All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

कुत्ते ने की मेरी पहली चुदाई


मेरा नाम शबनम है. मेरे परिवार मे सिर्फ़ मम्मी, पापा, मेरे बड़े भैया और मैं हैं. हां, और हमारा अल्सेशन कुत्ता जिसका नाम  भोलू है. जब मैं 11 साल की थी हम एक छ्होटे से घर में रहते थे. एक किचन, बाथरूम और दो कमरे. भैया एक कमरे में सोते थे और मैं मम्मी पापा के साथ एक कमरे में. घर छ्होटा होने के कारण मैने कई बार पापा और मम्मी को प्यार करते देखा था. पापा मेरी मम्मी के उपर चढ़ जाते थे और मम्मी अपनी लातें फैला देती थीं और फिर पापा अपना लंड उनके अंदर डाल देते थे. फिर पापा उपना लंड मम्मी की चूत में अंदर बाहर करते थे और कुछ देर बाद मम्मी सिसकारियाँ लेने लगती थी. मुझे लगता था के उन दोनो को खूब मज़ा आ रहा है. उन दिनो में मुझे यह बातें अजीब नहीं लगी. मैं नादान थी और मुझ पे अभी जवानी का जोश नही चढ़ा था. जब मैं 12 साल की हुई तो मेरा बदन बदलने लगा. मेरी छाती पे मेरे बूब्स आने लगे, मेरी चूत पर हल्के हल्के बाल उगने लगे.मैं जवान होने लगी. मैने आजमाया कि अपने बूब्स को सहलाने से मुझे अजीब सा मज़ा आता है. जब मैं अपनी चूत पर हाथ फेरती तो बहुत ही अछा लगता. जब मैं मम्मी पापा को चुदाई करते देखती तो जी करता के मैं भी उनके साथ यह प्यार का खेल खेलूँ: पापा मेरे भी बूब्स को दबाएँ और अपना लंड मेरे अंडर डालें और में उनका लंड मुँह में लूँ और चूसू, जैसे मम्मी करती थी. फिर स्कूल में मेरी सहेलियों ने मुझे बताया के यह चुदाई का क्या मतलब है. मेरी सहेली लता ने तो अपने परोसी लड़के के साथ ट्राइ भी किया था. hindi sex kahaniya (www.mastaram (10)


उसने बताया के लड़के के लंड को हाथ मे लेके सहलाने से वो बड़ा हो जाता है और वो लोहे जैसे सख़्त अकड़ जाता है और उसको फिर मुँह में लेके चूसने में बहुत मज़ा आता है. उसने अपने फ्रेंड का लंड अपनी चूत पे भी उपर नीचे रगड़ा था. उसको बहुत अछा लगा था. उसने बताया के लंड चूसने के बाद वो झाड़ जाता है और उसमे से खूब सारा मलाई जैसा पानी निकलता है जिसको पीने में बहुत मज़ा है. उसने बताया के वो अब अपने फ्रेंड का लंड अंदर भी लेना चाहती है. सिर्फ़ मौका मिलने की बात है. यह बातें सुनती तो मेरे अंदर अक्सर एक अजीब सी गरमाइश उठती थी और मेरा दिल करता था के मैं भी यह बातें आज़माऊ. तब तक मैं 18 साल की हो गयी थी. एक दिन मैं स्कूल से आकर होमवर्क करने को बैठी. मम्मी, पापा दोनो ऑफीस गये हुए थे और मैं घर में अकेली थी. गर्मी थी इस लिए मैने सिर्फ़ टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने थे. हमारा कुत्ता भोलू कमरे में आकर मेरे पास बैठा था. मेरा मन होमवर्क पर नहीं था. मेरे सर में तो सेक्स के ख्याल आ रहे थे जैसे लता ने सुनाए थे. मैं बेड पे पीछे लेट गयी और अपने बूब्स को, जो अब साइज़ 34 के हो गये थे, अपने हाथों के साथ मसल्ने लगी. फिर मैने अपनी टी-शर्ट उतार दी ताके मेरे हाथ अछी तरह सब जगह पहुँच सकें. फिर मैने एक हाथ शॉर्ट्स के अंदर डाला और में अपनी चूत को सहलाने लगी. मेरी चूत हल्की सी गीली होने लगी और मेरी उंगलियाँ आसानी से मेरी चूत पे घूमने लगी. मेरा एक हाथ मेरे बूब्स पे और दूसरा हाथ चूत पे घूम रहा था. फिर अचानक मुझे महसूस हुआ के भोलू की गरम गरम गीली ज़बान मेरी जाँघो को चाट रही है. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैने भोलू को पीछे धकेला और गुस्से से बोली “ नो भोलू, बॅड बॉय”. मगर सच बताऊ तो वो भोलू का चाटना मुझे बहुत अछा लगा था. कुछ देर बाद भोलू फिर आकर मेरी जाँघो को चाटने लगा. मैं कुछ नहीं बोली और उसको चाटने दिया. आहिस्ता आहिस्ता वो उपर की तरफ, मेरी चूत के पास चाटने लगा. उसकी ज़बान बहुत गरम थी और उसका मुलायम फर मेरी चमड़ी पर रगड़ रहा था. मुझे बहुत अछा लग रहा था. मेरी चूत भी खूब गीली हो चुकी थी और मेरे अंदर खूब गरमाइश चढ़ चुकी थी. मैने अपनी शॉर्ट्स नीचे खिस्काई और उतार दी. अब मैं बेड पर नंगी पड़ी थी. मैने भोलू का सर अपने हाथ में लिया और उसको उपर अपनी चूत की तरफ खींचा. वो चाटने लगा. में तो बहाल होने लगी. मैने अपनी टाँगें फैलाईं और भोलू को अपनी चूत का पूरा प्रवेश दिया. अब उसकी ज़बान मेरे दाने पर भी घिस रही थी और कभी कभी मेरी कुँवारी चूत में भी प्रवेश करती थी. मैं बेड के किनारे तक खिसक गयी ताके भोलू की ज़बान सब जगह तक पहुँच सके. उसकी लंबी, गरम और खर खरी ज़बान मेरी गांड से उपर मेरे दाने तक चाट रही थी. मेरी टांगे काँपने लगी. मैं अपने चुतड उपेर करके भोलू से और जोश से चटवाने लगी. उसकी ज़बान मेरी चूत में घुस गई और मेरी गरमाइश बढ़ गई. मेरे अंदर में से यह गरमाइश मेरे पूरे बदन में फैल गई. मेरी चूत अचानक झटके देने लगी और में मज़े में खो गई. मैं तब पहली बार झाड़ गई. मेरी चूत से और पानी बहने लगा जिसको भोलू ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा. मेरा बदन पूरा थर थारा उठा. जब मुझे थोड़ा होश आया तो मैने भोलू को उपर बेड पर खींच लिया. वो दो पैर के साथ मेरे उपर खड़ा था और मेरे बूब्स को चाटने लगा. मैने फिर अपना हाथ नीचे उसके पैट को खिसकाया और मैं उसके लंड को सहलाने लगी, जोकि अभी उसके कवर में था. आहिस्ता आहिस्ता उसका लंड बाहर आने लगा. वो बहुत गरम और गीला चिकना था. थोड़ी ही देर में वो लंबा मोटा और सख़्त हो गया और भोलू हांफता हुआ हवा में, मेरे उपर धक्के लगाने लगा. मैने नीचे देखा तो उसका लंड अब कम से कम 9 इंच लंबा हो चुका था. मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसके लंड को अपनी चूत पर फेरने लगी. जन्नत का मज़ा मिल रहा था. मेरी साँस फूल गयी और मैं फिर से काँपति, झटके खाती हुई झर गई. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | अब मेरा कुत्ता भोलू पूरे जोश में था. उसका लंबा सख़्त लंड मेरी चूत के फांको के बीच था. कभी कभी वो मेरी चूत के छेद पर भी आता था और थोड़ा अंदर भी जाता था. वो झटके मारने लगा और अचानक उसका लंड मेरे अंदर कोई 3-4 इंच तक समा गया. मेरी चूत तो पूरी तरह से गीली थी और उसका लंड आगे से तीखा और चिकना था. पहले तो मुझे डर सा लगा. मेरे दिमाग़ मे आया कि अभी तो आधे से ज़्यादा लंड बाहर है, बाकी कैसे अंदर लूँगी? मगर भोलू को इन सब बातों का क्या पता था. वो तो चोद्ने में मगन था. वो अपनी १२० की रफ़्तार से मेरे अंदर बाहर जा रहा था. हर झटके के बाद उसका लंड थोड़ा और मेरे अंदर समा जाता. उसके लंड में से थोड़ा थोड़ा गरम गरम पानी सा मेरी चूत को और भी गीला और चिकना कर रहा था. मेरी चूत भरी जा रही थी और में मज़े से अपने कुत्ते से चुद रही थी. मैने जोश में आ कर भोलू को पीछे से पकड़ा और ज़ोर से अपनी तरफ खींचा. मुझे नही पता था कि क्या होगा. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर पूरा समा गया. मुझे महसूस हुआ कि मेरे अंदर कुछ फटा है और में दर्द से चीख पड़ी. भोलू ने मेरी सील तोड़ दी थी. मैने उसे धकेल कर उसको मेरे अंदर से निकालने की कोशिश करी मगर मैं उसको पीछे नही हटा पाई. उसने अपने अगले पैर मेरे बदन के पीछे अटकाए हुए थे और वो मेरे उपर चिप्टा हुआ था. उसका धड़ मेरे बूब्स और पेट पर सरक रहा था. उसकी ज़बान मेरी गर्दन और मुँह को चाट रही थी. मैं अपनी दर्द बिल्कुल भूल गयी और उसकी चुदाई का मज़ा लेने लगी. अब भोलू का पूरा 10 इंच लंबा गरम गरम मोटा लंड मेरे अंदर बाहर जाने लगा. में भी अपनी लातें फैला कर अपने चुतड उठा उठा उसके धक्कों का मुक़ाबला कर रही थी. जन्नत का मज़ा आ रहा था मुझे. उसका लंड हर धक्के के साथ मेरी पूरी गहराई तक पहुँच रहा था. मैं तब बहुत ही ज़ोर से झर गयी. मेरा पूरा बदन फिर से काँप उठा और मेरी चूत झटके खाने लगी. भोलू नही रुका और मुझे चोद्ता रहा. उसकी रफ़्तार बढ़ती गयी और मुझे ऐसे लगा जैसे उसका लंड और भी मोटा होता जा रहा है. मैने अपने हाथ से उसका लंड पकड़ा तो मैने महसूस किया कि उसका लंड जड़ के पास बहुत ज़्यादा मोटा था. मोटा ही नहीं वो तो एक टेन्निस बॉल जैसे गोल था. हर धक्के से यह गोला मेरी चूत के अंदर जाने की कोशिश कर रहा था. फिर वही हुआ. वो गोला मेरी चूत के अंदर चला गया. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मुझे लगा जैसे मेरी चूत फॅट जाएगी. भोलू फिर मेरी चूत में झरने लगा और उसने अपना गरम गरम वीर्य मेरे अंदर एक पिचकारी जैसे छोड़ दिया. अब वो अपना लंड मेरी चूत के अंदर बाहर नहीं कर पा रहा था. हम दोनो चूत और लंड से जुड़े हुए थे. फँसे हुए थे जैसे कुत्ता और कुतिया जुड़े हुए दिखते हैं. मेरा कुत्ता और में पूरे 15 मिनिट ऐसे ही पड़े रहे. उतने में मैं एक बार फिर झाड़ गयी. फिर उसका लंड ढीला हुआ और वो मेरी चूत में से निकला. साथ ही उसका ढेर सारा पानी निकला. भोलू मेरे उपर से उठा और कमरे के एक कोने में बैठके अपना लंड चाटने लगा. में बेड पर लेटी रही और अपनी पहली चुदाई का मज़ा लेती रही. एक तरफ मेरा दिमाग़ कह रहा था कि भोलू एक जानवर है, इंसान नहीं. मगर मन कह रहा था कि यह मज़ा फिर से ले लो. काफ़ी कन्फ्यूज़्ड थी मैं. अगले दिन दोपहर को जब मैं पलंग पे लेटी हुई थी, भोलू खुद ही आकर मेरी जांघे चाटने लगा. मैने कुछ देर सोचा कि मैं क्या करूँ. फिर मेरे से रहा नहीं गया और मैने अपने टी-शर्ट और शॉर्ट्स उतार दिए. बेड पे सरक कर में किनारे पर आ गयी और मैने भोलू को पूरा रास्ता दे दिया मुझे चाटने को. वो तुरंत मेरी चूत को चाटने लगा. आहिस्ता आहिस्ता उसका चाटने में और जोश आया. उसकी लंबी खर खरी ज़बान मेरी गांड के छेद पे शुरू होकर मेरी चूत और मेरे दाने तक चाट रही थी. कभी कभी उसकी ज़बान मेरी चूत के अंदर भी पहुँच रही थी. मेरा बदन अकड़ने लगा और कुछ ही मिनिट में मैं झटके खा खा कर झाड़ गयी. कुछ देर तक में ऐसे लेटी रही. जब मुझे थोड़ा आराम आया मैं उठी और फर्श पर आ गयी. भोलू का लंड उसके कवर में से निकला हुआ था और उसके पेट के नीचे लटक रहा था. उसको मैने अपने हाथ में लिया और उसको हल्के हल्के सहलाने लगी. वो अकड़ने लगा और थोड़ा थोडा पानी छोड़ने लगा. मैने आगे झुक कर उसके लंड के छेद पर ज़बान लगाई. उसका पानी गरम था और टेस्टी. नमकीन सा और थोड़ा मीठा. फिर मैं भोलू का लंड चूसने लगी. वो इतना लंबा था कि मैं उसको पूरा मुँह में नहीं ले पा रही थी. फिर भोलू आगे को धक्के मारने लगा और अपने लंड को मेरे मुँह में पेलने लगा. साथ ही वो अपना सर मोड़ के मेरी गांड को चाटने लगा. में फिर झाड़ गयी में अपने हाथों और घुटनों के सहारे में बैठी थी कुतिया जैसे. भोलू ने अपना लंड मेरे मुँह से खींचा और वो घूम के मेरे पीछे आ गया, और मेरे ऊपर चढ़ गया. उसका बदन मेरी पीठ पर था और उसने मुझे अपने अगले पैरों से ज़ोर से चिपका लिया था. उसका लंड मेरे पीछे धक्के मार रहा था. कभी गांड के पास और कभी चूत के पास. अचानक उसका निशाना ठीक हुआ और उसका लंड मेरी चूत में समा गया. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | दो तीन धक्कों में उसका पूरा 10 इंच का लंड मेरे अंदर आ गया, और वो तेज़ रफ़्तार से मेरी चुदाई करने लगा. उसका मोटा लंबा और गरम लंड मुझे पेलते पेलते मेरी पूरी गहराई तक प्रवेश कर रहा था. मैं परमानंद में थी स्वर्ग का मज़ा ले रही थी. कुच्छ 15 तो 20 मिनिट के बाद में फिरसे झाड़ गयी. मेरा पानी छूट गया और मेरा पूरा बदन थर थराने लगा. मेरी चूत झटकने लगी. भोलू उसी रफ़्तार से चोद्ता रहा. उसका लंड मेरे अंदर भरा हुआ था. मेरा क्लाइमॅक्स जारी रहा. बहुत देर के बाद भोलू ने अपना पानी मेरी चूत में छोड़ दिया. उसका लंड इतना मोटा हो गया था के वो मेरे अंदर फँसा ही रहा. निकल नहीं पा रहा था. जैसे कुत्ता और कुतिया फँसते हैं वैसे हम दोनो फँसे हुए थे. में लगातार झाड़ रही थी. सोच रही थी के यह कब ख़तम होगा. फिर 15 मिनिट के बाद उसका लंड मुरझाया और वो मेरे अंदर से निकला. साथ साथ उसका ढेर सा पानी मेरी चूत में से निकला. में थकावट के मारे वहीं फर्श पर लुढ़क गयी. भोलू मेरे सामने लेट गया और मेरे मुँह और बूब्स को चाटने लगा. मैने उसको अपनी बाहों में ले लिया और मैं वैसे ही सो गयी. मैने अपनी सहेली लता को इस बारे में कुछ नहीं बताया. हम उस वक़्त दोनो 13 साल की उमर के थे. लता अपने पड़ोस के लड़के रवि, के साथ एक्सपेरिमेंट कर रही थी. उसने रवि का लंड चूसा था और अपनी चूत पर भी रगड़ा था. फिर उसने मुझे बताया कि उस रात उसके परिवार वाले बाहर जा रहें हैं और उसने रवि को घर बुलाने का प्रोग्राम बनाया है. उसने पूछा शबनम, तू भी आएगी? मैं बोली लता, तू पागल है ? मैं वहाँ क्या करूँगी ?लता बोली अरे यार मैं बहुत नर्वस हूँ. तू साथ होगी तो मुझे सहारा मिलेगा. तो मैं मान गयी. शाम को मैं पढ़ाई के बहाने मम्मी से इजाज़त लेकर लता के घर गई. लता बेडरूम में बैठी थी. बहुत सेक्सी कपड़े पहने थे उसने. एक पीले रंग का टाइट टॉप जिसके अंदर उसके छ्होटे छ्होटे बूब्स तने हुए थे और उसके उभरे हुए निपल्स सॉफ सॉफ दिख रहे थे. नीचे उसने हॉट-पॅंट्स पहनी थी. उसका फिगर बहुत ही सुन्दर लग रहा था. हॉट पॅंट्स के अंदर उसके चूतड बहुत सेक्सी लग रहे थे. मैं बोली लता तू तो बहुत प्यारी लग रही हो. जी करता है के तुझे चूम लूँ. तो लता ने जवाब दिया “अर्रे शबनम, मैं भी तो कब से ये ही चाहती हूँ. आ मेरे पास. मैं हैरान हो गई और लता के पास गयी. उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और हम ने अपना पहला किस किया. शुरू में तो कुछ संकोच और शरम के साथ था. हम दोनो को शायद अच्छा लगने लगा. तो लता ने अपना मुँह खोल लिया और मैने उसको चूमते हुए अपनी ज़बान उसके मुँह में डाली. मुझे एक बिजली का शॉक सा लगा उसकी ज़बान के मिलन से. मीठा मीठा टेस्ट आया उसके मुँह का. हम एक दूसरे की बाहों में लिपटे ऐसे किस करते रहे. मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था. मैने एक हाथ से लता के बूब्स को दबाया और सहलाने लगी. लता सिसकारियाँ लेने लगी और उसके हाथ भी मेरे बदन पर फिरने लगे. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | लता मेरी सलवार के उपेर से ही मेरी जाँघो पे अपना हाथ फेरने लगी. मैने अपनी लातें थोड़ी फैला दी और उसका हाथ उपर आया और मेरी चूत को सहलाने लगा. मैं पागलों जैसे सिसकारियाँ लेने लगी. लता ने मेरा नाडा खोला और मेरी सलवार नीचे गिर गई. उसका हाथ मेरी चड्डी के अंदर गया और वो मेरी नंगी चूत पर फिरने लगा. मैं गीली होने लगी. उतने में मैं लता को किस कर रही थी मैं उसकी गर्दन और कंधों को चाटने लगी. फिर मैने लता के टॉप को नीचे खिसकाया. उसके प्यारे गोल बूब्स जिनके उपर गुलाबी निपल्स को देख कर मैं बहाल हो गई. मैं झुकी और उसके बूब्स को चूसने लगी. उसकी एक उंगली मेरी चूत के फांकों के बीच थी और मेरी गीली चिकनी चूत उसकी उंगली को प्रेशर देने लगी. अचानक उसकी उंगली मेरी चूत के अंदर समा गई. कुच्छ देर बाद हम दोनो अलग हुए. हमारी आँखें मिली और तब हम दोनो को अहसास हुआ के हम एक दूसरे को बहुत चाहते हैं. हमारा दोनो का प्यार कुच्छ ही देर पहले पैदा हुआ था. लता कुच्छ महीनो से अपने दोस्त रवि के साथ एक्सपेरिमेंट कर रही थी. उसने रवि का लंड चूसा था और उसका पानी भी पिया था. मगर अभी तक उसने रवि के साथ चुदाई नही की थी. आज उसने रवि को अपने घर इसी लिए बुलाया था. जब बेल बजी तो मैने लता से पूछा ‘अब क्या करें ?’ तो लता बोली ‘अर्रे यार शबनम, तू तो मेरी बेस्ट फ्रेंड है. तू तो सब कुच्छ जानती है. तू कपबोर्ड में छुप जा और सब कुच्छ देख ले. मुझे अच्छा लगेगा अगर तू मेरे साथ होगी.’ लता के कमरे में उसके कपड़ों के लिए एक बड़ी कपबोर्ड थी. उसने मुझे उस में छुपा दिया और दरवाज़ा थोड़ा खुला छोड़ दिया ताके मैं सब कुच्छ देख सकूँ. फिर उसने घर का दरवाज़ा खोला और रवि को अंदर बुलाया. लता की चेहरा, हमारी कुच्छ ही मिनिट पहले की कारिस्तानी से,बिल्कुल खिला हुआ था. उसके निपल अभी आकड़े हुए थे और उसके सेक्सी टॉप के अंदर से सॉफ दिख रहे थे, और उसकी हॉट-पॅंट का उपर का बटन खुला था, जिस से उसकी पैंटी का एलास्टिक दिख रहा था. रवि थोड़ा शरमाता हुआ अंदर आया और बोला ‘हाई लता, तू बहुत सुंदर लग रही है.’ लता कुच्छ नही बोली. उसने दरवाज़ा बंद किया और रवि को अपने कमरे में ले आई. अंदर आते ही लता, रवि से लिपट गयी. अब रवि ने उसको अपनी बाहों में ले लिया और उसको मुँह पे किस करने लगा. लता ने अपना मुँह खोल दिया और रवि की ज़बान उसके मुँह में चली गयी. रवि ने अपने हाथ लता के टॉप के अंदर खिसकाये और वो लता की पीठ पर फेरने लगा. लता हल्के हल्के ‘उन्ह उन्ह उन्ह’ की आवाज़ें निकालने लगी. उसने रवि के शर्ट के बटन एका एक खोलने शुरू किए और उसके पॅंट की ज़िप भी नीचे खींच दी. रवि की चड्डी की उभार सॉफ दिखने लगी. लता बाहर से ही रवि के लंड को सहलाने लगी. उनका किस अभी जारी था. रवि ने फिर लता का टॉप उपर खींचा. लता ने अपनी बाहें उपर करी और रवि ने उसका टॉप उतार दिया और वो लता के 32 साइज़ के उभरे हुए गोल बूब्स को उसके ब्लॅक ब्रा के उपर से ही दबाने लगा. फिर लता झुकी और घुटनों बल बैठ गयी … उसने रवि की पॅंट और चड्डी एक झटके से नीचे खींच दी. रवि का तना सख़्त लंड बाहर निकला. मैं देख के अचेत हो गयी … इतना सुंदर लग रहा था उसका 6 इंच लंबा लंड . मैं तो पहली बार किसी लड़के का साधन देख रही थी …. ब्लू मूवीस में तो देखे थे मगर असलियत में नहीं. लता ने उसको हाथ में लिया और ज़बान निकाल कर उसके टोपे को चाटने लगी. फिर लता ने रवि के लंड को मुँह में ले लिया और वो हल्के हल्के उसको अंदर बाहर करने लगी. रवि ने उसके सर पे हाथ रखा और वो लता को अपनी ओर खींचने लगा. अब उसका लंड आहिस्ता आहिस्ता और गहराई तक लता के मुँह में समाने लगा. थोरही देर बाद रवि ने लता के मुँह में तेज़ी से झटके मारना शुरू किया. उसकी साँस फूली हुई थी और वो हर झटके के साथ ‘हुंग…. हुंग…. हुंग ‘ की आवाज़ कर रहा था. उसने लता का सर ज़ोर से पकड़ा और अपनी तरफ खींचा. उसका लंड अब जड़ तक लता के मुँह में पूरा गले तक चला गया. लता पीछे खींच रही थी मगर रवि ने नही छोड़ा. लता का मुँह अब रवि की झांतों पे दबा हुआ था. अचानक रवि अकड़ सा गया और उसका बदन थर थराने लगा. मुझे पता लग गया के वो लता के मुँह के अंदर ही झाड़ रहा है … पूरी गहराई तक. फिर रवि ने लता को कुच्छ ढील दी और लता ने अपना सर पीछे किया. उसके मुँह में से रवि का लंड बाहर निकला. उसके गाढ़े पानी की तारें लता के लबो से लटकी हुई थीं. रवि का पानी लता के गले में छूटा था तो उसको सब निगलना ही पड़ा था. अलमारी में से यह सब देख कर मेरी चूत पानी पानी हो गयी थी. मैने दो उंगलियाँ चूत में डाली हुई थी और मैं लातें चौड़ी कर के अपनी चूत को रगड़ रही थी. अब रवि और लता बेड पे लेट गये और एक दूसरे को सहलाने लगे. रवि के हाथ लता के बदन पर फिर रहे थे, कभी उसके बूब्स को दबाते, कभी उसकी चिकनी जाँघो को मसल्ते और कभी उसकी चूत को प्यार करते. लता पीठ पे लेटी इस सब का मज़ा ले रही थी. उसके एक हाथ में रवि का लंड था और वो उसको हल्का हल्का मसल रही थी. कुच्छ ही देर में रवि का लंड फिर अकड़ने लगा और वो जल्दी ही अपनी पूरी लंबाई पे आ गया. रवि लता के निपल को, जो बिल्कुल खड़े हो गये, ज़ोर से चूस रहा था और उसके बूब्स ज़ोर से दबा रहा था. लता भी अब पूरी गरम हो गयी थी. उसने रवि को अपने उपर खींच लिया और वो दोनो जोश से टंग किस्सिंग कर रहे थे. रवि का लंड पूरी तन्नाव में था और लता की चूत के ऊपर लटका हुआ था. लता ने खुद ही उसका लंड हाथ में लिया और अपनी चूत के मुँह पर लगाया. दूसरे हाथ से उसने रवि के कूल्हो को दबाया. रवि का अकड़ा लंड लता की चिकनी गीली चूत में समाने लगा. आधा लंड तो आराम से लता की चूत में खिसकता गया. तब लता की हल्की सी चीख निकली, ‘हाइ  ऊउम्म्म्मय्ी मै मर गयी. बड़ी दर्द हो रही है. है रवि निकालो इसको’. रवि तो अब पूरे जोश में था. वो अपने कूल्हे दबाता गया और अचानक उसका लंड एक ही झटके में लता की गीली चूत में पूरा समा गया. फिर रवि रुक गया. लता उसके नीचे दर्द से हल्के से रो रही थी. मैने देखा के उनके नीचे चादर लाल होने लगी थी …. लता के खून से. रवि ने लता के कुँवारापन का फूल लूट लिया था. कुच्छ देर वो दोनो ऐसे ही पड़े रहे. फिर रवि आहिस्ता आहिस्ता लता के ऊपर हिलने लगा. वो अपना लंड धीरे से निकालता और फिर धीरे से फिर लता की चूत में पेलता. शुरू में लता ने दर्द की आहें ली मगर जल्दी ही वो अपनी लातें फैला कर रवि के लंड को मज़े से अंदर लेने लगी. अब वो अपने कूल्हे उठा उठा कर रवि के झटकों का साथ देने लगी. ऐसे ही वो चुदाई में मगन हो गये. उनकी रफ़्तार तेज़ होने लगी और अब उनकी चुदाई की आवाज़ें कमरे में गूंजने लगी. एक तो लंड और चूत के मिलन की आवाज़ और दूसरे रवि के ‘उन्ह.. उन्ह.. उन्ह’ और फिर लता का ‘आ.. आ.. आ’, यह सब आवाज़ें एक साथ मुझे भी पागल कर रही थी. मैं तेज़ी से अपनी उंगलियाँ अपनी चूत पर फेर रही थी …. मेरा दाना उभर कर बड़ा हो गया था, मेरी चूत पानी छोड़ रही थी. मुझ में मौज की लहरें दौड़ रहीं थी. और फिर मैं इन दोनो की चुदाई देखते देखते झड़ने लगी. उधर लता और रवि भी जोश की हद पे पहुँच गये थे. लता मस्ती में चिल्ला रही थी ‘रवि, मेरी जान …. और चोदो … और चोदो…. पेल दो मेरे अंदर …. ऊओह आअहह एम्म्म ‘ और रवि की रफ़्तार और भी तेज़ हो गे थी. उसका लंड लता की पूरी गहराई तक जाता था और फिर उसकी झांतों पर रगड़ता था. लता का बदन अकड़ने लगा, और वो झटके खाती खाती झड़ने लगी. वो रवि से चिपेट गयी. उसकी लातें उसकी पीठ पर टाइट हो कर लिपटी हुई थीं और उसका बदन ज़ोर से काँप रहा था. फिर रवि भी झटकने लगा. मैं समझ गयी के वो मेरी सहेली लता की चूत में झाड़ रहा है. मुझसे भी रहा नही गया और मैं भी तब बहुत ही ज़ोर से झाड़ गयी. कुच्छ देर बाद रवि उठा और अपने कपड़े पहन ने लगा. लता बेड पे ही पड़ी रही. फिर रवि, मेरी नंगी लता को किस करके चला गया. मैं बाहर आई और अपनी चुदि हुई सहेली के साथ लेट गयी. मैने उसकी चूत में उंगली डाली. उसकी चुदाई का जूस उसकी चूत में से टपक रहा था … लता का पानी और रवि की वीर्य का मिक्स्चर. मैने उंगली को मुँह मे डाला और उस मिक्स्चर को चाट गयी. लता गहरी नींद में सो गयी और मैं भी कपड़े पहन कर घर चली गयी. अगले दिन हम ने स्कूल में तय किया के हम दो दिन बाद लता के घर में ही ट्राइ करेंगे अपने नये जगे हुए प्रेम को आज़माने के लिए. क्या था के लता को अभी चुदाई से काफ़ी तकलीफ़ हो रही थी. दो दिन के बाद मैं लता के घर, स्कूल के बाद पहुँची. लता अपने कमरे में बिल्कुल नंगी बैठी पॉर्न मूवी देख रही थी. जैसे मैं अंदर आई तो लता ने उठ कर पहले दरवाज़ा लॉक किया और मुझे अपनी बाहों में ले लिया. वो मुझे लिप्स पे किस करने लगी. मैं भी गरम थी और में साथ देने लगी. मैने लता के खुले मुँह में अपनी ज़बान डाल दी. फिर से खूब ज़ोर से बिजली जैसा शॉक लगा और मैने लता की मिठास को टेस्ट किया. हम ऐसे किस करते रहे. लता ने मेरे बूब्स पर हाथ फेरना शुरू किया. मैं सिसकारियाँ लेने लगी और मैने लता की चूत पर हाथ फेरा. उसने तुरंत अपनी लातें चौड़ी कर दी ताके मैं अच्छी तरह से पहुँच जाउ. उसकी चूत चिकनी और गरम थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था उसको सहलाते हुए. मैने अपनी एक उंगली लता की गीली चूत में खिसका दी. उसने अपनी चूत आगे करके मेरे हाथ पर दबाई. कुच्छ देर बाद हम दोनो बहुत गरम हो गये थे तो हम बेड पर बैठ गये. लता ने मेरी टी-शर्ट और पॅंट उतारनी शुरू करी. साथ साथ लता मुझे चाट रही थी. कभी गाल पर, कभी नेक, और कभी बाहों पर. मैने कपड़े उतरवाने में खूब साथ दिया और जल्दी से मैं भी बिल्कुल नंगी हो गयी. अब हम बेड पर लेटे एक दूसरे को खूब किस और लीक करने लगे. हमारे बूब्स, जिन में जवानी की मज़बूती थी, एक दूसरे से दब रहे थे … निपल्स हम दोनो के स्टिफ हो गये थे. फिर लता ने भी अपनी उंगली मेरी चूत में खिसका दी और हम एक दूसरे को फिंगर फक्किंग करने लगे. लता की उंगलियाँ कभी मेरे दाने पर फिरती और कभी मेरी चूत में सरक्तीं. मैं भी लता को ऐसे ही कर रही थी. कुच्छ ही देर में हम दोनो झड़ने लगे. हमारा पानी छूटने लगा.में बोली ‘ लता जल्दी 69 में आजा. मैने तेरा जूस पीना है.’ उसने मुझे पीठ पे लिटाया और वो मेरे उपर आई और उसकी चूत मेरे मुँह के सामने आ गयी. उसकी चूत में से थोड़ा थोड़ा पानी टपक रहा था. मैने अपनी ज़बान से उसको टेस्ट किया. बहुत टेस्टी था … कुच्छ मीठा और कुच्छ नमकीन. मैं जल्दी से उसका स्वीट जूस पीने लगी और उसे चाटने लगी, कभी मैं अपनी ज़बान उसकी चूत में डालती तो लता का पूरा बदन झटके खाने लगता. उतने में लता भी बिज़ी थी. मैने अपनी लातें पूरी चौड़ी कर दी थीं और लता का सर मेरी चूत को दबा रहा था. वो भी मुझे चाट रही थी और मेरा माल पी रही थी. 10 मिनिट्स के बाद मैं फिर झाड़ गयी और मेरे बाद लता भी झड़ने लगी. हम दोनो एक दूसरे का जूस पीते रहे. कुच्छ देर बाद हम अलग हुए और बेड पर लूड़क पड़े. उसके बाद मैं अपने घर आ गई . मैने अपने कुत्ते भोलू के साथ कई बार सेक्स किया और मज़ा लिया दोस्तो भोलू मेरी तन्हाई का साथी था


समाप्त


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कुत्ते ने की मेरी पहली चुदाई

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