All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

देखो कितनी मस्त आइटम है-2


देखो कितनी मस्त आइटम है-1

गतांग से आगे….  इशिता घर में टीवी देख रही थी. इशिता रोशनी की मम्मी थी और उनकी एज 36-37 के करीब थी. दिखने में वो टिपिकल पंजाबन औरतें जेसी दिखती थी और उनका जिस्म एकदम कसा हुया था. असल में रोशनी बिल्कुल उनके उपर ही तो गई थी. इशिता ज़्यादातर सलवार कमीज़ ही पहनती थी और वो भी एकदम कसे हुए और पारदर्शी होते थे. सजने सँवरने का शॉंक तो उसे शुरू से ही था. शादी के बाद हालाँकि उसके इस शॉंक में कमी ज़रूर आई थी लेकिन फिर भी उसे जब भी मोका मिलता वो खुद को सजाने लग जाती थी. आज भी उसने ऑरेंज कलर का हल्का सा सलवार कमीज़ पहना था और कमीज़ के उपर वाइट कलर के हल्के फूल थे और सलवार बिल्कुल प्लेन थी. उसका कमीज़ बिल्कुल टाइट था जोकि उसके बदन से चिपका हुआ था और इशिता की सब से बड़ी ख़ासियत थी उसके बड़े-2 मम्मे जोकि हमेशा तन कर खड़े रहते थे. गाओं के सभी लड़के और उसकी उमर के बंदे उसपे मरते थे लेकिन इशिता ने शादी के बाद कभी किसी को आँख उठा कर नही देखा था. शादी से पहले कॉलेज में उसके 2 लड़कों के साथ अफेर थे और उन दोनो ने इशिता को खूब चोदा था मगर शादी के बाद इशिता ने खुद को अपने पति अरुन तक ही सीमित रखा था. शादी के पहले कुछ साल तो अरुन ने उसे खूब चोदा था मगर अब उसकी दिलचस्पी इसमे कम हो गई थी. वैसे भी घर की ज़मीन कम होने की वजह से अरुन एक प्राइवेट जॉब करता था और थक हर कर घर आने की वजह से अब वो इशिता को टाइम नही दे पाता था. इशिता को भी अब इस से कोई शिकायत नही थी और वो भी अपने पति और एक बेटी के साथ खुश थी. आज भी उसने घर का काम निपटाने के बाद नाहकर खुद को अच्छे से सज़ा संवार कर ही टीवी देखना शुरू किया था. इस उमर में भी उसका जिस्म एकदम कसा हुया था और उसका फिगर नॅचुरल पंजाबन औरतों जेसा 36-30-36 था. इशिता टीवी देख रही थी और उसके पति काम पर गये हुए थे और रोशनी भी अभी कॉलेज से नही लौटी नही थी. इशिता को डोर बेल सुनाई दी तो वो पास ही पड़ी अपनी चुन्नी उठाकर दरवाज़ा खोलने गई. उसने चुन्नी को गले में डालते हुए दरवाज़ा खोला.

सामने खड़े शख्स ने दोनो हाथ जोड़कर कहा ‘सत श्री अकाल भरजाई जी’

इशिता ने मुस्कुराते हुए दोनो हाथ जोड़े और जवाब दिया ‘सत श्री अकाल जीजा जी आइए अंदर आ जाइए’

ये शक्ष इशिता की ननद का पति अरिजीत था और पोलीस में उँची पोस्ट पर था. दिखने में अच्छा था पूरा ताकतवर और मूछ उपर को चढ़ा कर रखता था. पहली नज़र में उसको देखने वाला डर सा जाता था. उसके साथ एक और आदमी था जोकि पोलीस की वर्दी पहने हुए था शायद वो कोई हवलदार था. इशिता ने उनके अंदर आते ही दरवाज़ा बंद किया और उन्हे सोफे पे बैठने का इशारा करते हुए बोली ‘जी आप बैठिए मैं पानी लाती हूँ’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

अरिजीत सोफे पे बैठ गया और अपने साथ वाले हवलदार को बैठने का इशारा करते हुए किचन की तरफ जा रही इशिता के हिलते चूतड़ देखने लगा. अरिजीत की आँख तो इशिता के उपर शुरू से ही थी लेकिन वो कभी आगे नही बढ़ पाया था. इशिता को भी इसकी भनक थी कि अरिजीत उसको गंदी नज़र से देखता है मगर उसने कभी ऐसा कदम नही उठाया था कि अरिजीत को आगे बढ़ने का मोका मिले. इशिता पानी लेकर वापिस आई और झुक कर दोनो को पानी दिया. गिलास उठाते वक़्त अरिजीत की नज़र इशिता के कमीज़ से झाँक रहे मम्मो पे पड़ी और दूसरे ही पल इशिता के सीधा हो जाने से वो फिरसे उसके कमीज़ में क़ैद हो गये. (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

इशिता पास ही सोफे पे बैठ गई और बोली ‘जी और बताओ दीदी केसी है’

अरिजीत ने मूछो को ताव देते हुए कहा ‘सब ठीक आ जी मालक की किरपा से आप बताओ’

इशिता बोली ‘सब ठीक है जी आज केसे आना हुआ’

अरिजीत टाँग पे टाँग रख कर बीती इशिता की उठी हुई जाँघ को घूरता हुआ बोला ‘बस यही पास के गाओं में इंक्वाइरी के लिए आए थे सोचा आपसे मिलता चलूं’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

इशिता ने अरिजीत की नज़र को पहचानते हुए अपनी टाँग दूसरी टाँग से उतार कर सीधी करते हुए कहा ‘ये तो अच्छा किया आपने आप बैठिए मैं छाई बनाती हूँ’

अरिजीत बोला ‘वो अरुन नही दिख रहा’

‘वो तो काम पे गये है अभी प्राइवेट जॉब शुरू की है एक’ इशिता ने उठते हुए कहा और किचन की तरफ चली गई.

अरिजीत फिरसे उसकी लहराती गाऔर को घूरता रहा. कुछ देर ऐसे ही बैठने के बाद अरिजीत उस हवलदार को बोला ‘मैं वॉशरूम होकर आता हूँ’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)


अरिजीत वॉशरूम कर के बाहर निकला और ड्रॉयिंग रूम की तरफ आने लगा. जेसे ही वो किचन के सामने से गुज़रा तो उसकी नज़र अंदर चाइ बना रही इशिता के उपर पड़ी. इशिता उसकी तरफ पीठ किए खड़ी थी और उसके बड़े-2 चूतड़ एकदम कसे हुए थे और उसका कमीज़ कमर से टाइट होने की वजह से उसकी गाऔर की गोलाई बहुत ही जबरदस्त लग रही थी. इशिता ने चुन्नि को उतारकर साइड पे रखा हुया था. अरिजीत का दिल कर रहा था कि वो अभी जाकर उसे पीछे से पकड़ ले लेकिन अगर इशिता ने शोर मचा दिया तो उसका क्या होगा. यही डर उसे सता रहा था. एक पल के लिए कुछ सोचता हुआ वो किचन को तरफ बढ़ गया और इशिता के बिल्कुल पास जाकर बोला ‘वो अभी बनी नही चाइ’


इशिता ने जेसे ही उसकी आवाज़ सुनी तो एकदम से घबरा गई और तेज़ी से पीछे पलटी तो अरिजीत की मजबूत छाती से टकरा गई. उसके बड़े-मम्मे एक पल के लिए अरिजीत की छाती में दब से गये. अरिजीत की नज़र सीधी इशिता के ब्स्डे-2 मम्मो पे गई और उसके हाथ इशिता को संभालने के लिए उसकी कमर में. बिना चुन्नी के इशिता के बड़े-2 कबूतर सूट से बाहर निकलने को हो रहे थे. इशिता ने खुद को संभाला और एकदम उनसे दूर होकर अपनी चुन्नि उठा ली और गले में डालते हुए बोली ‘जी आप यहाँ’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

अरिजीत भी संभलता हुया बोला ‘वो मैं वॉशरूम से आ रहा था तो सोचा पूछता चलूं कितना टाइम लगेगा’

इशिता अपने बालों की लट को चेहरे से हटाती हुई बोली ‘ जी बस तियार है अभी लाई’

अरिजीत कुछ देर के लिए चुप रहा और फिर बोला ‘वो अरुन को कितनी सॅलरी मिलती है’

इशिता अब सम्भल चुकी थी और बोली ‘जी यही कोई 7-8 हज़ार’

अरिजीत बोला ‘इतने में तो गुज़ारा मुश्क़िल है’

इशिता बोली ‘जी वो खेती के पेसे भी आ जाते हैं’

अरिजीत बोला ‘ फिर भी कमाई तो जितनी ज़्यादा हो उतना अच्छा है’

इशिता बोली ‘जी ये बात तो सही है आपकी’

अरिजीत फिरसे बोला ‘वैसे मेरे एक दोस्त का खुद का बिज्नीस है अगर अरुन चाहे तो वहाँ जॉब लगवा सकता हूँ मैं उसकी वो सॅलरी भी कम से कम 15000 तक देगा तुम पूछ लेना उससे’

इशिता उसकी बात सुनकर खुश होती हुई बोली ‘जी इसमे पूछना क्या ये तो बहुत अच्छा ऑफर है’

अरिजीत ने इशिता की आँखों में चमक देखते ही असली बात की ‘लेकिन एक प्रॉब्लम. है’

इशिता ने चाइ कप में डालते हुए कहा ‘जी केसी प्रॉब्लम’

अरिजीत उसके बिल्कुल नज़दीक होकर अपने एक हाथ से इशिता के नर्म चूतड़ को दबाता हुया बोला ‘उसके लिए तुम्हे कुछ करना होगा’

इशिता एकदम सिहर उठी और अरिजीत का हाथ झटकती हुई बोली ‘ये आप क्या कर रहे हो’

अरिजीत ने आगे बढ़ते हुए इशिता को पीछे से बाहों में भर लिया और कहा ‘बस मुझे खुश कर दो एक बार’

इशिता को बहुत गुस्सा आ रहा था और उसने पूरे ज़ोर से अरिजीत को पीछे धकेला और बोली ‘आप प्लीज़ बाहर चले जाइए यही अच्छा होगा’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

अरिजीत फिरसे बोला ‘सोच लो ऐश करोगी वैसे भी तुम्हारी जवानी ऐसे ही बीत रही है किसी काम आ जाएगी और तेरी बच्ची का फ्यूचर अच्छा हो जाएगा’

इशिता को कुछ सुन ना अच्छा नही लग रहा था और वो फिरसे गुस्से मे बोली ‘मैने कहा ना बाहर जाइए यहाँ से नही तो मैं शोर मचा दूँगी’

अरिजीत ने आखरी दाव खेला ‘सोच लो सिर्फ़ एक बार की ही बात है सारी जिंदगी ऐश करोगी. मुझे सोच कर बता देना’

कहते हुए अरिजीत बाहर चला गया. इशिता की आँखों में आँसू आ गये थे. किसी तरह से उसने खुद को संभाला और चाइ लेकेर बाहर चली गई. किसी तरह से उसने चाय पीने तक अरिजीत की नज़रो का सामना किया और फिर जैसे ही वो जाने के लिए उठे तो इशिता ने राहत की साँस ली. घर से निकलते वक़्त एक दफ़ा फिरसे अरिजीत ने इशिता का हाथ पकड़ा और मुस्कुरा कर बाहर निकल गया. इशिता ने गुस्से से दरवाज़ा बंद किया और सीधा अपने बेडरूम में जाकर लेट गई और आज हुई घटना के बारे में सोचने लगी.

बस रोशनी के गाओं के बस स्टॉप के रुकी और रोशनी , राजेश और सुमित उसमे से नीचे उतर गये और बस आगे बढ़ गई. सुनीता का गाओं उनके गाओं से आगे था इसलिए वो बस में ही खड़ी रहकर अपने गाओं के आने का इंतज़ार करने लगी. सुमित और राजेश अपने घर की तरफ मूड गये और रोशनी तेज़-2 कदमो के साथ अपने घर की तरफ बढ़ने लगी. गर्मी शुरू होने लगी थी जिसकी वजह से धूप अपना रंग दिखा रही थी. रोशनी के तेज़ चलने की वजह से उसके चूतड़ कुछ ज़्यादा ही मटक रहे थे. वो अपने घर से थोड़ा ही दूर थी कि उसे आगे से दो लड़के आते हुए दिखाई दिए. ये दोनो का रोज़ का काम था रोशनी को इसी वक़्त गली में मिलना. ये दोनो रोशनी के गाओं के ही थे और पिछले काफ़ी दिनो से रोशनी के उपर लाइन मार रहे थे. रोशनी भी अब जवानी की दहलीज़ पर थी इसलिए अपने इर्द-गिर्द इस तरह लड़को का मंडराना अब उसे भी अच्छा लगने लगा था. इन दोनो लड़को में से एक लड़का जो की रोशनी को अच्छा लगने लगा था वो था विवेक. दिखने में एकदम मस्त पूरी मस्क्युलर बॉडी और जिम का शोकीन था. बाल पहलवानो की तरह बिल्कुल छोटे-2 और चेहरे पे हल्की दाढ़ी और मूछ रंग ना ज़्यादा गोरा और ना ज़्यादा काला जेसा की आम तौर पे गाओं के लड़को का होता है बिल्कुल वैसा ही था. उसकी सब से अट्रॅक्टिव चीज़ थी उसकी बॉडी. एकदम बॉडी बिल्डर जेसी खूब कसा हुया बदन चौड़ी छाती और डोले-शोले कुल मिलाकर वो दिखने में मस्त था और 10 में से 6-7 लड़किया उसे पहली नज़र में दिल देने के लिए तैयार हो सकती थी. उसके साथ जो दूसरा लड़का था वो भी रोशनी के गाओं का ही था और उसका नाम हरप्रोशनी था. शकल सूरत में अगर हरप्रोशनी को विवेक से मिलाया जया तो वो उससे कही आगे था एकदम गोरा चिकना और चेहरे पे हल्की दाढ़ी और मूछ थी. लेकिन बॉडी के मामले में वो थोड़ा विवेक से पीछे था. एक नॉर्मल सी बॉडी थी उसकी लेकिन फिर भी वो एकदम परफेक्ट था किसी भी लड़की के सपनो के राजकुमार जेसा. ये दोनो काफ़ी दिनो से आते जाते रोशनी का रास्ता रोक रहे थे. जबसे इन भावरों को रोशनी के जवान होने की महक महसूस हुई थी तब से ही दोनो भावरे इस महक फैलाने वाले फूल का रस पीने के लिए मचल रहे थे लेकिन रोशनी नाम का ये फूल इतनी जल्दी किसी को अपना रस पिला दे ऐसा ना तो कुदरत को मंजूर था और नही रोशनी की जवानी को अब देखना था कोन्सा भावरा इस फूल का रस पीने में कामयाब होने वाला था.


उन दोनो को जेसे ही रोशनी आती हुई दिखाई दी तो दोनो एकदुसरे को देखते हुए बोले ‘अरे देख माल आ गया’

रोशनी को ज़्यादा तो नही मगर उनका ‘माल’ शब्द सुनाई दे गया था और उसने आइडिया लगा लिया था कि वो उसे ही माल बोल रहे थे. जेसे ही रोशनी उनके पास से गुज़री तो विवेक उसके साथ-2 चलने लगा और बोला ‘किवे ओ सोहनेयो’

रोशनी ने कोई जवाब तो नही दिया मगर उसका नज़रो को झुकाकर मुसकराना देख विवेक समझ गया की चिड़िया पिंजरे में आ सकती है.

विवेक ने हिम्मत दिखाते हुए धीरे से साथ चलते हुए रोशनी की कलाई पकड़ ली और कहा ‘आइ लव यू रोशनी’

रोशनी एक तरफ कलाई पकड़े जाने से घबरा गई तो दूसरी और विवेक की बात सुनकर शर्मा भी गई. उसने ज़ोर लगाते हुए अपनी क्लाई छुडाइ और तेज़ी से भाग कर अपने घर के पास हो गई. विवेक वही खड़ा होकर उसे देखता रहा. रोशनी जेसे ही अपने घर के मेन गेट के सामने पहुँची तो उसने एक दफ़ा घूम कर विवेक की तरफ देखा और मुस्कुराती हुई दरवाज़ा खोल कर अंदर दाखिल हो गई. विवेक ने जेसे ही रोशनी को मुस्कराते हुए देखा तो उसने दिल के साथ अपने लंड को भी उछलते हुए महसूस किया और भाग कर हरप्रोशनी के पास आकर बोला ‘देखा साले कहा था ये सेट हो जाएगी’

हरप्रोशनी उससे जलता हुया बोला ‘अभी सेट कहाँ हुई’

विवेक बोला ‘साले तूने देखा नही केसे मुस्कुरा कर गई वो’

हरप्रोशनी उसकी खिचाई करता हुया बोला ‘अरे वो इसलिए हँसी कि केसा बंदर मुझे प्रपोज कर रहा है’

विवेक ने एक घुसा उसे मारते हुए कहा ‘साले अब जल मत देखना केसे नंगी करके चोदुगा तेरे सामने इसे’

हरप्रोशनी हस्ता हुआ बोला ‘अरे मैं तो मज़ाक क्र रहा था तू इसे पता ले मैं किसी और को देखता हूँ वैसे भी हम मिल कर ही तो मज़े करेंगे हमेशा की तरह’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

विवेक उससे हाथ मिलाता हुया बोला ‘बिल्कुल यार चल अब ट्यूब्ल पे चलते हैं आज तो दारू बनती है शाम को’

हरप्रोशनी बोला ‘अरे पहले शाम को ग्राउंड में भी जाना है प्रॅक्टीस के लिए शाम को देखेगे अगर मूड बना तो’

फिर वो दोनो अपने खेतों की तरफ निकल गये.

शाम हो चुकी थी और रोशनी सो कर उठी थी और हाथ में चाइ का कप पकड़ कर ड्रॉयिंग रूम में टीवी देख रही थी. उसने कपड़े चेंज कर लिए थे और अब एक ब्लॅक टी शर्ट और पिंक कलर का लोवर पहना था. लोवर उसकी टाँगों से चिपका हुआ था और उसकी गाऔर भी फुटबॉल की तरह शेप में दिखाई दे रही थी. टीवी में कुछ खास नही आ रहा था इसलिए बोर होकर रोशनी ने चाइ ख़तम की और टीवी बंद करके मम्मी के रूम में गई. इशिता भी अलमारी में कपड़े ठीक कर रही थी. रोशनी ने इशिता को कहा ‘मम्मी मैं राजेश के घर जा रही हूँ’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

इशिता ने चेहरा घूमकर उसे जवाब दिया ‘ओके बेटा जल्दी आ जाना’

रोशनी बोली ‘ओके मम्मा’….


कहानी जारी है …… पढ़ते रहिये मस्तराम डॉट नेट ….|


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