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तुमने कभी किसी लड़की को चोदा है-3


प्रेषक: अजित


तुमने कभी किसी लड़की को चोदा है-1 | तुमने कभी किसी लड़की को चोदा है-2

गतांग से आगे….  वंदना ने करवट लेकर मुझे अपने उपर से हटाया और मुझे अपनी बाहों मे कस कर कान मे फूस-फूसा कर बोली, “अजित तुमने तो कमाल कर दिया, क्या गजब की ताक़त है तुम्हारे लंड मे.”

मैने बोला , “कमाल तो आपने कर दिया है वंदना, आजतक तो मुझे मालूम ही नही था कि अपने लंड का कैसे इस्तीमल करना है. यह तो आपकी महरबानी है जो कि आज मेरे लंड को आपकी चूत की सेवा करने का मौका मिला.” अबतक मेरा लंड उनकी चूत के बाहर झान्टो के जंगल मे राउंड मार रहा था. वंदना ने अपनी मुलायम हथेलिओं मे मेरा लंड को पकड़ कर सहलाना शुरू किया. उनकी उंगली मेरे आंडो से खेल रही थी. (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

उनकी नाज़ुक उंगलिओ का स्पर्श पाकर मेरा लंड भी जाग गया और एक अंगड़ाई लेकर वंदना की चूत पर ठोकर मारने लगा. वंदना ने कस कर मेरे लंड को क़ैद कर लिया और बोली, “बहुत जान है तुम्हारे लंड मे, देखो फिर से फड़-फडाने लगा, अब मैं इसको छोड़ूँगी नही.”  (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

हम दोनो अगल बगल लेटे हुए थे. वंदना ने मुझको चित लिटा दिया, और मेरी टाँग पर अपनी टाँग चढ़ा कर लंड को हाथ से मूठ मारने लगी. साथ ही साथ वंदना अपनी कमर हिलाते हुए अपनी झांट और चूत मेरी जाँघ पर रगड़ने लगी. उनकी चूत पिछली चुदाई से अभीतक गीली थी और उसका स्पर्श मुझे पागल बनाए हुए था. अब मुझसे रहा नही गया और करवट लेकर वंदना की तरफ मुँह करके लेट गया. उनकी चूंची को मुँह मे दबा कर चूस्ते हुए अपनी उंगली चूत मे घुसा कर सहलाने लगा. वंदना एक सिसकारी लेकर मुझसे कस कर चिपट गयी और ज़ोर ज़ोर से कमर हिलाते हुए मेरी उंगली से चुदवाने लगी. अपने हाथ से मेरे लंड को कस कर ज़ोर ज़ोर से मूठ मार रही थी. मेरा लंड पूरे जोश मे आकर लोहे की तरह सख़्त हो गया था. अब वंदना की बेताबी हद से ज़्यादा बढ़ गयी थी और खुद चित हो कर मुझे अपने उपर खींच लिया. मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रखती हुई बोले, “आओ मेरे अजिता, सेकेंड राउंड हो जाए.” (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

मैने झट से कमर उठा कर धक्का दिया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धँस गया. वंदना चिल्ला उठी और बोले, “जीओ मेरे अजिता, क्या शॉट मारा है . अब मेरे सिखाए हुए तरीके से शॉट पर शॉट मारो और फाड़ दो मेरी चूत को.” वंदना का आदेश पाकर मैं दुगुने जोश मे आ गया और उनकी चूंची को पकड़ कर वंदना की चूत मे लंड डालने लगा. उंगली की चुदाई से वंदना की चूत गीली हो गयी थी और मेरा लंड सतसट अंदर-बाहर हो रहा था. वंदना नीचे से कमर उठा उठा कर हर शॉट का जवाब पूरे जोश के साथ दे रही थी. वंदना ने दोनो हाथो से मेरी कमर को पकड़ रखा था और ज़ोर ज़ोर से अपने चूत मे लंड घुस्वा रही थी. वो मुझे इतना उठाती थी कि बस लंड का सुपाड़ा अंदर रहता और फिर ज़ोर नीचे खींचती हुई घप से लंड चूत मे घुस्वा लेती थीं. पूरे कमरे मे हमारी सांस और घपा-घाप, फ़च-फ़च की आवाज़ गूँज रही थी.

जब हम दोनो की ताल से ताल मिल गयी तब वंदना ने अपने हाथ नीचे लाकर मेरे चूतड़ को पकड़ लिया और कस कस कर दबोचते हुए मज़ा लेने लगी. कुछ देर बाद वंदना ने कहा, “आओ एक नया आसन सिखाती हूँ,” और मुझे अपने उपर से हटा कर किनारे कर दिया. मेरा लंड ‘पक’ की आवाज़ साथ बाहर निकल आया. मैं चित लेता हुआ था और मेरा लंड पूरे जोश के साथ सीधा खड़ा था. वंदना उठ कर घुटनो और हथेलिओं पर मेरे बगल मे बैठ गयी. मैं लंड को हाथ मे पकड़ कर उनकी हरकत देखता रहा. वंदना ने मेरे लंड पर से हाथ हटा कर मुझे खीच कर उठाते हुए कहा, “ऐसे पड़े पड़े क्या देख रहे हो, चलो अब उठ कर पीछे से मेरी चूत मे अपनी लंड को घुसाओ.” (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

मैं भी उठ कर वंदना के पीछे आकर घुटने के बल बैठ गया और लंड को हाथ से पकड़ कर वंदना की चूत पर रगड़ने लगा. क्या मस्त गोल गोल गद्दे दार गान्ड थी. वंदना ने जाँघ को फैला कर अपने चूतड़ उपर को उठा दिए जिससे कि उनकी रसीली चूत साफ नज़र आने लगी. वंदना का इशारा समझ कर मैने लंड का सुपाड़ा उनकी चूत पर रख कर धक्का दिया और मेरा लंड उनकी चूत को चीरता हुआ जड़ तक धँस गया.

वंदना ने एक सिसकारी भर कर अपनी गान्ड पीछे कर के मेरी जाँघ से चिपका दी. मैं भी वंदना की पीठ से चिपक कर लेट गया और बगल से हाथ डाल कर उनकी दोनो चूंचियों को पकड़ कर मसल्ने लगा. वो भी मस्ती मे धीरे धीरे चुतड़ों को आगे-पीछे करके मज़े लेने लगी. उनके मुलायम चूतड़ मेरी मस्ती को दोगुना कर रहे थे. मेरा लंड उनकी रसीली चूत मे आराम से आगे-पीछे हो रहा था.

कुछ देर तक चुदाई का मज़ा लेने के बाद वंदना बोली, “चलो अजित अब आगे उठ कर शॉट लगाओ, अब रहा नही जाता.” मैं उठ कर सीधा हो गया और वंदना के चुतड़ों को दोनो हाथों से कस कर पकड़ कर चूत मे हमला शुरू कर दिया. जैसा कि वंदना ने सिखाया था मैं पूरा लंड धीरे से बाहर निकाल कर ज़ोर से अंदर कर देता. शुरू मे तो मैने धीरे धीरे किया लेकिन जोश बढ़ता गया और धक्को की रफ़्तार बढ़ती गयी. धक्का लगाते समय मैं वंदना के चूतड़ को कस के अपनी ओर खीच लेता ताकि शॉट तगड़ा पड़े .  (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

वंदना भी उसी रफ़्तार से अपने चूतड़ को आगे-पीछे कर रही थी. हम दोनो की साँसे तेज हो गयी थी. वंदना की मस्ती पूरे परवान पर थी. नंगे जिस्म जब आपस मे टकराते तो घप-घप की आवाज़ आती थी . काफ़ी देर तक मैं उनकी कमर पकड़ कर धक्का लगाता रहा. जब हालत बेकाबू होने लगी तब वंदना को फिर से चित लेता कर उन पर सवार हो गया और चुदाई का दौर चालू रखा. हम दोनो भी पसीने से लथपथ हो गये थे पर कोइ भी रुकने का नाम नही ले रहा था. तभी वंदना ने मुझे कस कर जाकड़ लिया और अपनी टाँगे मेरे चुतड़ों पर रख दी और कस कर ज़ोर ज़ोर से कमर हिलाते हुए चिपक कर झड गयी. उनके झड़ने के बाद मैं भी वंदना की चूंचियों को मसल्ते हुए झड गया और हान्फते हुए उनके उपर लेट गया. हम दोनो की साँसे ज़ोर ज़ोर से चल रही थी और हम दोनो काफ़ी देर तक एक-दूसरे से चिपक कर पड़े रहे.

कुछ देर बाद वंदना बोली, “क्यो अजित कैसी लगी मेरी चूत ?”

मैं बोला, ” है वंदना जी करता है कि जिंदगी भर इसी तरह से तुम्हारी चूत मे लंड डाले पड़ा रहूं. ”

“जब तक मेर हज़्बेंड वापस नही आते, यह चूत तुम्हारी है, जैसे मर्ज़ी हो मज़े लो, अब थोड़े देर आराम करते है.”

“नही वंदना, कम से कम एक बार और हो जाए. देखो मेरा लंड अभी भी बेकरार है.”

वंदना ने मेरे लंड को पकड़ कर कहा, “यह तो ऐसे रहेगा ही, चूत की खुसबु जो मिल गयी है. पर देखो रात के तीन बज गये है, अगर सुबह टाइम से नही उठें तो पड़ोसियों को शक हो जाएगा. अभी तो सारा दिन सामने है और आगे के कितने दिन हमारे है. जी भर कर मस्ती कर लेना. मेरा कहा मनोगे तो रोज नया स्वाद चखाउन्गी.”

वंदना का कहना मान कर मैने भी ज़िद छोड़ दी और वंदना करवट ले कर लेट गयी और मुझे अपने सटा लिया. मैने भी उनकी गान्ड की दरार मे लंड फँसा कर चूंचियों को दोनो हाथों मे पकड़ लिया और वंदना के कंधे को चूमता हुआ लेट गया. नींद कब आई इसका पता ही नही चला. (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

इसके बाद बहुत बार हमने इस तरह से सेक्स किया… लेकिन कभी कभी मुझे डर भी लगता था और गिल्टी फील होता था कि उसके बच्चे मुझे मामा कहते है और मैं ऐसा ये सब कर रहा हूँ…. फिर बाद मे धीरे धीरे मैने उनको मिलना बंद कर दिया. बात चीत करना भी बंद कर दिया.

अभी तो हम खाली एक दूसरे को कभी कभी देखते है और बात नही होती. लेकिन स्माइल अभी भी मुझे मिलती है कभी कभी.


तो दोस्तों फिर कभी लिखुगा अपनी आगे की कहानी तब तक आप भी अपनी कहानी हमें पोस्ट कर पढ़ते रहिये |


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तुमने कभी किसी लड़की को चोदा है-3

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