही थीं और मेरी चूत और ज़्यादा गीली होने लगी। उसने बैठे-बैठे पूछा कि मैडम, “सच आप चाहती हैं कि मैं भी नंगा हो जाऊँ?” तो मैंने मुस्कुरा के कहा, “तुम्हारी मर्ज़ी…. मुझे तो कोई प्रॉबलम नहीं है क्योंकि मैं भी तो तुम्हारे सामने नंगी खड़ी हूँ।“


मेरी चिकनी चूत लाईट में चमक रही थी और गीली भी हो गयी थी और मुझे पक्का यकीन था कि अनिल को मेरी गीली चूत की महक ज़रूर आ रही होगी। जिस तरह वो नीचे बैठा था, मेरी चूत उसके मुँह के सामने थी। उसने ऊपर टेप की तरफ़ देखते-देखते मेरी चूत पे किस कर दिया तो मेरी टाँगें खुद ही खुल गयीं और मेरा हाथ उसके सिर पे चला गया और वो घुटनों के बल झुक गया और मेरी गाँड पे हाथ रख कर मेरी चूत को चूमने और चूसने लगा। मैं तो नशे में मदहोश थी ही और हवस की आग में पहले से ही जल रही थी। उसका मुँह अपनी चूत पे महसूस करते ही मैं तो जैसे दीवानी हो गयी और उसके सिर को पकड़ के अपनी चूत में दबाने लगी। उसने मेरी पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से कटा तो मेरे मुँह से मस्ती की चींख निकल गयी, “आआआआहहहहह “और मैं एक दम से झड़ने लगी। मेरी आँखें बंद हो गयीं और मैं अपनी चूत को उसके मुँह से रगड़ने लगी। मैं झड़ती गयी और वो मेरा जूस पीता गया। जब मेरा झड़ना खतम हुआ तो मैंने झुक कर उसके कंधों को पकड़ा तो वो उठ खड़ा हुआ। उसने पहले ही बैठे-बैठे ही अपनी लुँगी को खोल दिया था और मेरी चूत चाटते हुए वो अपना लंड मेरे सैंडलों पर रगड़ रहा था। जब वो खड़ा हुआ तो उसकी लुँगी भी नीचे गिर पड़ी और वो भी नंगा हो चुका था और उसका लंड स्प्रिंग के जैसे ऊपर नीचे हो कर हिल रहा था जैसे मेरी चूत को सेल्यूट कर रहा हो। उसका लंड भी बहुत ही मस्त था…. बड़ा और मोटा बिला-खतना लंड। नशे में मैं पूरी बेशर्म तो हो ही गयी थी और मैंने एक ही सेकेंड में उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगी। वॉव… मस्त और बहुत ही कड़क लंड था उसका। काफी लंबा और मोटा, लोहे जैसा सख्त था। मैंने एक हाथ उसकी बैक पे रख कर उसको अपनी तरफ़ खींच लिया और दूसरे हाथ से उसके लंड को पकड़ के अपनी चूत में ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर रगड़ने लगी। उसने झुक कर मेरी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उसके लंड में से प्री-कम निकल रहा था जो चूत को स्लिपरी बना रहा था।


मेरी चूत में तो जैसे आग लगी हुई थी और नशे में मैं खड़ी-खड़ी ही हाई हील सैंडलों में झूमने लगी थी। मैं नीचे बैठ गयी और उसके लंड को किस किया और उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी तो उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी गाँड आगे पीछे करके मेरे मुँह को चोदना शुरू कर दिया। अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था। अब तो बस मेरी गरम और गीली चूत को उसका लंबा मोटा कड़क और तगड़ा लंड चाहिये था। मैं बैठे-बैठे ही लेट गयी और उसको अपने ऊपर खींच लिया। बस उसी वक्त बिजली चली गयी और कमरे में एक दम से अंधेरा हो गया पर केंडल की रोशनी से रूम बहुत ही रोमैंटिक लगने लगा। उस वक्त जितने नशे और वासना में मैं चूर थी, उस हालत में म्यूनिसपैलटी का कुढ़ाघर भी मुझे रोमैंटिक लगता। खैर, मैं लेट गयी और उसको अपने ऊपर खींच लिया और अपनी टाँगें फैला लीं। अनिल मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गया। उसने अपने पैर पीछे की तरफ़ को सीधे कर दिये और उसका लंड मेरी चूत के लिप्स के बीच में था। अपनी दोनों कुहनियों को मेरे जिस्म के दोनों तरफ़ रख कर वो मुझ पर झुक गया और मुझे किस करने लगा। उसकी ज़ुबान मेरे मुँह में घुस गयी थी और मुझे अपनी चूत के जूस का टेस्ट उसके मुँह से आने लगा। वो अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चिकनी चूत के अंदर-बाहर कर रहा था। मेरी टाँगें उसकी गाँड पे क्रॉस रखी हुई थी। उसने सुपाड़े को अंदर-बाहर करते-करते एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरे मुँह से मस्ती की “आआआआआहहहहह” निकल गयी और उसका गरम लंड मेरी तंदूर जैसी चूत में ऐसे घुस गया जैसे गरम चाकू मक्खन में घुस जाता है। उसका लंड बेहद मोटा था। उसके लंड से मेरी चूत खुल गयी थी। मेरी आँख से दो बूँद आँसू भी निकल गये। ये आँसू मस्ती के थे जिसे उसने नहीं देखा।


मैंने उसको ज़ोर से पकड़ा हुआ था और मेरी टाँगें उसकी गाँड पे क्रॉस थी। उसने लंड को बाहर निकाल कर चोदना शुरू कर दिया। बहुत ही मज़ा आ रहा था उसकी चुदाई से। उसके हाथ मेरी बगल से निकल कर कंधों को पकड़े हुए थे। वो अपनी टाँगें पीछे दीवार से टिका कर गचागच चोद रहा था। उसके हर झटके से मेरे चूचियाँ डाँस करने लगी थी। कमरे में हल्की सी रोशनी चुदाई में मज़ा दे रही थी। कमरा रोमैंटिक लग रहा था और चुदाने में मज़ा आ रहा था। वो गचागच चोद रहा था और मुझे लग रहा था कि आज उसका लंड मेरी चूत फाड़ डालेगा। लेकिन मैं भी तैयार थी, मैं चाहती थी कि आज वो सच में मेरी चूत को फाड़ डाले और चोदते-चोदते मेरी चूत को अपनी मनि से भर दे। एक हफ़्ते से मेरी चुदाई नहीं हुई थी और मेरी चूत को तो बस लंड चाहिये था। मेरी चूत की खुजली बढ़ गयी थी और मैं चाहती थी कि मस्त चुदाई हो। अनिल का लंड बेहद वंडरफुल था। वो पूरी मस्ती में चोद रहा था। लंड को पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाल-निकाल कर चूत में घुसेड़ देता तो उसके लंड का हेल्मेट जैसा सुपाड़ा मेरी बच्चे दानी से टकरा जाता और मेरा सारा जिस्म काँप जाता। अब वो बहुत तेज़ी से चोद रहा था और मैं शायद तीन बार झड़ चुकी थी। मेरे जूस से चूत बहुत ही गीली हो चुकी थी और अब उसका लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था और वो बहुत ही ज़ोर-ज़ोर से चूत फाड़ झटके मार रहा था। यंग था ना, इसी लिये पूरी ताकत से धक्के मार-मार के चुदाई कर रहा था। मेरे मुँह से खुद-ब-खुद निकलना शुरू हो गया, “आआआईईईईईई  आहहहहाआआआआआ ऐसे ही…ईईईईई चोदो…. ओ‍ओ‍ओ‍ओ ऊऊऊईईईई आआआआआहहह मज़ा…आआआआ रहा है….. और ज़ोर से…ए‍ए‍ए‍ए‍ए आआंआंआंआंहहह” और उसका लंड बड़ी बे-दर्दी से मेरी चूत को चोद रहा था। अब उसके चोदने की रफ़्तार बढ़ गयी थी और उसके मुँह से भी अजीब आवाज़ें निकलने लगी थी। फिर अचानक उसने अपना पूरा लंड बाहर निकाल कर इतनी ज़ोर से मेरी चूत के अंदर धक्का मार कर घुसेड़ दिया कि मेरे मुँह से चींख निकल गयी, “ऊऊऊऊऊऊऊईईईईईईई अल्लाह…आआआआआ”, और मैंने उसको बहुत ज़ोर से पकड़ लिया और उसके लंड में से मलाई की पिचकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी। उसकी पहली पिचकारी जब मेरी चूत के अंदर पड़ी तो मैं फिर से झड़ने लगी और अब उसके लंड में से क्रीम निकल-निकल कर मेरी एक हफते से प्यासी चूत की प्यास बुझाने लगी। उसकी मलाई निकलती रही और मेरी चूत भरती रही। उसकी मलाई भी बहुत ही गाढ़ी थी,मज़ा आ रहा था उसकी मलाई चूत के अंदर महसूस करके।


उसके धक्के अब धीरे होने लगे और अभी भी उसका लंड अंदर ही था। वो मेरे सीने पर गिर गया जिससे मेरे चूचियाँ दब गयी। वो थोड़ी देर ऐसे ही लेटा रहा और उसका लंड अभी अंदर ही था। जब मेरा झड़ना खतम हुआ और मेरी साँसें ठीक हुई तो देखा कि अभी तक उसका लंड मेरी चूत के अंदर ही घुसा हुआ है और वैसे ही तना हुआ है, लोहे जैसा सख्त। उसकी क्रीम निकलने से भी लंड नरम नहीं हुआ था। थोड़ी ही देर में उसकी साँसें भी ठीक हो गयी और फिर उसने मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी और हम एक दूसरे की जीभ को चूसने लगे। कमरे में अभी भी मोमबत्ती जल रही थी और धीमी रोशनी बहुत दिलकश और रोमैंटिक लग रही थी। मैंने गौर किया है कि रूम में अगर थोड़ा अंधेरा हो और लड़की ने शराब पी हुई हो तो लड़की में शरम नहीं रहती और वो हर तरीके से चुदवा सकती है और वो भी कर लेती है जो वो बिना शराब पिये नहीं कर सकती। कुछ यही हाल मेरा भी था। मेरे पास अब कोई शरम -हया बाकी नहीं थी। ऐसा लग रहा था जैसे सारे जहाँ में बस हम दो ही हों और कोई नहीं…… फिर चाहे जिस तरह से चुदाई हो, लंड चूस लो या अपनी चूत चटवा लो… कोई फ़रक नहीं पड़ता।


अनिल मेरे ऊपर ही लेटा हुआ था और उसका अकड़ा हुआ सख्त लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर घुसा हुआ था। उसका लंड मेरी चूत के अंदर ऐसे फिक्स बैठा था जैसे बोतल के ऊपर कॉर्क और लंड अंदर ही रहने की वजह से हमारी दोनों की क्रीम भी मेरी चूत के अंदर ही फंसी हुई थी, बाहर नहीं निकली थी। हम दोनों किस कर रहे थे और वो मेरी चूचियों को मसल रहा था। वो मेरे निप्पलों को अंगूठे और उंगली से मसल रहा था। थोड़ी ही देर में उसने मेरी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया जिससे मेरी चूत में फिर से खुजली होने लगी और जिस्म में बिजली सी दौड़ने लगी। पर उसका इरादा तो कुछ और ही था। उसने एक ही हरकत में अपना लंड मेरी चूत में से बाहर निकाल लिया और इस से पहले कि मेरी क्रीम से भरी चूत में से क्रीम बहने लगती, वो पलट गया और अपनी दोनों टाँगें मेरे सिर के दोनों तरफ़ रख के अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया। उसके लंड से हम दोनों की मिक्स क्रीम टपक कर मेरे मुँह पे गिर रही थी तो मैंने मुँह खोल दिया और हम दोनों की मिक्स क्रीम से भीगे हुए उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। बहुत ही टेस्टी था उसका लंड। ऐसे लग रहा था जैसे मैं कोई शहद चूस रही हूँ।


उसका लंड तो अभी तक नरम नहीं हुआ था, बल्कि मेरे चूसने से उसका लंड और भी ज़्यादा अकड़ गया था और अब वो मेरे मुँह को चोद रहा था । वो आगे झुक कर मेरी मेरी चूत में अपनी उंगलियाँ अंदर-बाहर करके चोदने लगा। मैं इतनी मस्ती में आ गयी और गरम हो गयी कि उसके लंड को बहुत ही ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी और वो भी अपनी गाँड उठा-उठा के मेरे मुँह को चोदने लगा। उसने जब मेरी चूत में चार उंगलियाँ घुसेड़ीं और अंगूठे से क्लिटोरिस को रगड़ा तो मैं काँपने लगी और बहुत ज़ोर से झड़ गयी। मेरी चूत से जूस निकलने लगा और मैं कुछ ज़्यादा ही मस्ती से उसके लंड को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी और मुझे महसूस हुआ कि उसका लंड मेरे मुँह में ही और ज़्यादा ही मोटा हो रहा है। मैं समझ गयी कि अब उसकी क्रीम भी निकलने वाली है और उसी वक्त उसने अपने लंड को मेरे हलक में पूरा अंदर तक घुसा दिया जिससे मेरी आँखें बाहर निकल आयीं और साँस बंद होने लगी। उसके लंड से मलाई की गाढ़ी-गाढ़ी पिचकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी और डायरेक्ट मेरे हलक में गिरने लगी। उसके लंड में से मलाई निकलती ही चली गयी…. निकलती ही चली गयी और इस कदर निकली कि मुझे लगा जैसे मेरा पेट उसकी क्रीम से ही भर जायेगा। पता नहीं इतनी क्रीम कैसे निकली उसके लंड से।


हम दोनों झड़ चुके थे और दोनों के जूस निकल चुके थे और दोनों गहरी-गहरी साँसें ले रहे थे। उसका लंड मेरे मुँह में ही था और उसका मुँह मेरी चूत पे। अब उसका लंड मेरे मुँह में थोड़ा-थोड़ा नरम हो गया था पर उसके यंग लंड में अभी भी सख्ती थी। थोड़ी ही देर के बाद मैंने उसको अपने ऊपर से हटा दिया और वो नीचे मेरी बगल में लेट गया। हम दोनों करवट से लेटे थे और अभी भी मेरा मुँह उसके लंड के सामने था और मेरी चूत उसके मुँह के सामने। मैंने उसके लंड से खेलना शुरू कर दिया और उसने मेरी चूत में उंगली डाल के फिर से क्लीटोरिस को मसलना शुरू कर दिया। उसका लंड एक ही मिनट के अंदर फिर से कुतुब मिनार जैसे खड़ा हो गया तो मैंने उसको सीधा लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गयी और उसके मूसल लंड को पकड़ के अपनी चूत के छेद पर एडजस्ट करके बैठने लगी। गीला लंड धीरे-धीरे गीली चूत के अंदर घुसने लगा। उसका मूसल जैसा लंड मेरी चूत में घुसता हुआ बेइंतेहा मज़ा दे रहा था। मैं पूरी तरह से उसके लंड पे बैठ गयी और उसका लंड जड़ तक मेरी चूत में घुस चुका था। मेरे मुँह से मस्ती की सिसकियाँ निकल रही थी। अब मैंने उसके लंड पे उछालना शुरू कर दिया जिससे मेरी चूचियाँ उसके मुँह के सामने डाँस कर रही थी। मैं उसके लंड पे ऐसे सवार थी जैसे घुड़सवार हॉर्स रेस के वक्त घोड़े पे सवर होता है। उसने मेरी चूचियों को पकड़ के मुझे अपनी तरफ़ झुकाया और चूसने लगा। अभी हम मस्ती में चुदाई कर रहे थे कि रूम में जलती मोमबत्ती खतम हो गयी थी और कमरे में एक दम से अंधेरा हो गया था। पर हमारा ध्यान तो चुदाई में था। मैं उछल-उछल के उसके लंड पे बैठ रही थी और उसका लंड मेरी चूत के बहुत अंदर तक घुस रहा था।


चुदाई फ़ुल स्पीड से चल रही थी। मैं उछल-उछल कर उसके कुतुब मिनार जैसे लंड पे अपनी चूत मार रही थी। उसके घुटने मुड़े हुए थे और मेरे चूतड़ उसकी जाँघों से लग रहे थे। मेरे बाल सैक्सी स्टाईल में उड़-उड़ क्र मेरे मुँह के सामने आ रहे थे। मैं ज़ोर-ज़ोर से उछल रही थी। मेरे उछलने से कभी तो पूरा लंड चूत के बाहर तक निकल जाता और जब मैं ज़ोर से उसके लंड पे बैठती तो उसका लोहे जैसा लंड गचाक से मेरी चूत में घुस कर मेरी बच्चे दानी से टकराता तो मेरे जिस्म में बिजली सी दौड़ जाती और मैं काँपने लगती। फिर अचानक ऐसे हुआ कि मैं जब उछल रही थी तो उसका पूरा लंड मेरी चूत के बाहर निकल गया और जब मैं ज़ोर से उसके लंड पे बैठी तो उसका लंड थोड़ा सा अपनी पोज़िशन से हिल गया और उसका मूसल लंड मेरी चूत में घुसने की बजाये मेरी गाँड में घुस गया। मेरी गाँड के छेद को पता ही नहीं था कि रॉकेट लंड मेरी गाँड में घुसेगा। इसलिये गाँड के मसल रिलैक्स नहीं थे और एक दम से पूरा का पूरा लंड मेरी टाइट गाँड मैं घुसते ही मेरी चींख निकल गयी, “ऊऊऊऊऊऊईईईईईईईई अल्लाहहह…आंआंआंआंआं”, पर अब क्या हो सकता था, लंड तो गाँड में घुस ही चुका था। मैं थोड़ी देर ऐसे ही उसके लंड को अपनी गाँड में रखे रही और जब मेरी गाँड उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट कर चुकी तो मैं उछल- उछल के अपनी गाँड मरवाने लगी। अब उसका लंड मेरी गाँड में आसानी से घुस रहा था। वो फ़ुल स्पीड से मेरी टाइट गाँड मार रहा था। बीच-बीच में मैं रुक कर अपनी चूत को उसके नाफ़ के हिस्से से रगड़ती थी। मैं फिर से झड़ने लगी और उसका लंड भी मेरी गाँड के अंदर फूलने लगा और अनिल ने अपनी गाँड उठा कर अपना मूसल लंड मेरी गाँड में पूरा अंदर तक घुसा दिया। फिर उसने भी अपनी क्रीम मेरी गाँड के अंदर ही निकाल दी। मैं भी झड़ चुकी थी और मदहोश हो कर उसके जिस्म पर गिर पड़ी। हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये और पता नहीं कब हमारी आँख लग गयी और हम एक दूसरे से लिपटे हुए नंगे ही सो गये। इतनी ज़बरदस्त तस्कीन बक़्श चुदाई के बाद नींद भी बहुत मस्त आयी। सुबह मेरे सारे जिस्म में मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था। बार-बार अंगड़ायी लेने का दिल कर रहा था और चुदाई का सोच सोच कर खुद-ब-खुद ही मुँह पे मुस्कुराहट आ रही थी।


मैं सुबह जल्दी ही उठ गयी और देखा तो अनिल के उठने से पहले ही उसका लंड उठ चुका था। उसका मोर्निंग इरेक्शन देख कर मैं मुस्कुरा दी और उसके हिलते हुए लंड को अपने हाथ में पकड़ के पूछा, “क्या ये अभी भी भूखा है? सारी रात तो चोदता रहा मुझे और अब फिर से अकड़ गया….” तो वो आँखें बंद किये हुए मुस्कुराया और बोला कि “ऐसी प्यारी चूत मिले तो ये रात दिन खड़ा ही रहे” और फिर हम दोनों हँसने लगे।


 


दोनों नंगे ही थे और उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और एक बार फिर से मुझे चोद डाला। सुबह की पहली चुदाई में भी एक अजीब बात होती है, जल्दी कोई भी नहीं झड़ता। ये चुदाई भी काफ़ी देर तक चलती रही। उसका लोहे के मूसल जैसा लंड मेरी चूत को चोद-चोद कर भोंसड़ा बनाता रहा और तकरीबन आधे घंटे की फर्स्ट-क्लास चुदाई के बाद हम दोनों झड़ गये और कुछ देर तक ऐसे ही नंगे एक दूसरे से लिपट कर लेटे रह और एक दूसरे को किस करते रहे। कभी वो चूचियों को चूसता रहा और कभी मैं उसके लंड को ऐसे दबाती रही जैसे मुझे और चुदाई करनी है और लंड पकड़ के सिसकारियाँ भरती रही।


जल्दी ही मेरी चूत में लगी क्रीम सूख गयी और फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों उठ गये। वहाँ उसके पास शॉवर लेने की कोई जगह तो थी नहीं, बस मैंने वैसे ही अपने कपड़े पहन लिये और अभी मैं अंदर ही बैठी रही। बाहर से रोशनी अंदर आ रही थी।


मेरे घर में भी कोई नहीं था तो मुझे कोई प्रॉबलम नहीं थी कि रात कहाँ सोयी थी। रात भर तेज़ बारिश हो रही थी, इसलिये बिजली और टेलीफोन के तार लूज़ हो गये थे। ना बिजली थी और ना टेलीफोन के कनेक्शन। आज छुट्टी होने की वजह से उसकी दुकान भी बंद थी और उसके पास कोई वर्कर भी नहीं आने वाले थे। इसलिए हमें कोई मुश्किल नहीं हुई। सुबह के करीब दस बजे के करीब उसने दुकान का शटर आधा उठा दिया और मैं अभी भी अंदर के रूम में ही बैठी थी। बाहर अभी भी थोड़ी-थोड़ी बारिश हो रही थी। थोड़ी देर के बाद वो करीब के होटल से कुछ नाश्ता पैक करवा के ले आया और चाय भी। हम दोनों ने नाश्ता किया और चाय पी कर थोड़ी देर अंदर ही बैठे रहे। उसने मुझे बहुत किस किया और मेरी चूचियों को दबाता ही रहा। मुझे लगा कि मेरी चूत फिर से गीली होनी शुरू हो गयी है और वो अब फिर से फ़ुल चुदाई के मूड में आ गया है पर उसने चोदा नहीं। शायद ये सोचा होगा कि फिर कभी मौके से चुदाई करेगा।


जब देखा मार्केट की कुछ दुकानें खुल चुकी हैं तो मैं पहले तो दुकान के बाहर काऊँटर पे आ कर क ऐसे खड़ी हो गयी जैसे कोई कस्टमर खड़ा होता है। अनिल ने कपड़े एक हफते के बाद देने का वादा किया और कुछ देर के बाद मैं अपने घर को चली गयी। घर जा कर पहले तो गरम पानी का शॉवर लिया। पिर गरम-गरम चाय पी और बेड में लेट के रात की चुदाई के बारे में सोचने लगी जिससे मेरे चेहरे पे खुद-ब-खुद मुस्कुराहट आ गयी और मेरा हाथ खुद-ब-खुद मेरी चूत पे आ गया और मैं चूत का मसाज करने लगी। थोड़ी देर के बाद मैं झड़ गयी और गहरी नींद सो गयी।


अब तो ज़िंदगी बेहद हसीन हो गयी थी। वैसे मैं इस कदर हवस-परस्त (सेक्स-ऐडिक्ट) हो चुकी थी कि मेरी चुदाई की तलब मिटती ही नहीं थी। हर वक़्त ‘ये चूत माँगे मोर’ वाली बात थी। खुदा के फ़ज़ल से चुदाने के लिये अब तो दो-दो मस्त लौड़ों का इंतज़ाम था और लेस्बियन सेक्स के लिये भी सलमा आँटी और डॉली थी। वैसे भी अब तो मैं मुकर्रर बाइसेक्सुअल हो चुकी थी और मर्दों और औरतों को एक ही नज़र से देखती थी। फिर तीन हफ़्तों बाद एक और वाक़िया हुआ जिसके बाद मेरी हवस-परस्ती अगले मक़ाम पे पहुँच गयी और मैं कुत्ते से भी चुदवाने लगी। मेरी इस बेरहरवी का क्रेडिट भी सलमा आँटी को ही जाता है जिहोंने मुझे इस लुत्फ़ से वाक़िफ़ करवाया। आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है


उस दिन मैं ग्यारह बजे के करीब ऑफिस गयी थी। हमेशा की तरह एस-के के चेंबर में पहले तो काम की बातों के साथ -साथ दो पैग शराब पिये और फिर एस-के से अपनी चूत और गाँड दोनों मरवायीं क्योंकि एस-के के उस दिन दोपहर की फ्लाइट से चार दिन के लिये अहमदाबाद के लिये निकलने वाला था। फिर घर आकर थोड़ी देर आराम किया और उसके बाद खाना खा कर करीब दो घंटे कम्प्यूटर पे ऑफिस का काम किया। फिर शाम को सात बजे के करीब मैं तैयार होके सलमा आँटी के घर गयी। वैसे तो सलमा आँटी ही ज्यादातर मेरे घर आती थीं लेकिन अश्फ़ाक़ भी दो दिनों से एक हफ़्ते के लिये टूर पे गये हुए थे और एस-के भी नहीं था तो उस दिन मैं पहली दफ़ा रात को भी सलमा आँटी के घर पे ही रुक गयी। हस्ब-ए-दस्तूर हम दोनों अपने-अपने सैंडलों के अलावा बिल्कुल नंगी हो गयीं और शराब पीते हुए हम दोनों ने उनके बेडरूम में एक ब्लू-फिल्म देखी। फिर काफी देर तक आपस में गुथमगुथा होकर एक दूसरे को चूमा, सहलाया, और सिक्स्टी नाइन पोज़िशन में एक -दूसरे की चूतें चाटती रहीं। फिर हमने आमने-सामने लेट कर आपस में अपनी टाँगें कैंची की तरह फंसा कर सलमा आँटी के दो-रुखे डिल्डो का एक-एक सिरा अपनी-अपनी चूतों में घुसेड़ कर काफी देर तक चुदाई का मज़ा लिया और हम दोनों कईं दफ़ा फारिग  हुईं।


एक दूसरे के आगोश में थोड़ा सुस्ताने के बाद हम दोनों फिर व्हिस्की पीने लगीं और सलमा आँटी ने ब्लू-फिल्म की एक नयी सी-डी लगा दी। हम दोनों बेड पर ही हेडबोर्ड और तकियों के सहार कमर टिकाये टाँगें लंबी करके बैठी थीं। फिल्म के पहले सीन में दो अंग्रेज़ लेस्बियन औरतें आपस में हम-जिंसी चुदाई का मज़ा ले रही थीं। इस तरह की फिल्में मैंने सलमा आँटी के साथ पहले भी कईं दफ़ा देखी थीं। काफी गरम सीन था और हम दोनों व्हिस्की की चुस्कियाँ लेते हुए वक़फ़े-वक़फ़े से एक दूसरे के होंठों को भी चूम रही थीं। मैंने सिसकते हुए सलमा आँटी से कहा कि “बेहद हॉट सीन है आँटी“ तो वो बोलीं, “जब अगला सीन देखोगी तो होश उड़ जायेंगे…!“mast chudasi bhbhi ki kahani (www.mastaram (25)


हक़ीकत में उस फिल्म के अगले सीन ने मेरे होश उड़ा दिये। पिछले सीन वाली लेस्बियन औरतों में से एक औरत नंगी ही कमरे से बाहर गयी और जब लौट कर आयी तो उसके साथ एक काले रंग का बड़ा सा कुत्ता था जिसके कंधे उस लंबी अंग्रेज़ औरत के चूतड़ों के ऊपर तक पहुँच रहे थे। उसके बाद वो दोनों औरतें उस कुत्ते के साथ चुदाई में शरीक़ होने लगीं। इससे पहले मैंने सुना-पढ़ा ज़रूर था कि कुछ लोग इंसानों के बजाय जानवरों से चुदाई करते हैं लेकिन मैंने कभी इस पर इतना गौर नहीं किया था। मैंने एक घूँट में अपना गिलास खाली कर दिया और ताज्जुब से आँखें फाड़े उस पर्वर्टेड चुदाई का दिलफ़रेब नज़ारा देख रही थी। फिल्म में उन दोनों औरतों की मस्ती-भरी सिसकियों और चींखों से ज़ाहिर था कि कुत्ते के बड़ी-सी गाजर जैसे लंड से चुदवाने में उन्हें बेहद मज़ा आ रहा था।  मुझे हवस-ज़दा देख कर सलमा आँटी ने प्यार से मेरी चूचियाँ मसलते हुए पूछा, “है ना कमाल का सीन… मज़ा आया?”


“ऊँऊँह… आँटी… दिस इज़ सो किंकी…. लेकिन क्या ये मुमकीन है… ऑय मीन कि हक़ीक़त में… कुत्ते से… चुदाई… रियली?” मैं इस कदर मग़लूब और इक्साइटिड थी कि ठीक से बोल भी नहीं पा रही थी। व्हिस्की का नशा इक्साइटमेंट में और इज़ाफ़ा कर रहा था। आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है


सलमा आँटी मेरी रहनुमाई करते हुए बोलीं, “येस डार्लिंग… ये हक़ीक़त ही है… निहायत अमेज़िंग हक़ीक़त! इसमें हैरानी वाली कौन सी बात है… दुनिया भर में काफ़ी औरतें इस तरह की चुदाई का खूब मज़ा लेती हैं। कुत्ते मर्दों के मुक़ाबले कहीं ज्यादा एनर्जेटिक होते हैं और पूरे जोश-ओ-खरोश से ज़बर्दस्त चुदाई करते हैं! मालूम है कुत्ते का लंड असल में चूत के अंदर जाकर फूलता है…?”  ये कहते हुए उन्होंने शोखी से मुस्कुराते हुए मुझे देख कर आँख मार दी।


“आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे की आप को इसका तजुर्बा…?” मैं हंसते हुए बोलने लगी तो आँटी ने कबूल करते हुए कहा, “हाँ मेरी जान…. तजुर्बे से ही बोल रही हूँ…!” सलमा आँटी ने कन्फेस किया तो मैं हक्की बक्की रह गयी और मेरा मुँह खुला का खुला रह गया । “हाय अल्लाह…. रियली…? ये आप क्या कह रही हो…. आप कुत्ते से?” मेरी आवाज़ सदमे और व्हिस्की के नशे से लरज़ रही थी। दो मिनट तक हम दोनों में से कोई नहीं बोला।


“शायद मुझे ये सब तुम्हें नहीं बताना चाहिये था!” मेरा रिएक्शन देख कर आँटी ने कहा। “मैं…नहीं… मैं मैं वो… मेरा मतलब… कब से… क्या ऑस्कर के साथ?” पशोपेश की हालत में मैंने हकलाते हुए कहा।


सलमा आँटी ने साइड-टेबल से व्हिस्की और सोडे की बोतल लेकर हम दोनों के खाली गिलासों में पैग बनाये और फिर मुझे देते हुए धीरे से बोलीं, “येस डियर.. ऑस्कर के साथ… ही इज़ वंडरफुल… ऑस्कर से तो पिछले पाँच-छः सालों से तकरीबन हर रोज़ चुदवा रही हूँ… लेकिन ऑस्कर मेरी ज़िंदगी में पहला कुत्ता नहीं है… बल्कि मेरी चूत सबसे पहले किसी मर्द से नहीं बल्कि कुत्ते से ही चुदी थी!” फिर सलमा आँटी ने तफ़्सील बताया कि कैसे बीस-इक्कीस साल की उम्र में उन्होंने और उनकी दो लेस्बियन सहेलियों ने एक दिन अपने पालतू कुत्ते को फुसला कर अपनी वर्जिनिटी खोयी थी। उसके बाद तो जब भी उन्हें मौका मिलता वो अपने कुत्ते से चुदवा कर खूब मज़ा करती थीं और ये सिलसिला उनकी शादी तक ज़ारी रहा। शादी होने के बाद वो कईं सालों तक इस तरह की बेरहरावी से दूर रहीं। लेकिन उनके शौहर मर्चेंट नेवी में थे और साल में कभी-कभार ही छुट्टी पे घार आ पाते थे तो अपनी जिस्मनी तस्कीन के लिये  आँटी जल्दी ही गैर-मर्दों और औरतों के साथ हमबिस्तर होने लगीं। फिर कुछ सालों बाद जब ऑस्कर उनकी ज़िंदगी में आया तो ज़ाहिर है कि वो खुद पर काबू नहीं रख सकीं और उससे चुदवाना शुरू कर दिया।


मैं व्हिस्की पीते हुए हैरत से आँटी की बातें बड़े गौर से सुन रही थी और मेरी चूत बेहद गीली हो गयी थी और पूरे जिस्म में और दिमाग में सनसनी सी फैली हुई थी। अगर्चे ये सब पर्वर्टिड था लेकिन शायद इसी वजह से मुझे ये सब बेहद दिलचस्प और इक्साइटिंग लग रहा था। मैंने पूछा, “कैसा… कैसा लगता है… कुत्ते से चुद… चुदवाना?”


“जस्ट अमेज़िंग…. गज़ब की मस्ती भरी और बेइंतेहा तसल्ली बख़्श धुंआधार चुदाई होती है… ऑस्कर जब मेरी कमर पे चढ़ के और मेरी गाँड से चिपक कर मुसलसल पंद्रह बीस मिनट तक अपना अज़ीम लंड मेरी चूत में दनादन पिस्टन की तरह अंदर-बाहर चोदता है तो… बस जन्नत की सैर करा देता है… चूत भी बार -बार पानी छोड़-छोड़ के बेहाल हो जाती है… कुत्ते का लंड चूत में अंदर जाने के बाद पूरा फूलता है…. और फिर जब उसके लंड की जड़ में गाँठ फूल कर चूत में फ़ंस जाती है तो वो एहसास मैं बयान नहीं कर सकती… बीस-बीस मिनट तक फिर हम दोनों चिपके रहते हैं और उसकी मनि मेरी चूत में मुसलसल गिरती रहती है…!” आँटी ने मस्ती भरे अंदाज़ में कहा और फिर मेरे होंठों को चूमते हुए बोलीं,  “वैसे तुम्हें खुद ही ऑस्कर से चुदवा कर ये निहायत अमेज़िंग मज़ा ले कर देखना चाहिये!”


सलमा आँटी की बात सुनकर मैं व्हिस्की का बड़ा सा घूँट पीते हुए लरजती हुई आवाज़ में बोली, “क्या…? मैं… मैं.. रियली… लेकिन… आर यू श्योर…!” कुत्ते से चुदवाने के ख्याल से मेरे जिस्म में सनसनती लहरें दौड़ने लगीं। फिर आँटी उठ कर हाई-हील के सैंडलों में अपनी मस्त गाँड मटकाती हुई ऑस्कर को लाने के लिये कमरे से बाहर चली गयीं। शाम से हम दोनों ने काफी ड्रिंक कर ली थी और सलमा आँटी के कदमों में थोड़ी-सी लड़खड़ाहट ज़ाहिर हो रही थी। दो मिनट बाद ही वो दूसरे कमरे से ऑस्कर को अपने साथ लेकर वापस आयीं और बेड पर बैठते हुए शोख अंदाज़ में बोली, “सो आर यू रेडी… अपनी ज़िंदगी की सबसे बेहतरीन चुदाई का मज़ा लेने के लिये?”


“ऊँहूँ?” मैंने धीरे से मुस्कुराते हुए गर्दन हिलायी। हमारे घर में कभी भी कोई पालतू कुत्ता या कोई और जानवर नहीं था इसलिये मुझे कुत्तों के ज़ानिब ज्यादा जानकारी नहीं थी। इस वजह से थोड़ी एइंगज़ाइअटी और घबराहट सी महसूस हो रही थी लेकिन नशे में मतवाला हवस-ज़दा दिमाग और जिस्म इस बेरहरावी में शऱीक होने के लिये बेकरार था। ऑस्कर भी बेड पर चढ़ गया और सलमा आँटी के सैंडल और पैर चाटने लगा। आँटी उसकी गर्दन सहलाने लगीं और मुझे भी ऐसा ही करने को कहा तो मैं भी उसकी कमर सहलाने लगी। ऑस्कर का नोकिला लाल लंड करीब एक-दो इंच अपने बाल-दार खोल में से बाहर निकला हुआ था। फिर आँटी ने ऑस्कर का चेहरा मेरी टाँगों की तरफ़ किया और उसे मेरी चूत चाटने के लिये कहा तो बासाख़्ता मैंने अपनी टाँगें फैला कर अपनी चूत खोल दी। ऑस्कर ने मेरी टाँगों के बीच में अपना मुँह डाल कर अपनी लंबी भीगी ज़ुबान मेरी रानों पर फिरायी तो अजीब सा एहसास हुआ। तीन-चार दफ़ा मेरी रानों को चाटने के बाद उसने अपना थूथना मेरी भीगी चूत पर लगा कर अपनी ज़ुबान नीचे से ऊपर चाटते हुए मेरी क्लिट पर भी फिरायी तो मेरा पुरा जिस्म थरथरा गया। सलमा आँटी उसे सहलाते-पुचकरते हुए उसकी हौंसला अफ़ज़ाई कर रही थीं।


ऑस्कर काफी जोश में मेरी चूत चाटने लगा। उसकी ज़ुबान मेरी रसीली-भीगी चूत में घुसते हुए उसमें से निकलता हुआ रस चाट रही थी। मैं आँखें बंद करके मस्ती में ज़ोर-ज़ोर से चींखने लगी। एस-के, अनिल, सलमा आँटी और डॉली सभी से चूत चटवाने में मुझे बेहद मज़ा आता था लेकिन ऑस्कर की ज़ुबान की बात ही अलग थी। अपनी चूत और क्लिट पर उस जानवर की लंबी-खुर्दरी भीगी ज़ुबान की चटाई से मेरा जिस्म बेपनाह मस्ती में भर कर बुरी तरह थरथरा रहा था। उसकी ज़ुबान मेरी चूत में इतनी अंदर तक जा रही थी जहाँ तक किसी इंसान की ज़ुबान का पहुँच पाना मुमकिन नहीं था। एक तरह से वो अपनी ज़ुबान से मेरी चूत चाटने के साथ-साथ चोद भी रहा। मैंने ज़ोर-ज़ोर से कराहते हुए मस्ती में अपने घुटने मोड़ कर बिस्तर में अपने सैंडल गड़ाते हुए अपने चूतड़ ऊपर उठा दिये और अपनी चूत उसके थूथने पर ठेल दी। उसकी ज़ुबान मेरी चूत में अंदर तक घुस कर फैलती और फिर बाहर फिसल कर मेरी धधकती क्लिट पर दौड़ती।


मेरे जिस्म में इस कदर मस्ती भरी लहरें दौड़ रही थीं कि मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा था और मेरी चूत पिघल कर पानी छोड़ने लगी। बिस्तर की चादर अपनी मुठ्ठियों में कस कर जकड़ते हुए मैं मस्ती में बेहद ज़ोर से चींखी,“आआआहहह आँटी ईईईई… मेरी चूत… झड़ीईईई… हाय अल्लाह…. ऑय…ऑय एम कमिंग…!” मेरी चूत से बे-इंतेहा पानी निकलाने लगा जिसे ऑस्कर ने अपनी ज़ुबान से जल्दी-जल्दी चाटने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे कि मेरा पेशाब निकल गया हो। इस कदर गज़ब का ऑर्गैज़म था कि बेहोशी सी छा गयी और मैं आँखें बंद करके हाँफने लगी। ऑस्कर अभी भी मेरी चूत चाटते हुए मेरे पनी के आखिरी कतरे पी रहा था। सलमा आँटी उसे पुचकारते हुए बोलीं, “बस.. बस… इतना काफी है… डार्लिंग!” और ऑस्कर को अपनी तरफ़ खींचकर उसे सहलाने लगी।


बेहतरीन ऑर्गैज़म के लुत्फ़ का एहसास करते हुए मैं चार-पाँच मिनट तक आँखें बंद किये लेटी रही। मुझे बेहद तसल्लुत महसूस हो रही थी। जब मैंने आँखें खोलीं तो देखा कि सलमा आँटी घुटनों पे बैठी ऑस्कर का लाल गाजर जैसा लंड प्यार से सहला रही थीं। करीब सात-आठ इंच लंबा और मोटा सा नोकीला लंड सख्त होकर फड़क रहा था जिसे देख कर मेरे चेहरे की सुकून भरी मुस्कुराहट हैरत में तब्दील हो गयी। आँटी ने मुझे सेहर-ज़दा नज़रों से ऑस्कर के लंड को घूरते हुए देखा तो बोलीं, “है ना लाजवाब? पास आकर इसे हाथ में महसूस करके देखो!” मैं खुद को रोक नहीं सकी और शोखी से मुस्कुराते हुए उठ कर घुटने मोड़ कर बैठ गयी और अपना एक हाथ ऑस्कर के पेट के नीचे ले जा कर उसके सख्त और लरज़ते हुए गरम लंड को सहलाने लगी। उसके लंड को आगे से पीछे तक सहलाते हुए उसके लंड की फूली हुई नसें मुझे अपने हाथ में धड़कती हुई महसूस हो रही थीं। ऑस्कर के लंड से मुसलसल चिकना और पतला-सा रस चू रहा था। मोटी गाजर जैसा उसका लंड मेरे हाथ में धड़कता हुआ और ज्यादा फूलने लगा और उसकी दरार में से सफ़ेद झाग जैसा रस और ज्यादा चूने लगा और मेरा हाथ और उंगलियाँ उस चिकने रस से सन गयीं। इतने में सलमा आँटी उसके टट्टों की फुली हुई एक हाथ में पकड़ कर मुझे दिखाते हुए बोलीं, “देखो ये किस कदर लज़ीज़ मनि से भरे हुए हैं…।“ और अपने होंथों पर ज़ुबान फिराने लगीं।


फिर अचानक नीचे झुक कर आँटी उसके रस से सने हुए लंड पर जीभ फिराने लगीं और उसका रिसता हुआ लंड अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया। ऑस्कर मस्ती से रिरियाने लगा। आँटी को ऑस्कर का लंड चूसते देख मेरे मुँह में भी पानी भरने लगा। बेसाख्ता मैं अपना हाथ अपने होंठ और नाक के करीब ले गयी तो ऑस्कर के लंड के चिकने रस की तेज़ खुशबू मेरी साँसों में समा गयी और मैं ऑस्कर के लंड के रस से सनी अपनी उँगलियों मुँह में लेकर चाटते हुए उसका ज़ायका लेने लगी। मुझे एस-के और अनिल की मनि बेहद पसंद थी लेकिन ऑस्कर के इस रस का ज़ायका थोड़ा अलग था लेकिन था बेहद लज़्ज़तदार। ऑस्कर का लंड अपने मुँह से निकालकर चटखारा लेते हुए आँटी भी बोलीं, “ऊँऊँ यम्मी… तुम भी चूस के देखो… बेहद लाजवाब और अडिक्टिव ज़ायका है इसका… मेरा तो इससे दिल ही नहीं भरता!” आँटी की बात पूरी होने से पहले ही मैं झुक कर अपनी ज़ुबान ऑस्कर के लंड की रिसती हुई नोक पर फिराने लगी। मैंने अपनी ज़ुबान पर उसके लंड से रिसता हुआ रस अपने मुँह में लेकर घुमाते हुए उसका ज़ायका लिया और फिर अपने हलक़ में उतार लिया। अपनी इस बेरहरावी पे मस्ती में मेरी सिसकी निकल गयी। मैं फिर उसके कुत्ते के गरम लंड पे अपनी ज़ुबान घुमा-घुमा कर लपेटते हुए चुप्पे लगाने लगी और उसमें से चिकना ज़ायेकेदार रस मुसलसल मेरी ज़ुबान पे रिस रहा था।


फिर मैंने उसके लंड की नोक को चूमते हुए उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और मस्ती में अंदर-बाहर करते हुए उसे चूसने लगी। मुझे बेहद मज़ा आ रहा था और ऑस्कर भी रिरियाने लगा और झटके मारने लगा लेकिन सलमा आँटी ने उसे पकड़ रखा था और उसे पुचकार भी रही थीं। मैं अपने हलक तक उसका लंड ले-ले कर चूसते हुए उसके  चिकने रस का मज़ा ले रही थी और अब उसकी मनि के इखराज़ होने की मुंतज़िर थी। थोड़ी ही देर में ऑस्कर का रिरियाना तेज़ हो गया और उसका लंड मेरे मुँह में और भी फूल गया। मेरे होठों के बाहर उसके लंड की जड़ गेंद की तरह फूल गयी और अचानक मेरा मुँह उसकी गाढ़ी चिपचिपी मनि से भर गया। मैं उसकी बेशकीमती मनि गटक-गटक कर पीते हुए अपने मुँह में जगह बना रही थी और ऑस्कर फिर मेरा मुँह भर देता था। कुत्ते के लंड और टट्टों में से उसकी मनी चूस-चूस कर पीते हुए मैं बेहद मस्ती और मदहोशी के आलम में थी। ऑस्कर के लंड की मनि मेरे होंठों के किनारों से बाहर बहने लगी लेकिन मैंने उसके लंड को अपने मुँह में चूसना ज़ारी रखा। मनि का आखिरी कतरा इखराज़ होने के बाद भी मैं उसके लंड को कुछ देर तक चूसती रही।


आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है


जब मैंने ऑस्कर का लंड अपने मुँह से रिहा किया तो अचानक सलमा आँटी ने मेरे होंठों पे अपने होंठ रख दिये और मेरे मुँह में जीभ डालकर अपने कुत्ते की मनि का ज़ायका लेने लगीं। मैं तो पहले ही बेहद गरम थी और सलमा आँटी से कस कर चिपक गयी और हम दोनों किसिंग करते हुए फिर से आपस में गुथमगुथा होकर एक-दूसरे को सहलाने लगीं। करीब पाँच मिनट तक हमारी ज़बरदस्त स्मूचिंग ज़ारी रही। फिर मैं आँटी से बोली, “मज़ा आ गया आँटी ऑस्कर का लंड चूस कर… लेकिन आपने पहले कभी इस बात का ज़िक्र क्यों नहीं किया….  मुझे इतने दिन इस नायाब तजुर्बे से महरूम रखा आपने?”


आँटी मुस्कुराते हुए बोलीं, “इस तरह के मामलों में काफी एहतियात बरतनी पड़ती है… और सिर्फ़ तुम ही हो जिसे मैंने अपने इस हसीन राज़ में शरीक़ किया है… लेकिन अभी तुमने असली मज़ा लिया ही कहाँ है… ऑस्कर का लंड चूत में नहीं लोगी क्या?


“लूँगी क्यों नहीं… मेरी चूत तो बेकरार है ऑस्कर के लंड से चुदने के लिये… लेकिन ऑस्कर तो जस्ट अभी-अभी फारिग हुआ है…!” मैं तड़पते हुए बोली। ऑस्कर बिस्तर से उतरकर नीचे बेड के करीब खड़ा हमारी तरफ़ देखते हुए पूँछ हिला रहा था। आँटी बोलीं, “अरे खूब स्टैमिना है मेरे ऑस्कर में… लगातार चार-पाँच दफ़ा फारिग होकर चुदाई करने की ताकत है इसके अमेज़िंग लंड में।“ मैंने आँटी से कहा कि पहले मैं जल्दी से पेशाब कर के आती हूँ और उठ कर अटैच्ड बाथरूम में चली गयी। नशे की खुमारी की वजह से हाई पेन्सिल हील की सैंडल में चलते हुए मेरे कदम ज़रा लड़खड़ा रहे थे। जब मैं पेशाब करके वापस आयी तो सलमा आँटी ऑस्कर का लाल लंड सहला रही थीं जो फूल कर चोदने के लिये तैयार था। आँटी बोलीं, “चलो घुटने मोड़ कर कुत्तिया की तरह झुक कर अपनी ज़िंदगी की सबसे थ्रिलिंग चुदाई के लिये तैयार हो जाओ!” मैं फौरन बेड पे कुत्तिया की तरह झुक गयी। “गुड…. लेकिन अपनी टाँगें थोड़ी चौड़ी फैलाओ… थोड़ी सी और चौड़ी…!” आँटी बोलीं तो मैंने अपनी टाँगें चौड़ी फैला दीं और अपना चेहरा तकिये पे टिका लिया। ऑस्कर से चुदने की बेकरारी में मेरे पूरे जिस्म में मस्ती भरी लहरें दौड़ रही थीं और मेरी चूत में तो जैसे शोले दहक रहे थे।


अपनी गाँड ऊँची उठाये और थरथराती रानें चौड़ी फैलाये हुए मैंने तकिये पे गाल टिका कर अपनी गर्दन मोड़ कर पीछे देखा तो ऑस्कर अपना जबड़ा खोले खड़ा था और उसके कान सीधे खड़े थे। उसकी पिंक ज़ुबान बाहर लटकी हुई थी। सलमा आँटी ने मेरे चूतड़ों को सहलाते हुए उन्हें फैलाया और भर्रायी आवाज़ में अपने कुत्ते से बोलीं, “ऑस्कर बेबी! देखो कितनी हसीन गाँड है…!” और फिर खुद ही मेरी गाँड के छेद पर अपनी ज़ुबान फिराने लगीं। मेरे पूरे जिस्म में सनसनी फैल गयी और मैं सिसकने लगी। ऑस्कर भी मेरे सैंडल और पैर चाटने लगा और फिर मेरी रानों पे अपनी ज़ुबान फिराने लगा और अचानक भोंकते हुए रिरियाया तो सलमा आँटी हंसते हुए बोली, “ओके बाबा… ले तू चाट ले… तेरी बारी… गो अहेड!” मुझे अपने चूतड़ों पे ऑस्कर की गरम साँसें महसूस हुईं और फिर उसकी लंबी ज़ुबान मेरे चूतड़ों की दरार के बीच में घुस कर चाटने लगी। सलमा आँटी ने मेरे चूतड़ पकड़ कर चौड़े फैलाये हुए थे। ऑस्कर की गरम भीगी ज़ुबान मेरी गाँड से चूत और फिर क्लिट तक ज़ोर-ज़ोर से चाटने लगी। मुझसे इतनी मस्ती बर्दाश्त नहीं हो रही थी। मैंने सिसकते हुए आँटी से कहा, “ऊँऊँहहह प्लीज़ आँटी… अब जल्दी से इसके लंड से चुदवा दो ना… आँआँहह… नहीं तो मैं फिर ऐसे ही झड़ जाऊँगी।“


फिर मुझे अपने चूतड़ों पे ऑस्कर का भारी जिस्म महसूस हुआ और उसके अगले पैर मेरी कमर को जकड़े हुए थे और वो अपनी पिछली टाँगों पर खड़ा था। या अल्लाह! अब वो जानवार मुझे अपनी कुत्तिया बना कर चोदने के लिये मेरे ऊपर सवार हो रहा था और…  और सलमा आँटी भी उसे उकसा रही थीं। “वेरी गुड ऑस्कर डार्लिंग…! वैसे ही मज़े से चोदना जैसे तू मुझे चोदता है…!” आँटी ऑस्कर से कह रही थीं और फिर मुझसे मुखातिब होकर बोलीं, “तुम भी घबराना नहीं डियर! बेइंतेहा मज़ा आयेगा तुम्हें!” फिर मुझे अपनी गरम चूत पे ऑस्कर के लंड की ठोकर महसूस हुई तो मस्ती में मेरे मुँह से ज़ोर से सिसकी निकल गयी। फिर मुझे उसके ताकतवर मज़बूत जिस्म का धक्का अपने चूतड़ों पे महसूस हुआ और उसका हड्डी वाले लंड ने मेरी चूत पे जोर से ठोकरें मारी। मेरी सुलगती चूत में अपना फड़कता हुआ गाजर जैसा लाल मोटा लंड घुसाने की कोशीश करते हुए बेकरारी से वो ज़ोर से रिरियाया और मेरे चूतड़ों पर झटके मारते हुए उसने मेरी कमर पे अपनी अगली टाँगें और ज्यादा ज़ोर से कस दीं। मैं भी उसका लंड लेने की बेकरारी में अपनी गाँड गोल-गोल घुमाने लगी। मेरी साँसें भी ज़ोर से चल रही थीं और दिल भी खूब ज़ोर से धड़क रहा था। ऑस्कर के लंड से चुदने की तड़प अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही थी।


मेरी हालत देख कर सलमा आँटी बोलीं, “उसकी हेल्प करो! गो ऑन… उसका लंड पकड़ के अपनी चूत में डालो…!” मेरे मुँह से मुसलसल हल्की-हल्की ‘ऊँह ऊँह’ निकल रही थी। मैंने एक हाथ पीछे अपनी रानों के दरमियान ले जा कर ऑस्कर का सख्त चिकना लंड पकड़ कर अपनी चूत पे दबाते हुए उसे अंदर का रास्ता दिखाया। खुद-ब-खुद ऑस्कर ने फ़ितरती तौर पे आगे धक्का मारा और उसका लंड ज़ोर से मेरी तड़पती मेरी भीगी चूत को बेहद चौड़ा फैला कर बड़ी बेरहमी से चीरते हुए अंदर गहरायी तक घुस गया। “ऊँह ऊँह ऊँह ऊऊऊहहह अल्लाहहह!” ऑस्कर के मुसलसल झटकों से उसका लंड अपनी चूत में ठंसाठंस भरा हुआ महसूस करके मैं मस्ती में सिसकने लगी। उसका फूला हुआ लाल लंड पुरा का पूरा मेरी फैली हुई चूत में घुस कर बुरी तरह से चोद रहा था। मनि से लबालब भरे हुए टट्टे ज़ोर-ज़ोर से झूलते हुए मेरी चूत पर थपेड़े मार रहे थे। ऑस्कर का लंड मेरी चूत में ज़ोर-ज़ोर से चोदते हुए और ज्यादा फूलता जा रहा था और मेरी चूत की दीवारों को फैलाते हुए खूब प्रेशर डाल रहा था। “ओह… ओंह… ओह मेरे खुदा… आँह.. ओंह…!” मेरे हलक़ से ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ निकल कर मेरे आधे खुले होंठों से छूट रही थीं और मैं आँखें फाड़े साईड में ड्रेसिंग टेबल के आइने में ऑस्कर को पीछे से अपनी चूत में ज़ोर-ज़ोर से चोदते हुए देख रही थी।


ऑस्कर के ज़ोरदार धक्कों से सिर तकिये पे ज़ोर-ज़ोर से रगड़ रहा था। मैं भी अपनी गाँड पीछे ठेल-ठेल कर ऑस्कर के बेरहम धक्कों का जवाब देने लगी। मैं अपनी दहकती चूत में ऑस्कर के लंड की बेरहम चुदाई से मैं इतनी मस्त और मदहोश हो गयी थी कि उस वक़्त मुझे सलमा आँटी की मौजूदगी का एहसास भी नहीं था। इस दरमियान मैं दो दफ़ा चींखते हुए बेहद ज़बर्दस्त तरीके से झड़ी लेकिन ऑस्कर ने पुर-जोश चोदना ज़ारी रखा। मेरी साँसें तेज़-तेज़ चल रही थीं और मेरी कराहें और मस्ती भरी चींखें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। ऑस्कर का लंड शुरू से मेरी चूत में गरम-गरम रस मुसलसल छोड़ रहा था जिससे मेरी चूत की आग और ज्यादा भड़क रही थी। फिर मैंने महसूस किया कि कुछ देर से ऑस्कर के लंड की जड़ की फूली हुई गाँठ बहुत ज़ोर से मेरी चूत पे टकरा रही है और ऑस्कर ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारते हुए उसे मेरी चूत में ठूँसने के लिये बड़ी शिद्दत से कोशिश कर रहा था। ऑस्कर के लंड की टेनिस बॉल जैसी गाँठ अपनी चूत में लेने के ख्याल से मेरे जिस्म में मस्ती की लहरें सनसनाने लगीं। आँटी ने भी ज़िक्र किया था कि कुत्ते के लंड की गाँठ चूत में लेने में बेहद मज़ा आता है। कुछ ज़बरदस्त धक्के मारने के बाद आखिरकार ऑस्कर कि कोशिश कामयाब हुई और मेरी चूत की दीवारें उसकी फूली गाँठ को अंदर लेने के लिये फैल गयीं। “आआआईईईई अल्लाहहह…. मेरी चूत… आँटीईईई…. ऊँऊँईईईई”, मैं दर्द ओर मस्ती में बड़ी ज़ोर से चींखी। आँटी प्यार से मेरी कमर और चूतड़ सहलाने लगीं।


अपने लंड का सबसे मोटा हिस्सा मेरी चूत में ठूँस कर फंसाने के बाद ऑस्कर नये जोश के साथ चोदने लगा। उसकी गेंद जैसी गाँठ ने मेरी चूत को बेहद चौड़ा फैला रखा था और मेरी चूत भी उसके ऊपर कसके जकड़ी हुई थी। अब चोदते हुए उसका लंड मेरी चूत से बाहर नहीं आ रहा था और अंदर फंसा हुआ ही फूल-फूल के चूत में धड़कते और कूदते हुए चुदाई कर रहा था। ये चुदाई ट्रडिश्‍नल चुदाई से अलग थी लेकिन बेहद ज़बरदस्त और निहायत मज़ेदार थी। करीब पंद्रह मिनट ऑस्कर मुझे इसी तरह चोदते हुए मेरी चूत में लगातार मनि छोड़ता रहा और मैं लगातार ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थी, सुबक रही थी, सिसक रही थी और जब मेरी चूत पानी छोड़ती तो ज़ोर-ज़ोर से चींख भी रही थी। मेरी चूत तो बार-बार झड़-झड़ के निहाल हो गयी थी। ये मेरी ज़िंदगी की सबसे निहायत और बेहतरीन चुदाई थी।


ऑस्कर के झटके अचानक पहले से तेज़ हो गये। हालाँकि उसकी मनी शुरू से ही मेरी चूत में इखराज़ हो रही थी लेकिन ऑस्कर एक तरह से अब झड़ने वाला था। मेरी चूत उसका लंड और उसकी गाँठ बे-इंतेहा फूल गये और फिर अचानक ऑस्कर ने हिलना बंद कर दिया। उसका लंड बेहद ज़ोर से मेरी चूत में फड़कने लगा और मुझे उसकी मनी का इखराज़ भी पहले से ज्यादा तेज़ होता हुआ महसूस हुआ और मेरी चूत ने भी एक दफ़ा फिर से पानी छोड़ दिया। ऑस्कर ढीला होकर दो-तीन मिनट मेरी कमर पे ही रहा और फिर आँटी ने उसे मेरी कमर से उतारा तो भी उसके लंड की गाँठ मेरी चूत में ही फंसी थी। आँटी ने मेरी तसल्ली की कि ये नॉर्मल है और पाँच दस मिनट में ऑस्कर के लंड की गाँठ सिकुड़ने के बाद उसका लंड मेरी चूत में से आज़ाद हो जायेगा। वैसे मुझे भी ऑस्कर से कुत्तिया की तरह चिपके हुए मज़ा ही आ रहा था। उसके लंड और फूली हुई गाँठ की लरज़िश और प्रेशर मुझे अपनी चूत में बेहद अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर बाद ऑस्कर का लंड सिकुड़ मेरी चूत से रिहा हो गया और मैं और आँटी एक-दूसरे के आगोश में चिपक कर सो गये।


उस दिन के बाद तो मैं ऑस्कर की दीवानी हो गयी और रोज़-रोज़ शाम को आँटी के घर जाकर ऑस्कर से चुदवाती हूँ। एस-के और अनिल के साथ भी पहले की तरह ही चुदाई का खूब मज़ा लेती ही हूँ लेकिन ऑस्कर से चुदवाये बगैर मुझे चैन नहीं आता। मैंने तो अब खुद ऑस्कर जैसा बड़ी नस्ल वाला कुत्ता पालने का फैसला कर लिया है और अशफ़ाक को भी इसके लिये राज़ी कर लिया है। इसके अलावा मुझे इस बात का भी शक़ है कि मेरे और एस-के के रिलेशन के ज़ानिबअशफाक को शायद पता चल चुका है पर वो खामोश है। अशफाक हमें एक दूसरे के साथ रहने का ज़्यादा से ज़्यादा मौका देता रहता है। बेचारा कर भी क्या सकता है। उसको तो बस आग लगाना ही आता है जिसे बुझाने के लिये मुझे एस-के,अनिल और ऑस्कर के लंड की ज़रूरत पडती है। एस-के न्यू-यॉर्क के ट्रेवलिंग प्लैन में लगा हुआ है। मेरा पासपोर्ट भी आने वाला है और दो महीने के बाद मैं एस-के के साथ एक महीने के लिये न्यू-यॉर्क चली जाऊँगी। उधर अनिल ने एक बड़े फैशन-शो में उसके कपड़ों के लिये मुझे मॉडलिंग करने की ऑफर दी है। मैंने जब अशफ़ाक़ से इस बारे में बात की तो इसके लिये भी खुशी-खुशी रज़ामंद हो गया। फैशन शो अगले ही महीने है और आजकल रिहर्सल और तैयारी के बहाने मैं अनिल से भी हर रोज़ चुदवाने जाती हूँ।


!! समाप्त !!!


The post मेरी चूत के लिप्स-7 appeared first on Mastaram: Hindi Sex Kahani.




मेरी चूत के लिप्स-7

No comments:

Post a Comment

Facebook Comment

Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks