All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

देखो कितनी मस्त आइटम है-3


देखो कितनी मस्त आइटम है-1 | देखो कितनी मस्त आइटम है-2

गतांग से आगे…. रोशनी ने एक चुन्नि ऐसे ही टी शर्ट के उपर से गले में डाल ली और राजेश के घर की तरफ चल पड़ी. गाओं होने की वजह से लड़कियों के लिए चुन्नी का इस्तेमाल करना लगभग ज़रूरी ही था. रोशनी अपनी गाऔर मटकाती राजेश के घर पहुँची तो राजेश भी टीवी ही देख रही थी और सेम सिचुयेशन में वो भी बोर हो रही थी. रोशनी के आते ही उसने टीवी बंद किया और बोली ‘रोशनी चल ना घूम के आते हैं ग्राउंड की तरफ मैं तो बोर हो रही हूँ’

रोशनी को भी घूम कर आना ही सही लगा लेकिन अकेले जाने की बात से चिंतित होकर वो बोली ‘हम दोनो अकेली थोड़ा ना जाएगी उस तरफ कितने लड़के होते है शाम को’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

राजेश को भी उसकी बात सही लगी वैसे राजेश को कोई प्रॉब्लम नही थी बल्कि वो तो जाना ही उन लड़को को देखने के लिए चाहती थी. लेकिन घरवालो और अपने भैया सुमित की वजह से उसने अपनी भाभी को साथ लेजाना सही समझा. उसकी कोई ओरिज्णल भाभी तो नही थी लेकिन उसके ताया के लड़के की शादी हो चुकी थी और उसकी वाइफ का नाम कमल था उससे राजेश की अच्छी बनती थी. कमल भी दिखने में एकदम पटाका थी. अभी शादी को 2 ही साल हुए थे लेकिन कोई बेबी नही था. पूरे गाओं के लड़को में कमल फेमस थी | (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)


हर कोई उसकी लेना चाहता था मगर अभी तक तो यह सुमित केवल उसके पति को ही मिल पाया था. वैसे स्वाभाव से कमल एक नंबर. की चालू थी लेकिन शादी के बाद अभी तक उसका चालूपना निकल कर बाहर नही आया था. राजेश ने अपने ताया के घर जाकर भाभी को आवाज़ दी और वो तीनो ग्राउंड की तरफ घूमने निकल गई. राजेश ने क्रीम रंग का साकवर सूट पहना था और वही कमल भाभी ने येल्लो कलर का हल्का ट्रांसपेरेंट सूट पहना था और पीछे पीठ पे उनकी काले रंग की ब्रा की स्ट्रिप्स सॉफ दिखाई दे रही थी. भाभी का फिगर 34-30-36 बहुत मस्त था. उनकी एज 28 के करीब थी. वो बातें करती हुई ग्राउंड के पास पहुँच चुकी थी और काफ़ी सारे गाओं के लड़के वहाँ कब्बड़ी और कुश्ती की प्रॅक्टीस कर रहे थे. बहुत से लड़को की नज़र पास के रास्ते से गुज़र रही इन तीन हसिनाओ पे भी गढ़ी हुई थी और वो तीनो भी चोरी-2 उन लड़को के जिस्म को घूर रही थी. राजेश की नज़र एक लड़के की बॉडी पे जाकर अटक सी गई. क्या बॉडी थी उस लड़के की एकदम कसी हुई और चौड़ी छाती और वो भी वॅक्सिंग करवाई हुई बिल्कुल किसी हीरो की तरह. राजेश के जिस्म में उस बॉडी को देखकर सनसनाहट सी हुई. जेसे ही उसने नज़र उठाकर उस लड़के का चेहरा देखा तो वो खुश हो गई. ये लड़का कोई और नही विवेक ही था. राजेश मन ही मन बोली ‘कितनी सेक्सी बॉडी है दिल करता है अभी कस कर उसके सीने से लग जाउ’

जेसे ही रोशनी और कमल की नज़र उसकी बॉडी पे पड़ी तो वो दोनो भी खुद को उसकी तरफ अट्रॅक्ट होने से बचा नही पाई. रोशनी और विवेक की नज़र मिली और दोनो मुस्कुरा उठे और जेसे ही विवेक की नज़र राजेश से टकराई तो वो भी मुस्कुरा पड़ी. विवेक के लिए तो दोनो हाथो में जेसे लड्डू आ गये. उसका लंड उसके अंडरवेर में अकड़ गया. वो तीनो चलती हुई आगे निकल गई और हरप्रोशनी बिचारा उदास खड़ा देखता रहा लेकिन उसे किसी ने घास नही डाला. फिर वो प्रॅक्टीस करने लगे और अंधेरा होते ही घरो को लौट गये. राजेश , रोशनी और कमल भाभी भी वहाँ से सीधा गुरुद्वारे गई और फिर घर वापिस आ गई.

रात को अरुन काम से वापिस आ गया था और इशिता ने रात का खाना बनाया और रोशनी ने अपने पापा को खाना दिया और फिर खुद भी खा लिया और आख़िर में इशिता ने खुद भी खाना खाया और किचन का सारा कम ख़तम करके अपने बेडरूम में पहुँची. अरुन बैठे अख़बार पढ़ रहे थे. इशिता उनके पास बैठ कर बोली ‘जी आपको सॅलरी मिली आज या नही’

अरुन अख़बार पढ़ता हुया बोला ‘हां मिल गई’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

इशिता ने खुश होकर कहा ‘ओके तो मेरा 1000 रुपया. कहाँ है आपने सूट दिलाने का वादा किया था’

अरुन थोड़ा परेशानी भरे स्वर में बोला ‘प्रोशनी इस वार और रुकजा अगली वार पक्का ले लेना तू तो जानती है रोशनी की अड्मिशन में कितने पैसे खरच हो गये’

इशिता थोड़ी रूठ कर बोली ‘पिछले 3 महीने से रुकती आ रही हूँ अब और कितना रुकु’

अरुन को गुस्सा आ गया और वो बोला ‘तो मैं क्या करू अब खुद को बेच दूं’

इशिता को ऐसी उम्मीद नही थी और वो एकदम से खड़ी हुई और फिरसे किचन में आकर दूध गरम करने लगी. अपने परिवार की माली हालत वो अच्छे से जानती थी और इसी वजह से वो अब तक रुकती आ रही थी मगर इस महीने भी अरुन ने उसे रुकने के लिए बोल दिया था जिसकी वजह से उसका गुस्सा भी कही ना कही जायज़ था. वो किचन में खड़ी दूध गर्म कर रही थी कि उसे सुबह की घटना याद आ गई. केसे उसकी ननद के हज़्बेंड ने उसे पीछे से पकड़ लिया था. एक पल के लिए उसका दिल किया अभी जाकर उसका मूह तोड़ दे लेकिन दूसरे ही पल उसे अरिजीत के आखरी बोल याद आए ‘सोच ले सिर्फ़ एक बार ही करना है सारी जिंदगी ऐश करेगी’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

एक पल के लिए इशिता ने सोचा कि सिर्फ़ एक बार की ही तो बात है लेकिन दूसरे ही पल उसकी मर्यादा ने उसे दुतकार दिया. वो इसी कशमकश में थी एक तरफ उसका दिमाग़ कह रहा था कि जेसा है सब ठीक है लेकिन दूसरी तरफ वो सोच रही थी कि अगर एक बार उसके साथ करने से सब कुछ सही हो सकता है तो इसमे ग़लत भी क्या है. वो कोई फ़ैसला नही कर पा रही थी आख़िर उसने दूध गिलास में डाला और रोशनी को उसके कमरे में दूध देकेर अपने कमरे में पहुँच गई और अरुन को गिलास पकड़ाते हुए उसके मूह से खुद ही निकल गया ‘वो आज अरिजीत जीजू आए थे और एक नोकरी के लिए बोल रहे थे आपके लिए सॅलरी भी अच्छी है’

अगले ही पल जब इशिता को एहसास हुआ कि उसने ये क्या बोल दिया. लेकिन अब क्या हो सकता था. शायद इशिता के दिमाग़ में वोही बातें घूम रही थी और उसे पता भी नही चला था कि उसने कब ये बात बोल दी थी.

अरुन उसकी बात सुनकर बोला ‘अच्छा कब आए थे’

इशिता बिस्तर पर बैठती हुई बोली ‘सुबह आए थे उन्हे काम था पास के किसी गाओं में’

अरुन बोला ‘केसी जॉब है कुछ बताया’


मनपीट कुछ बताना नही चाहती थी उसे पता था कि अगर ये जॉब उसके पति ने करने की इच्छा ज़ाहिर की तो उसे अरिजीत के बिस्तर में जाना ही पड़ेगा. अरुन ने फिरसे पूछा तो इशिता ने बता ही दिया ‘कोई उनके दोस्त का बिज्निस है उसी में बोल रहे थे और सॅलरी भी कम से कम 15-16000 बता रहे थे’

अरुन की आँखें चमक उठी और वो बोला ‘क्या फिर तो सुबह ही बात करता हूँ उनसे’

फिर इशिता और अरुन ने कुछ इधर उधर की बातें की और सो गये.

सुबह हो चुकी थी और रोज़ की तरह रोशनी कॉलेज के लिए रेडी होकर अपनी फ्रेंड राजेश के घर की तरफ जा रही थी. रोशनी ने आज रेड कलर का पाजामी सूट पहना था जो कि उसके बदन से चिपका हुआ एकदम टाइट था. टाइट पाजामी में साइड से रोशनी की मांसल जांघों की पूरी शेप आसानी से दिख रही थी और पाजामी थोड़ी पारदर्शी थी इसकी वजह से उसके नीचे रोशनी द्वारा पहनी हुई काली पैंटी व सॉफ दिखाई दे रही थी. उसका सूट ग़ज़ब का था और उसके जिस्म के उपर ग़ज़ब लग रहा था. एक हाथ में पर्स उठाए वो मटकती हुई राजेश के घर की तरफ बढ़ रही थी. जेसे ही वो राजेश के घर की तरफ मूडी तो विवेक पहले से ही रोज़ की तरह रास्ते में उसका इंतेज़ार कर रहा था. रेड कलर के सूट में रोशनी को देखते ही विवेक के होश से उड़ गये. दोनो की नज़र एक दफ़ा टकराई और फिर दोनो मुस्कुरा उठे. जेसे ही रोशनी उसके पास से गुज़री तो वो बोल उठा ‘वाह ओ रब्बा आज तो कहर लग रही हो’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

रोशनी उसकी बात सुनकर मुस्कुरा पड़ी लेकिन बिना कोई जवाब दिए आगे निकल गई. विवेक की नज़र रोशनी की बल खाती कमर और मटकती गाऔर पे पड़ी तो उसका लंड ताव में आ गया और वो उससे थोड़ी दूरी बनाकर उसके पीछे चलता हुआ बोला ‘वाह डार्लिंग तुम्हारी चाल तो एकदम क़ातिलाना है’

रोशनी को तो अपनी तारीफ हमेशा ही अच्छी लगती थी. उसने एक दफ़ा गर्दन घुमा कर विवेक को देखा और मुस्कुरा कर फिरसे चेहरा सामने करते हुए अपनी कमर को और ज़्यादा मटका कर चलने लगी जिसकी वजह से उसके दोनो चूतड़ कुछ ज़्यादा ही आपस में रगड़ने लगे. विवेक ने भी इस बात को नोटीस किया और उसका हाथ खुद ब खुद ही पॅंट के उपर से ही अपने लंड पे चला गया. जल्दी ही रोशनी राजेश के घर में दाखिल हो गई और फिर कुछ देर बाद राजेश और सुमित के साथ ही बाहर निकली. वो थोड़ा आगे आए तो रोशनी ने देखा विवेक फिरसे वही बैठा था लेकिन अब उनके साथ सुमित था इसलिए वो कुछ नही बोला. सुमित से उसकी अच्छी बन ती थी और दोनो अच्छे दोस्त थे. सुमित ने उसे चलते-2 हाल चाल पूछा और आगे निकल गेया. विवेक पीछे से रोशनी और राजेश की मटकती गाऔर को घूरता रहा. उसे पता था कि रोशनी एक दफ़ा घूम कर उसे ज़रूर देखेगी लेकिन उसकी अपेक्षा से उलट रोशनी की जगह राजेश ने उसे घूम कर देखा और सेक्सी स्माइल भी दी और जवाब में विवेक भी मुस्कुरा उठा लेकिन उसे समझ नही आया कि ये हो क्या रहा था. कुछ-2 तो वो समझ रहा था कि राजेश भी उसकी लाइन में आ रही थी लेकिन वो तो रोशनी की गाऔर का दीवाना था. जो भी था विवेक के दोनो हाथो में इस वक़्त मोटी चूर के लड्डू थे.

वो तीनो बस स्टॉप पे पहुँच कर बस का वेट करने लगे और जेसे ही बस आई तो वो तीनो बस में चढ़ गये और भीड़ से भरी बस उनके कॉलेज की तरफ चल पड़ी. विवेक वहाँ से अपने खेतों की तरफ चल पड़ा और रास्ते उसे हरप्रोशनी भी मिल गया. फिर वो दोनो ट्यूबिवेल की तरफ निकल गये. गाओं में गेहू की कटाई का काम चल रहा था जिसकी वजह से उनका सारा दिन खेत में ही निकल जाता था. पढ़ाई तो उन दोनों ने छोड़ दी थी और अब खेती में ही अपने घरवालो का हाथ बँटाते थे.

बस में रोशनी , राजेश और सुमित को रोज़ की तरह खड़े रहकर ही जाना पड़ रहा था और भीड़ होने की वजह से भीड़ का फ़ायदा उठाने वालो ने मौका मिलते ही रोशनी और राजेश के चुतड़ों को दबा दिया था लेकिन ये तो अब रोज़ की बात थी और राजेश के साथ-2 रोशनी भी अब इसका मज़ा लेने लगी थी. सुनीता रोज़ की तरह आगे सीट पे ही बैठी थी. बस उनके गाओं से इक गाओं पीछे से चलती थी जिसकी वजह से सुनीता को ज़्याटर सीट मिल ही जाती थी कभी कभार ही उसे खड़ी रहकर जाना पड़ता था. सुमित ने उसका चेहरा देखा और उसमे ही खो गेया. एकदम पर्फेक्ट पंजाबन लड़की थी सुनीता. सादगी ही उसका सबसे सुंदर रूप था. आज के मॉडर्न युग में ऐसी सिंप्लिसिटी वाली लड़की का मिलना लगभग मुश्क़िल था लेकिन सुनीता इस कथन को ग़लत साबित कर रही थी. लड़के भी अक्सर मॉडर्न लड़कियों के पीछे ही भागते हैं मगर सुमित को तो सुनीता की सादगी ही पसंद थी और शायद भगवान ने भी इन दोनो को एकदुसरे के लिए बनाया था. सुनीता को हालाँकि अभी तक इस का आभास नही हुआ था कि सुमित उसे चाहता है लेकिन देखना था कि कब तक वो इस आभास से बची रहने वाली थी. सुमित सपनो में खोया था कि कनडक्टर की आवाज़ ने उसे सपनो की दुनिया से निकला. सुमित ने फ्टाफ़ट 3 टिकेट्स ली और कनडक्टर उसके पास से गुज़रता हुआ पीछे निकल गया. उसने आँखें फाड़ ते हुए रोशनी और राजेश को देखा और गंदी सी मुस्कान देता हुया बोला ‘थोड़ा साइड को हो जाइए प्लीज़’ (दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |)

उसकी नज़र रोशनी की कमीज़ को फाड़ने को उतारू हो रहे रोशनी के मम्मों पे थी और रोशनी ने भी उसे भाँप लिया था मगर उसने चुन्नी से अपनी दोनो मिसाइल’स को ढकने को कोशिश नही की क्यूंकी वो तो उसे और भड़काना चाहती थी. कंडक्टर उसके मम्मो को घूरता हुआ अपना हाथ रोशनी की दोनो जांघों पे फिराता हुआ गुज़र गया. रोशनी को उसके स्पर्श से करंट सा लगा और कनडक्टर ने बिल्कुल वेसा ही पीछे खड़ी राजेश के साथ भी किया और राजेश को तो उसका हाथ अपनी योनि पे भी महसूस हुया. राजेश ने रोशनी के कान में कहा ‘यार ये तो आगे ही बढ़ता जा रहा है’

रोशनी मुस्कुरा कर बोली ‘कोई बात नही कल इसको मज़ा चखाएँगे’… आगे की कहानी फिर जल्दी ही पोस्ट करुगा |


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