All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

लंड को पहली बार मिली चूत-8


दोस्तों अभी तक अपने लंड को पहली बार मिली चूत-7 में जो पढ़ा अब उसके आगे लिख रहा हु :  ये कहते हुए, उसने विनय के सर को पकड़ कर जैसे ही उसके होंटो को अपनी चुचियों पर झुकाया तो, विनय ने भी अपने गीले होंटो मे ममता के राइट निपल को मूह में भर कर चूसना शुरू कर दिया…..”ष्हिईीईईईईई हाईए विनय आहह हां पीजा मेरे दूध को अह्ह्ह्ह और ज़ोर से चूस मेरे मम्मे पूरा का पूरा खाली कर दे…” ममता ने सिसकते हुए, विनय को अपनी बाहों में कसते हुए अपने ऊपेर लुड़का लिया…..अब विनय ममता के ऊपेर आ चुका था. उसका लंड ममता की पेंटी की पैंटी के ऊपेर से उसकी चूत पर दस्तक दे रहा था…. जिसे महसूस करके, ममता की चूत पैंटी को अंदर से पानी बहा कर गीला कर रही थी…. उसने विनय की पीठ से उसकी टीशर्ट के अंदर हाथ डालते हुए उसकी टीशर्ट को उतारना शुरू कर दिया….और किसी आग्याकारी बच्चे की तरह विनय ने भी ममता की चुचियों से मूह हटाते हुए अपनी बाहो को ऊपेर कर लिया, ताकि ममता उसकी टीशर्ट को उतार सके…..टीशर्ट उतार कर ममता ने बेड पर फेंकी और फिर विनय के शॉर्ट्स को खेंच कर उतारना शुरू कर दिया….


विनय ने घुटनो के बल बैठते हुए खुद ही अपने शॉर्ट्स और अंडरवेर को उतार कर साइड में रख दिया….ममता की नज़र जैसे ही विनय के तने हुए लंड पर पड़ी, तो उसकी आँखे वासना की चमक से भर उठी…..उसने अपने दोनो हाथ नीचे लेजाते हुए, विनय के लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया, और उसके लंड को धीरे-2 सहलाते हुए विनय के चेहरे की ओर देखने लगी…


ममता: विनय उस दिन तुम्हे मज़ा आया था ना…..जब मेने तुम्हारे लंड की मूठ मारी थी..


विनय: श्िीीईईई हां मासी…..


ममता: चल आज तुझे मैं उस दिन से भी ज़्यादा मज़ा दूँगी…पर ये सब तू किसी को बताएगा तो नही…..?


विनय: (ना में सर हिलाते हुए….) नही मासी जी….


ममता: अच्छा चल तो फिर मेरी पैंटी उतार…..(ममता ने मुस्कुराते हुए विनय को कहा….)


विनय: क्या मैं….


ममता: हां तुझे ही बोल रही हूँ मेरे राजा….उतार ना….


विनय ने अपने काँपते हाथो से ममता की पेंटी को दोनो तरफ से पकड़ कर नीचे सरकाना शुरू किया तो, ममता ने खुद ही अपनी गान्ड बेड से ऊपेर उठा ली, ताकि विनय उसकी पैंटी उतार सके……विनय ने जैसे ही पैंटी को उतारा तो देखा, उसकी पैंटी नीचे से एक दम गीली थी…..ममता के काम रस की तेज सुंगध विनय के नथुनो में घुल गयी…..”इसे प्री कम कहते है….” ममता ने मुस्कुराते हुए कहा….”जब किसी लड़की या औरत को कोई लड़का या मर्द मज़ा देता है, जैसे तूने मुझे दिया है, तो उसकी फुद्दि से ऐसा गाढ़ा पानी निकलता है…..


अब विनय का ध्यान ममता की बिना झान्टो वाली क्लीन शेव्ड चूत पर गया, तो उसके बदन मे अजीब सी झुरजुरी दौड़ गयी…..”पहली कभी देखी है किसी की चूत….” ममता ने मुस्कुराते हुए कहा…..तो विनय ने अपने गले का थूक गटकते हुए ना मे सर हिला दिया… “देख ना इसे खोल कर अपने हाथो से कैसे पानी छोड़ रही है…..”


ममता ने विनय का एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रखते हुए कहा, तो विनय का हाथ अपनी चूत पर महसूस करते ही, ममता एक दम सिसक उठी…..”श्िीीईई ओह विनय…..” विनय ने एक बार मस्ती में सिसक रही ममता की तरफ देखा, और फिर अपने हाथो की उंगलियों से उसकी चूत की फांको को फेलाना शुरू कर दिया…..जैसे ही ममता की चूत का गुलाबी रस से भरा छेद विनय की आँखो के सामने आया तो, उसके लंड ने एक जबरदस्त झटका खाया. मानो ममता की चूत को सलामी दे रहा हो…….mastaram (27) kahani


ममता ने फिर से अपना हाथ बढ़ा कर विनय के लंड को पकड़ लिया, और उसके सुपाडे की चमड़ी पीछे सरकाते हुए, उसे अपनी चूत की फांको के बीच में जैसे ही रगड़ा तो, ममता ने सिसकते हुए, अपनी आँखे बंद कर ली….ममता की चूत की गरमी को अपने लंड के सुपाडे पर महसूस करते ही, विनय भी सिसक उठा….”अहह मासिईईईईई”


ममता: मासी नही ममता बोल ना जानू……


विनय: अह्ह्ह्ह ममता बहुत हॉट है, आपकी चूत…..


ममता: अब तू अपना लंड मेरी चूत में घुसा धीरे-2…..आराम से अंदर करना…..


ममता ने विनय के लंड के सुपाडे को अपनी चूत के छेद पर सेट करते हुए कहा….तो विनय ने धीरे-2 अपने लंड के सुपाडे को ममता की चूत के छेद पर दबाना शुरू कर दिया….जैसे ही विनय के लंड का सुपाडा ममता की चूत के छेद फेलाता हुआ अंदर घुसा तो, ममता के रोम-2 मे मस्ती की लहर दौड़ गयी….उसने सिसकते हुए अपने हाथ को विनय के लंड से हटा लिया….”श्िीीई ओह विनय हां ऐसे ही अंदर करते रहो…..धीरे-2…..उंह” विनय भी अपने लंड के सुपाडे के इर्द गिर्द ममता की चूत की टाइट दीवारो को महसूस करके एक दम से सिसक उठा….


उसे अपने कुंवारे लंड के सुपाडे पर मदहोश कर देने वाली गुदगुदी महसूस हो रही थी… उसकी आँखे भी ममता की आँखो की तरह धीरे-2 बंद होने लगी थी….पर मासी ने ऑर्डर जो दिया था….और अपनी मासी जो कि अब उसकी सबसे अच्छी दोस्त बन चुकी थे…उसका कहा विनय कैसे टाल सकता था….अपने लंड के सुपाडे पर हो रही तेज सरसराहट को भी मात देते हुए, उसने अपने लंड को और अंदर की तरफ दबाया तो, विनय का आधा लंड ममता की चूत के दीवारो को खोलता हुआ अंदर जा घुसा…


ममता: ओह हाईए विनय…..तेरा लंड किन्ना सोना खड़ा है…..हाईए कर दे हुन पूरा अंदर श्िीीईईईईईईईई………


ममता ने अपनी बाहों को विनय की दोनो बगलो से निकालते हुए, उसके पीठ पर अपनी बाहों को कस लिया….दोनो नंगे जिस्म एक दूसरे से ऐसे चिपक गये…..जैसे एक ही जिस्म हो…..ममता को मज़ा आ रहा है….ये देख विनय ने खुद पर गर्व महसूस किया कि, ममता को उसका लंड अपनी चूत में लेकर मज़ा आ रहा है, तो उसने फिर से अपने लंड को चूत के अंदर धकेलना शुरू कर दिया….इस बार विनय का लंड ममता की पनियाई हुई चूत की दीवारो को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर जा घुसा….ममता के होंटो पर कामुक संतुष्टि भरी मुस्कान फेल गयी.


उसने अपनी टाँगो को उठा कर विनय की पीठ पर कस लिया….”श्िीीईईई उंह विनय हाआँ आईसीए ही लेटे रहो आहह मेरे ऊपेर…..” ममता ने मदहोश होकर विनय के गालो को चूमना शुरू कर दिया…..”हाईए विनय आज कितने दिनो बाद मेरी चूत को कितना सकून मिला है…उंह उंह…” विनय के गालो पर चुंबन झाड़ते हुए…..) ममता जानती थी कि, भले ही विनय का लंड किसी बड़े मर्द जितना बड़ा हो गया है….पर विनय चुदाई के इस खेल में कितनी देर टिक पाता है….इसका ममता को कोई अंदाज़ा नही था….वो नही चाहती थी कि, विनय उसे बीच मज़धार में ही छोड़ दे….इसीलिए वो विनय के लंड को अपनी चूत मे अच्छी तरह महसूस करके पूरी तरह गरम हो जाना चाहती थी….ताकि वो उस चर्म सुख को पा सके. जिसके लिए वो पिछले कई महीनो से तड़प रही थी……


ममता: विनय मेरे मम्मे चूसो ना….प्लीज़ मेरी जान…..तुम बहुत अच्छा चूस्ते हो…..


विनय: मासी आपको अच्छा लग रहा है….


ममता: (विनय के होंटो को चूमते हुए) हां बहुत अच्छा मेरे शोना, तुम्हे अच्छा शीईइ नही लग रहा है……


विनय: ओह्ह्ह्ह मासी बहुत गरम है आपकी ये….


ममता: अह्ह्ह्ह क्या गरम है…..और तू श्िीीई फिर से मासी क्यो क्यों बोल रहा है मेरी जान.


विनय: तुम्हारी चूत ममता…..


विनय के मूह से ये सुनते ही, ममता की चूत ने और रस टपकाना शुरू कर दिया….”हाई मेरे शोना…..तुझे अच्छा लग रहा है ना….तो मुझे भी अच्छा लग रहा है…..ले चूस ना मेरी चुचियों को…..” ममता ने विनय के सर को पकड़ कर अपनी चुचि पर झुकाते हुए कहा तो, विनय ने लपक कर ममता की चुचि को मूह में भर लिया….और ठीक बच्चों की तरफ उसके निपल को अपने होंटो में दबा -2 कर चूसने लगा….ममता ने मस्ती मे आकर तड़पते हुए अपने सर को इधर उधर पटकना शुरू कर दिया…..


ममता: ओह्ह्ह्ह विनय हाां मेरे शोना चूस ले अपनी मासी की चुचियों को अह्ह्ह्ह खा जा मेरी जान हाईए मेरी फुदी ओह…..


ममता लगातार सिसकते हुए, विनय की पीठ को तेज़ी से सहला रही थी…..विनय ममता की कभी एक चुचि को चूस्ता तो कभी दूसरी को, उसका लंड ममता की चूत की गरमी से और हार्ड हो चुका था……जिससे ममता अपनी चूत में झटके ख़ाता हुआ सॉफ महसूस कर पा रही थी….ममता अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी…..ज़रूरत थी तो, सिर्फ़ 15-20 जबरदस्त झटको की, जो कि विनय अपना लंड सुपाडे तक बाहर निकाल-2 कर अंदर करते हुए मारता….


ममता: ओह्ह्ह्ह विनय अब अह्ह्ह्ह धीरे-2 अपने लंड को मेरी चूत के अंदर बाहर करो…ध्यान रखना पूरा बाहर मत निकाल लेना…


विनय ने जैसे ही ममता की ये बात सुनी, तो उसने ममता की चुचियों से अपना मूह हटा लिया और ममता की नशीली मदहोशी से भरी आँखो मे देखने लगा….तो ममता ने उसके फेस को दोनो हाथो में लेकर उसके होंटो को अपने होंटो से लगा दिया….इस बार खुद ही विनय ने ममता के होंटो को अपने होंटो में भर कर चूसना शुरू कर दिया….और अपने लंड को धीरे-2 सुपाडे तक बाहर निकाला और फिर से धीरे-2 अंदर कर दिया….”ममता अपनी चूत की दीवारो पर विनय के लंड के सुपाडे की रगड़ को महसूस करके एक दम मदहोश गयी.


उसकी आँखे पूरी तरह से बंद हो गयी……ममता ने अपने होंटो को ढीला छोड़ कर पूरा खोल दिया…तो विनय ने भी ममता के रसीले शहद जैसे मीठे होंटो के रस को अपने होंटो से दबा -2 कर चूसना शुरू कर दिया…..और साथ ही धीरे-2 अपने लंड को ममता की चूत में अंदर बाहर करने लगा…..अभी विनय ने 6-7 बार ही अपने लंड को चूत के अंदर बाहर किया था, कि ममता मस्ती मे एक दम मचल उठी….उसने अपने होंटो को विनय के होंटो से अलग करते हुए उसने सर को अपनी गर्दन पर दबा लिया और काँपती हुई आवाज़ मे बोली…..


ममता: ओह व व विनय ओह्ह्ह मेरे राजा चोद अपनी मासी को अह्ह्ह ओह्ह्ह और ज़ोर से घस्से मार…..और तेज़ी से अहह…..


ये सुनते ही विनय एक दम से जोश में आ गया….और उसने तेज़ी से अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….”ओह्ह्ह विनय य्स्स बेबी हाआँ ऐसी ही चोद डाल मुझे आहह ओह्ह्ह्ह उंह श्िीीईईईईईई हइई विनय आहह कर दे मुझे ठंडी अहह….” फिर तो विनय जैसे ही ममता की बातें सुन कर ऐसे जोश में आया कि, उसने ताबडतोड़ धक्के लगाते हुए, ममता की चूत मे उसके कामरस की नदी बहा डाली…..झाड़ते हुए ममता का पूरा बदन काँपने लगा……जब मदहोशी और मस्ती की इंतिहा हो गयी तो, ममता ने भी नीचे से झाड़ते हुए, अपनी गान्ड को खूब कस कर उछाला….और फिर एक दम काँपते हुए झाड़ कर निढाल हो गयी….


इधर विनय भी अपनी जवान से भरपूर मासी की चूत की गरमी को ज़्यादा देर बर्दास्त ना कर सका….”अहह ओह्ह्ह्ह मस्ससी ओह मेरा अहह……….” उसने अपने लंड मे तेज सनसनाहट महसूस हुई, बदन का सारा खून उसे अपने लंड की नसों मे इकट्ठा होता हुआ महसूस होने लगा….और विनय भी हुंकराते हुए ममता की चूत में झड़ने लगा….विनय का लंड अब रह-2 कर ममता की चूत मे झटके ख़ाता हुआ, अपने वीर्य की बूंदे टपका रहा था…और विनय ममता की चुचियों में अपना चेहरा रखे, अपनी उखड़ी हुई सांसो पर काबू पाने की कॉसिश कर रहा था….. जैसे ही दोनो की साँसे दुरस्त हुई, तो विनय ममता के ऊपेर से उतर कर उसकी बगल मे लेट गया…..ममता ने उसकी तरफ करवट ली, और उसकी चेस्ट को हाथ से सहलाने लगी….”विनय कैसा लगा तुम्हे ये सब करके…..?” ममता जानना चाहती थी कि, क्या विनय ये सब दोबारा करना चाहेगा…..”बहुत अच्छा…बड़ा मज़ा आया…..”


ममता: अब बस किसी को बताना नही….ये बातें सब से छुपा कर की जाती है…जब घर मे हमारे आसपास कोई हो तो, हम ऐसे बिहेव करेंगे….जैसे आज से पहले करते थे.


विनय: ओके समझ गया…..


ममता: अब तुम्हारा दोबारा जब भी मन करेगा तो मुझे बता देना……


विनय: ओके बता दूँगा……


इतने में ममता के मोबाइल की रिंग बजी, तो ममता ने उठ कर अपना मोबाइल उठाया….. फोन अजय की दुकान से था….”हेलो हांजी जीजा जी…..”


अजय: (दूसरी तरफ से…..) वो मेने ये बताने के लिए फोन किया था कि, आज शाम 7 बजे शो की टिकेट्स मेने बुक करवा रखी है…..शीतल दीदी के घर से भी सब जा रहे है….तुम और विनय भी तैयार हो जाना…..मैं 6 बजे तक घर आ जाउन्गा…..


ममता: (दीवार पर लगी घड़ी की तरफ देखते हुए….जिसमे अभी सिर्फ़ 4 बजे थे…) ओके जीजा जी…..


अजय: वैसे वो बदमाश है कहाँ पर….मेरी बात तो करवाओ उसके साथ…..


ममता: सो रहा है…..


अजय: चल रहने दे…..थोड़ी देर बाद उठा देना..


उसके ममता ने कॉल कट की, और विनय की तरफ मुस्कुराते हुए देखा….”क्या हुआ मासी किसका फोन था…..”


ममता: तुम्हारे मामा जी का…..कह रहे थे….आज शाम को मूवी देखने चलना है….


विनय: 7 बजे वाला शो…..?


ममता: हां….पर अभी बहुत टाइम है हमारे पास…..दोबारा करना है…..?


ममता ने विनय के पास आकर बैठते हुए कहा…..तो विनय ने भी हां में सर हिला दिया… ममता के होंटो पर तेज कामुक मुस्कान छा गयी…बलि का बकरा हालाल हो चुका था…उसने विनय के ऊपेर झुकते हुए, अपने होंटो को विनय के होंटो पर रख दिया….दोनो एक दूसरे के होंटो को चूसने में मस्त थे कि, तभी बाहर डोर बेल बजी…..ममता एक दम से हड़बड़ा गयी….”हाई अब कॉन आ गया…..” ममता ने जल्दी से अपने सर कपड़े समेटे….और विनय को कहा कि, वो जल्दी से अपनी टीशर्ट और शॉर्ट्स पहन कर बाहर का गेट खोले….वो अपने रूम में कपढ़े पहनने जा रही है……


विनय ने एक ही मिनिट में अपने शॉर्ट्स और टीशर्ट पहनी, और भागता हुआ बाहर गेट की तरफ चला गया…..जब विनय ने जाकर गेट खोला तो, देखा सामने पिंकी और अभी खड़े थे…दोनो बेहद खुश लग रहे थे….शायद उन्हे भी पता चल चुका था कि, सब लोग शाम को मूवी देखने जा रहे है…..”विनय भैया पता है….पापा का फोन आया था…..बोल रहे थे कि, हम सब मूवी देखने जा रहे है शाम को आप भी…..”


विनय: हां मुझे पता है….

पिंकी: कैसे…..?

विनय: मामा जी का भी फोन आया था….

फिर तीनो अंदर आ गये….थोड़ी देर बाद ममता भी कपड़े पहन कर जब रूम से बाहर आई तो, पिंकी और अभी को देख कर दाँत पीसने लगी….कि इनको इतनी धूप में भी चैन नही है…..सारा मज़ा किरकारा कर दिया….इन आफ़ात की पूडियों ने….खैर ममता को मन मारना पड़ा, शाम को सब लोग मूवी देखने चले गये…..रात को खाने के वक़्त मामा ने बताया कि, कल किरण वापिस आने वाली है…..ममता को ये सुन कर बुरा तो लगा, पर आख़िर किरण को अपने घर तो वापिस आना ही था…..

उस रात मामा विनय के साथ उसके रूम मे सो गये…..विनय को प्यार जो बहुत करते थे….अगली सुबह भी अजय ने ममता को जल्दी उठा दिया….ममता ने अपने जीजा के लिए ब्रेकफास्ट बनाया और फिर लंच पॅक करके दिया….अजय के जाने के बाद ममता ने गेट बंद किया और फिर से अपने रूम मे आकर सो गयी…..जब आँख खुली तो 10 बज चुके थी….वो जल्दी से उठी, और विनय के रूम में गयी, तो देखा विनय अभी तक सो रहा था….उसने विनय के पास जाते हुए आवाज़ लगा कर विनय को उठाया……..

और जैसे ही विनय उठा तो, ममता ने झुक कर उसके होंटो पर हल्का सा चुंबन झाड़ दया…. “गुड मॉर्निंग शोना…..” उठ जाओ….मैं ब्रेकफास्ट बनाने जा रही हूँ….फ्रेश होकर डाइनिंग टेबल पर आ जाओ….करीब 11 बजे दोनो ब्रेकफास्ट करके फ्री हुए तो, ममता झूठे बर्तन उठा कर किचन मे चली गयी……तभी बाहर डोर बेल बजी, तो ममता ने विनय को गेट खोलने के लिए कहा…..जब विनय ने जाकर गेट खोला तो सामने किरण खड़ी थी……विनय को देखते ही मामी के होंटो पर ममता भरी मुस्कान उमड़ आई, उसने विनय को अपने सीने से लगा लिया.

पहले भी कई बार किरण विनय को दुलारते हुए गले से लग लेती थी……और विनय ने भी आज तक ऐसा कभी महसूस नही किया था….जो वो आज कर रहा था….किरण की 38 साइज़ की बड़ी-2 चुचियाँ जो ममता से कही ज़्यादा बड़ी थी….विनय को अपने गालो पर दबति हुई महसूस हुई, तो उसके बदन मे वही अजीब सी सरसराहट दौड़ गयी, जो उसे ममता की चुचियों को छूते वक़्त हुई थी…..”कैसा है मेरा राज कुमार…..” किरण ने विनय के माथे पर चूमते हुए कहा…


विनय: मैं ठीक हूँ…..आप कैसे है…..और वैशाली कहाँ है…..?


किरण: वो….उसे तो आते ही रिंकी ने रोक लिया…..


विनय: (किरण के हाथ से एक बॅग लेकर उठाते हुए) लाइए मामी मैं लेजाता हूँ अंदर…..

ममता भी किरण की आवाज़ सुन कर बाहर आ गयी….और बाहर से वशाली भी अंदर आ गयी. वशाली और विनय दोनो ही हम उम्र थे…..इसीलिए दोनो में बेहद लगाव था….हां हालाकी वशाली थोड़ी तुनक मिजाज़ की थी….छोटी-2 बातों पर भड़क जाती थी…..खैर मामी और वशाली अंदर आए तो, ममता ने उनके लिए चाइ पानी का इंतज़ाम किया….

नाश्ता करने और थोड़ी देर आराम करने के बाद ममता अपनी बेहन किरण के साथ अपने भाई की शादी को लेकर मसरूफ़ हो गयी….क्या हुआ क्या-2 खरीदा कितनी तैयारी हो गयी….वग़ैरह-2. किरण ने बातो-2 में ममता को बताया कि, मम्मी पापा कह रहे थे कि, ममता का कॉलेज जब तक शुरू नही हो जाता. तब तक वो वहाँ आ जाए…..अभी शादी की बहुत सारी शॉपिंग करनी बाकी है……एक तरफ भाई की शादी की खुशी थी…..और दूसरी तरफ अपने नये प्रेमी से बिछड़ने का दुख भी था…..अभी-2 तो उसने विनय के साथ पहली चुदाई का सुख लिया था…..

किरण मामी के घर आ जाने से मानो घर में रौनक लौट सी आई थी…….पर अब विनय को ये रौनक कहाँ अच्छी लगती थी…..उसे तो बस तनहाई पसंद थी….वो भी ममता के साथ. जो अब मामी के आने के बाद उन्हे बेहद मुस्किल से मिलने वाली थी….उस दिन घर में खूब चहल पहल रही….शीतल भी घर आई अपने बच्चों के साथ….शादी को लेकर तीनो आपस में बातें करती रही…..

विनय हमेशा इस तलाश में रहता कि, उसे ममता के साथ अकेले रहने के लिए कुछ पल ही मिल जाए……वो तरसती निगाहो से ममता को घूर रहा था….और ममता भी उसके आँखो में छुपी हुई तड़प को देख कर मन ही मन मुस्कुरा रही थी…..एक जवान औरत या लड़की को इससे ज़यादा और क्या चाहिए…..कि एक जवान लड़का कैसे उसके आगे पीछे चक्कर लगा रहा है. वो कई बार विनय की तरफ देख कर अपने होंटो को अपने दाँतों में दबा कर उसे कामुक इशारा करती, तो ममता की नज़रें विनय के दिल को चीर जाती……

विनय का बेहद बुरा हाल था……घर में रहा तो, दिमाग़ ही खराब हो जाएगा….ये सोच कर विनय घर से बाहर निकल गया……कुछ देर दोस्तो के साथ घूमता रहा…..पर फिर जब वो घर को वापिस आने लगा तो, रास्ते में जब अपने स्कूल के सामने से गुज़रा तो, स्कूल के छोटे गेट के बाहर खड़े पीयान रामू ने उसे आवाज़ देकर अपने पास बुला लिया…..जब विनय उसके पास गया तो, रामू ने विनय से हाथ मिलाते हुए कहा……

रामू: क्यों विनय बाबू किधर घूम रहे हो……?

विनय: कुछ नही ऐसे दोस्तो के पास से आ रहा हूँ……

रामू: यार कामाल हो इतने दिनो से यहाँ आए भी नही…..आओ अंदर चलते है…..

विनय: नही -2 मुझे देर हो रही है……

रामू: अर्रे विनय बाबू आओ भी ना…..एक बहुत ज़रूरी बात करनी है……

विनय: नही मुझे सच में देर हो रही है….जो भी कहना है यही कह दो….

रामू: देख लो विनय बाबू……एक मस्त चीज़ बतानी थी तुमको….वरना बाद मे हाथ मलते रह जाओगे……

विनय के मन में अजीब सी हलचल हुई, आख़िर ऐसी क्या बात है……जो रामू उसकी इतनी मिन्नतें कर रहा है…..विनय कुछ सोच कर रामू के साथ अंदर आ गया….रामू ने गेट बंद किया….और उसे स्कूल की बिल्डिंग के पीछे बने हुए, अपने रूम्स की तरफ लेजाने लगा…..एक बार फिर से अंजानी उत्सुकता ने विनय के दिल को घेर लिया था….”आइए विनय बाबू अंदर आईए…..” रामू ने रूम के डोर पर पहुँचते हुए विनय से कहा….और फिर अंदर चला गया……जैसे ही विनय उस रूम में दाखिल हुआ, तो उसकी नज़र नीचे बैठी एक औरत पर पड़ी…..जो नीचे रखे हुए गॅस स्टोव पर रात के लिए सब्जी बना रही थी…..

उस औरत का रंग सांवला था…..एक दम गदराई हुई थी….उसने अपनी साड़ी को अपने घुटनो तक उठा रखा था…..उसके साँवले रंग की सुडोल पिंदलियाँ सॉफ दिखाई दे रही थी…. जैसे ही उस औरत ने विनय को रामू के साथ अंदर आते हुए देखा तो उसके माथे की थ्योरियाँ चढ़ गयी…….”अब ये किसे उठा लाया है तू…..दोपहर को तेरा जी नही भरा….” उस औरत ने मूह मे भुन्भुनाना शुरू कर दिया…..”पता नही इसको कहाँ-2 से ऐसे छोकरे मिल जाते है…”

रामू: अर्रे भगवान ये हमारे स्कूल में पढ़ते है…..विनय बाबू….

औरत: स्कूल में पढ़ते है, तो यहाँ कॉन से तेरे बाप ने क्लास खोल रखी है….जो तू इसे यहाँ उठा लाया…..

रामू ने देखा कि उसकी पत्नी का मूड उखड़ा हुआ है तो, उसने विनय की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर कहा…..”विनय बाबू आप चलिए मेरे साथ….” विनय समझ चुका था कि, ये औरत रामू की पत्नी है…..पर वो उस पर इतना क्यों भड़क रही है…..विनय की समझ में नही आ रहा था….जैसे ही दोनो रूम से बाहर आए तो, रामू ने विनय के सामने थोड़ा सा मुस्कुराते हुए कहा….”वो मेरी पत्नी है….कुछ ही दिन पहले गाओं से आई है….आज सुबह-2 ही इसके साथ झगड़ा हो गया था….तो इसलिए कुछ गरम है….अच्छा जो मैं कहना चाहता था. वो अभी नही बता सकता…..लेकिन आप कल ज़रूर आइयेगा……सच में बहुत ज़रूरी बात है……

विनय: ठीक है अब मैं जाऊ….बहुत देर हो रही है….

रामू: हां विनय बाबू आइए मैं आपको बाहर छोड़ देता हूँ…..

उसके बाद रामू ने विनय को स्कूल से बाहर छोड़ दिया…..और गेट बंद करके फिर से अपने रूम में चला गया…रामू गेट बंद करके, जैसे ही अपने रूम में पहुँचा तो, उसकी पत्नी अंजू उस पर बरस पड़ी……”क्यों रे तेरी गान्ड मे फिर से कीड़े रेंगने लगे….जो तू उनको शांत करने के लिए इसको बुला लाया था……पूरी दोपहर तू उस छोकरे के साथ पीछे कमरो मे गान्ड मरवाता रहा….फिर भी तेरा दिल नही भरा….जो एक और नया लड़का ढूँढ लाया……


रामू: ओहो अंजू तुम भी ना…..कुछ बोलने से पहले एक बार कुछ सोच समझ तो लिया करो… किसी के सामने कुछ भी बकती है तू भी….साली जब देखो रंडी की तरह मूह से आग उगलती रहती है…अर्रे बोलने से पहले ये तो जान लेती कि, वो कॉन है…..

अंजू: क्यों किसी मिनिस्टर की औलाद है काया….?

रामू: नही मिनिस्टर के औलाद नही है…..पर वो ऐसा लड़का भी नही है समझी…..मेरी तो मति ही मारी ही गयी थी…..जो मेने तेरे बारे मे सोचा….

अंजू: (मूह बनाते हुए) अबे हिजड़े अगर मेरे बारे मे सोचता होता तो, आज तक मैं 5 बच्चों की माँ बन चुकी होती….पर तुझे तो बस तेरी गान्ड मे नये-2 लौन्डो का लंड चाहिए…..(अंजू बर्तन पर बन रही सबाज़ी की तरफ देखते हुए बोली….)

रामू: देखा-2 साली रांड़ का अभी भी मूह बंद नही हो रहा…….अब भगवान ने मुझे ऐसा बनाया है तो इसमे मेरा क्या कसूर…..साली तेरे चक्कर में मेने उसका कोरा लंड आज तक अपनी गान्ड मे नही लिया……

अंजू: (बेलन उठा कर रामू को दिखाते हुए) आबे गान्डू चुप कर…….सब जानती हूँ…..साला नमार्द कही का…तू क्या खाक सोचेगा मेरे बारे मे….

रामू: साली छिनाल तुझसे मिलवाने लाया था मैं उसको……

अंजू: (रामू की बात सुन कर हैरान होते हुए) क्या मुझसे मिलवाने….क्यों…..ओह्ह्ह अच्छा-2 कही वो भी तेरी तरह गान्डू तो नही है…..कि इसीलिए तू मुझे उससे मिलवा कर ये दिखाना चाहता था कि, देख इस दुनाया में मै ही अकेला गान्डू नही हूँ…..

रामू: साली सीधी बात तो तुझे समझ ही नही आती….तू सुन छिनाल रंडी ये ये इतना लंबा लंड है उसका…..साला कसम से जब खड़ा होता है, तो…….(रामू बोलते-2 चुप हो गया….)

अंजू हैरानी से रामू के हाथ की तरफ देख रही थी…..जिससे उसने विनय के लंड की लंबाई को हाथ से बताया था…..”क्या इतना बड़ा….तो साले मादरचोद अब तक तूने उसे छोड़ कैसे दिया…” अंजू ने साड़ी के ऊपेर से ही अपनी चूत को खुजाते हुए कहा….”तेरे लिए छोड़ दिया. साली एक दम कोरा लंड है……एक दम मस्त….तू रात को मुझे तंग करती रहती है…..साली ने लंड के चुप्पे लगा-2 कर मुरझा दिया है…..

अंजू: (शर्मा कर मुस्कुराते हुए) कहाँ अब कहाँ लगाने देते हो तुम…..15 दिन हो गये…. चूत में जाने लायक तो तुम्हारा खड़ा होता ही नही….

रामू: देख अंजू……लड़का एक दम कोरा है….जवान है…..और मुझसे खुला हुआ भी है….हर तरह की बात हम आपस मे कर लेते है….साली तेरी चूत के लंड का इंतज़ाम किया था….और तूने अपनी भयानक आवाज़ सुना कर भगा दिया…

अंजू: क्या सच मे उस लड़के का लंड इतना बड़ा है…..

रामू: कसम मुझे अपनी गान्ड के कीड़ों की…..साली लंड तो मस्त है उसका…..हां पर है कच्चा खिलाड़ी…..मेने अपनी आँखो से देखा है उसका लंड….पकड़ा भी है….बोल क्या कहती है…..

अंजू: अब तुम मुझे स्कूल के बच्चे से चुदवाओगे…..

रामू: साली अब नखरे मत कर…..ऐश करेगी….

अंजू: वो तुम्हारी पत्नी को चोदेगा और तुम्हे बुरा नही लगेगा…..

रामू: देख मैं तुम्हे वो सुख नही दे सकता…..जो एक पति अपनी पत्नी को देता है….पर तुझे वो सुख दिलवा तो सकता ही हूँ…..मुझे क्या ऐतराज होगा….हां पर इसके बदले में मुझे भी कुछ चाहिए…..

अंजू: हां बोल क्या चाहिए….

रामू: देख आज के बाद तू मुझे दोबारा कभी नही रोकेगी…..

अंजू: वो तो बाद की बात है….पहले ये तो देख लूँ कि जितनी तारीफ तू उसके लंड की कर रहा है…..उसमे सच मे इतना दम है भी या नही…..

रामू: है मेरी जान है…..

अंजू: चल अगर तेरे बात सही हुई तो, फिर तुम्हे कभी किसी बात के लिए नही रोकूंगी….

रामू: और मुझ पर गुस्सा भी नही करोगी…..

दूसरी तरफ जब विनय घर पहुँचा तो, शाम के 7 बज चुके थे……उसकी मामी बाहर गेट पर ही खड़ी थी….शायद वो विनय को ही ढूँढ रही थी…..जैसे ही उसने विनय को देखा तो उसने राहत के साँस ली…..”कहाँ चला गया था तू….कब से तुम्हे ढूँढ रही हूँ…..कितना वक़्त हो गया है….”

विनय: वो मामी अपने दोस्त के घर चला गया था….

किरण: दोस्त के घर चला गया था…..और ये तूने अपनी क्या हालत बना रखी है…चल अंदर चल कर हाथ मूह धो ले….ऐसे ही मत घुमा कर……

विनय अंदर चला गया……और जाते ही बाथरूम में घुस गया…..फ्रेश होकर बाहर आया, और वशाली के साथ बैठ कर टीवी देखने लगा…..रात के 9 बजे करीब सब ने खाना खाया और ममता वशाली और विनय के साथ ऊपेर छत पर जाने की तैयारी करने लगी…वशाली विनय और ममता ने अपने-2 बिस्तर उठाए और एक के पीछे एक लाइन से चलते हुए ऊपेर जाने लगे….. सबसे आगे वशाली चढ़ रही थी….उसके पीछे ममता और लास्ट में अपना विनय. ममता जानबूज कर कुछ धीरे धीरे सीढ़ियाँ चढ़ रही थी….वशाली सबसे पहले ऊपेर पहुँची, और अपना बिस्तर रख कर बिछाने लगी….तब तक विनय और ममता भी ऊपेर आ गये और बिस्तर बिछाने लगे….


ममता ने देखा कि वशाली अपना बिस्तरा लगा चुकी है…..”वशाली बेटा एक काम कर तू नीचे से पानी की बॉटल ले आ….नही तो प्यास लगने पर नीचे जाना पड़ेगा रात मे….” ममता ने अपने बिस्तर को जल्दी -2 बिछाते हुए कहा…

वशाली: ठीक मासी जी ले आती हूँ….

और जैसे ही वशाली सीढ़ियों से नीचे उतरी तो ममता तेज़ी से सीडयों की तरफ गयी….और कुछ सीढ़ियाँ नीचे उतर कर, उसने विनय को आवाज़ दी….जब विनय ने ममता की तरफ देखा तो वो कामुकता के साथ मुस्कुराते हुए उसे अपने पास आने का इशारा कर रही थी…..विनय भी तो कब से तड़प रहा था….वो तेज़ी से उठा और सीढ़ियों पर दो कदम नीचे उतर कर ममता के सामने जाकर खड़ा हो गया….ममता ने एक बार फिर से नीचे की तरफ नज़र डाली और फिर एक दम विनय को अपने बाहों में भरते हुए, अपने से चिपका लिया….और उसके गालो और माथे पर चूमते हुए बोली….”ओह्ह्ह मेरे शोना कहाँ था सारा दिन….पता है इतना अच्छा मोका था आज…..दीदी और वशाली शीतल दीदी के घर गये थे….आधे घंटे बाद वापिस आए….पर तू पता नही कहाँ गायब हो गया था….”

विनय: वो मैं तो दोस्त के घर चला गया था….

ममता: चल वो सब छोड़……आज अपनी दोस्त को प्यार कर ले…..कल तो मैं घर जा रही हूँ….

विनय: (चोन्कते हुए) क्या कल घर जा रही हो आप…..?

ममता: हां मम्मी पापा ने बुलाया है…..चल वो सब बाद में बात करेंगे…..

ये कहते हुए ममता ने अपने सुर्ख रसीले होंटो को विनय के होंटो से लगा दया…..जैसे ही विनय के मूह मे ममता के सुर्ख होन्ट का रस घुला, तो उसकी आँखे मस्ती मे बंद होती चली गयी…..आँखे तो ममता की भी बंद होने लगी थी….पर वशाली कभी भी ऊपेर आ सकती थी…विनय ने कुछ ही पॅलो मे ममता के होंटो को अपने होंटो मे दबा-2 कर चूसना शुरू कर दिया…..उसका लंड उसके शॉर्ट मे एक दम तन चुका था…..जिसे ममता अपनी सलवार के ऊपेर से अपनी चूत पर रगड़ ख़ाता हुआ सॉफ महसूस कर पा रही थी…..ममता का दिल तो कर रहा था कि, वो अभी अपनी सलवार उतार कर विनय के लंड को चूत में घुसवा ले, और विनय उसके जबरदस्त चुदाई करे…..

पर समय इसकी इजाज़त नही दे रहा था…..विनय के हाथ खुद ब खुद ही, ममता के कुर्ते के ऊपेर से उसकी चुचियों पर आ चुके थे….और जैसे ही विनय ने ममता की चुचियों को अपने हाथो मे लेकर दबाया तो, ममता के रोम-2 में मस्ती की लहर दौड़ गयी…..पर तभी उसे किसी के सीढ़ियों पर चढ़ने की आवाज़ आए तो, वो एक दम से विनय से अलग हो गयी… “लगता वशाली ऊपेर आ रही है….दोनो वापिस ऊपेर जाकर बिस्तरों पर बैठ गये…

नीचे बिस्तर पर बैठ कर, कुछ देर वो ऐसे ही इधर उधर की बातें करते रहे….अजय अभी तक नही आया था….तीनो रात के 10 बजे तक आपस में बातें करते रहे….फिर धीरे-2 सब को नींद आने लगी….अजय कब आया उन तीनो को पता नही चला….सुबह-2 5 बजे का वक़्त था….आज आसमान मे घने बदल छाए हुए थे….बेहद ठंडी हवा चल रही थी……ऊपेर से कूलर की ठंडी हवा से कूलर के सबसे नज़दीक लेटी वशाली की नींद खुल गयी….

ऊपेर हल्की-2 सर्दी लग रही थी……इसीलिए वो उठ कर नीचे जाने लगी….और जैसे ही उसने नीचे जाने के लिए सीढ़ियों का डोर खोला तो, उसकी आवाज़ सुन कर ममता भी जाग गयी….उसने अपनी अध खुली नींद से भरी आँखो से सीढ़ियों के डोर की तरफ देखा….जहाँ से वशाली नीचे उतर गयी…..उसने थोड़ी देर वेट किया और फिर सीढ़ियों के डोर पर जाकर नीचे देखा. वशाली नीचे जा चुकी थी….उसने जल्दी से सीढ़ियों के डोर को फिर से लॉक किया…..और तेज़ी से विनय के पास आकर नीचे बैठते हुए उसके गालो को थपथपाते हुए जगाना शुरू कर दिया…..विनय ने आँखे खोल कर देखा तो ममता उसके बगल मे बैठी हुई, उसकी तरफ अजीब सी नज़रो से देखते हुए मुस्कुरा रही थी……आसमान में अभी भी हल्का-2 अंधेरा था…..उसने दूसरी तरफ नज़र डाली, जिस तरफ वशाली सोई हुई थी……जब उसको पता चला कि, वशाली ऊपेर नही है, तो उसे ममता की मुस्कुराहट के पीछे छुपे हुए राज़ का पता चल गया…..जब ममता ने विनय को वशाली की तरफ देखते हुए देखा तो, वो मुस्कुराते हुए धीरे से फुसफुसा कर कहा… “नीचे चली गयी है…..” ममता ने इधर उधर देखा, पास के घर की छत पर भी कुछ लोग सोए हुए थे….

ममता: (धीरे से फुसफुसाते हुए) विनय मैं बाथरूम में जा रही हूँ….थोड़ी देर बाद तुम भी आ जाना….

ममता खड़ी हुई, पास वाले घर की छत पर नज़र डाली, और फिर धीरे-2 बाथरूम की तरफ बढ़ी, छत पर एक छोटा बाथरूम था….जो कम ही यूज़ किया जाता था…..और फिर जैसे ही ममता बाथरूम में घुसी, तो विनय भी उठ कर बाथरूम की तरफ चल पड़ा….उसकी नज़रें भी बाथरूम की तरफ जाते हुए, चारो तरफ का मुआईना कर रही थी….फिर वो जैसे ही विनय बाथरूम में एंटर हुआ, तो ममता ने बाथरूम का डोर बंद करते हुए, विनय को अपनी चुचियों से कस्के चिपका लिया…..

सुबह-2 जैसे ही विनय को जैसे ही अपनी चेस्ट मे ममता की चुचियों के तने हुए निपल्स महसूस हुए, तो विनय की सारी सुस्ती और नींद एक दम से गायब हो गयी……ममता ने कुछ पलों के लिए विनय के होंटो को चूमा और फिर विनय से अलग होते हुए तेज़ी से हड़बड़ाते हुए बोली. “विनय जल्दी करो….अपना शॉर्ट्स उतारो…….” विनय ने झुक कर अपने शॉर्ट्स को जैसे ही नीचे किया तो, उसका लंड जो की मॉर्निंग बोनर के कारण एक दम तना हुआ था, बाहर आकर झटके खाने लगा….ममता ने लपक कर विनय के लंड को अपने हाथ मे भर कर हिलाया….तो उसका लंड और भी तन गया……..

ममता: (विनय के लंड को छोड़ते हुए) चल पूरा उतार दे……

विनय ने जैसे ही अपना शॉर्ट्स उतार कर अपनी टाँगो से निकाला तो, ममता ने उसका शॉर्ट्स पकड़ कर हॅंगर पर टाँग दिया….”चल जल्दी से वहाँ पर बैठ जा” ममता ने कमोड की तरफ इशारा करते हुए कहा….विनय कमोड पर बैठ गया……ममता ने जल्दी से अपनी सलवार का नाडा खोला और फिर अपनी सलवार और पेंटी के जबरन में उंगलियों को फन्साते हुए दोनो को एक ही साथ मे उतारते हुए, अपनी टाँगो से निकाल कर हॅंगर पर टाँग दिया….विनय तरसती हुई नज़रों से ममता की तरफ देख रहा था…….उसकी चूत की एक झलक पाने के लिए उसका मन नज़ाने कब से तरस रहा था….


अभी भी ममता की बिना बालो वाली चूत उसकी नज़र के सामने नही थी…..ममता के कुर्ते का पल्ला उसकी जाँघो तक को ढके हुए था….जब ममता ने विनय को इस तरह अपनी जाँघो की तरफ घुरता पाया, तो उसके होंटो पर तीखी कामुक मुस्कान फेल गयी….वो समझ गयी कि, विनय की नज़रें किस चीज़ को तलाश कर रही है……पर आज वो विनय के दिल की हर खावहिश पूरा कर देना चाहती थी…..क्योंकि उसके बाद तो, वो 20 दिन के लिए अपने मायके जा रही थी…..वो अपनी गान्ड को मटकाते हुए विनय सामने आकर खड़ी हो गयी…….

और फिर अपने कुर्ते के पल्ले को पकड़ कर धीरे-2 अपनी कमर तक उठा दिया……जैसे ही विनय की नज़र ममता की जाँघो में कसी हुई चूत पर पड़ी, तो विनय के लंड ने जबरदस्ता झटका खाया…..जिसे देख ममता मंद-2 मुस्कुराते हुए बोली……”इसे ही ढूँढ रही थी ना जनाब की नज़रें…..अब ऐसे बैठे देखते ही रहोगे, या फिर इसको छू कर भी देखना है…..” विनय ने ऊपेर सर उठा कर देखा तो, ममता की आँखो में वासना के लाल डोरे तैर रहे थी. विनय ने गाले का थूक गटकते हुए, हां में सर हिला दिया……

उसने अपने काँपते हुए हाथ को धीरे से जैसे ही ममता की चूत की फांको पर रखा, तो ममता ने सिसकते हुए, अपनी जानफहो को खोल कर फेला दिया….”श्िीीईईईईई विनय हाआँ ज़ोर से मसल इसको……” विनय ने अपनी पूरी हथेली उसकी जाँघो के बीच में लेजाते हुए, चूत की फांको के ऊपेर रखते हुए धीरे-2 उसकी चूत को मसलना शुरू किया, तो ममता का पूरा बदन थरथरा गया……अभी विनय ने कुछ ही देर ममता की छूट को मसला था कि, ममता ने उसके हाथ को अपनी चूत से हटाते हुए, विनय की जाँघो के दोनो तरफ पैर करके खड़ी हो गयी….

फिर एक हाथ नीचे लेजा कर विनय के लंड को पकड़ा और अपनी चूत के छेद पर सेट करते हुए धीरे-2 नीचे की ओर अपनी चूत को दबाने लगी, तो विनय के लंड का सुपाडा ममता की चूत की फांको को चूत के छेद पर तरफ खेंचता हुआ थोड़ा सा ही अंदर घुस पाया…..ममता की चूत एक दम सुखी थी…..सुबह-2 उसकी चूत बिल्कुल भी नम नाही थी….ममता ने अपनी गान्ड को विनय की जाँघो से ऊपेर उठाया…..और फिर एक हाथ को अपने मूह के सामने लाते हुए, उसमे ढेरे सारा थूक अपने मूह से उगल दिया…..

विनय ये सब पहली बार देख रहा था…..उसे इतना तो समझ आ गया था कि, आज मासी की चूत उस दिन की तरह पानी नही छोड़ रही है…..पर वो अपने हाथ पर थूक क्यों रही है….ये बात विनय की समझ से परे थी…..ममता ने अपने हाथ मे थूक लेकर हाथ को नीचे किया…और फिर विनय के लंड पर उस हाथ से अपने थूक को फैलाते हुए मलने लगी…..फिर जो थोड़ा सा थूक उसके हाथ मे बचा था, उसने उसे जल्दी से अपनी चूत के छेद और फांको पर लगा दिया……उसने फिर से विनय के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर सेट किया, और जैसे ही थोड़ा सा वजन उसने नीचे की ओर डाला तो, ममता के थूक से सना हुआ विनय का लंड फिसल कर सुपाडे तक ममता की चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा…..

ममता: शईईईईईई उंह बन गया काम……ओह्ह्ह्ह विनय…….

ममता ने तब तक अपनी चूत को विनय के लंड के सुपाडे पर दबाना जारी रखा, जब तक विनय का पूरा लंड ममता की चूत की गहराइयों मे समा नही गया….अपनी चूत को विनय के लंड से पूरी तरह भरा हुआ महसूस करके, ममता के पूरे बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी… उसने विनय के होंटो पर अपने तपते हुए होंटो को लगा दिया……दोनो पागलो की तरह एक दूसरे के होंटो को चूसने लगी….

ममता अब विनय की जाँघो पर बैठी हुई, तेज़ी से अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी…. विनय का लंड भी उसी रफतार से ममता की चूत के अंदर बाहर हो रहा था…..कुछ ही पलों मे ममता इतनी गरम हो गयी कि, उसकी चूत जो थोड़ी देर पहले एक दम खुसक थी. अब उसमे मानो जैसे पानी की बाढ़ आ गयी हो….अब विनय का लंड भी ममता की चूत से निकल रहे कामरस से भीग कर आसानी से अंदर बाहर होने लगा था….

विनय भी अब पूरी तरह मदहोश हो चुका था…..उसके हाथ खुद ब खुद ममता की चुचियों पर आ गये थे……और जैसे ही उसने ममता की चुचियों को पकड़ कर मसलना शुरू किया, तो ममता एक दम जोश से भर उठी, उसने पूरे जोश मे आते हुए तेज़ी से अपनी गान्ड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया…..”अह्ह्ह्ह ओह विनय श्िीीईईईई ओह मज़ा आ रहा है ना……श्ईईई मेरी फुददी मार कर…..” ममता ने सिसकते हुए विनय की आँखो मे देखते हुए बोला…..

विनय: अहह हाआँ बॅ बहुत मज़ा आ रहा है ओह……

ममता ने विनय के हाथो पर अपने हाथ रखे, और उसके हाथो को अपनी चुचियों से हटाते हुए, अपनी कमर के पीछे लेजाना शुरू कर दिया….ये सब करते हुए ममता की कमर लगतार आगे पीछे होते हुए हिल रही थी….उसने विनय के हाथो को पीछे लेजा कर अपने मोटे-2 चुतड़ों पर रख दिए….”ष्हिईीईईई ओह विनय इन्हे भी मसलो……श्िीीईईईई” जैसे ही विनय के हाथ ममता के मोटे चुतड़ों पर लगे तो, विनय का दिल और तेज़ी से धड़कने लगा….आज पहली बार वो ममता के चुतड़ों को छू रहा था….विनय ने ममता के चुतड़ों को पकड़ कर धीरे-2 मसलना शुरू कर दिया….”श्िीीईईईईई ओह विनय हाआंस ऐसीए हीए और ज़ोर से दबा मेरी गान्ड को….”

विनय तो पहले ही बहुत मस्त हो चुका था…..इसीलिए अब वो ममता के चुतड़ों को पागलो की तरह अपनी हथेलियों मे दबोचते हुए मसल रहा था…….ममता ने अब अपनी गान्ड को पूरी रफ़्तार से हिलाना शुरू कर दिया था…..”ओह श्िीीईईईई विनय ओह हइई देख आह मेरी फुद्दि पानी छोड़ने वाली है अहह उंह शियीयीयैआइयीयीयियी” ममता बुरी तरह से मचलते हुए झड़ने लगी……और साथ ही विनय के लंड से वीर्य की धार निकल कर उसकी चूत को अंदर तक भरने लगी…..


सुबह के 9 बज रहे थे…..ममता अपने मायके जाने के लिए तैयार थी……विनय बाहर बरामदे मे एक कोने मे बैठा हुआ, तरसती हुई नज़रों से ममता को बार-2 देख रहा था. कैसा रोग वो उस मासूम को लगा कर उससे दूर जा रही थी……अब मैं ये सब किसके साथ करूँगा…..अब तो मासी 20 दिन बाद ही वापिस आएँगी…..इतने दिन तक कैसे वेट करूँगा..

“विनय जा ममता को बस स्टॉप तक छोड़ आ…..” अपनी मामी किरण की आवाज़ सुन कर विनय अपने ख़यालों की दुनिया से बाहर आया….”जी छोड़ आता हूँ……” विनय ने उदासी के साथ सर को झुका लिया, तभी ममता भी अपना बॅग उठा कर विनय के पास आ गयी…..फिर ममता ने किरण से विदा ली, और विनय के साथ बाहर आ गयी…..दोनो गली मे चलते हुए रोड की तरफ जाने लगे….

ममता: क्या बात है उदास लग रहे हो….?

विनय: नही तो……

ममता: ह्म्म्म्म जानती हूँ……तुम्हे मेरा जाना अच्छा नही लग रहा ना…..?

विनय: (हां मे सर हिलाते हुए) जी…..

ममता: दिल छोटा मत करो मेरे शोना……मैं जल्दी वापिस आने की कॉसिश करूँगी…..

विनय: कब तक आ जाएँगी आप…..?

ममता: अभी तो कुछ कह नही सकती……पर जल्दी से सारा काम ख़तम करके वापिस आने की पूरी कॉसिश करूँगी……मेरा भी अब तुम्हारे बिना कहाँ दिल लगेगा…..

ममता की बात सुन कर विनय को तसल्ली हुई, कि ममता भी तो उससे दूर जान बुझ कर नही जा रही है…..रोड पर जाकर दोनो बस स्टॅंड पर खड़े हो गये…….”अब ऐसे मूह लटका कर रखोगे तो मुझे सारे रास्ते मे तुम्हारा ये उदास चेहरा नज़र आता रहेगा…..” ममता ने स्माइल करते हुए कहा….तो विनय ने जबरन अपने होंटो पर मुस्कान लाते हुए कहा….”आप मेरी चिंता मत करिए……आप वहाँ जाकर जल्दी से काम ख़तम करके आ जाना…..मैं वेट करूँगा…”

इतने मे बस आ गयी…..ममता ने प्यार से विनय के गाल को चूमा और फिर बस मे चढ़ गयी…..विनय ने बाहर खड़े होकर हाथ हिलाते हुए उससे विदा किया, और उसके बाद उदास चेहरा लिए हुए घर की तरफ लौटने लगा | समाप्त


दोस्तों जुड़े रहिये मस्तराम के साथ और पढ़ते रहिये मस्त मस्त कहानिया और कमेंट कर मुझे ये भी बताईये कहानी कैसी लगी  |


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लंड को पहली बार मिली चूत-8

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