All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

मेरा चुदाई का प्यासा परिवार-3


मेरा चुदाई का प्यासा परिवार-1 | मेरा चुदाई का प्यासा परिवार-2

गतांग से आगे …… और मैं सुमोना के सामने, सोफे पे पूरा नंगा बैठा अपने लण्ड से खेलने लगा। फिर सुमोना ने तीसरा हाथ बाँट दिया और तीसरा गेम शुरू हुआ। इस बार, मेरा लक अच्छा था और मैं गेम जीत गया। सुमोना – तो तुम इस बार जीत ही गये… तो बताओ, पहले क्या देखना चाहते हो… मेरे बूब्स या मेरी चूत… बोलो क्या उतारें, अपना ब्लाउज या पेटीकोट… मैं – मुझे पहले तुम्हारे बूब्स देखने हैं… प्लीज़, अपना ब्लाउज उतारो ना… सुमोना ने बिना देर किए, एक ही झटके में फटाफट अपना ब्लाउज उतार दिया और एक तरफ फेंक दिया। उसके नंगे बूब्स देख कर, मैं और भी ज़्यादा उतेज्ज़ित हो गया और उसके बूब्स देखते हुए, अपना लण्ड पकड़ कर बहुत ज़ोर से मूठ मारने लगा।

सुमोना – अरे, ये क्या… इतने भी बेसबर मत बनो… अपने हाथ से ही सब कर लोगे क्या… चलो, आगे खेलते हैं…

मैं – उनमह: ठ ठा ठीक है… सुमोना अब ताश ले कर, चौथा हाथ बाँटने लगी और चौथा गेम शुरू हुआ।

इस बार भी, मेरा हार्ड लक रहा और मैं गेम हार गया। और भी हजारो कहानियां है मस्तराम डॉट नेट पर |

सुमोना – वाउ!! लो तुम फिर से हार गए और मेरे पूरे कपड़े भी अभी नहीं उतरे…

मैं – हाँ, माई हार्ड लक… पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा है…

सुमोना – सोच रही हूँ तुम को, क्या डेयर दूं…

मैं – कुछ भी दे दो…

सुमोना – मेरा डांस करने का, मन कर रहा है… तुम्हारा डेयर ये है की तुम अपने लण्ड से टेबल पर ड्रम बजाओ और मैं डांस करती हूँ…

और मैं तुरंत अपना लंबा लण्ड पकड़ कर, टेबल पर पटक पटक कर ड्रम की तरह बजाने लगा और सुमोना उठ कर अपने नंगे बूब्स उछाल उछाल कर नाचने लगी.!


थोड़ी देर बाद, सुमोना ने ताश का पाँचवा हाथ बनाया और पाँचवा गेम शुरू हुआ।

इस बार, मैं जीत गया.!

मैं – हुर्रे!! मैं जीत गया… तो फाइनली, अब मुझे तुम्हारी चूत के दर्शन होंगे…

सुमोना – ये लो, मेरा पेटीकोट… अब मैं भी तुम्हारी तरह, पूरी नंगी हो गई हूँ… लो, देख लो मेरी चूत… जी भर के देखो…

अब सुमोना ने ताश का छठा हाथ बनाया और छठा गेम शुरू हुआ।

इस बार, मैं फिर जीत गया.!

मैं – मैं जीत गया… बोलो, तुम को क्या डेयर दूं…

सुमोना – कुछ भी दे दो… मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ… पूरी नंगी तो हूँ ही… अब कुछ भी करवा लो…

मैं – हुम्म्म: सोच रहा हूँ क्या करूँ… क्या डेयर दूँ…

सुमोना – तुम भी पूरे नंगे हो और मैं भी पूरी नंगी हूँ… चाहो तो, अपना लण्ड मुझ से चूसवा लो… मुझे भी मज़ा आएगा…

मैं – हाँ, आ जाओ ना… चूस लो ना, मेरा लण्ड… ये कब से बेताब है… और सुमोना सोफे से उठी और मेरे सोफे के सामने, अपने घुटने पर बैठ कर मेरी कमर पकड़ कर मेरा लण्ड चूसने लगी।

थोड़ी देर चूसने के बाद, सुमोना ने लण्ड मुंह से निकाला.!

सुमोना – चलो ना, अब बेड पर चलते हैं… गेम बंद करो और मुझे बेड पर ले चलो… कब से मैं तुम्हारे लण्ड की भूखी हूँ… प्लीज़, मुझे अब बेड पे ले जा के चोद दो ना, किशोर…

मैं – मैं भी कब से, तुम को चोदना चाहता हूँ… चलो उठो… बेड पर चलते हैं…

मैंने सुमोना को उठाया और हम दोनों, बेड पर आ गए।

मैं सुमोना के बूब्स चूसने लगा और वो बेड पर मचलने लगी।

थोड़ी देर बाद, मैं उसकी चूत चाटने लगा।

सुमोना – उंहमहम: आअहह… किशोर, बहुत मज़ा आ रहा है… जीभ अंदर डाल के, लीक करो ना…

और मैं उसकी चूत के अंदर, जीभ फिराने लगा और वो और ज़ोर से बेड पर तड़पने लगी।

सुमोना – आअहह… मैं एक दम तैयार हूँ, अब और इंतेज़ार नहीं होता… प्लीज़, अब लण्ड डालो ना…

फिर, मैंने सुमोना को सीधा बेड पर लिटाया और उसके उपर चढ़ गया।

अपना लण्ड हाथ में पकड़ कर, एक ही झटके में पूरा अंदर घुसा दिया।


सुमोना के मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी और मैं उसे धीरे धीरे लण्ड अंदर बाहर करते हुए, चोदने लगा।

धीरे धीरे, मैं अपनी स्पीड बड़ा रहा था और साथ ही सुमोना की सिसकारियाँ भी तेज़ होती जा रही थी.!

सुमोना – आ आ अहह… आ आ आह… ओह… ऐसे ही, ज़ोर से… चोदो… मेरी ले लो… मैं रंडी हूँ… मेरी मार लो… आ आ हह… मस्त लण्ड है तेरा… कुतिया की तरह, चोद मुझे… आ आहह… फाड़ डाल, मेरी चूत… मैं झड़ रही हूँ… करते रहो… ऐसे ही… आ आ आ आ आ आ आ आ ह ह ह ह ह ह ह ह…

मैं – साली, रंडी… कुतिया… ले और ले… आह अहहा… और फिर हम दोनों ने एक साथ चरम आनंद का अनुभव किया और मैंने सुमोना की चूत के अंदर ही निकाल दिया।

चुदाई के बाद, सुमोना ने विस्की का थर्ड पेग बनाया और हम दोनों सोफे पर नंगे ही, आमने सामने बैठ कर, विस्की सीप करने लगे। और भी हजारो कहानियां है मस्तराम डॉट नेट पर |

सुमोना – बहुत मज़ा आया, आज चुदाई में… मैं कब से, तुम्हारे लण्ड की भूखी थी… आज तुम्हारे लण्ड का मज़ा मिल ही गया… अब हम दोनों जब तक यहाँ हैं, रोज़ चुदाई करेंगें और खूब ऐश करेंगें… बड़ा मज़ा आएगा…

मैं – हाँ, सच में मज़ा आएगा… मैं भी कब से, तुम को चोदने के लिए तड़प रहा था… जब भी तुम को देखता था, लण्ड टाइट हो जाता था…

सुमोना – काश, मुझे कभी आकाश का लण्ड भी मिल जाए… मुझे उसका भी चाहिए और क्या मस्त बॉडी है, उसकी…

मैं – करिश्मा भी, कोई कम नहीं है…

सुमोना – हाँ, करिश्मा भी कोई कम रंडी नहीं है… उसकी आँखों में भी मैंने तुम्हारे और रंजन के लण्ड के लिए, भूख देखी है… रंजन और करिश्मा, पिछले 2 हफ्ते घर पे अकेले थे… मुझे पूरा यकीन है की करिश्मा ने रंजन को सिड्यूस कर के, उसका लण्ड ले लिया होगा और अब रूचि भी वहाँ पहुँच चुकी है… रंजन ने कई बार, मुझे चोदते हुए रूचि का नाम लिया है… रंजन रूचि की भी चूत मारना चाहते हैं… हो सकता है, करिश्मा उनकी मदद कर दे तो तीनों मिल के, खूब चुदाई कर रहे होंगे…

मैं – मुझे तुम तो मिल ही गई हो… रूचि, अगर पापा और आकाश से चुदती है तो मुझे कोई प्राब्लम नहीं… पर, मुझे करिश्मा की भी चाहिए… उसकी स्कर्ट में मोटी मोटी मस्त जांघें और बड़े बड़े बूब्स देख कर, मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है…

सुमोना – ठीक है, आगे जब भी मौका लगेगा, मैं तुम को करिश्मा की दिलवाने की कोशिश करूँगी… पर तुम भी कोशिश करना की मुझे कभी आकाश के साथ अकेले रहने का मौका मिले… सिड्यूस तो, मैं उसे खुद ही कर लूँगी…

मैं – ठीक है… वादा रहा… जब मैं ऊटी से सिंगापुर के लिए निकला, उसके एक दिन पहले रूचि ऊटी से घर आ गई थी क्यों की उन दिनों सिर्फ़ पापा ऑफीस जा रहे थे.! इसलिए, करिश्मा फ्री थी और करिश्मा रूचि को लेने एयरपोर्ट आ गई थी.!

करिश्मा ने एयरपोर्ट से रूचि को लिया और दोनों घर के लिए निकले, गाड़ी में।


करिश्मा – तो कैसा रहा, तेरा हनिमून किशोर के साथ… 2 हफ्ते, बहुत मज़ा किया होगा, तुम दोनों ने ऊटी में…

रूचि – अरे नहीं, हनिमून कहाँ यार… शादी के बाद में, ये मेरा और किशोर का चौथा विकेशन था… अब वो पहले हनिमून जैसी बात अब कहाँ रही… पर, हाँ विकेशन में मज़ा बहुत आया…

करिश्मा – तो क्या तू किशोर के लण्ड से संतुष्ट नहीं है… ज़यादा चोदता नहीं क्या, तुझे वो…

रूचि – अरे!! नहीं नहीं… ऐसी बात नहीं है… किशोर, बहुत पक्का और असली मर्द है और उसका लण्ड भी लंबा और मोटा है… फाड़ के रख देता है, मेरी… विकेशन पे एक दिन में, कई कई बार ले लेता है… मेरा मतलब था की फर्स्ट हनिमून में जो नयापन का मज़ा था, वो अब नहीं बचा क्यों की वही सब कुछ हम कई बार कर चुके हैं…

करिश्मा – तो तू पटा ले ना, किसी को… किशोर के लण्ड के मज़े के साथ साथ, तुझे नयापन भी मिल जायगा…

रूचि – हाँ यार!! ऐसा ही कुछ सोच रही हूँ… देखती हूँ… कुछ ना कुछ तो करूँगी…

करिश्मा – मेरे पास एक आइडिया है…

रूचि – बता…

करिश्मा – मुझे भी किशोर पसंद है… तू मेरे लिए, मुझे तेरे पति किशोर को पाटने में मेरी मदद कर दियो और तू मेरे पति आकाश को पटा ले… मैं तेरी मदद कर दूँगी…

रूचि – वाउ!! एक्सचेंज ऑफर… हाहहाहा… तुम सीरीयस हो… कहीं तू मज़ाक तो नहीं कर रही…

करिश्मा – अरे, नहीं यार… मेरा भी हाल, कुछ तेरी तरह ही है… कुछ नयापन हो लाइफ में, तो मज़ा आ जायगा…

रूचि – चल, बाद में सोचते हैं इस बारे में… अभी आज कल तो आकाश मॉरिशस में है और किशोर सिंगापुर में और यहाँ पर तो सिर्फ़ ससुर जी ही हैं।

दोनों घर पहुँचते हैं और अपने अपने रूम में, चले जाते हैं।

रूचि नहा के फ्रेश हो जाती है और सो जाती है।

करिश्मा भी अपने रूम में, रेस्ट करने लगती है।

शाम को, पापा ऑफीस से घर आते हैं।

करिश्मा, दरवाज़ा खोलती है।

पापा अंदर आते ही, करिश्मा को पकड़ कर किस करने लगते हैं, तो करिश्मा उनको दूर हटाते हुए बोलती है की अभी नहीं… रूचि घर पर है… 8 बजे, डिन्नर पर मिलते हैं… फिर रात में, रूचि के सोने के बाद… मैं आप के कमरे में आ जाउंगी…

रात 8 बजे, करिश्मा पापा और रूचि तीनों डिन्नर टेबल पर थे।


करिश्मा ने काली स्कर्ट और काला टॉप पहना था।

टॉप में से उसकी क्लीवेज मस्त लग रही थी, जो किसी को भी पागल बना दे।

रूचि ने अपने सिग्नेचर स्टाइल में, पर्पल कलर की सादी और पारदर्शी साड़ी, मिलते रंग के बिकनी ब्लाउज के साथ पहनी थी।

साड़ी उसने नेवेल से, बहुत नीचे बँधी थी।

पापा उसकी नेवेल, क्लीवेज और पीठ ललचाई नज़रों से बस घूरे जा रहे थे।

पापा सिर्फ़ अपने गाउन में थे और उन्होने, अंदर कुछ नहीं पहना था।

करिश्मा – हमारा डिन्नर टाइम तो हो गया पर आज कुछ ज़यादा भूख नहीं है…

रूचि – हाँ, मैंने भी लेट खाया था फ्लाइट में…और भी हजारो कहानियां है मस्तराम डॉट नेट पर |

ससुरजी – मेरा तो एक दो ड्रिंक्स लेने का मन है, अभी…

करिश्मा – तो चलिए, फिर हम तीनों लिविंग रूम में बार के पास चलते हैं और कुछ देर वहीं बैठ के 2 या 3 ड्रिंक्स लेते हैं… पहले, रूचि तुम पिओगी ना…

रूचि – ओह!! हाँ हाँ क्यूँ नहीं… चलो…

करिश्मा और रूचि, लिविंग रूम में जा के एक 3 सीटर सोफे पे जा के आस पास बैठ गई और पापा बार के सामने खड़े हो कर ड्रिंक्स बनाने लगे।

ससुरजी – रूचि, तुम क्या लोगी…

रूचि – पापा, मैं वाइट वाइन…

ससुरजी – और करिश्मा, तुम…

करिश्मा – मुझे तो कुछ भी चलेगा… आप जो अपने लिए बना रहे हो, वही मुझे भी डाल डो… (पापा को देख कर, हंसते हुए)

ससुरजी – मैं विस्की ले रहा हूँ… विस्की चलेगी…

करिश्मा – हाँ हाँ… क्यूँ नहीं…

पापा ने करिश्मा और रूचि को उनका ड्रिंक दिया और अपना ड्रिंक ले के, उनके सामने वाले सोफे पे बैठ गई।


तीनों, अपना अपना ड्रिंक सीप कर रहे थे।

अपना ड्रिंक सीप करते हुए पापा, फिर रूचि के अधनंगे जिस्म को निहारने लगे। करिश्मा ने पापा को रूचि की तरफ घूरते हुए देखा तो उसने चुपके से रूचि का आँचल पकड़ कर, उसकी साड़ी का पल्ला धीरे धीरे खींच कर ढलका दिया।

जब रूचि का पल्ला ढलका तो उसने करिश्मा की ये हरकत नोटीस की और रूचि ने करिश्मा की तरफ देखा तो करिश्मा ने रूचि को चुपके से आँख मार कर, इशारा किया और पापा की तरफ देखा।

रूचि ने भी करिश्मा की नज़रों का पीछा करते हुए, पापा की तरफ देखा तो सारी बात समझ गई।

पापा को उसने, अपनी तरफ घूरता पाया और उनके गाउन में लण्ड का काफ़ी उँचा टेंट भी बन रहा था।

रूचि ने वापस, करिश्मा की तरफ देखा। और भी हजारो कहानियां है मस्तराम डॉट नेट पर |

दोनों की नज़रें मिली और दोनों के होठों पर स्माइल थी।

रूचि, समझ गई थी की पापा की सिड्यूस करना है।

अब रूचि के सिने से, साड़ी का आँचल ढलाक चुका था।

वो, थोड़ा सीधा हो कर बैठ गईं।

पापा अपना ड्रिंक सीप करते हुए, रूचि को देख रहे थे।

रूचि को देखते हुए और ड्रिंक सीप करते हुए अंजाने में, पापा का दूसरा हाथ उनके लण्ड की तरफ चला गया और वो अपना खड़ा लण्ड गाउन के ऊपर से सहलाने लगे।

इस हालात पे, करिश्मा चुटकी लेते हुए बोली।

करिश्मा – क्या पापा, जब से रूचि आई है… आप तो मेरी तरफ देख भी नहीं रहे…

ससुरजी (सकपका कर लण्ड से, हाथ हटाते हुए) – अरे नहीं, करिश्मा ऐसी कोई बात नहीं है…

करिश्मा – अच्छा, आप को मेरे और रूचि में से कौन ज़यादा पसंद है…

ससुरजी – तुम दोनों ही, मुझे अज़ीज़ हो…

पहली ड्रिंक ख़तम हो गई थी, पापा सोफे से उठ कर खड़े हुए।

ससुरजी – लाओ, अपना अपना ग्लास दो… मैं अगला ड्रिंक बनाता हूँ…

ये कहते हुए, पापा पहले करिश्मा की तरफ बड़े और उसका ग्लास ले कर रूचि की तरफ मुड़े।

रूचि के सामने झुक कर, पापा ने उसके बिकनी ब्लाउज की डीप क्लीवेज में अंदर तक झाँकते हुए, उसे से ग्लास लिया।

रूचि ने अभी भी, अपना ढलका हुआ आँचल नहीं उठाया था और उसका उठाने का कोई इरादा भी नहीं था.!

पापा ने दोनों को एक एक ड्रिंक और बनाया और पहले, करिश्मा का ड्रिंक उसकी तरफ बड़ाया।

फिर, पापा रूचि के पास जा कर थोड़ा झुक कर फिर से रूचि के बिकनी ब्लाउज की डीप क्लीवेज में, अंदर तक झाँकते हुए उसे ड्रिंक देने लगे।

रूचि – अरे!! कहाँ देख रहे हो, पापा… यहाँ देखो, नहीं तो ड्रिंक गिर जाएगी…

ससुरजी – ओह सॉरी… ये लो तुम्हारे ड्रिंक…

रूचि (ड्रिंक लेते हुए) – धन्यवाद पापा…

पापा, वापस अपने सोफे पे जा कर बैठ गये।

तीनों, अपना दूसरा ड्रिंक सीप करने लगे।

पापा अभी भी, रूचि की निहार रहे थे। रूचि – पापा, आज क्या बात है… आज तो आप, मुझे कुछ ज़यादा ही प्यार से देख रहे हो… करिश्मा – हाँ, मुझे भी जलन हो रही है… और भी हजारो कहानियां है मस्तराम डॉट नेट पर |

ससुरजी – ऐसा कुछ नहीं है, बेटा…

रूचि – पापा, आप उतनी दूर वहाँ क्यों बैठे हो… आप भी इसी सोफे पे आ जाओ ना… जो देखना है, पास से देख लेना… अच्छा लगेगा…

ससुरजी – रूचि, तुम को कुछ बुरा तो नहीं लगा…

रूचि – नहीं नहीं… बिल्कुल भी नहीं… आप आ जाओ ना, यहाँ…

ससुरजी – ठीक है… फिर, मैं वहीं आता हूँ…

और पापा उसी थ्री सीटर सोफे पर करिश्मा और रूचि के बीच में बैठ गये और पापा फिर चोरी चोरी, रूचि का जिस्म देखने लगे।

करिश्मा – पापा, मैं भी तो सेक्सी हूँ और मैंने भी कम कपड़े पहने है… लेकिन, आप तो बस, रूचि को ही देखे जा रहे हो…

रूचि – हा हा हा…

ससुरजी – तुम दोनों ही बहुत सेक्सी हो… पर रूचि, आज इतने दिनों बाद आई है तो…

करिश्मा – तो क्या आप, आज रूचि को पूरी नंगी देखना चाहते हो…

रूचि – पापा, आप मुझे नंगी देखना चाहते हो तो बता दो… मुझे कोई प्राब्लम नहीं है… मैं अभी आप के सामने नंगी हो जाउंगी.!

करिश्मा – चलो, एक काम करते हैं… हम सभी नंगे हो जाते हैं… मज़ा आएगा…

रूचि – चलो, तो फिर ठीक है…

करिश्मा ने फिर पापा के जवाब का इंतेज़ार नहीं किया और उनका गाउन खोल कर, कंधों पर से खिसका कर उतार कर एक तरफ फेंक दिया।

पापा, अब पूरे नंगे हो गये थे और अपना लण्ड पकड़ कर बैठे थे और हिलाते हुए अभी भी रूचि के बूब्स देख रहे थे।

पापा का गाउन उतारने के बाद, करिश्मा ने अपना टॉप स्कर्ट और पैंटी भी उतार दी और पलक झपकते ही, पूरी नंगी हो गई और पापा के सामने सेंटर टेबल पर खड़ी हो कर, पोज़ कर कर के पापा को दिखाने लगी।

पापा, थोड़ी देर देखते रहे और अपना लण्ड पकड़ कर हिलाते रहे।


थोड़ी देर, देखने के बाद.!

ससुरजी – करिश्मा, हम दोनों तो नंगे हो गये हैं… अब, रूचि को भी नंगी करो ना…

करिश्मा – रूचि तू आ जा ना, टेबल के ऊपर… मैं तुझे पापा के सामने नंगी करती हूँ… पापा बेताब हो रहे हैं, तुझे नंगा देखने के लिए…

रूचि – बिल्कुल…

रूचि उठ कर, पापा के सामने सेंटर टेबल पर खड़ी हो गई।

करिश्मा ने उसकी लटकती हुई साड़ी, रूचि के चारों तरफ से घुमा कर पूरी निकाल दी और एक तरफ फेंक दी।

अब रूचि के बदन पर, तीन कपड़े थे – बिकनी ब्लाउज, पेटीकोट और पैंटी.!

करिश्मा रूचि के पीछे, टेबल पर खड़ी हो गई और रूचि का फ्रंट पापा के सामने था और पापा सोफे पर नंगे बैठ कर, लण्ड के साथ खेल रहे थे।

करिश्मा – पापा, ये आप की रंडी है… बताओ, पहले इसका क्या उतारूँ, ब्लाउज या पेटीकोट… पहले क्या देखोगे, इसकी टाँगें या बूब्स…

ससुरजी – पेटीकोट उतार दे, रांड़ का पहले…

करिश्मा ने रूचि का पेटीकोट उतार दिया।

अब रूचि पैंटी और बिकनी ब्लाउज में थी।

करिश्मा – पापा, अब क्या उतारूँ छिनाल का…

ससुरजी – ब्लाउज और पैंटी भी निकाल दे… कर दे, इसको नंगी…

करिश्मा ने रूचि को फिर पूरा नंगा कर दिया।

रूचि – पापा, लो मैं नंगी खड़ी हूँ, आप के सामने… देख लो, मुझे जी भर के… मुझे अपने इस्तेमाल की चीज़ बना लो… मैं प्यासी हूँ, आप के तगड़े लण्ड की… कर लो मेरे साथ, जो जी चाहे… चूत, ले लो मेरी… चोद डालो, मुझे… पापा ने रूचि का हाथ पकड़ कर, उसे टेबल पर से नीचे उतरा और उसे ज़ोर से हग कर के किस करने लगे।

करिश्मा भी टेबल पर से नीचे आ गई और उसने पापा को पीछे से हग कर लिया।

रूचि (लिप्स अलग करते हुए) – चलो, हम पापा के बेडरूम में चलते हैं…

पापा ने रूचि को गोदी में उठा लिया और तीनों बेड रूम की तरफ चल पड़े।

बेड रूम में पहुँच कर, पापा ने रूचि को बेड पर फेंक दिया।

फिर उन्होंने करिश्मा को पकड़ा और उसको भी उछाल कर, बेड पर फेंक दिया।

पापा खुद भी, बेड पर आ गये।और भी हजारो कहानियां है मस्तराम डॉट नेट पर |

अब पापा ने रूचि की टाँगें फैलाई और अपना मुंह बीच में घुसा कर, रूचि की चूत चाटने लगे और रूचि मस्ती के मारे, बेड पर मचलने लगी।


कहानी जारी रहेगी दोस्तों पढ़ते रहिये मस्तराम डॉट नेट और भी हजारो कहानियां है मस्तराम डॉट नेट पर |


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मेरा चुदाई का प्यासा परिवार-3

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