All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

कच्ची उम्र में चुदाई का जोश


हेल्लो मेरा नाम आफिया है, मैं एक मुस्लिम फॅमिली से हूँ. ये मेरी पहली स्टोरी है. इसलिए मैंने अपना नाम छुपा लिया और आफिया लिखा है. मै अभी १९ साल की हु. मेरा रंग गोरा है. हाइट 5फ्ट 4 इंच. ब्रेस्ट 34ब, वाइटल स्टेट्स 34 26 28 है. सिर पर लंबे बाल हैं | मैं स्टूडेंट हूँ. ये कहानी उस वक़्त की है जब मैं फिफ्थ मे पढ़ती थी. मेरी उमर उस वक़्त नौ साल की थी. हम एक मकान मे किरायेदार थे. ग्राउंड फ्लोर पर हम और उपर के तल्ले मे मकान मलिक रहते थे. काफ़ी बड़ा मकान था. हमारी फॅमिली बड़ी थी जबकि उपर वाली फॅमिली मे मा बाप और एक बेटा. बेटे की उमर 24 य्र्स थी. उसके मोम डॅड ज़्यादातर विलेज मे रहते थे. लड़के का नाम राज था, सब उसको राजू कहते थे.


वैसे तो टेलीविजन हमारे यहाँ भी था पर ज़्यादा टाइम चॅनेल चेंज करने मे वेस्ट होता था. एक शाम मैं छत पर थी. टीवी मे कुछ सॉंग्स की आवाज़ आ रही थी. मैंने 1स्ट्रीट फ्लोर पर आके देखा. टीवी चल रहा था और उसमे सॉंग्स आ रहे थे. मैंने गेट पर खड़े खड़े ही सारा सॉंग देखा. इतनी शांति से वो सॉंग सुना कि मन हुआ रोज वहाँ आकर प्रोग्राम देखु.


धीरे धीरे ये मेरी रुटीन मे आता गया. मैं रोज ही वहाँ टीवी देखने लगी. राजू को मालूम न्ही था, मैं बाहर से देखती थी. एक शाम जब मैं टीवी देख रही थी तो मुझे राजू दिखाई दिया. उसने मुझे देखा तो भीतर बुला लिया और मैं वहाँ बैठ कर टीवी देखने लगी राजू भैया भी मुझसे बात करने लगे. उन्होने कहा कि रोज आ जाया करो.


अब तो कोई प्राब्लम न्ही थी. राजू भैया भी टीवी देखते थे , कभी उठ जाते थे, चाय बनाते, कुछ खाते, इधर उधर घूमते रहते. एक बार जब मैं टीवी देख रही थी, राजू भैया उठ कर नहाने चले गये. मेरी उमर उस समय नौ साल थी. मैं फ्रॉक पहना करती थी. राजू के जाने के बाद मैने अपने घुटनो को मोड़ लिया और उसपर अपना हाथ रखा और थोड़ी टीका के मूवी देखने लगी.


मूवी इतनी अच्छी थी कि राजू कब आ गया ध्यान नही रहा. जब मेरी नज़र उसपर पड़ी तो मैंने उसको ध्यान से अपनी तरफ देखते पाया. मुझसे नज़र मिली तो वो फिर बाहर गया. मैंने खुद पर ध्यान दिया तो पाया कि घुटने मोड़ने से मेरी फ्रॉक सामने से खुल गयी थी और मेरी पैंटी राजू को दिख रही थी. उसकी नज़र पैंटी पर है थी. मुझे समझ नही आया कि वो मेरी पैंटी क्यू देख रहा था.


बात आई गयी हो गयी. 2 / 4 दिन बाद की बात है. जब मैं टीवी देख रही थी राजू भी नहा के आ गया. वो मेरे सामने बैठ गया. उसके हाथ मे बुक थी. उसने टी शर्ट और टवल बाँधी हुई थी. वो पढ़ने लगा और मैं टीवी देखने मे बिज़ी थी. थोड़ी देर मे मेरा ध्यान राजू की तरफ गया. उसने पालती मारी हुई थी जिस वजह से उसकी टवल सामने से खुली हुई थी. मैंने नज़र छुपा के देखा तो उसने नीचे कुछ नही पहना था.


टवल के भीतर उसका नुनु दिख रहा था. मुझे अजीब नही लगा. नुन्नि तो मेरे छ्होटे भाई की भी थी. हम रोज ही देखते थे. पर राजू की नुन्नि, मेरे भाई से बड़ी थी और मोटी भी. मैं सोचती रही कि ऐसा क्यू? टीवी प्रोग्राम ख़तम हुआ तो मैं नीचे चली आई. रात भर राजू की नुन्नि मेरे दिमाग़ मे घूमती रही. सवेरे मैंने अपने भाई की नुन्नि देखी तो पहले जेसी ही छ्होटी सी थी, लिट्ल फिंगर की तरह. मुझे लगा कि मुझसे कोई भूल हुई है राजू की नुन्नि देखने मे. सोचा अगर चान्स मिला तो फिर देखूँगी राजू की. मैं शाम होने का इंतज़ार करने लगी. शाम होते ही मैं उपर चली गयी. टीवी उस वक़्त बंद था. मेरा फेव सॉंग प्रोग्राम का टाइम हो गया. राजू होता तो टीवी चला देता. मैंने सोचा राजू भैया को खोज के उनको बोलती हू टीवी चलाने को. मैं हर रूम मे जाकर देखने लगी. एक रूम मे राजू भैया सो रहे थे. जब मैं उनके पास गयी तो देखा कि वो टवल पहने ही सो गये थे. नींद मे उनका टवल उपर हो गया था और उनकी नुन्नि दिख रही थी. नुन्नि के नीचे एक बॉल भी थी. मैंने ध्यान से देखा तो राजू की नुन्नि रियल मे बड़ी थी और मोटी भी. मेरा प्रोग्राम मिस हो रहा था, राजू को उठाना पड़ेगा. मैंने आवाज़ लगाई- राजू भैया टीवी चला दो. 2/3 बार बोलने पर उनकी आँख खुली, मेरी बात सुन कर वो उठ गये. मैं टीवी रूम मे भाग के आ गयी. फिर राजू भैया दिखाई दिए. उनका टवल शायद गिर गया था. वो अपने आँख मलते हुए इस तरफ आ रहे थे. मेरी नज़र उनकी नुन्नि पर गयी. चलते समय उनकी नुन्नि हिल रही थी. जब वो टीवी के पास पहुचे तो रुक गये और टीवी चलाने लगे. उनकी नुन्नि ने हिलना बंद कर दिया. मैंने उनकी नुन्नि को देखा , सोचा आज स्केल पर चेक करूँगी भाई और राजू की नुन्नि का डिफरेन्स. राजू ने टीवी चला दियाऔर दूसरे रूम मे चला गया. मैं टीवी देखती रही. प्रोग्राम ख़तम हो गया तो मैं चली गयी. रात मे बॅग से स्केल निकाला और भाई का चेक किया. उसकी 1 आंड हाफ इंच थी. फिर राजू का याद करके स्केल मे देखा तो वो सिक्स इंच के उपर था.. इतना फरक? फिर याद आया कि राजू उस्दिन मेरी पैंटी देख रहा था, कल फिर वेसा करूँगी, देखु राजू देखता है या नही. मैंने अपनी पैंटी मे हाथ डाला और पहली बार महसूस किया कि मेरे नुन्नि की जगह एकदम प्लेन है और वहाँ होल है. मैंने उंगली डाली तो थोड़ी सी गयी और गुदगुदी होने लगी. ये सब करते करते सो गयी. सपने मे देखा कि मैंने राजू की नुन्नि अपने हाथ मे ली हुई है और उसको देख रही हूँ. सवेरे उठी तो सोचा, राजू ने तो अपनी नुन्नि दिखाई है, बदले मे मुझे भी दिखानी चाहिए. शाम हुई , उपर जाने लगी तो मा से डाँट पड़ गयी, क्या रोज रोज टीवी देखती हे, पढ़ाई किया कर. उस दिन जाना नही हुआ. अब टीवी से ज़्यादा राजू की नुन्नि देखने की इच्छा थी. उस शाम मॅनेज नही हो पाया. नेक्स्ट डे सबकी नज़र बचा के उपर गयी. राजू ने कल ना आने का रीज़न पूछा. मैंने बताया कि मा ने मना किया. राजू ने कहा कि मा को बोलो ट्यूशन के लिए. ट्यूशन के बहाने रोज आ जाना टीवी देखने. प्लान अच्छा था. मैंने मा को ट्यूशन के लिए कहा. उन्होने राजू से कहा तो राजू ने रोज शाम को 2 घंटे के लिए पढ़ाने के लिए हां कर दी, विदाउट फीस. मा भी खुश, मैं भी खुश. मा इसलिए खुश कि फ्री मे ट्यूशन मिल गया, मैं इसलिए खुश कि अब रोज नुन्नि देखने मिलेगी. शाम हुई, मैं बुक्स लेकर उपर चली गयी. मैंने फ्रॉक पहनी थी नीचे पैंटी थी. ट्यूशन स्टार्ट हुआ. मुझे मेद्स के प्राब्लम सॉल्व करने दिए गये. मैं वो करने लगी, साइड मे टीवी ऑन था. राजू गया और 5 मिनिट मे वापस आ गया. उसने 1स्ट्रीट फ्लोर का गेट बंद किया और मेरे पीछे आ गया. वो टवल मे था. राजू ने पीछे से मेरे कंधे पर हाथ रखा और मेद्स देखने लगा. मुझे लगा कि वो मेरी पीठ खुजा रहा है. साइड मे रखी ड्रेसिंग टेबल के ग्लास से देखा तो राजू की नुन्नि मेरी पीठ से लगी हुई थी और वो हिला के उपर नीचे कर रहा था. मुझे उनकी नूनी का साइज रोज से बड़ा दिखा और वो सीधा उठा हुआ था, रोज की तरह झूला हुआ नही था. राजू ने कहा कि अलमारी के उपर एक बुक है जो हेल्प करेगी मेद्स मे. मुझे निकालने को कहा. पर मेरा हाथ वहाँ केसे जाता. राजू ने कहा कि वो मुझे उठा देगा और मैं वहाँ से बुक उठा लू. मैं राजू के साथ अलमारी तक आई. उसने मुझे कमर से पकड़ के उठाया, फिर मेरे बम्स के नीचे हाथ लगा कर और उपर किया. मुझे वो बुक दिखने लगी. पर मुझे ऐसा लगा कि राजू ने मुझे अलमारी से दूर रखा हुआ है और वो मेरे बम्स दबा रहा है. मैंने नीचे देखा. राजू की टवल गिर गयी थी और उसकी नूनी सीधी थी. इतने मे राजू ने मुझे नीचे उतार दिया. कहा कि उसका हाथ स्लिप हो रहा है. मैंने पूछा स्लिप क्यू हो रहा है? उसने कहा कि तुम्हारी पैंटी की वजह से स्लिप हो रहा है. अगर उसको उतार दो तो स्लिप नही होगा. मैंने फ्रॉक उपर करके अपनी पैंटी उतार दी. अब राजू ने मेरे बम्स पकड़े, थोड़ा सहलाया और उपर उठाया मुझे. बुक मेरे हाथ मे आ गयी. नीचे उतरते वक़्त मेरा सरीर राजू के सरीर से चिपका हुआ था और रगड़ खा रहा था. फिर मेरे दोनो पैरो के बीच कुछ आ गया. शायद राजू की नुन्नि थी. राजू ने तुरंत नही छोड़ा मुझे. धीरे धीरे उतारा. उसकी नुन्नि मेरी चूत के एरिया को रगड़ती हुई निकल गयी. खैर किताब मिल गयी थी. मैंने झुक कर पैंटी को उठाना चाहा तो राजू ने पैंटी ले ली और कहा जाने के समय पहन लेना, अभी पढ़ाई करो. राजू ने टवल लपेट लिया और मेरे सामने बैठ गया. उसकी नुन्नि सॉफ दिख रही थी, मैंने साइज का आइडिया लगाया और आज फिर स्केल पर चेक करने की सोची. थोड़ी देर बाद पढ़ाई ख़तम. मैं टीवी देखने लगी. राजू मेरे साथ पिक्चर देखने लगा. मैं पेट के बल लेट कर टीवी देख रही थी. अचानक राजू ने मेरी फ्रॉक मे हाथ डाला और मेरे बम्स सहलाने लगा. फिर हाथ से मुझे पीछे से उँचा किया और मेरी चूत तक सहलाने लगा. मुझे अच्छा लग रहा था. मैंने कुछ नही कहा और टीवी देखती रही. एक बार मैंने ज़रा नज़र बचा के राजू को देखा. वो अपनी नुन्नि को हाथ मे पकड़े हुए था और उसको हिला रहा था. हिलने से उसकी नुन्नि के उपर की चॅम्डी पीछे चली जाती थी और उसमे से दिखता था एकदम चिकना गोरा पिंक कलर का नुन्नि के उपर का हिस्सा जो नॉर्मल मे नही दिखता था. बहुत अच्छा लग रहा था वो.इसी तरह कुछ देर चलता रहा. फिर ट्यूशन टाइम ख़तम हो गया और मैं पैंटी पहन कर नीचे चली आई. आज बहुत अच्छा लगा था, नयी चीज़ देखने मिली थी. मुझे भी सहलाया था. नेक्स्ट और क्या होगा ये सोचते सोचते आँख लग गयी. नेक्स्ट डे मेरा सिर भारी था, फिर भी ट्यूशन गयी. पढ़ने मे मन नही लग रहा था. राजू ने मुझे लेटने को कहा और आराम करने को कहा. मैं लेट गयी. आज मैंने सलवार पहनी थी. राजू मेरा सिर दबाने लगा. बोला तुम जब भी यहाँ आओगी, फ्रॉक मे आना और आते ही अपनी पैंटी उतार देना. पर आज तो सलवार थी. राजू ने मेरी सलवार नीचे सरकाते हुए पूरी उतार दी और फिर पैंटी उतार दी. मैं पीठ के बल लेटी हुई थी. पैंटी उतरते ही मैं पूरी नंगी हो गयी, मेरी चूत ओपन हो गयी. राजू उसको सहलाने लगा. बहुत अच्छा लग रहा था. फिर राजू ने मेरी फ्रॉक भी उतार दी. मैं पूरी नंगी हो गयी. राजू मेरी छाती पर हाथ फेरता रहा. बीच मे दबा भी देता था. फिर पेट सहलाता, फिर मेरी चूत. थोड़ी देर बाद उसने मेरे पैरो को मोड़ दिया. और फैला दिया. अब वो नीचे झुक कर मेरी चूत देखने लगा. फिर वो मेरी चूत की तरफ लेट गया. अब मुझे लगा कि वो किस कर रहा है. मैंने गर्दन उठा के देखा तो राजू के सिर के बाल दिखे. उसकी जीव मेरी चूत पर थी और वो उसको चाट रहा था. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. कुछ देर ये सब करता रहा . फिर वो बैठ गया. अपनी पॅंट उतारी. नीचे पैंटी नही थी इसलिए उसकी नुन्नि बाहर आ गयी. वो मेरे सिर के पास आया और कहा- आफिया, इसको देखो.


मैंने देखा. क्या सुंदर नुन्नि थी. अब वो मेरे पास बैठ गया और मुझे नुन्नि पकड़ने को कहा. मैंने झिझकते हुए नुन्नि पकड़ी. वो मेरे हाथ मे नही आई, काफ़ी मोटी लग रही थी. राजू ने मेरा हाथ पकड़ के आगे पीछे किया तो वो कल वाला हिस्सा दिखाई दिया. उसने हिलाते रहने को कहा. फिर मुझे उसकी नुन्नि को किस करने को कहा.


राजू- आफिया, नुन्नि को किस करो.


मैं- राजू भैया, शरम आ रही हे.


राजू- शरम क्यू, मैंने भी किस किया ना तुम्हारी चूत को. अब तुम भी करो.


मैंने हल्के से किस किया. राजू ने अपनी नुन्नि को पकड़ कर मेरे होंठो पर यहाँ से वहाँ फेरना शुरू किया और कहा.आफिया’ अपना मूह खोलो.


मैंने मूह खोला तो राजू ने अपनी नुन्नि मेरे मूह मे डाल दी. पर वो काफ़ी बड़ी थी मेरे लिए. अब नौ साल की लड़की का मूह था ये. नुन्नि के उपर का हिस्सा मेरे मूह मे आ गया. उसने कहा – सियरा, इसको मूह मे घूमाओ, अपनी जीव से इसको चॅटो और चूसो मैं करने लगी, हम दोनो को मज़ा आ रहा था. मेरे मूह मे नुन्नि घुसाए राजू लेट गया. उसका मूह मेरी चूत की तरफ था.


मैं उसकी नुन्नि चूसने मे लगी थी और वो मेरी चूत मे उंगली डाल रहा था. काफ़ी देर तक ये सब चलता रहा. थोड़ी देर बाद राजू ने कहा.


आफिया, अब नुन्नि से एक जूस निकलेगा, सफेद, तुम उसको पी जाना, उसको पीने से दिमाग़ तेज होता हे और नंबर अच्छे आएँगे.


मैंने सिर हिलाकर हां कहा. और जब उसका जूस निकला तो राजू ने मेरा मूह पकड़ लिया और सारा जूस मेरे मूह मे डाल दिया. मैं पी गयी सब. बहुत नया और अच्छा लगा. फिर तो ये रोज का काम हो गया. थोड़ी देर तक पढ़ाई करने के बाद रोज यही सब होता. एक नयी बात ये हुई कि अब राजू की फिंगर मेरी चूत मे पूरी जाने लगी. और मेरी चूत भी कुछ फूलने लगी. राजू मेरी चूत को खूब दबाता, उंगली करता और मैं उसका जूस पीती.


एक दिन राजू ने अपना जूस मुझे पिलाने के बाद अपनी नुन्नि फिर से मेरे मूह मे डाल दी, वो फिर से बड़ी हो गयी. फिर राजू ने उसपर आयिल लगाया. मेरी चूत मे उंगली डाल डाल के आयिल लगाया. फिर वो बैठ गया और मुझे उसकी नुन्नि पर बैठने बोला. जब मैं बैठने लगी तो उसने अपने लंड को मेरी चूत पर टीकाया और बैठने बोला. जैसे ही मैं बैठी, लगा कुछ घुस गया और दर्द भी हुआ. मैं उठ गयी.


फिर राजू ने मुझे अपनी गोदी मे लिया. मेरा मूह अपनी तरफ किया और एक हाथ से अपने लंड को पकड़ा, मेरी चूत पर सेट किया और बैठने को कहा. बैठते ही फिर वेसा हुआ, मैं उठने लगी तो उसने उठने नही दिया. कहा कुछ देर बैठी रहो, ठीक लगेगा. मैं बैठी रही. थोड़ी देर मे दर्द कम हो गया. अब मैंने पीछे होकर झुक कर देखा राजू का लंड मेरी चूत मे घुसा हुआ था. राजू ने आयिल से भीगी हुई अपनी एक उंगली मेरी गांड मे घुसा रखी थी.


ये नया एक्सपीरियेन्स था. मुझे ठीक ही लग रहा था. थोड़ी देर मे लंड से जूस निकल गया. हम दोनो अलग हुए. टवल से खुद को पोछा.


मैं- राजू भैया, आज अच्छा लगा, नयी चीज़ हुई.


राजू- हां आफिया, धीरे धीरे सब सिखा दूँगा, पर स्टडी भी करती रहो. अगर नंबर ठीक न्ही आए तो तुम्हारी अम्मी ट्यूशन बंद करा देगी, फिर ये सब नही मिलेगा.


मैं- भैया, आपका लंड इतना बड़ा है या सबका ऐसा होता है?


राजू- आफिया, सबका बड़ा होता है, किसी का 5, किसी का 6, जैसे मेरा 8 इंच है.


मैं- तो क्या ये इतना ही जाता है चूत मे?


राजू- नही आफिया, ये पूरा लंड चला जाता है.


मैं- भैया, आपने मेरे पीछे भी उंगली घुसाई थी, क्यू?


राजू- ये लंड वहाँ भी जाता है. चूत मे, गांड मे, मूह मे, सब जगह.


मैं- मेरे मे कब जाएगा?


राजू- रोज उंगली से बड़ा करूँगा. जब छेद बड़ा हो जाएगा तब ये सब जगह आराम से जाएगा और तुझे मज़ा भी आएगा.


मैं- ओके भैया. कल मिलती हू, बाइ


अब ये रोज होने लगा. अब मेरी गांड मे राजू की 2 उंगली घुसने लगी और चूत मे लंड का टॉप. एक दिन राजू ने मुझे कहा कि आज वो मेरे गांड मे लंड डालेगा थोड़ा सा. मैंने कहा ओके. राजू ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, मेरे पीछे आया और मेरी गांड पर जीव फिराने लगा. मुझे अच्छा लग रहा था. फिर उसने वहाँ आयिल लगाया. मेरे पेट के नीचे तकिया रखा और मेरे उपर चढ़ गया. अपने लंड को गांड के छेद पर टीकाया और पुश किया. लंड का टॉप घुस गया और हल्का दर्द हुआ.


राजू उसी पोज़िशन मे रुक गया. जब दर्द कम हुआ तो उसने फिर पुश किया. शायद लंड और गया. दर्द हुआ. मैंने कहा बस भैया, आज इतना ही करो. उसने वो पोज़िशन मे छोड़ के अपना जूस निकाला और भीतर डाल दिया. फिर लंड बाहर निकाल लिया.


मैं- भैया, आज लंड ज़्यादा घुसा ना?


राजू- हां, यहाँ तक गया, 1/4थ, मैं तुम्हारी गांड मे ट्राइ करूँगा अब. वहाँ जल्दी चला जाएगा. चूत मे थोड़ा टाइम लगेगा.


मैं जब खड़ी हुई तो चलने मे तकलीफ़ होने लगी. डर लगा अगर अम्मी ने रीज़न पूछा तो क्या कहूँगी.. राजू ने कहा कि कह देना पैर मे मोच आ गयी है. फिर क्या था, अब कोई डर नही. अब रोज चुदाई होने लगी.एक दिन तो ऐसा आया कि उसका लंड मेरी गांड मे पूरा घुस गया.


उस दिन, राजू ने कहा, दर्द हो तो चिल्लाना मत. राजू मेरे पीठ पर चढ़ा. लंड मेरी गांड पर टीकाया. मेरी बगल से हाथ डाल के मेरे कंधो को पकड़ लिया. लंड पुश किया तो आधा चला गया. उसने और घुसाना चाहा. पर दर्द से मैं आगे की तरफ होने लगी पर राजू ने मेरे कंधे पकड़े हुए थे सो आगे नही जा सकी. मेरा मूह तकिये मे घुसा हुआ था. राजू ने फिर पुश किया. मुझे साफ लगा कि लंड मेरी गांड मे जा रहा है. पर मैं चिल्लाई न्ही. इसी तरह पुश करते करते 5 मिनिट बाद राजू रुक गया. मैंने पूछा क्या हुआ तो उसने मेरा एक हाथ मेरी गांड पर रखवाया . मैंने महसूस किया कि राजू का लंड न्ही मिल रहा है. उसके लंड की बाल तो टच हुई पर लंड न्ही मिला.


राजू ने कहा- आफिया,, आज तूने पूरा लंड ले लिया है. सारा तेरी गांड के भीतर है,


मैं- क्या? पूरा 8 इंच चला गया?


राजू- हां आफिया. इतने दिन की मेहनत आज सफल हुई. इसी तरह एक दिन चूत मे भी जाएगा.


मैं- ह्म्‍म्म भैया, अब क्या करना है.


राजू- तुझे कुछ नही करना, मुझे करना है.


कहकर राजू ने मेरी गांड मारनी शुरू की. उसके धक्को से मेरा पूरा सरीर हिल रहा था. 15/20 मिनिट बाद उसने जूस गांड मे निकाला और लंड बाहर खींच लिया. फिर मुझे किस किया और प्यार किया.15/20 दिन बाद तो अब बिना तकलीफ़ के मेरी गांड चुदने लगी, अब तो राजू बैठा रहता और मैं उसके लंड पर बैठ जाती और लंड भीतर चला जाता. खूब चुदाई होती. इस बीच मेरे एग्ज़ॅम हुए, अच्छे नंबर आए. अम्मी बहुत खुश हुई.


राजू को शुक्रिया कहा और मुझे और भी मन लगा कर ट्यूशन करने को कहा. एग्ज़ॅम के बाद छुट्टी हो गयी . विंटर सीज़न था. राजू ने पिक्निक का प्रोग्राम बनाया.अम्मी को बताया कि सब बच्चो को पिक्निक पर ले जाएगा वो. अम्मी राज़ी हो गयी. 40 किमी दूर झरना था, वहाँ जाना था सबको. हमारे यहा टोटल 5 बच्चे थे चाचा ताऊ मिला कर, राजू के पास इडिका कार थी. राजू ने मुझे फ्रॉक पहनने को कहा. फिर हम पिक्निक को निकल पड़े.


कार छ्होटी थी. हम 6 प्लस ड्राइवर. जगह कम लग रही थी. राजू ने मुझे अपनी गोदी मे आने को कहा जिससे सब आराम से बैठ गये.मैं राजू की गोदी मे थी. थोड़ी देर बाद राजू ने मेरी फ्रॉक मे हाथ घुसाया और पैंटी नीचे खिचने लगा. मैंने थोड़ा सा उठकर ये होने दिया. राजू ने पॅंट की ज़िप खोल कर लंड बाहर कर लिया. ठंड थी, हम शॉल ओढ़ के बैठे थे. किसी को कुछ मालूम न्ही क्या हो रहा था मेरे साथ.mastaram ki mas mast chudai ki kahaniya pahe (www.mastaram (8)


राजू की लंड को पकड़ा, एकदम टाइट. थोड़ा सा उठ कर अपनी गांड पर लगाया. धीरे धीरे लंड पूरा गांड मे चला गया.अब मैं राजू के सहारे पीठ लगा कर बैठ गयी. राजू मेरी छाती दबा रहा था अब मेरी छाती पर उभार आने लगा था, राजू वो ही दबा रहा था. अब सफ़र का आनंद आने लगा था. पूरे रास्ते इसी तरह बैठी रही. जब झरना आ गया तो मैं उठी. लंड भी खिचता हुआ बाहर निकल गया, राजू ने उसको ज़िप मे डाला और हम उतर गये.


झरने मे मेरे अलावा सब बच्चे किनारे पर नहाते रहे. मुझे राजू थोड़ा भीतर ले गया. मैंने पैंटी तो पहनी न्ही थी. राजू ने भी टवल उतार के अपने गले मे डाल लिया. मैंने पानी के भीतर राजू का लंड पकड़ लिया और हिलाने लगी. वो टाइट हो गया. मैंने लंड की तरफ पीठ कर दी. राजू ने मेरी कमर पकड़ कर अपना लंड मेरी गांड मे घुसा दिया. पानी मे मेरी गांड मारी जा रही थी. किनारे पर मेरी छ्होटी बहन शबनम ने हमे पानी मे देखा.


शबनम- बाजी, वहाँ क्या कर रही हो?


मैं- स्विम्मिंग सीख रही हूँ. राजू भैया सिखा रहे हैं.


शबनम- मुझे भी सीखनी है स्विम्मिंग.


राजू- अभी आफिया को सीखा रहा हूँ. आधा सीखा है इसने.


मैं झूठे ही हाथ चलाने लगी. पीछे राजू दनादन पंपिंग कर रहा था. शबनम को यही लगा होगा कि राजू स्विम्मिंग सीखा रहा हे. अब राजू ने मुझे पानी मे सीधा लिटा दिया. मेरी कमर को पकड़ा. मेरे पैर अपने कंधे पर रखे और चोद्ने लगा. शबनम ने देखा.


शामनाम- बाजी, ये कैसी स्विम्मिंग है?


मैं- क्यू क्या हुआ.


शबनम- तुम सीधी लेटी हुई हो, तुम्हारे पैर भैया के कंधे पर हैं.


मैं- ये नयी स्टाइल की स्विम्मिंग है.


राजू- हां शबनम, ये स्टाइल मे बहुत मज़ा आता है.


शबनम- अच्छा बाजी.


आधे घंटे तक मेरी गांड मारने क बाद जूस निकल गया. हम दोनो अलग हुए, राजू ने टवल लपेट लिया. हम दोनो बाहर आ गये. शबनम ज़िद करने लगी कि उसको भी पानी के बीच जाना है एक बार. राजू उसको मजबूरी मे ले गया. वहाँ राजू ने शबनम को पानी पर उल्टा लेटा दिया और उसके पेट के नीचे हाथ रख कर उसको स्विम्मिंग सिखाने लगा. दूर से तो यही दिख रहा था. शबनम थोड़ी मोटी थी.


मैं अपने कपड़े चेंज करने लगी और नाश्ता लगाने की तैयारी मे लग गयी. राजू ने एक हाथ शबनम की छाती पर और दूसरा उसकी चूत पर रख कर उसको पानी पर टीकाया हुआ था. एक बार शबनम का बॅलेन्स खराब हुआ, वो पानी मे डुबकी लगाने लगी, फिर राजू का सहारा पा कर ठीक हो गयी. पर उसके दोनो हाथ पानी मे थे. आधे घंटे बाद राजू और शबनम बाहर आ गये.


हमने नाश्ता किया. थोड़ा हसी मज़ाक किया. फिर वापस घर को चले. रास्ते मे राजू ने कहा- शबनम की चूत तेरे से ज़्यादा फूली हुई और मोटी है.. मैंने पानी मे चेक किया. जब एक बार उसका बॅलेन्स बिगड़ा तो वो मेरे लंड को पकड़ का संभली थी. उसको मालूम न्ही हुआ कि उसने क्या पकड़ा है. वो काफ़ी देर तक उसको पकड़े रही. शायद उसको न्ही मालूम वो क्या पकड़ी थी.


मैं- भैया आज मज़ा बहुत आया, पानी मे काफ़ी अच्छे से गांड मारी आपने.


राजू- एक आध दिन मे मैं तुम्हारी चूत की चुदाई करूँगा.


मैं- क्या??? लंड चला जाएगा उसमे.?


राजू- ट्राइ करेंगे. देखना वहाँ ज़्यादा मज़ा आएगा.


मैं- ह्म्‍म्म, कब करेंगे?


राजू- आज तो शायद टाइम न्ही मिलेगा.. कल तैयार रहना.


मैं- ओके भैया.


नेक्स्ट डे राजू ने मुझे नंगा करके मेरी चूत की खूब मालिश की. खूब फिंगर की. आयिल लगाया. मुझे पीठ के बल लिटा दिया. कमर के नीचे तकिया लगाया. मेरी चूत उपर हो गयी. मेरे दोनो पैरो को फैला कर दूर किया जिससे मेरी चूत फेल गयी. अब उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा. कहा


राजू- आफिया चिल्लाना नही, दर्द हो तब भी, समझ ले ये तेरा एग्ज़ॅम है.


मैं- ओक भैया, पर कुछ होगा तो नही ?


राजू- नही, बस जैसा मैं कहता जाऊ वेसा करते रहना. देखना पूरा लंड जाएगा भीतर.


राजू मेरे उपर झुका, मेरे कंधे पकड़े और लंड को पुश किया, लंड भीतर घुसा. और पुश, और भीतर. और पुश, मुझे दर्द होने लगा पर मैं चिल्लाई नही. गर्दन उठा कर लंड को धीरे धीरे भीतर घुसते देखती रही. काफ़ी दर्द हुआ. एक वक़्त ऐसा आया कि पूरा 8 इंच लंड भीतर समा गया. अब राजू रुक गया. जब दर्द कम हुआ तो उसने चोद्ना शुरू किया.. थोड़ी


देर बाद रियल मे मज़ा आने लगा.अब तो मैं भी अपनी कमर नीचे से उठा उठा कर लंड भीतर लेने लगी. राजू मेरी कमर पकड़े हुए था और ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था. करीब 25 मिनिट की चुदाई के बाद राजू के लंड ने जूस छोड़ा. बहुत मज़ा आया.


तो दोस्तो ये थी मेरी पहली चुदाई. आशा करती हू कि आपको मेरी चुदाई पसंद आई होगी..कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया दे |


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कच्ची उम्र में चुदाई का जोश

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