All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

लंड को पहली बार मिली चूत-7


दोस्तों अभी तक अपने लंड को पहली बार मिली चूत-6 में जो पढ़ा अब उसके आगे लिख रहा हु : विनय: ष्हिईीईईईईईई अहह हाां मौसी……ममता: क्या कहा मज़ा आ रहा है……कितना…..?विनय: बहुत ज़्यादा मज़ा आ रहा है…..उफफफ्फ़…….ममता: फिर करती रहूं….या छोड़ दूं……विनय: उफफफ्फ़ अहह हाईए मासी जी करते रहिए….आह ओह्ह्ह्ह मासी मेरा पेशाब निकलने वाला है….पीछे हट जाओ……अहह…….ममता: (ये सुन कर ममता की आँखे ख़ुसी से चमक उठी……विनय अब किसी भी पल झड सकता था… उसने विनय के लंड को और तेज़ी से सहलाना शुरू कर दिया……) हाआँ कर दे कुछ नही होता….मैं पीछे हट जाउन्गी…..विनय: अह्ह्ह्ह ओह मस्सी उफफफफफ्फ़ अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उंघह उंघह विनय की कमर तेज झटके खाने लगी…..और ममता की मुट्ठी में पकड़ा हुआ लंड भी. और साथ ही उसके लंड से तेज वीर्य के बोछार होने लगी….जो सीधा जाकर ममता के फेस और उसकी कमीज़ के ऊपेर खुले हुए गले से बाहर झाँकती चुचियों पर भी……विनय को ऐसा लग रहा था कि, जैसे दुनिया का सारा मज़ा उसके लंड से होकर बाहर निकल रहा है….मदहोशी के आलम में उसकी आँखे मुन्दती चली गयी…..इतना मज़ा इतना लुफ्त आज तक कभी नही मिला था….उसका पूरा बदन कांप रहा था…..बदन मानो जैसे सुन्न पड़ गया हो….

ममता भी फटी हुई आँखो से उसके लंड से निकल रही वीर्य की लंबी-2 पिचकारियों को देख रही थी……उसे यकीन नही हो रहा था कि, इस उम्र में ही उसके लंड से इतना पानी निकल रहा है….ममता का पति सेक्स के बाद जब भी झड़ता था तो, वो अपना लंड चूत से बाहर निकाल कर अपना पानी ममता के होंटो को गिराता था…..जिसे ममता भी पसंद करती थी….दूसरी वजह ये थी कि, अभी कॉन सा दोनो को 3-4 साल बच्चा करना था…

विनय झड कर शांत हो चुका था…..और अपनी सांसो पर काबू पाने की कॉसिश कर रहा था. जब उसने आँखे खोल कर ममता की तरफ देखा, तो उसके चेहरे को अपने लंड से निकले पानी से पूरी तरह से सना हुआ पाया……ये पेशाब तो नही था….फिर ये है क्या …..जिग्याशा वश उसने अपनी एक उंगली को ममता के गाल पर गिरे हुए वीर्य पर लगा कर देखा तो, वो चीज़ एक दम चिकनी और गाढ़ी थी…..ममता उसकी ये हरक़त देखते हुए मुस्कुरा रही थी…..उसने पहले तो गोर से अपने वीर्य को देखा और फिर ममता की तरफ…..

जो उसकी तरफ देख कर वासना भरी मुस्कान के साथ मुस्करा रही थी…..”सॉरी मासी वो मेने पहले ही कहा था कि, मेरा पेशाब निकलने वाला है…..पर आप पीछे नही हटी…पर ये है क्या…..”

ममता: वो सब मैं बाद में बता दूँगी…..पहले ये बता तुझे कैसे लगा…..?

विनय: (सर को झुका कर शरमाते हुए) बहुत अच्छा लगा……

ममता ने बाल्टी से एक मग पानी लिया……और विनय के लंड पर पानी डाल कर उसके लंड को अच्छे से सॉफ करने लगी…… “इससे भी ज़्यादा मज़ा लेना है……?” ममता ने उसके लंड को सॉफ करते हुए कहा….तो विनय ने हां में सर हिला दिया…..”

ममता: ठीक है……पर मेरी एक बार याद रखना….ये बात किसी को पता नही चलनी चाहिए. नही तो आज के बाद मैं तुम्हे कभी बुलाउन्गी भी नही……

विनय: नही नही मैं नही बताउन्गा किसी को……

ममता: अच्छा तू अभी मेरे रूम में जा…..मैं थोड़ी देर में आती हूँ…..mastaram (23)विनय ने अपना शॉर्ट्स ऊपेर किया और जाकर ममता के रूम में बैठ गया…..उसके दिमाग़ में उत्सुकता थी…..अंजानी उत्सुकता….ढेरो अरमान पता नही अब ममता मासी उसे क्या सिखाने वाली है….इससे भी ज़्यादा मज़ा पर कैसे…..दूसरी तरफ ममता ने अपना फेस और बूब्स पर लगे वीर्य को अच्छे से धोया और बाथरूम से बाहर आकर जैसे ही अपने रूम में जाने लगी तो, बाहर मेन डोर की बेल बजी….

ममता गेट के तरफ चली गयी…….जब जाकर गेट खोला तो देखा सामने शीतल खड़ी थी…. शीतल ने अंदर आते हुए कहा…” ममता वो विनय को बुला ला…..वो हम सब मार्केट जा रहे है…..शॉपिंग करने तो, सोचा कि कुछ नये कपड़े विनय को भी दिलवा दूं…..” ममता को ये सुन कर बहुत बुरा लगा…..पर बेचारी कर भी क्या सकती थी….उसने वही खड़े-2 विनय को आवाज़ लगा कर कहा कि, शीतल मासी बुला रही है, तो विनय उनके साथ चला गया….


ममता को बहुत गुस्सा आ रहा था…..ये सोच कर कि, जब भी बात बनने लगती है….तो ये शीतल बीच में आकर टाँग अड़ा लेती है…..पर फिर मन मार कर, ममता अपने रूम में और बेड पर लेट कर सो गयी……शाम के 6 बजे उठी….अभी तक विनय वापिस नही आया था…..खैर उसने रात के खाने की तैयारी शुरू कर दी…..करीब 8 बजे शीतल विनय को वापिस छोड़ कर चली गयी….विनय अपने लिए लाए हुए नये जीन्स और टीशर्ट दिखाने के लिए ममता के पास गया.

विनय: (अपने नये ड्रेस दिखाते हुए) ये देखो मासी शीतल मासी ने मुझे नई पेंट टीशर्ट लेकर दी है……

ममता: (बिना उसके कपड़ों की तरफ देखते हुए) अच्छी है….अब जा यहाँ से मुझे मेरा काम करने दे…..

विनय को बड़ा अजीब सा लगा…..पर उसने कुछ कहना सही नही समझा और वो अपने रूम में आ गया…..रात को करीब 9 बजे उसके मामा अजय भी वापिस आ गये…..विनय उस समय, उनके रूम में टीवी देख रहा था…..अजय ने विनय को चॉक्लेट निकाल कर देते हुए कहा….” अर्रे क्या बात है विनय बाबू आज सोए नही…..”

विनय: नींद नही आ रही थी….अभी ममता मासी खाना बना रही है…..

अजय: अच्छा पर बेटा जल्दी सो जाया करो…..

विनय: अभी तो 9 बजे है …..इतनी जल्दी सो कर क्या करना है…कॉन सा स्कूल जाना है अभी….

अजय: ओह्ह हां मैं तो भूल ही गया था कि, तुम्हारी वाकेशन्स चल रही है….अच्छा तुम टीवी देखो मैं ज़रा कपड़े चेंज करके हाथ मूह धो लेता हूँ….फिर साथ में खाना खाते है…..

विनय: ओके मामा जी……

उसके बाद तीनो ने एक साथ डिन्नर किया, और अपने अपने रूम्स में सोने के लिए चले गये… ममता का दिल तो कर रहा था कि, वो विनय के रूम में चली जाए….या फिर उसे अपने पास बुला ले…..पर अपने जीजा की माजूदगी में वो कोई रिस्क नही लेना चाहती थी…..सोचा कॉन सा अभी दीदी कुछ दिन और आने वाली है…..कोई ना कोई मोका तो मिल ही जाएगा….


ममता ने चिंगारी सुलगा दी थी….वो अब इंतजार में थी कि, कब वो चिंगारी आग में बदले और खुद विनय उसके पास आए, और उससे कुछ कहे…..क्योंकि जिस उम्र में विनय उस वक़्त था…..वो उम्र ऐसी होती है कि, अल्हड़ पन में बच्चा कुछ भी किसी के भी सामने बक सकता है…अगली सुबह भी अजय ने ममता को जल्दी उठा दिया…..ममता ने अजय का नाश्ता और लंच तैयार करके दिया….अभी विनय सो रहा था…..जब उसका मामा नाश्ता करके चला गया….ममता ने टाइम देखा तो 7 बज रहे थे….वो अपने रूम में फिर से आकर सो गयी…….फिर 9 बजे उठी, तो देखा कि विनय अभी भी अपने रूम में सो रहा था….उसने जाकर विनय को जगाया और खुद किचन में जाकर नाश्ता तैयार करने लगी…..विनय भी नहा धो कर बाहर हाल में डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ गया……तभी बाहर डोर बेल बजी……

ममता: (किचिन से विनय को आवाज़ लगा कर कहते हुए) विनय जाकर देखो तो कॉन है….?

विनय: जी मासी……

विनय उठ कर बाहर गया तो, देखा बाहर उसकी मासी शीतल खड़ी थी…..उसने अंदर आकर विनय को प्यार दिया…..और बोली, “नाश्ता कर लिया बेटा…..”

विनय: अभी नही मासी बना रही है……

शीतल: क्या अभी तैयार कर रही है….इतना टाइम हो गया….अभी तक मेरे बच्चे को उसने नाश्ता भी नही करवाया……चल आ मेरे साथ……

शीतल अंदर आ गयी….और किचन में चली गयी….”अर्रे दीदी आप नमस्ते…..”

शीतल: नमस्ते क्या बात है ममता आज इतनी लेट कैसे हो गया तुमको…..देर से उठी थी क्या…

ममता: हां दीदी वो जीजा जी ने सुबह 5 बजे उठा दिया था….पहले सुबह उनका नाश्ता दिया और फिर दोपहर का लंच भी बना कर साथ में दिया तो, उसके बाद फिर से सो गयी…..इसलिए बाद मे लेट उठी थी…..

शीतल: ओह्ह्ह अच्छा……चल तू नाश्ता बना मैं चलती हूँ…..

ममता: अर्रे दीदी बैठिए तो सही……मैं नाश्ता बना रही हूँ नाश्ता करके जाना….

शीतल: नही नही मैं तो अभी करके आई हूँ…..वो कल रात किरण से फोन पर बात हुई थी. परसो आ रही है……

ममता: जी……

उसके बाद शीतल अपने घर वापिस चली गयी…..शीतल के जाने के बाद उसने नाश्ता डाइनिंग टेबल पर लगाया और फिर विनय और ममता दोनो ने एक साथ नाश्ता किया….आज ममता चुप थी. वो देखना चाहती थी कि, क्या विनय उस दिन की घटना के बाद खुद कोई हरक़त करता है या नही…आज तो ममता की किस्मत भी उसका पूरा साथ दे रही थी…..घर का सारा काम निपटाने के बाद, वो अपनी बेहन किरण के रूम मे गयी…..जहाँ पर विनय अकेला बैठा टीवी देख रहा था……ममता ने उस समय बहुत ही डीप नेक कमीज़ पहनी हुई थी……..जो गले से काफ़ी खुली हुई थी…..

विनय बेड के किनारे पर लेटा हुआ टीवी देख रहा था…..ममता ने रूम के अंदर आकर बेड के साथ अपनी पीठ टिकाते हुए, नीचे चटाई पर बैठ गयी…..”क्या देख रहे हो विनय….” ममता ने विनय का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए उससे बात शुरू की….वो भी सामने टीवी पर ही देख रही थी……”कुछ खास नही आ रहा…..” विनय ने जब नीचे बैठी ममता की तरफ देखा तो उसका मूह खुला का खुला रह गया….ममता की चुचियाँ आधे से ज़यादा उसकी कमीज़ के गले से बाहर आ रही थी…..”लाओ रिमोट मुझे दो….” उसने बिना पीछे देखे अपना हाथ बढ़ाया. तो विनय ने उसे रिमोट दे दिया……


ममता चॅनेल चेंज करने लगी……पर अब विनय का पूरा ध्यान ममत की गोरे रंग की गुदाज मोटी चुचियों पर था……उन्हे देखते ही उसके लंड में तेज सरसाहट होने लगी….ममता कुछ देर बैठी, और फिर अपने रूम में चली गयी….वो देखना चाहती थी कि, क्या विनय उसके पीछे उसके रूम में आता है या नही…


.उस दिन ममता मासी ने उसके लंड को कितने प्यार से हिलाया था……सच में कितना मज़ा आया था…..उस दिन ममता मासी ने कहा था कि, वो उसे और मज़ा देंगी….

ये सोचते ही उसके बदन में अजीब सी झुरजूरी दौड़ गयी……वो डरते हुए पर दिल के हाथो मजबूर होकर उठा और ममता के रूम में चला गया….

ममता अपने रूम में बेड पर लेटी हुई अपनी बुक पढ़ रही थी….जब उसने विनय को अपने रूम में आते देखा तो, उसके होंटो पर तीखी मुस्कान फेल गयी…..”क्या हुआ कुछ चाहिए…..?” विनय ने ना में सर हिला दिया…..

विनय: वो मैं अकेला बोर हो रहा था……आज पिंकी और अभी भी नही आए…..

ममता: ह्म्‍म्म्म चल आ ही गया है तो इधर ही बैठ जा…..

विनय ममता के पास जाकर बेड पर बैठ गया…..ममता इंतजार कर रही थी कि, विनय कुछ कहे या कोई हरक़त करे, पर विनय तो चोर नज़रो से बीच-2 में ममता की कमीज़ में कसी हुई चुचियों को देख कर मन बहला रहा था…..जब ममता को लगा कि, इस भौंदू से उम्मीद रखने का कोई फ़ायदा नही है तो, उसने खुद ही बात को आगे बढ़ाया….उसने किताब बंद करके एक साइड में रख दी… ममता: विनय उस दिन तुम्हे मज़ा आया था ना……?

विनय: जी…….

ममता: पहले कभी किसी लड़की ने तुम्हे वहाँ टच किया है…..?

विनय: (चोंक कर ममता की ओर देखते हुए) नही……

ममता: अच्छा ये बता मैं तुम्हे कैसी लगती हूँ…..?

विनय: जी बहुत अच्छी…..

ममता: और……

विनय: और क्या….

ममता: मेरा मतलब मैं देखने में कैसे लगती हूँ…..

विनय: बहुत सुंदर……

ममता: मुझमे सबसे सुंदर क्या लगता है तुम्हे….घबरा नही….देख आज तक मेने कभी तेरी किसी भी बात की शिकायत की है….

विनय: (ना में सर हिलाते हुए) आप बुरा तो नही मनोगे…..

ममता: नही बता भी ना…..

विनय: (ममता की चुचियों की तरफ इशारा करते हुए…..) ये आपके दूध…..

ममता: हहा हा क्या कहा तुमने दूध मेरे भौंदू राम इन्हे दूध नही चुचियाँ कहते है….क्या कहते है…(ममता ने विनय की तरफ वासना भरी नज़रो से देखते हुए कहा….)

विनय: (कांपती हुई आवाज़ मे…..) चुचियाँ…….

ममता: तुम्हे इन्हे छूना अच्छा लगता है ना…..?

विनय: (हां में सर हिलाते हुए) जी…..

ममता: अभी भी छूने का मन है ना……

विनय चोंक कर ममता की तरफ देखने लगा….

ममता: अभी छूना चाहता है……?

विनय: (लड़खड़ाती हुई आवाज़ मे) हां….

ममता की आँखो में वासना के गुलाबी डोरे तैर रहे थे……7 महीने हो चुके थे….उसे अपने पति से चुदे हुए, अभी -2 तो उसे लंड का स्वाद अच्छा लगने लगा था कि, शादी के 1 महीने बाद ही उसका पति अब्रॉड चला गया था……..ममता कुछ सोच कर बोली…..

ममता: बाहर गेट लॉक है ना….?

विनय: हां…..

ममता: जा एक बार फिर से चेक करके आ……

विनय बेड से उठा और जैसे ही वो ममता के रूम से बाहर निकला तो वो तेज़ी से गेट की तरफ भागा…अभी वो गेट के पास पहुचा ही था कि, डोर बेल बज उठी…अंदर बैठी ममता ने भी डोर बेल सुनी तो, वो एक दम झुंझला सी गयी…..उसने घड़ी में टाइम देखा तो, अभी सिर्फ़ 10 बज रहे थे…..”अब इस वक़्त कॉन कम्बख़्त आ मरा……” ममता एक दम से खीजते हुए उठी और रूम से बाहर आई, जब वो रूम से बाहर आई तो, देखा कि विनय हाथ मे एक बड़ा सा बर्तन उठाए हुए, गेट की तरफ जा रहा था….

ममता: कॉन है विनय….और तू ये पतीला कहाँ लिए जा रहा है…..

विनय: वो मासी जी दूध वाला है…..

ममता: ओह्ह्ह जा जल्दी से दूध डलवा ला….

विनय बाहर गया तो, ममता भी गेट पर चली गयी…..थोड़ी देर बाद विनय भी दूध लेकर घर के अंदर आ गया…..”जा किचन में रख दे…..मैं गरम कर देती हूँ…कही खराब ही ना हो जाए…..” ममता ने गेट के कुण्डी लगाते हुए कहा…..ममता ने सोचा कि वो तो भूल ही गयी थी कि, इस वक़्त दूध वाला दूध देने आता है….ममता ने गेट लॉक किया और वही खड़े होकर मन ही मन दुआ करने लगी कि, अब कम से कम 2-3 घंटो तक कोई और ना आए…….


गेट लॉक करने के बाद ममता किचन मे गयी…..और दूध गरम करने लगी….विनय भी वही खड़ा था…..”तू क्यों यहाँ गरमी मे तप रहा है….जाकर बाहर बैठ……मैं दूध गरम करके आती हूँ…..” ममता ने दूध गरम किया, फिर किचन से बाहर निकल कर किचन का डोर बंद किया और अपने दुपट्टे से पसीना पोंछते हुए अपने रूम मे जाने की बजाए किरण के रूम में चली गयी……

क्योंकि पूरे घर में किरण के रूम में ही एक विंडो एसी था…..उसने वहाँ जाकर एसी ऑन किया और अपना पसीना सुखाने लगी…..विनय वही बाहर बैठा था……जाते हुए उसे मासी ने क्यों अपने साथ जाने के लिए नही कहा…ये सोच -2 कर वो परेशान हो रहा था….करीब 10 मिनिट बाद किरण के रूम से ममता की आवाज़ आई…..”विनय इधर आओ…..” विनय उठ कर किरण के रूम की तरफ चल पड़ा….जैसे ही वो रूम मे पहुँचा तो देखा ममता बेड पर पीठ के बल लेटी हुई थी…..उसने अपना दुपट्टा उतार कर टेबल पर रखा हुआ था….उसकी मोटी-2 चुचियाँ उसकी कमीज़ में कसी हुई, ऊपेर नीचे हो रही थी… ममता बेड पर लेटे हुए डोर पर खड़े विनय को देख कर मुस्कुराइ, और कामुकता भरी आवाज़ में उसे अंदर आने को कहा….”विनय अंदर आ जाओ…..” जैसे ही विनय अंदर की तरफ बढ़ा. “विनय डोर बंद कर दो एसी चल रहा है….” डोर को बंद करना है, ये सुनते ही विनय के लंड में कुछ हलचल सी होने लगी…..एक अंजान उत्सुकता उसके दिल को घेरने लगी….उसने मूड कर डोर बंद किया तो, ममता ने एक और ऑर्डर उसे दे डाला…..”विनय ये लाइट भी बंद कर दो. आँखो में चुभ रही है…..

विनय ने लाइट बंद की, और धीरे-2 बेड की तरफ बढ़ा….ममता के पास जाते हुए उसका दिल जोरो से धड़क रहा था….वो पास पहुँच कर बेड के किनारे बैठ गया…ममता पीठ के बल लेटी हुई थी….जब विनय बेड के किनारे पर बैठा तो, ममता ने उसकी तरफ करवट बदलते हुए, उसका हाथ पकड़ कर बहुत ही लरजता से कहा…..”लेट जाओ ना….ऐसे बैठे-2 थक जाओगे…..” विनय ने ममता की बात सुनी और फिर पैरो में पहनी हुई चप्पल उतार कर बेड पर पीठ के बल लेट गया…..”

मेरी तरफ फेस करके लेटो….” ममता ने उसे कंधे से पकड़ कर अपनी तरफ घूमाते हुए कहा, तो विनय खुद ही करवट लेते हुए उसकी तरफ घूम गया….

पूरे घर मे एक दम सन्नाटा छाया हुआ था…..कहाँ तो कुछ दिन पहले तक इस समय सभी बच्चे मिल कर हुड़दंग मचाया करते थे…..पर आज वही हुड़दंग विनय के मन में मचा हुआ था….आगे क्या नया होने वाला है, ये सोच-2 कर ही विनय का बुरा हाल हो रहा था….दोनो एक दूसरे की तरफ फेस किए हुए लेटे हुए थे….ममता ने विनय का हाथ पकड़ा और अपने राइट मम्मे पर रखते हुए धीरे से मस्ती भरी आवाज़ मे फुसफुसा कर कहा….”तुम्हे इन्हे छूना अच्छा लगता है ना…..?”

ममता ने उसके हाथ को अपनी चुचि पर दबाना शुरू कर दिया….विनय ने अपने गले का थूक निगलते हुए हाँ में सर हिला दिया….”फिर दबाओ ना…..जैसे उस रात को दबा रहे थे….” विनय सवालिया नज़रों से ममता की ओर देखने लगा….वो अभी डर रहा था कि, कही ममता मासी बुरा ना मान जाए…..”शियीयीयी दबाओ ना कुछ नही कहूँगी मैं….” ममता ने अपना हाथ उसके हाथ के ऊपेर से हटाते हुए कहा….तो विनय ने डरते हुए, धीरे-2 उसकी चुचि को दबाना शुरू कर दिया….ममता के पूरे बदन में मस्ती की लहर दौड़ गयी….

उसने विनय की कमर में अपनी बाहों को डालते हुए, उसे अपनी तरफ खेंचते हुए अपने से सटा लाया….”अहह हाआँ सबाश विनय हाआँ ऐसे ही थोड़ा सा ज़ोर से दबाओ….हां थोड़ा और ज़ोर से…..” विनय ममता की चुचियों को दबाता हुआ, उसके तमतमा रहे फेस को देख रहा था….उसकी आँखे मस्ती में बंद हो गयी थी…..और ममता धीरे-2 सिसकारियाँ भर रही थी… ममता की चूत में सरसराहट अब और बढ़ चुकी थी…उसने अपना एक हाथ नीचे लेजाते हुए, उसके लंड पर शॉर्ट्स के ऊपेर से रख दिया, और धीरे-2 उसके लंड को सहलाने लगी…..


विनय का सेमी एरेक्टेड लंड थोड़ी ही देर में पूरे तनाव में आ चुका था……और उसका शॉर्ट्स फाड़ कर बाहर आने को उतावला हो रहा था……”शीई विनय तुम्हे अच्छा लगता है, जब मैं तुम्हारे लंड को सहलाती हूँ….” उसने विनय के लंड को शॉर्ट्स के ऊपेर से मुट्ठी मे भरते हुए कहा…..

विनय: काँपती हुई आवाज़ मे…) हां मासी जी…..

ममता: कितना अच्छा लगता है…..?

विनय: बहुत……

ममता: और मेरी चुचियों को दबाना…..?

विनय: और भी ज़्यादा अच्छा लगता है…

ममता: देखना चाहता है इन्हे….

विनय: हूँ…..

ममता ने विनय का लंड छोड़ा और एक दम से उठ कर बैठ गयी…..उसने जैसे ही अपनी कमीज़ को पकड़ कर ऊपेर उठाना शुरू किया, तो टीवी पर रखा उसका मोबाइल बजने लगा….वो बेड से नीचे उतरी और अपनी कमीज़ उतार कर बेड पर फेंकते हुए, टीवी की ओर बढ़ी, पीछे बैठा विनय हैरानी से ये सब देख रहा था….ममता की नंगी पीठ देखते ही उसके लंड ने झटके खाने शुरू कर दिए…..उसकी पीठ पर कसी हुई ब्रा के स्ट्रॅप्स कितने सेक्सी लग रहे थे…ममता ने जाकर अपना मोबाइल उठा कर देखा, तो उसके मायके से फोन था….

ममता: हेलो…..

दूसरी तरफ से किरण की आवाज़ आई…..

किरण: हेलो ममता कैसी हो…..?

ममता: मैं ठीक हूँ दीदी आप कैसे हो…..?

किरण: मैं भी ठीक हूँ…..मैं परसो वापिस आ रही हूँ…..कोई परेशानी तो नही है ना…..?

ममता: नही दीदी कोई परेशानी नही है…….

किरण: अच्छा विनय कैसा है….?

ममता: जी वो भी ठीक है……

किरण: ला मेरे राजकुमार से मेरे बात तो करवा….

ममता: दीदी वो तो सो रहा है…..

किरण: अच्छा चल रहने दे उसे सोने दे….सुन घर का और विनय का ध्यान रखना….

ममता: दीदी ये भी कोई कहने वाली बात है….क्या ये मेरा घर नही है…..

किरण: हां बिल्कुल तुम्हारा ही घर है…..अच्छा अब मैं फोन रखती हूँ….

ममता: ओके दीदी बाइ…..

ममता ने जलदी से फोन कट किया….और अपनी सलवार का नाडा पकड़ कर खोलते हुए उसे भी उतार दिया….अब ममता और देर नही करना चाहती थी….क्योंकि वो जानती थी कि, कभी भी कोई भी कबाब मे हड्डी बन सकता है……जैसे ही ममता अपना मोबाइल टीवी पर रख कर विनय की तरफ मूडी, तो विनय का मूह खुला का खुला रह गया…..ये नज़ारा विनय अपनी जिंदगी में पहली बार देख रहा था…..ममता गोलडेन स्किन कलर की ब्रा और पेंटी पहने उसके सामने खड़ी थी…….रूम में बेहद अंधेरा था….इसीलिए ममता ने टीवी ऑन कर दिया….और उसकी वॉल्यूम को बिल्कुल बंद कर दिया…….

वो धीरे 2 बेड की तरफ बढ़ी, और बेड पर बैठते हुए बोली….”क्या देख रहा है….कैसी लग रही हूँ मैं…..”

उसने मुस्कराते हुए कहा…. “बहुत खूबसूरत…” विनय ने वैसे ही लेटे हुए कहा, तो ममता ने अपने दोनो हाथो को पीछे लेजाते हुए, अपनी ब्रा के हुक्स खोल दिए. और फिर अगले ही पल उसने धीरे-2 ब्रा को अपने बदन से अलग करते हुए बेड पर रख दिया…ममता की 34 साइज़ की तनी हुई मोटी-2 चुचियाँ देख विनय की आँखे हैरानी से फेल गयी…..वो एक टक ममता की चुचियों को घुरे जा रहा था…..

ममता ने अपनी चुचियों पर अपने हाथों को फेरते हुए विनय की तरफ देखा और फिर धीरे से मादक आवाज़ में बोली…..”विनय तुम्हे मेरी चुचियाँ कैसी लगी…..”

तो विनय ने हकलाते हुए झपक से बोला….”बहुत हॉट है मासी……” तो ममता मन ही मन अपनी चुचियों की तारीफ सुन कर मुस्करा पड़ी….”मासी नही ममता बोल मुझे……अब तो हम दोस्त है ना….”

विनय: जी…..

ममता: फिर बोल ना मुझे ममता….

विनय: ममता……

ममता धीरे से विनय के पास पीठ के बल लेट गयी……और उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी चुचि पर रखते हुए, धीरे से फुस्फुसाइ….”अब तुझे किस बात का इंतजार है मेरे राजा…..दबा ना इनको तुझे इन्हे दबाना अच्छा लगता है ना….” विनय ममता के ऊपेर झुक गया….उसने अपने काँपते हाथो को जैसे ही ममता की चुचियों पर रखा तो, ममता ने भी अपने दोनो हाथ उसके हाथो पर रख दिए….जैसे वो चाहती हो कि, अब ये हाथ हमेशा उसकी चुचियों से ही चिपके रहे….पिछले 6 महीने से पति के लंड के लिए तरस रही ममता, की चुचियों पर विनय के हाथ लगे ही थे कि, ममता की चूत मे तेज सरसराहट हुई, उसकी आँखे मस्ती मे बोझल होने लगी….

ममता: (सिसकते) श्िीीईई विनय दबा ना…..ज़ोर ज़ोर से जितना तेरा मन करे, जब तक तेरा दिल ना भरे अपनी ममता की चुचियों को दबाता रह…..

विनय अब थोड़ा सहज महसूस करने लगा था….उसके हाथो मे ममता की 34 साइज़ की चुचियाँ संभाले नही संभाल पा रही थी….एक बहुत ही सुखद अनुभाव विनय के हाथो से होता हुआ, उसे अपने लंड पर महसूस हो रहा था….वो भी ममता की तरह गर्म हो चुका था. और जैसे ही विनय ने पहली बार ममता की नंगी चुचियों को अपने हाथों मे भर कर दबाया तो, ममता की आँखे मस्ती मे बंद हो गयी….पूरा बदन थरथरा कर रह गया… होन्ट खुल गये…..”अहह श्िीीईईईईई विनय हाआँ मेरे जान ऐसे ही और ज़ोर से दबा ना….” ममता ने जैसे विनय से मिन्नत करते हुए कहा….

ममता की मस्ती भरी सिसकारी ने आग मे घी का काम किया, और विनय ने धीरे-2 ममता की चुचियों को दबाना शुरू कर दिया….ममता के तीखे नोक दार निपल्स विनय की हथेलियों के बीच मसले जा रहे थे……जिसके कारण ममता को अपनी चुचियों के निपल्स मे तनाव बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था….उसकी चूत अब चीख-2 कर लंड माँग रही थी….वो एक दम मदहोश हो चुकी थी….अब उसके सबर का पैमाना उछलने को था….उसने विनय के सर को दोनो हाथो से पकड़ा, उसके होंटो को अपने होंटो से लग दिया…..


अगले ही पल ममता विनय के लड़कियों जैसे रसीले होंटो को पागलो की तरफ चूस रही थी….विनय की आँखे भी मस्ती मे बंद हो गयी थी…..करीब 2-3 मिनिट बाद, ममता ने अपने होंटो को विनय के होंटो से अलग किया, और उखड़ी हुई सांसो के साथ मस्ती भरी आवाज़ मे बोली……”मेरे शोना ओह तू भी चूस ना मेरे होंटो को….” और फिर से दोनो के होन्ट आपस मे उलझ गये….इस बार विनय ममता के होंटो को चूस रहा था…धीरे-2 नरमी से…. और ममता उसका हॉंसला बढ़ाने के लिए एक हाथ से उसके सर के बालो को और दूसरे हाथ से उसकी पीठ को सहला रही थी….

जिससे विनय धीरे-2 जोश मे आता जा रहा था….और ये सोच कर कि, ममता मासी को उसका ये सब करना कितना मज़ा दे रहा है, उसका कॉन्फिडेन्स लेवेल भी बढ़ता जा रहा था…अब ममता ने उसके ऊपेर वाला होन्ट चूसना शुरू कर दिया था….और विनय ममता का नीचे वाला होन्ट चूस रहा था….दो बदन काम की आग मे जल रहे थे…..विनय अब जोश में बढ़ता जा रहा था…उसने धीरे-2 फिर से ममता की चुचियों को फिर दबाना शुरू कर दिया था….विनय की इस हरक़त से ममता मन ही मन खुश हो गयी….आख़िर विनय ने अपनी तरफ से कोई पहला कदम उठाया था….ममता ने अपने होंटो को विनय के होंटो से अलग किया, तो विनय ने अपनी आँखो को खोल कर ममता की तरफ देखा….

ममता: (मदहोशी भरी आवाज़ मे.) विनय मेरे मम्मे चुस्स ना…..पी ले मेरा दूध…अगले भाग में पढ़िए आगे क्या हुवा |


दोस्तों जुड़े रहिये मस्तराम के साथ और पढ़ते रहिये मस्त मस्त कहानिया और कमेंट कर मुझे ये भी बताईये कहानी कैसी लग रही है |


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लंड को पहली बार मिली चूत-7

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