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मेरी बीवी और उसका जिम ट्रेनर-9


और अब आगे की कहानी :  जावेद ने मिताली को खिंचा और ऊपर उठाके उसी रूम के अंदर के एक टेबल पर बिठा दिया। जावेद ने मिताली को फिर उस टेबल के ऊपर सुला दिया और खुद टेबल के बाजु में खड़े होकर सोयी हुई मिताली के नंगे बदन को निहारने लगा और मजे लेने लगा। उस पोसिशन में भी मिताली के मम्मे कड़क और निप्पल खड़े हुए दिख रहे थे। जावेद इस तरह खड़ा था जैसा कोई मसाज करनेवाला मसाज करने के लिए क्लायंट के पास खड़ा होता है।


जावेद मिताली के ऊपर झुका और उसने मिताली को किस करना शुरू किया। पहले माथे पर, फिर होठों पर उसके बाद गर्दन पर चूमते हुए जावेद निचे की तरफ जाने लगा। गर्दन के बाद चूचियों को चूमा उसके बाद मिताली के नाभि को और आखिर में मिताली के ट्रैक पैंट के ऊपर से मिताली की चूत चूमकर जावेद रुका। फिर जावेद के हाथों ने ट्रैक पैंट के ऊपर से ही मिताली की चूत को पकड़ा।


जावेद : जानू, क्या ये मेरे लिए तैयार है ?


मिताली : ह्म्म्म्………. बहुत ज्यादा……


जावेद : दैट्स ग्रेट जानू।


ये कहते हुए जावेद ने मिताली के पैंट को निचे की तरफ सरकाना शुरू किया। ये देखकर में भी मन निचे निचे जाने लगा। मैं गिर रहा था। मै अपने खुद के सामने ही मेरी बीवी को किसी दूसरे मर्द के हाथों खो रहा था। धोखेबाजी की वजह से जो दर्द मेरे दिल में उभरा था अब वो और भी ज्यादा तीव्र होते जा रहा था। लेकिन इसी वजह से जो भाव मेरे बीवी के चेहरे पर उभरके आ रहा था वो बिलकुल ही अलग था। इस पूर्व समय में मेरी बीवी बस जावेद के लंड को अपने हाथों से मसले जा रही थी।


मिताली की आँखों में अब एक कामुक चमक थी। इतने समय में उसने एक बार भी अपनी नज़रे जावेद के उस हत्यार से नहीं हटाई थी। मेरी बीवी पूरी तरह जावेद के लंड से सम्मोहित हो चुकी थी। और वो जावेद के लंड की तुलना मेरे लैंड से कर रही थी। और कह रही थी की जावेद का लंड देखने के बाद अतुल के नुन्नी को लंड कहना भी योग्य नहीं है।mastaram (8)


जावेद ने पूरी तरह मेरी बीवी की ट्रैक पैंट निकल कर फेंक दी। मिताली की कामुक जांघे और बेहतरीन टाँगे अब दिखाई देने लगी थी। वो हर रोज़ एपिलेटर का इस्तेमाल करती और हमेशा अपनी टांगो को वैक्स करती थी। इसलिए वो काफी आकर्षक दिखाई दे रही थी। जावेद उसकी खरदूरी उंगलिया मिताली के टांगो पे फेरने लगा। उसके स्पर्श से होनेवाली गुदगुदी की वजह से मिताली अपनी टांगे खिंच लेती और उसका शरीर हिलने लगता था। जावेद ने मिताली के जांघो पर चूमना शुरू किया साथ ही साथ वो उसकी जांघो को हाथों से मसल भी रहा था। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है


फिर जावेद अपने हाथ मिताली की चूत के आसपास फेरने लगा लेकिन जानबूझकर उसने मिताली की चूत को टच भी नहीं किया। मिताली अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी उसने जावेद का ये खेल कुछ देर सहन किया लेकिन अब और नहीं। उसने जावेद का हाथ खिंचा और जावेद की हथेली पैंटी के ऊपर से ही अपनी चूत पर रखी और उसने वहां और से दबाया। मिताली ने जावेद का हाथ तब तक दबाकर पकड़ा जब तक उसे पूरी तरह शांति न मिली हो।


जावेद ने भी अब मिताली को चिढ़ाना छोड़ दिया। और उसका चेहरा मिताली की पैंटी के ऊपर ले गया। वहांपर उसने जोर की की सांस ली और वो मिताली के चूत की खुशबु सूंघने लगा। फिर वो उसके होठों से वहांपर चूमने लगा। जिससे मेरी बीवी का जिस्म बड़ी जोरो से धक्के खाने लगा। उसे फिर से उसका ओर्गास्म प्राप्त हो चूका था।


मिताली ने जावेद के बाल पकड़कर उसे खिंचा था और वो अब जावेद का चेहरा चूत पर दबाकर जोरदार सिस्कारियां भर रही थी। अब जावेद के उँगलियों ने धीरे धीरे पैंटी को और खींचना शुरू किया। जिसकी वजह से शर्म और हवस के मारे मिताली का चेहरा गुलाबी हो चूका था। वैसे तो मिताली हमेशा उसकी चूत क्लीन शेव्ड रखती थी। लेकिन उसे ये पता नहीं था की आज ये मामला शायद यहाँ तक पहुंचेगा इसलिए उस दिन उसने चूत शेव नहीं की थी। उसकी चूत पर छोटे छोटे कटे हुए हलके से बाल नजर आ रहे थे। लेकिन ये देखकर जावेद और गर्म हो गया। जावेद ने कुछ देर हथेली पूरी चूत पर घुमायी। जिससे अब मिताली अपने आप पे का नियंत्रण खो चुकी थी उसका शरीर हिलने लगा था। जावेद की उंगलिया अब मिताली के चूत के दाने को रगड़ रही थी। मिताली ने अब उसकी पीठ थोडीसी उठाई और जावेद के हाथ को जोर से थामा ताकि जावेद को रोक जा सके. लेकिन जावेद फिर भी चालू रहा।


मिताली : प्लिज्……. प्लिज…… रुक जाओ न। मुझे चक्कर सा आने लगा है।


जावेद : तुम्हे चक्कर नहीं आ रहा है जानू। वास्तव में तुम आनंद के परमोच्च शिखर पर पहुँच चुकी हो। पीछे हटो और बस एन्जॉय करो छिनाल रंडी। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है


जावेद ने अब अपने हाथ मिताली की चूत से हटा दिए लेकिन अब वहांपर खुद के होंठ टेक दिए। मिताली उसे रोकने के लिए जोर से गांड को आगे पीछे करने लगी। मिताली को लग रहा था की वो अब नहीं सहन कर पायेगी और आखरी बार चूत का पानी छोड़ देगी। लेकिन जावेद ने मिताली को धकेला और अपने होंठ मिताली की चूत पर रख दिए। वो मिताली के चूत को चूसने लगा। उसके चूसने की आवाज़े सुनकर शायद किसीका जगह पर ही पानी निकल जाये। जावेद ने मिताली के चूत के दाने को दांतो के बीच पकड़ा और हलके से खींचा जिससे मिताली अब हिलने लगी थी। और इस तरह तड़पने लगी जैसे मछली को पानी से बाहर निकल दिया हो।


मिताली : प्लिज्………. प्लिज्………. प्लिज……… प्लीज नहीं।


जावेद ने इस सबकी परवा नहीं की उसने उसका काम जारी रखा। जावेद ने अब खुदका सर वहां से हटाया और मिताली की बायीं जांघ को अंदर से चूमने लगा। थोडासा घुटने के ऊपर। मिताली की जांघ की मखमली नरम कोमल चमड़ी को जावेद अब जबान से चाटने लगा। मिताली के घुटने से उसकी चूत तक जावेद चाटते हुए जाने लगा।


जावेद को मुंह चूत के प्रवेशद्वार पर लगते ही मिताली एक बार फिर छटपटाई। मैंने मिताली के साथ कभी ऐसा नहीं किया था। जावेद का एहसास मिताली को पागल बना दे रहा था मिताली ऐसे थी जैसे मानो ये उसका सपना था जो पूरा हो रहा था। जावेद अभी तक मिताली के चूत के छेद तक नहीं पहुंचा था। लेकिन फिर अब तक मिताली जितनी गर्म हो चुकी थी उतनी इसके पहले जिंदगी में कभी नहीं हुई थी। और मैंने या मिताली ने कभी सोचा भी नहीं था उतना जिंदगी में पहली बार उसकी चूत गीली हो गई थी।


अब जावेद ने मिताली के बाये जांघ को चाटना शुरू किया। और ऊपर सरकने लगा। पूरी जांघ पर जावेद अपने जबान की लौ फिराए जा रहा था। जैसे ही वो चूत के छेद की नजदीक पहुंचा वैसे ही उसने चाटने की गति काम कर दी। और फिर एक दम से ही दबाव बढ़ाके पुरे दात मिताली के जांघ में घुसाकर चाटने की गति बढाई। इसकी वजह से मिताली अब उसकी गांड ऊपर की तरफ हवा में उछलने लगी।


जावेद ने अपनी जबान को थोड़ा फैलाया और वो उसके चूत के दाने पर जम के बरसाने लगा। जैसे दाने को फटकार लगा रहा हो। जावेद मिताली के चूत का रस पी रहा था उसकी आवाज़े ऐसी आ रही थी जैसा कोई कुत्ता पानी पी रहा हो। वैसे भी वो हरामी मुसलमान किसी कुत्ते से कम नहीं था। लेकिन इसका नतीजा ये हुआ की फिर से मिताली के चूत में पानी की बाढ़ आ गयी। मिताली ने फिर से परमोच्च ओर्गास्म को प्राप्त किया था।


मिताली : ओह्ह्ह्ह ह…… आह्ह्ह्ह्ह………नहि…नहि… ओह्ह्ह्ह……मै………मै छूट रही हूँ.……… ओह्ह्ह्……. आह्ह्ह्ह्ह्……. आआआआअ……… आह्ह्ह्ह्ह्ह……… मिताली को जैसे जिंदगी भर का क्लायमैक्स मिल चूका था। मिताली अब पूरी तरह ख़त्म हो चुकी थी। लेकिन उसकी आँखों की वासना ख़त्म नहीं हुई थी। जावेद के होंठ और जबान निचे की तरफ जाने लगे और आखिर में उसकी चूत के द्वार पर पहुँच गए। जावेद ने मिताली के चूत का पानी किसी प्यासे जानवर की तरह पिया। मिताली अब किसी अनोखी अवस्था में थी वो अब खुद का होश खो चुकी थी।


मिताली के होंठ हिल रहे थे जैसे की वो कुछ गुणगुणा रही हो। ये सब अब बहुत हो चूका था। अब उस चीज़ की बारी थी।


जावेद ने अब उसके हाथ मिताली के जांघो पर अंदर की तरफ रखा। और उसके दोनों पैर जितने फ़ैल सकते थे उतना फैलाया। वो खड़ा हुआ और मिताली की चूत के ऊपर झुक गया। और जबान मिताली के चूत पर फिरने लगा। अब वो इतनी तेज़ी से जबान फिरने लगा जैसे जबान से वो मिताली की चूत चोद रहा था। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है


मिताली : ओह गॉड …, यस। और चूसो … और चाटो…… तेज़ी से चाटो


मिताली की आहे अब चीखो में बदल चुकी थी वो जोर जोर से चिल्लाने लगी।


जावेद अपनी जबान मिताली के चूत के दाने पर ले गया। और बड़ी तेज़ गति में वो वहां चूसने लगा। वो बस तेज, तेज और तेज अपनी गति बढ़ा रहा था। मिताली ने जावेद का सर दोनों हाथों से चूत पर दबाकर रक्खा था। लेकिन मिताली की गांड टेबल पर कूद रही थी। हाल ऐसा था जैसा मिताली जावेद का चेहरा चोद रही हो। मिताली अपनी पूरी ताकत लगाकर गांड को धक्के दे रही थी।


थोड़ी देर बाद मिताली ने टाँगे खींची और जोर से चिल्लाई, “येस्स्स्स्स्स्स……… यस !!! येस्स्स्स्सस……। ओह गॉड……. येस्स्स


मिताली अब दिमाग की सोच से ऊपर निकल चुकी थी। वो बस धक्के पर धक्के मारती चली गयी। मिताली की चूत के दाने पर, उसकी नाभि पर, कमर पर और निप्पल पर बस पानी ही पानी था। सफ़ेद पानी। वो पूरी बॉडी का ओर्गास्म था। जावेद का पहला पानी। वो काफी गाढ़ा था।


मिताली को कुछ मिनट लगे वापस जमीं पर लौटने के लिए। मिताली पूरी तरह ख़त्म हो चुकी थी और जावेद भी यह बात जानता था। इसलिए दोनों ने कुछ देर का ब्रेक लिया।


कुछ देर तक के लिए दोनों बस एक दूसरे को सहला रहे थे। और चुम्माचाटी कर रहे थे। मिताली टेबल पर लेटी हुई थी और जावेद वहीँ टेबल के पास खड़ा था। दोनों मादरजात नंगे थे। मिताली की बॉडी पसीने में भीगी हुई थी। जावेद जरा भी नहीं हिचकिचा रहा था वो लगातार मिताली के अर्दन को नाभि को पेट को चूमते जा रहा था।


मिताली ने हाथ में जावेद का लंड पकड़ा हुआ था जो अब किसी खम्बे की तरह खड़ा था। जावेद के अंडे पूरी तरह फूल चुके थे वो पूरा पानी से भरे हुए लग रहे थे। जावेद का एक हाथ अभी भी मिताली के जांघो के बीच था और वो मिताली के चूत के दाने को रगड़ रहा था। और दूसरा हाथ मिताली के चुचो पर था वो मिताली के निप्पल को पिंच कर रहा था। उस कमरे में अब गर्मी बढ़ती जा रही थी। जावेद : हे डॉल। क्या तुम्हे मेरा ये ट्रीटमेंट पसंद आया ?


मिताली : येस्स्स्सस……. ये काफी इंटेंस था। इस तरह का आनंद मुझे पहली बार हुआ है।


जावेद : क्या तुमने कभी तुम्हारे पति के साथ ये सब कुछ एन्जॉय किया है ?


मिताली : नहीं, कभी नहीं। उसे जिंदगी का मजा नहीं लेने आता। उसे बस कुछ ही चीज़े पता है। और बाकि चीज़े करने के लिए उसमे ताकत ही नहीं है।


जावेद : तो बताओ मेरे लंड के सामने उसका लंड कैसा है ?


मिताली : मुझे तुम्हारा लंड बहुत पसंद है। मुझे ऐसा लग रहा है जैसा। …… ह्म्म्म्म्………. जैसा मैंने कोई स्टील का रॉड पकड़ा है।


मिताली : अतुल का लंड रबर की तरह है। वो बस पूरी तरह कचरा है। मुझे उसका लंड कभी पसंद नहीं आया।


जावेद : व्वा जानू। तुम असल में एक रंडी छिनाल हो जो इस तरह की बाते कर रही हो। इसके वजह से मै और भी ज्यादा गर्म हो रहा हु।


मिताली : ह्म्म्म्म्म……… थैंक्स।


जावेद : वो चोदता कैसे है ?


मिताली : उसकी नुन्नी कभी मुझे मेरे चूत के अंदर महसूस ही नहीं हुई। उसकी नुन्नी काफी ढीली थी चूत के अंदर भी वो कड़क नहीं हो पता था। मै बस लेटी रहती और उसके ख़त्म होने का इंतज़ार करती थी।


जावेद : गुड.…… बेबी ……… जारी रखो……और बताओ उसके बारे में


मिताली : (दोनों हाथों से जावेद का लंड मसलते हुए ) उसमे चोदने की शक्ति थी ही नहीं। बिस्तर पर वो पूरी तरह निरुपयोगी छक्का था। मुझे हमेशा से यही लगता था की मै उसके साथ सेक्स क्यों कर रही हूँ। मै उसके साथ हमेशा सेक्स वक्त मन ही मन में तुम्हारे जैसे जंगली मर्दो के बारे में सोचती थी। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है


जावेद : ह्म्म्म्म……… सुपर…… गो बेबी


मिताली : मुझे ये कभी एहसास ही नहीं हुआ की उसने कब पानी छोड़ दिया। वो पानी भी क्या था उसका वीर्य भी पेशाब की तरह पतला था। और बस १० – १२ बूंदो के बाद वो ठंडा जाता। पूरी तरह बगैर काम का पानी। वो पानी मुझे बच्चा भी न दे सका।


जावेद : ओके जानू। मै काफी ओवरलोड हो चूका हूँ। तुम मेरी अब गर्मी नहीं समझ सकती। बस हुआ। अब मै ज्यादा सहन नहीं कर सकता।


मै इस तरह की रंडीगिरी बाते सुनकर अपमानित हो गया था। अपमान की वजह से मेरी आँखों में आंसू आ गए थे। अगर मिताली मुझसे इससे पहले कह देती तो शायद मै अस्पताल में इलाज करवाता। हमारा भी बच्चा होता लेकिन ये सब उसने मुझसे नहीं कहा। मिताली की बातों में मेरे लिए नफरत थी।


दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में पढ़िए | आप भी अपनी कहानी भेज सकते है कहानी भेजने के लिए यहाँ क्लिक करे


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मेरी बीवी और उसका जिम ट्रेनर-9

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