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अनीसा की चूत से गांड तक-4


प्रेषिका: अनीसा


अनीसा की चूत से गांड तक-1 | अनीसा की चूत से गांड तक-2 | अनीसा की चूत से गांड तक-3

गतांग से आगे …..  एक दिन ऐसे हुआ के मैं काम कर रही थी और अहदाफ़ आ गये और मेरे पीछे खड़े हो कर काम देखने लगे। कभी-कभी कोई मिस्टेक हो जाती तो बता देते। मैं काम में बिज़ी थी। बीच में मुड़ कर देखा तो अहदाफ़ मेरे पीछे नहीं थे। मैंने सोचा कि शायद कुछ काम होगा और चले गये होंगे और मैं उठ कर बाथरूम में गयी। बाथरूम का डोर खोल के अंदर पैर रखते ही एक शॉक लगा। अहदाफ़ वहाँ खड़ा पेशाब कर रहा था और उसने अपना इतना मोटा गधे जैसा बे-खतना लौड़ा हाथ में पकड़ा हुआ था। पूरा हाथ में पकड़ने के बाद भी उसका लंड उसके हाथ से बाहर निकला हुआ था और अभी वो इरेक्ट भी नहीं था। मैं एक ही सेकेंड के अंदर पलटी और “ओह सॉरी” कह कर बाहर निकल गयी और सोचने लगी के अभी उसका लंड अकड़ा नहीं है तो ये हाल है उसके लौड़े का और जब अकड़ जायेगा तो क्या हाल होगा और ये तो लड़कियों की चूतें फाड़ डालेगा। इसी सोच के साथ मैं दूसरे बाथरूम में चली गयी और पेशाब करके वापस आ गयी और अपने काम में लग गयी। अहदाफ़ फिर से मेरे पीछे आ कर खड़ा हो गया और मेरा काम देखने लगा। मैं काम तो कर रही थी पर मेरा सारा ध्यान उसके लंड में था और उसका लंड जैसे ही मेरे ज़हन में आया, मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गयी। अहदाफ़ को भी पक्का यकीन था के मैंने उसके लंड को देख लिया है और औरों की तरह मैं भी हैरान रह गयी हूँ।


मैं काम में बिज़ी थी और वो पीछे खड़ा था। अब उसने मेरे कंधे पे हाथ रख दिया और कहा कि “अनीसा तुम्हारा ध्यान किधर है?” मैं घबड़ा गयी और सोचने लगी के उसको कैसे पता चला कि मैं दिल में क्या सोच रही हूँ। मैं खामोश रही तो उसने कहा कि “देखो तुमने कितनी एंट्रिज़ गलत कर दी हैं।“ मैं और घबरा गयी क्योंकि सच में मेरा दिल काम में था ही नहीं। मेरा दिमाग तो अहदाफ़ के लंड में ही अटक के रह गया था। मैं घर में होने के बावजूद मैं काफ़ी सजधज कर और अच्छे कपड़े पहन कर काम करती थी क्योंकि अहदाफ़ कभी भी आ सकता था। लो-कट गले वाले स्लीवलेस और टाईट सलवार-कमीज़ और साथ में उँची हील के सैंडल पहनना नहीं भूलती थी। कभी-कभार साड़ी भी पहनती थी| उस दिन भी मैंने स्काई ब्लू कलर की स्लीवलेस कमीज़ और सफेद सलवार पहनी थी जो मेरे जिस्म पे बहुत अच्छी लग रही थी। मेरी कमीज़ का गला भी काफी लो-कट था और चूछियों का क्लीवेज काफी हद तक नुमाया हो रहा था। मेरे कंधे खुले हुए थे और अहदाफ़ के दोनों हाथ मेरे कंधों पे थे। उसके गरम हाथों के लम्स से मेरा सारा जिस्म जलने लगा और मेरी ज़ुबान लड़खड़ाने लगी। मैं कुछ बोलना चाहती थी और ज़ुबान से कुछ और निकल रहा था। मेरे सारे जिस्म में जैसे बिजली का करंट दौड़ रहा था और दिमाग में साँय साँय होने लगी थी।


अहदाफ़ के दोनों हाथ अब मेरे कंधों से स्लिप हो के मेरी चूचियों पे आ गये थे और मेरी आँखें बंद होने लगी थी। पहले कमीज़ के ऊपर से ही दबाता रहा और फिर बिना हुक खोले ऊपर से ही कमीज़ के अंदर हाथ डाल दिये। क्योंकि मैंने लो-कट कमीज़ के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी तो उसके हाथ डायरेक्ट मेरी चूचियों के ऊपर आ गये और वो उनको मसलने लगा। मेरी कुर्सी सेक्रेटरी चेयर टाइप कि थी जिस में नॉर्मल कुर्सी की तरह से बैक-रेस्ट नहीं था बल्कि पीठ की जगह पर एक छोटा सा रेस्ट था और कुर्सी के बैठने कि जगह से बैक-रेस्ट तक पतली सी प्लास्टिक की पट्टी लगी हुई थी जिससे मेरा पीछे से सारा जिस्म एक्सपोज़्ड था, सिर्फ मेरी पीठ का वो हिस्सा छोड़कर जहाँ बैक रेस्ट का छोटा सा कुशन था। अहदाफ़ मेरे और करीब आ गया तो उसकी पैंट में से उसके लंड का लम्स मुझे मेरे जिस्म पे महसूस होने लगा। मैं तो उसका हाथ चूचियों पे महसूस कर के पहले से ही गीली हो चुकी थी और जब लंड मेरे जिस्म से लगा तो मैं अपनी जाँघें एक दूसरे से रगड़ने लगी और एक ही मिनट में झड़ गयी और मेरे मुँह से एक लंबी सी “आआआआहहहहह” निकल गयी और मैं अपनी कुर्सी पे थोड़ा सा और आगे को खिसक गयी और मेरे पैर खुद-ब-खुद खुल गये। मेरी जाँघें और टाँगें मेरे चूत के रस से भीग गयीं और मेरी आँखें बंद हो गयीं और मैं रिलैक्स हो गयी। मेरी सलवार बिल्कुल भीग गयी और मुझे अपना रस टाँगों से बह कर अपने पैरों के तलवों और सैंडलों के बीच में चूता हुआ महसूस हुआ। इतना रस था कि ऐसा लग रहा थ जैसे मेरा पेशाब निकल गया हो। अब मुझे यकीन हो गया कि आज मेरे दिल कि मुराद पूरी होने वाली है। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |


अहदाफ़ मेरी चूचियों को मसल रहा था और मैं इतनी मस्त हो चुकी थी कि दिखावे की मुज़ाहमत भी नहीं कर सकी और मेरे हाथ उसके हाथ पे आ गये और मैं उसके हाथों को सहलाने लगी। उसने मेरी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा और निप्पलों को पिंच करने लगा। मैं इतनी मस्त हो चुकी थी कि अपने ही हाथों से अपनी कमीज़ के हुक खोलने लगी। हुक खोल कर कमीज़ ढीली करते हुए ज़रा नीचे खिसका दी और अब वो मेरी चूचियों को अच्छी तरह से मसल रहा था और कह रहा था कि, “आअहह अनीसा! क्या मस्त चूचियाँ हैं, लगाता है अमन इन्हें दबाता नहीं है।“ मैं कुछ नहीं बोली और खामोश रही। वो मेरे पीछे से ही झुक कर मेरी गर्दन पे किस करने लगा और उसके लिप्स मेरे जिस्म पे लगते ही मेरे जिस्म में एक करंट सा दौड़ने लगा। फिर ऐसे ही किस करते-करते वो झुके हुए ही मेरी चूचियों को किस करने लगा तो मेरे हाथ बेसाखता उसकी गर्दन पे चले गये और मैं उसको अपनी तरफ़ खींचने लगी।


अब अहदाफ़ मेरे पीछे से हट कर मेरे सामने आ गया था। उसकी पैंट में से उसका लंड बाहर निकलने को बेताब था। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे हाथ को अपने लंड पे रख दिया और सच मानो, मैं अपना हाथ वहाँ से हटा ही नहीं सकी और उसने मेरे हाथ को ऐसे दबाया जैसे मेरा हाथ उसके लंड को दबा रहा हो। उसने अपनी पैंट की ज़िप खोल दी और बोला कि, “अनीसा! इसे बाहर निकाल लो”, तो मैंने उसका अंडरवीयर नीचे को खींच दिया और उसका लंड बाहर निकाला तो वो एक दम से उछल के मेरे मुँह के सामने आ गया और मैं तो सच में डर ही गयी। इतना लंबा मोटा बिला-खतना लंड और उसका मशरूम जैसा चिकना सुपाड़ा चमक रहा था और जोश के मारे हिल रहा था। मेरे मुँह से निकल गया, “हाय अल्लाह!! ये क्या है अहदाफ़? इतना बड़ा और मोटा….. ये तो किलर है…. ये तो जान ही ले लेगा!” तो वो हँसने लगा और बोला कि “आज से ये तुम्हारा ही है, जब चाहो ले लेना” और फिर उसने अपनी पैंट नीचे करके उतार दी। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |


उसका लंड इतना मोटा और लंबा वो भी बिला-खतना लंड देख कर मैं तो सच में घबरा गयी थी और मन में ही सोचने लगी कि ये तो मेरी चूत को फाड़ के गाँड में से बाहर निकल जायेगा। इतना मस्त लंड और उसका सुपाड़ा भी बहुत ही मोटा था, बिल्कुल हेलमेट की तरह से, जैसे कोई बहुत बड़ा चिकना मशरूम हो और लंड के सुपाड़े का सुराख भी बहुत बड़ा था। मैंने कभी इतना बड़ा और मोटा लंड नहीं देखा था। और पहली दफा बिला -खतना लंड देख रही थी| उसका लंड बहुत गरम था। हाथ में लेते ही मुझे लगा जैसे कोई गरम-गरम लोहे का पाइप पकड़ लिया हो। लगाता है वो झांटें शेव करता था। उसका लंड एक दम से चिकना था और बिना झाँटों वाला लंड बेहद दिलकश लग रहा था। उसने अपनी शर्ट भी उतार दी तो मैं उसके नंगे जिस्म को देखती ही रह गयी। सारे जिस्म पे हल्के-हल्के से नरम-नरम बाल जो बहुत सैक्सी लग रहे थे और मसक्यूलर बॉडी। उसने मुझे चेयर पे से उठाया और मेरे हाथ पीछे कर के मेरी कमीज़ को निकाल दिया और साथ में मेरी सलवार का नाड़ा उसने एक ही झटके में खोल दिया और मेरी टाँगों से चिपकी हुई भीगी सलवार एक-एक करके मेरी दोनों टाँगों और सैंडलों से नीचे खींचते हुए उतार दी।


मैं एक दम से नंगी हो चुकी थी और वो भी। चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहने होने के बाद भी मेरी हाईट अहदाफ़ की हाईट से काफी कम थी और जब उसने मुझे खींच के अपने जिस्म से लिपटा लिया तो उसका लंड मेरे पेट में घुसता हुआ महसूस होने लगा। वो लोहे की तरह से सख्त था और मेरे पेट में ज़ोर से चुभ रहा था और मेरी चूचियाँ हम दोनों के जिस्म के बीच में चिपक गयी थीं। उसका नंगा जिस्म मेरी चूचियों को टच होते ही मेरे निप्पल खड़े हो गये। इसी तरह से वो मुझसे लिपटा रहा। मैं भी ज़ोर से उसको पकड़े रही और अपनी ग्रिप टाइट कर ली। मेरी चूत का हाल तो मत पूछो। उस में से पानी ऐसे निकल रहा था जैसे कोई नल खुला हो और उस में से पानी निकल-निकल के बह रहा हो। उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड से लगाया तो मेरे जिस्म में झुरझुरी सी आ गयी। पहले तो मैंने डर के मारे अपना हाथ हटा लिया पर अहदाफ़ ने फिर से मेरा हाथ अपने लंड पे रखा तो मैं उसको धीरे से दबाने लगी और दिल में सोचने लगी कि आज मेरी छोटी सी चूत की खैर नहीं। आज तो ज़रूर मेरी चूत फटने वाली है। अहदाफ़ के हाथ मेरे जिस्म पे फिसल रहे थे, कभी चूचियों पर तो कभी गाँड पर, और जब उसका हाथ मेरी चिकनी चूत पे लगा तो मैं बहुत ज़ोर से काँपने लगी और साथ में ही झड़ने लगी तो अहदाफ़ बोला, “वॉव अनीसा, तुम्हारी चूत तो मक्खन जैसी चिकनी और समंदर जैसी गीली है….. मज़ा आयेगा इसे चोदने में।“ और जब उसने अपनी मोटी उंगली मेरी छोटी सी चूत के अंदर डाली तो मानो ऐसे महसूस हुआ कि कोई छोटा सा लंड ही घुस गया हो। वो मेरा पानी उंगली में लेकर चूसने लगा और बोला, “वाह तुम्हारी मीठी चूत का पानी भी बहुत मीठा है”, और फिर से मेरी चूत में अपनी उंगली डाल के मेरी चूत का पानी निकाल के मेरे मुँह में दे दिया और कहा कि “तुम भी टेस्ट करो कि तुम्हारी चूत का पानी कितना मीठा है।“ मैंने अपनी चूत का पानी चाट तो लिया पर मस्ती में मेरी कुछ समझ में नहीं आया कि टेस्ट कैसा है। कंप्यूटर की टेबल काफी बड़ी थी। कंप्यूटर रखने के बाद भी काफी जगह रहती थी तो अहदाफ़ ने मुझे मेरे बगल से पकड़ कर उठा लिया और मुझे टेबल पे बिठा दिया और वो नीचे खड़े-खड़े मेरी चूचियों को दोनों हाथों से मसलने लगा और एक के बाद दूसरी चूँची को चूसने लगा और निप्पलों को काटने लगा। मैं बहुत ही मस्त और गरम हो गयी और उसके अकड़े हुए लंबे लंड को अपने हाथों से पकड़ लिया। मैं उसके लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़े हुए थी लेकिन उसका लंड फिर भी मेरे दोनों हाथों के थोड़ा सा बाहर निकल रहा था और मैं उसके लंड को अपने पूरे हाथ में पकड़ नहीं पा रही थी। कितना मोटा और बड़ा था उसका लंड जो मेरे हाथ में नहीं आ रहा था। मैं उसके लंड को दोनों हाथों से पकड़ कर आगे पीछे करने लगी। वो मेरे सामने खड़ा था और उसका लंड मेरे जाँघों पे लग रहा था। मैं खुद थोड़ा सा टेबल पे सामने को खिसक गयी और टेबल के किनारे पे आ गयी तो उसका लंड अब मेरी चूत पे लगने लगा जिसमें से निकलता हुआ प्री-कम मेरी चूत के अंदरूनी हिस्से को चिकना कर रहा था। मैंने अपनी टाँगें थोड़ी और खोल लीं और उसके बैक पे क्रॉस कर लीं और उसे अपनी तरफ़ खींचने लगी। उसके लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के लिप्स के अंदर रगड़ना शुरू कर दिया और इतना एक्साइटमेंट था कि उसके प्री-कम से चिकने लंड का सुपाड़ा चूत के अंदर लगने से मैं जल्दी ही झड़ने लगी। इतना बड़ा तगड़ा लंड देख के डर भी लग रहा था और मज़ा भी आ रहा था।


वो कभी मेरी चूचियों को मसलता तो कभी मेरी गाँड को दबाता। मेरा तो मस्ती के मारे बुरा हाल था। उसने चेयर को टेबल के करीब खींच लिया और उसपे बैठ गया और मेरी टाँगों और जाँघों पे अपने होंठ रख दिये। मैं टेबल के पूरे किनारे पे आ गयी और अपने हाथों से उसका सर पकड़ के अपनी चूत पे दबा दिया और अपनी टाँगें उसके कंधों पे रख के उसको अपनी तरफ़ खींचने लगी। उसका मुँह मेरी चूत पे लगते ही मैं फिर से झड़ने लगी। मैं आज बहुत मस्ती मैं थी, एक तो ये कि आज से पहले कभी इतना बड़ा और इतना मस्त लंबा-मोटा और लोहे जैसा सख्त लंड देखा भी नहीं था और दूसरे ये कि अमन तो बस आग लगाना ही जानता था, आग बुझाना नहीं। आज मुझे पक्का यकीन था के मेरी इतने महीनों से जलती चूत में लगी आग आज इस तगड़े लंड से बुझ जायेगी। मेरे हाथ उसके सर को पकड़े हुए थे और मैं उसके सर को चूत के जितना करीब हो सकता था, दबा लेना चाहती थी। वो चाटता रहा और उसकी ज़ुबान मेरी चूत के अंदर बहुत मज़ा दे रही थी। कभी-कभी तो पूरी चूत को अपने दाँतों से पकड़ के काट लेता तो मेरी सिसकरी निकल जाती। मेरी आँखें बंद थी। “ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओहहहह”, बेइंतेहा मज़ा आ रहा था। चूत बेहद गीली हो चुकी थी और पानी लगातार निकल रहा था। पता नहीं कितने टाईम मैं झड़ गयी और अहदाफ़ सारा पानी पीता रहा। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |


थोड़ी देर के बाद अहदाफ़ खड़ा हो गया और मुझे उठा लिया तो मेरी टाँगें उसकी बैक पे लिपट गयीं और मैं उसके बंबू जैसे लंड पे बैठ गयी और वो मुझे ऐसे ही उठाये-उठाये बेडरूम में ले आया और मुझे ऐसे आधा बेड पे लिटा दिया कि हाई हील सैंडल पहने मेरे पैर ज़मीन पर थे और मेरे घुटने मुड़े हुए थे और मेरा आधा जिस्म बेड के किनारे पे था। अब अहदाफ़ फिर से ज़मीन पे बैठ गया और मेरी चूत को सहलाने लगा और कहने लगा कि, “वॉव अनीसा, क्या मक्खन जैसी चिकनी चूत है…. मस्त मलाई जैसी चूत…. लगाता है आज ही झाँटें साफ़ की हैं तुमने।“ मैं कुछ भी नहीं बोल सक रही थी। मस्ती में आँखें बंद थी और गहरी-गहरी साँसें ले रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही चूत को सहलाते-सहलाते उसने मेरी चूत को एक बार फिर से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और चूत में से पानी लगातार निकलने लगा और मेरी चूत में आग लगने लगी। मेरी टाँगें उसकी गर्दन पे थीं और मैं उसके सिर को पकड़ के अपनी चूत पे दबा रही थी और अपनी गाँड हिला-हिला के अपनी चूत उसके मुँह में रगड़ रही थी। मेरी चूत में से पानी निकलता रहा और मैं झड़ती रही। थोड़ी देर के बाद वो अपनी जगह से उठा और अपने लंड के मशरूम जैसे सुपाड़े को मेरी चूत के लिप्स के बीच में रख दिया तो मैं तभी उसके लंड को अपने हाथ में लेकर अपनी चूत में रगड़ने लगी। लंड का प्री-कम और चूत का पानी, दोनों मिल कर मेरी नाज़ुक चूत को गीला कर चुके थे और मेरी चूत बेहद गीली और स्लिपरी हो चुकी थी।


वो अपने लंड के सुपाड़े को चूत के दरवाजे पे रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मुझे किस करने लगा। दोनों एक दूसरे की ज़ुबानें चूस रहे थे। मेरी गाँड बेड के किनरे पे थी और मेरी टाँगें उसके बैक पे लपटी हुई थी और वो ज़मीन पे खड़ा हुआ था। वो धीरे-धीरे अपने लंड का दबाव बढ़ा रहा था और उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के होल में स्लिप हो कर अटक गया और अभी सिर्फ़ सुपाड़ा ही अंदर गया था कि मैं चींख उठी, “ऊऊऊऊईईईईईईई अल्लाह….आआआआआ धीरे! अहदाफ़ धीरे!” वो फिर से किस करने लगा और सिर्फ़ अपने लंड के सुपाड़े को ही चूत के अंदर-बाहर करने लगा तो मुझे बेहद मज़ा आने लगा और मैं झड़ने लगी। फिर ऐसे ही सुपाड़ा अंदर-बाहर-अंदर-बाहर करते-करते उसने एक धक्का मारा तो लंड थोड़ा और अंदर घुस गया और मेरे मुँह से चींख निकल गयी, “ऊऊऊऊऊऊऊईईईईईई ईईईईईईईईईईईई आंआंआंआंआं ईईईईईईईंईंईंईंईं” और मैं उसको अपने ऊपर से धकेलने लगी क्योंकि चूत में जलन होने लगी थी। वो एक दम से रुक गया और झटका देना बंद कर दिया। मेरी आँख से आँसू निकल गये और जैसे ही उसका लंड मेरी चूत के अंदर घुसा वैसे ही मेरी आँखें बाहर निकलने लगी और मुझे लगा के मेरी आई बॉल्स अपने सॉकेट में से बाहर निकल गयी हों। थोड़ी देर वो ऐसे ही मेरे ऊपर झुका-झुका मुझे फ्रेंच किस करने लगा तो थोड़ी देर के बाद मेरी चूत ने उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट कर लिया। अब वो ऐसे ही तकरीबन आधे से कुछ कम लंड को अंदर-बाहर करने लगा जिससे मुझे मज़ा आने लगा और चूत के पानी से उतना लंड आसनी से फिसल के अंदर-बाहर होने लगा। उसके हाथ मेरी बगल में से निकल कर मेरे कंधों को ज़ोर से टाइट पकड़े हुए थे। अब मेरी चूत उसके लंड को एडजस्ट कर रही थी। उसका लंड अंदर-बाहर स्लिप हो रहा था और कभी-कभी वो सुपाड़े तक निकाल के अंदर घुसाता तो कभी ऐसे ही छोटे-छोटे धक्के से अंदर बाहर करता। फिर उसने देखा कि मेरी ग्रिप उसके ऊपर कुछ लूज़ होने लगी और मेरी चूत उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट कर चुकी है तो वो समझ गया कि बाकी का लंड खाने के लिये अब मैं रेडी हूँ। फिर उसने मुझे टाइट पकड़ कर लंड को पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाल के एक इतना ज़ोरदार झटका मारा कि मेरे मुँह से चींख निकल गयी, “ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ ईईईईईईईईईईईईईई ईंईंईंईंआंआंआंआंआंऊंऊंऊंऊंऊं मैं मर गयी…ईईईईईईईई”, और उसका लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ मेरे पेट में घुस चुका था। मेरा अंदर का दम अंदर और बाहर का दम बाहर रह गया और मुझे लगा मानो किसी ने मेरी चूत को किसी तेज़ चाकू से काट डाला हो। चूत में बहुत ज़ोर की जलन होने लगी और अहदाफ़ के जिस्म पे मेरी ग्रिप बहुत ही टाइट हो गयी। मेरे मुँह से “ऊऊऊफफफफ” और “आआआहहहह” की तेज़ आवाज़ें निकलने लगीं जैसे किसी बकरे को हलाल करने के टाईम पे बकरे के मुँह से निकलती है और फिर मेरी ग्रिप अहदाफ़ के जिस्म से एक दम से लूज़ हो गयी और मेरे हाथ बेड पे गिर गये और मेरे सैंडल ज़मीन पर टकराये और फिर ऐसे लगा जैसे टोटल ब्लैक ऑऊट, और मैं शायद चार या पाँच मिनट के लिये बेहोश हो गयी थी। मेरा सारा जिस्म पसीने से भीग चुका था। साँसें तेज़ी से चल रही थी और मेरी आँख खुली तो सारा कमरा धुँधला सा नज़र आ रहा था और धीरे-धीरे मुझे साफ़ नज़र आने लगा और मैं होश में आ गयी।


और जब होश आया तो अहदाफ़ मेरे ऊपर लेटा था और लोहे जैसा सख्त लंड मेरी छोटी सी नाज़ुक चूत को फाड़ के अंदर घुस चुका था, लेकिन धक्के नहीं लगा रहा था। शायद अहदाफ़ को पता था कि मेरा टोटल ब्लैक ऑउट हो गया है और मैं बेहोश हो चुकी हूँ। फिर थोड़ी देर के बाद जब मेरे जिस्म में कुछ जान वापस आयी तो मैंने फटी आँखों से अहदाफ़ की तरफ़ देखा जैसे मेरी आँखें अहदाफ़ से कह रही हों कि तुम बड़े ज़ालिम हो, हथोड़े जैसे लंड से मेरी नाज़ुक चूत को फाड़ डाला। पर शायद वो मेरी नज़रों को समझ नहीं पाया और थोड़ा सा मुस्कुरा दिया और किस करने लगा। उसका लंड मेरी चूत में फँसा हुआ था। मेरी चूत पूरी तरह से खुल चुकी थी और मुझे लग रहा था जैसे मेरी चूत के अंदर कोई रेल इंजन का पिस्टन घुसा हो जिससे मेरी चूत के अंदर की सारी हवा निकल गयी हो। मुझे लग रहा था कि मेरे जिस्म के दो टुकड़े हो गये हों। थोड़ा और होश आया और मेरी आँखें खुली तो अहदाफ़ ने पूछा, “क्यों मेरी रानी, अभी तक तकलीफ हो रही है क्या??” मेरे मुँह से एक शब्द भी नहीं निकला, मैंने बस सिर हिला के हाँ मैं जवाब दिया तो वो मुझे किस करने लगा और कहा, “अभी सब ठीक हो जायेगा, तुम फिक्र ना करो”, और धीरे से लंड को बाहर खींचने लगा। जैसे-जैसे वो अपने लंड को बाहर खींचता, मुझे लगाता जैसे मेरे जिस्म में से कोई चीज़ बाहर निकल रही हो और मेरे जिस्म को खाली कर रही हो। पहले तो वो आहिस्ता आहिस्ता धक्के मारने लगा और धीरे-धीरे उसकी चुदाई की स्पीड बढ़ने लगी। अब मेरी चूत अहदाफ़ के इतने बड़े और मोटे लंड को पूरी तरह से एडजस्ट कर चुकी थी और मैं मज़े लेने लगी और सिसकने और चींखने लगी, “आआआहहहह ओ‍ओ‍ओहहह औंऔंऔं।“ मुझे इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था। मेरी टाँगें उसके बैक पे लिपटी हुई थी और वो नीचे खड़े-खड़े धक्के मार रहा था और लंड चूत के अंदर बाहर हो रहा था। उसी ताल में मेरे सैंडल उसकी चूतड़ों पे थाप रहे थे। जैसे ही लंड बाहर निकलता तो मुझे लगाता जैसे मेरा जिस्म खाली हो रहा हो और जैसे ही फिर से लंड चूत के अंदर घुस जाता मुझे लगाता जैसे मेरा जिस्म और चूत फिर से भर गये हों। उसके हर झटके से मेरे मुँह से “हंफहंफहंफ ऊफौफऊपऊप आआआहहहह ऊऊईईईई ईंईंईंईं आंआंआं ऊंहऊंहऊंह” जैसी आवाज़ें निकल रही थी और मैं फिर से झड़ने लगी। अब मेरी आँखों से आँसू भी नहीं निकल रहे थे। तकलीफ कि जगह मज़े ने ले ली थी और मैं मस्त चुदाई के पूरे मज़े ले रही थी। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |


अहदाफ़ अपनी गाँड हिला-हिला के लंड को पूरा बाहर तक निकाल-निकाल के मुझे गचा-गच गचा-गच चोद रहा था। कमरे में चुदाई की फच-फच-फच की आवाज़ें गूँज रही थीं। मैं अहदाफ़ के जिस्म से चिपकी हुई थी। मेरी चूचियाँ हर एक झटके से मेरे जिस्म पे डाँस करने लगती। अहदाफ़ कभी मेरी चूचियों को पकड़ के मसल देता, कभी झुक के मुँह में लेकर चूसने लगता और कभी निप्पलों को काटने लगता। लंड सुपाड़े तक पूरा बाहर निकाल-निकाल के वो मेरी टाइट चूत में घुसेड़ देता तो मेरी आँखें बाहर निकल आतीं और मुझे लगाता जैसे अहदाफ़ का मूसल जैसा लंड मेरी चूत को फाड़ के मेरी गाँड मैं से बाहर निकल जायेगा। अब मैं दर्द और मज़े से कराह रही थी। बेहद मज़ा आ रहा था और मैं अहदाफ़ के जिस्म से छिपकली की तरह चिपकी हुई थी। मैंने उसके जिस्म को टाइट पकड़ा हुआ था और वो था कि फ़ुल स्पीड से चोदे जा रहा था। मैं तो पता नहीं कितनी दफ़ा झड़ गयी। झड़ने से चूत अंदर से बेहद गीली हो गयी थी और अब लंड आसानी से अंदर-बाहर फिसल रहा था। मेरी चूत पूरी तरह से खुल चुकी थी और सूज के डबल रोटी हो गयी थी। चुदाई की स्पीड बढ़ गयी थी और मेरी चूत के अंदर फिर से लावा निकलने को बेचैन होने लगा। मेरे मुँह से मज़े की सिसकारियाँ निकलने लगी और उसी टाईम पे अहदाफ़ की चुदाई की स्पीड और बढ़ गयी और फिर अहदाफ़ ने अपना “आकाश मिसाइल” जैसा रॉकेट -लंड पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाला और एक इतनी ज़ोर से धक्का मारा कि मैं फिर से चिल्ला उठी, “आआआआआहहहहहह अल्लाहहह…आआआआआआ ऊंऊंऊंऊंऊंआआआआआआंआंआं”, और मुझे लगा जैसे कमरा गोल-गोल घूम रहा हो और मुझे कुछ नज़र ही नहीं आ रहा था। सारा जिस्म पसीने से भीग चुका था। आँखें बाहर को निकल गयी थीं और फिर उसके लंड में से मलाई की पिचकारियाँ निकलने लगी। पहली पिचकारी मेरी चूत में लगते ही मेरी चूत फिर से झड़ने लगी और जो लावा चूत के अंदर उबल रहा था, बाहर निकलने लगा। उसकी पिचकारियाँ निकलती रही और उसके धक्के धीरे होते गये और थोड़ी देर में अहदाफ़ मेरे जिस्म पे गिर गया और मेरी ग्रिप भी उसके जिस्म पे लूज़ हो गयी और मेरे हाथ पैर फिर से ढीले पड़ गये। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |


हम दोनों गहरी-गहरी साँसें ले रहे थे। मेरी चूचियाँ हम दोनों के जिस्म के बीच में पिसी जा रही थीं और दोनों के जिस्म के बीच में दोनों चूचियाँ फ़्लैट हो गयी थीं। झड़ने के बाद भी उसका लंड मेरी चूत में फूलता रहा और फिर वो मेरे ऊपर से मेरे साईड में लेट गया तो उसका लंड एक प्लॉप की आवाज़ के साथ ही मेरी फटी चूत से बाहर निकल गया और हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे। फिर हम दोनों ऊपर खिसक कर बेड के ऊपर आ गये। उसका लंड चूत से बाहर निकलते ही मेरी चूत में से दोनों की मिली जुली क्रीम निकल के बेड पे गिरने लगी। थोड़ी देर में देखा तो पता चला कि मेरी चूत से सच में खून निकल आया है। मैं हैरान रह गयी कि मेरी चूत की सील तो पहले ही टूट चुकी थी, फिर ये सेकेंड टाईम खून क्यों निकला। फिर ख़याल आया कि इतना बड़ा मूसल जैसा लंड इतनी छोटी सी चूत में घुसेगा तो खून तो निकलेगा ही और ये ख़याल आते ही मेरे मुँह पे हल्की सी मुस्कुराहट आ गयी। मेरी अंगारे की तरह से जलती और प्यासी चूत को आज इतने महीनों के बाद करार आया था। चूत की प्यास बुझ चुकी थी और चूत की आग ठंडी पड़ चुकी थी। मैं आँखें बंद किये लेटी रही और हम दोनों गहरी-गहरी साँसें लेते रहे।


अहदाफ़ ने कहा, “वॉव अनीसा, तुम्हारी चूत तो एक दम से टाइट है…. क्या अमन तुम्हें चोदता नहीं है?” तो मैंने कहा कि “पहले तो तुम्हारा लंड देखो, कितना बड़ा, लंबा-मोटा और कितना सख्त है, जैसे कोई स्टील का पाइप हो और ये मेरी इतनी छोटी सी चूत में घुसेगा तो तुम्हें तो टाइट ही लगेगा ना, और देखो इस मूसल ने मेरी छोटी सी चूत का क्या हाल बना दिया है….. इसमें से खून भी निकाल दिया…. इसने मेरी चूत को फाड़ डाला, और दूसरे ये कि हाँ, अमन से मुझे कभी भी मज़ा नहीं आया….. वो तो बस मेरी चूत में आग लगा के खुद ठंडा पड़ जाता है और पलट के सो जाता है और मैं सारी रात जलती रहती हूँ। कभी-कभी ही तो उसका छोटा सा लंड जो इतना सख्त भी नहीं होता, अंदर जाता है और फ़ौरन ही उसकी मलाई निकल जाती है….. ऐसा लगाता है जैसे मेरी गरम चूत में उसकी मलाई पिघल के निकल गयी हो और कभी-कभी तो बिना अंदर घुसाये ही, ऊपर ही अपना माल गिरा देता है और आज मुझे ऐसे लग रहा है जैसे आज ही मेरी सुहाग रात हुई हो और ऐसी चुदाई ज़िंदगी में कभी नहीं हुई।“ मैंने आगे कहा कि, “अहदाफ़! तुम्हारी वाइफ के तो मज़े होंगे?” वो बोला कि “नहीं! ऐसी कोई बात नहीं….. पहली टाईम तो वो भी तुम्हारी तरह से बेहोश हो गयी थी और अब उसकी चूत मेरा लंड आसनी से ले लेटी है….. मैं तो उसकी गाँड में भी डालता हूँ और वो गाँड भी असानी से मरवा लेती है।“ मैंने हैरत से कहा कि उसकी गाँड में इतना मोटा और बड़ा लंड घुस कैसे जाता है तो वो बोला कि “पहले टाईम ही थोड़ा सा दर्द होता है…. फिर बाद में नहीं होता और पहले टाईम डालने के लिये बहुत सा तेल लगाना पड़ा था, तब कहीं जा कर धीरे-धीरे घुसा सका था।“


हम ऐसे ही बातें करते रहे और अहदाफ़ ने मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया जो फिर से इरेक्ट हो चुका था। उसने फिर से मेरी चूत में अपनी उंगली डाल के क्लिटोरिस को मसलना शुरू कर दिया तो मेरी चूत फिर से गरम हो आयी और गीली हो गयी। वो मेरी चूचियों को चूस रहा था और खुद सीधा लेट के मुझे अपने ऊपर खींच लिया। फिर से उसका मूसल जैसा लंड किसी खौफनाक मिसाइल की तरह से खड़ा हो चुका था। मैं एक बार फिर से डर गयी। अहदाफ़ ने मुझे आगे की तरफ़ खींच लिया और मैं उसके मुँह पे बैठ गयी मेरे दोनों घुटने मुड़े हुए थे और मेरे पैर उसके सिर के दोनों तरफ़ थे। मैं अभी भी अपने सैंडल पहने हुए थी और मैं उसके मुँह पे अपनी चूत रगड़ रही थी। अहदाफ़ ने अपने हाथ बढ़ा के मेरे बूब्स को मसलना शुरू कर दिया। उसके दाँत मेरी चूत के अंदर बहुत मज़ा दे रहे थे और मैं झड़ने लगी। मैं इतने टाईम झड़ चुकी थी और ऐसे लगाता था जैसे मैं आज झड़ने के सारे रिकोर्ड तोड़ने वाली हूँ।


अब अहदाफ़ ने मुझे पलटा दिया और हम सिक्स्टी-नाईन पोज़िशन में आ गये। मैं झुक कर उसके मूसल जैसे लौड़े को अपने मुँह में लेने की कोशिश करने लगी पर उसके सुपाड़े से ज़्यादा मेरी मुँह में कुछ नहीं गया। मेरा मुँह उसके लंड के सिल्की सॉफ्ट चिकने सुपाड़े पे लगते ही अहदाफ़ ने अपनी गाँड उठा के लंड मेरे मुँह में घुसेड़ना चालू कर दिया जिससे वो कुछ और अंदर गया और मेरा मुँह उसके लंड से फ़ुल हो गया। मेरा मुँह पूरा खुल चुका था पर वो अपनी गाँड उचका-उचका कर मेरे मुँह में लंड घुसा रहा था। उसका लौड़ा तकरीबन आधा या उससे कुछ ज़्यादा ही अंदर घुसा होगा और अब वो मेरे हलक तक घुस चुका था और मैं उसका लंड चूसने लगी। मेरे मुँह में दर्द हो रहा था। इतना मोटा लंड इतनी देर तक नहीं ले पा रही थी। लंड में से चिकना-चिकना प्री-कम निकल रहा था जिसे मैं टेस्ट कर रही थी। उसका लंड उसके प्री-कम से और मेरे थूक से बहुत गीला हो चुका था। वो लगातार मेरी चूत को चूस रहा था और मेरी गाँड में अपनी उंगली घुसेड़ रहा था। बहुत मज़ा आ रहा था। कभी-कभी पूरी चूत को अपने दाँतों में पकड़ के काट लेता और ऐसे चबाता जैसे पान चबा रहा हो और मेरी चूत का फ़ालूदा बना के खा रहा हो। मैं इतनी मस्ती में आ गयी कि फ़ौरन ही झड़ने लगी। मेरी चूत का रसीला पानी अहदाफ़ के मुँह में जाने लगा जिसे वो शहद की तरह से चाटने लगा। अब अहदाफ़ ने मुझे फिर पलटा दिया। मैं उसके जिस्म के दोनों तरफ़ घुटने मोड़ कर बैठी थी जैसे घोड़े की सवारी कर रही हूँ। उसका मिसाइल जैसा लंड सीधा खड़ा था। मैं थोड़ा सा ऊपर उठी और उसके लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के सुराख में रगड़ने लगी। गीली चूत और चिकने प्री-कम से भरा हुआ लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के अंदर आसनी से घुस गया। अब तो मेरी चूत का सुराख बहुत ही बड़ा हो चुका था। इतने बड़े मोटे और लोहे जैसे लंड से जो चुद चुकी थी। अब मैंने धीरे-धीरे उसके मूसल लंड पे बैठना शुरू किया तो वो मेरी गीली चूत के अंदर घुसने लगा उसी वक्त अहदाफ़ ने मुझे झुका लिया और मेरी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और निप्पलों को काटने लगा। मैं और ज़्यादा मस्ती में आ गयी और अब वो अपनी गाँड उठा के अपने लंड को मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगा। अब उसका चिकना लंड गीली चूत में आधा ही आसनी से घुस रहा था। उसने देखते ही देखते अपनी गाँड को ज़ोर से ऊपर उठाया और लंड को जड़ तक मेरी चूत के अंदर पेल दिया और मेरी आँख में फिर से पानी आ गया और मुँह से “ऊऊऊऊईईईईईई.. या अल्लाह आआआआआ” निकल गया और मैं उचक के लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगी। पर अहदाफ़ ने मुझे ज़ोर से पकड़ा हुआ था। अब मैं फिर गहरी-गहरी साँसें ले रही थी। बहुत दर्द हो रहा था। थोड़ी ही देर के बाद मेरी चूत फिर से उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट करने लगी। थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद मेरी साँसें कुछ ठीक हुई तो अहदाफ़ ने अपनी गाँड उठा-उठा के मुझे चोदना शुरू कर दिया और मेरी चूचियों को चूसने लगा। मुझे भी अब मज़ा आने लगा और मैं उसके मूसल लंड पे उछलने लगी। जब उसका लंड चूत के अंदर घुसता तो लगाता जैसे चूत फाड़ के मेरे पेट तक घुस आया हो। बेतहाशा मज़ा आ रहा था। उसने मेरी डाँस करती हुई चूचियों को पकड़ के चूसना शुरू कर दिया और मैं झड़ने लगी पर उसके लंड से मलाई निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी।


मैं झड़ चुकी थी और मेरे हाथ पैर ढीले हो गये थे। अहदाफ़ समझ गया कि अब मैं बिल्कुल खल्लास हो चुकी हूँ तो उसने मुझे पीछे को हटा दिया और अपनी फैली हुई टाँगों के बीचे में लिटा लिया और मेरे सिर को उठा के मेरे मुँह में अपना मोटा लंड घुसा दिया। उसके लंड पे लगा हुआ मेरा पानी अच्छा लग रहा था मैं उसके लंड को चूसती रही। अब मैं उसके लंड को गले तक अंदर लेकर चूस रही थी। अहदाफ़ के हाथ मेरे सर पे थे और वो मेरे सिर को पकड़ के मेरा मुँह अपने लंड पे दबा रहा था और अपनी गाँड उठा-उठा कर मेरे मुँह को चोद रहा था। मुझे लगा कि उसका मूसल जैसा लंड मेरे मुँह के अंदर फूल रहा है और इससे पहले कै मैं कुछ समझ पाती और अपना मुँह लंड पे से हटा सकती, उसने एक ज़ोर दार धक्का मारा जिससे उसके लंड का सुपाड़ा मेरे हलक में घुस गया और उसके लंड में से मलाई की पिचकारियाँ निकलने लगी, जो डायरेक्ट मेरे हलक में चली गयी। मैं उसका लंड चूसती रही और उसकी मलाई खाती रही। जब वो पूरी तरह से झड़ चुका तो मुझे अपने ऊपर खींच के मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल के फ्रेंच किस करने लगा, जिस पर उसकी मलाई का टेस्ट था। उसका लंड अब थोड़ा सा सोफ़्ट हो चुका था और हमारे जिस्मों के बीच में सैंडविच बना हुआ था। ऐसे ही हम दोनों एक दूसरे के जिस्म पे पड़े रहे। थोड़ी देर के बाद अहदाफ़ ने शॉवर लिया। मेरी तो उठने की हिम्मत नहीं थी। शॉवर से बाहर निकल कर उसने अपने कपड़े पहने और मुझे किस करने लगा। मेरे चेहरे को अपने हाथों में ले लिया और बोला कि “अनीसा तुम बहुत ही खूबसूरत हो और ऑय लव यू वेरी मच….. यू आर द बेस्ट…..” और मैं किसी कुँवारी लड़की की तरह से शरमा रही थी।


और जब अहदाफ़ जाने लगे तो मैं उनके सीने से लिपट गयी और मेरी आँख में आँसू निकलने लगे। मैं रोने लगी। मुझे एक ही दिन में अहदाफ़ से अपनी जान से ज़्यादा मोहब्बत हो गयी थी । वो मुझे किस करने लगा और कहने लगा, “अरे अनीसा! ऐसे रोया नहीं करते, मैं हूँ ना तुम्हारे साथ, तुम किसी बात की फिक्र नहीं करना, मैं तुम्हारा ज़िंदगी भर साथ नहीं छोड़ुँगा। मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, बस ये राज़ मेरे और तुम्हारे बीच ही रहने दो…. अमन को इसकी खबर न हो, नहीं तो अच्छी बात नहीं होगी….. वो क्या फ़ील करेगा मेरे बारे में।“ मैंने आँसू भरी आँखों से अहदाफ़ की तरफ़ देखा और अपना सर हाँ में हिला दिया। मैं अहदाफ़ को छोड़ना ही नहीं चाह रही थी और उसे कस के पकड़ा हुआ था। मैं चाह रही थी कि कम से कम आज की रात अहदाफ़ मेरे साथ ही रहे और सारी रात मुझे प्यार करता रहे और मैं उसकी बाँहों में छिप के सो जाऊँ पर क्या करती, मजबूरी थी। उसको भी अपने घर जाना था। उसके भी तो बीवी बच्चे थे। आँसू भरी आँखों से अहदाफ़ को रुखसत किया और बेड पे गिर के रोने लगी। ये एक अजीब से रिश्ते की बुनियाद थी जिसे क्या नाम दूँ, मेरी समझ में नहीं आ रहा था। थोड़ी देर उदास रही पर फिर इस ख़याल से खुश हो गयी कि अब मुझे अपने चूत की प्यास बुझाने के लिये तरसना नहीं पड़ेगा। पता नहीं कब मैं वैसे ही सिर्फ सैंडल पहने, बिल्कुल नंगी सो गयी। दोस्तों आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |


सुबह उठी तो तबियत कुछ अजीब सी लग रही थी। बेड पे ही काफी देर तक लेटी रही और रात की चुदाई का सोच सोच के मुस्कुराती रही और फिर जब उठके बाथरूम जाने लगी तो पता चला कि मेरी चूत काफी सूज गयी है और चूत में बहुत दर्द हो रहा था। मैं रातभर से नंगी तो थी ही। अपने सैंडल उतार कर मैं बाथरूम में गयी और गरम-गरम पानी से शॉवर लिया और चूत में साबुन लगा के गरम पानी से धोया, तब कहीं जा कर चूत कि तकलीफ कुछ कम हुई और शॉवर से बाहर निकल के अपने जिस्म को टॉवल में लपेट के जिस्म सुखा रही थी तो सारे जिस्म में एक मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था जो बेहद अच्छा लग रहा था। नहाने के बाद कपड़े पहने और कॉफी बना कर पीने लगी। रात में कुछ खाया भी नहीं था और सच मानो कुछ खाने का मूड भी नहीं कर रहा था। कॉफी के साथ कुछ बिस्कुट खा लिये और मैं फ़्रेश हो गयी तो मुझे कल अहदाफ़ के साथ अपनी चुदाई का हाल याद आ गया तो मैं फिर से मुस्कुराने लगी और अहदाफ़ का खयाल आते ही मैंने ऑफिस के टेलीफोन पे अहदाफ़ का नम्बर डायल किया।


“हेलो अनीसा, कैसी हो…..” उसने पूछा। “छोटी सी चूत को फाड़ के अब पूछते हो कैसी हूँ?” मैंने हँसते हुए कहा तो वो भी हँसने लगा। मैंने पूछा, “तुम कैसे हो?” तो उसने कहा कि “जब से तुम्हारे घर से वापस आया हूँ, किसी काम में दिल नहीं लग रहा है, तुम्हारी याद सता रही है और तुम्हारी बांहों में सोने का मन कर रहा है।“ मैंने हँस कर कहा, “आ जाओ ना फिर…. देखो मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही हूँ”, तो अहदाफ़ ने हँसते हुए पूछा कि “तुम इंतज़ार कर रही हो या तुम्हारी चूत??” मैंने हँस के कहा, “खुद ही आ के पूछ लो, वो तो ज़खमी है…. शायद उसको मसाज की ज़रूरत पड़ेगी।“ अहदाफ़ ने फिर से हँसते हुए कहा कि “चलो अगर चूत ज़खमी है तो आज गाँड से ही काम चला लेते हैं”, तो मेरे मुँह से एक दम से चींख निकल गयी “नही….ईईईईईईई।“ वो हँसने लगा और कहा कि “चलो मैं थोड़ी देर में आता हूँ और खुद ही पूछ लुँगा कि कौन मुझे याद कर रहा है।“ फिर अहदाफ़ ने पूछा, “रात नींद कैसी आयी अनीसा?” तो मैंने कहा “बहुत वंडरफुल नींद आयी, ऐसी मस्ती में सोयी जैसे बेहोश हो गयी हूँ और बस अभी- अभी आँख खुली है। बस अभी शॉवर लेकर आयी हूँ, मुझसे तो ठीक से चला भी नहीं जा रहा है, कुछ मीठा-मीठा सा दर्द सारे जिस्म में है।“ अहदाफ़ हँसने लगा और कहा, “अभी क्या इरादा है?” मैंने कहा, “आ जाओ…. अब तुम्हारे बिना एक मिनट भी दिल नहीं लग रहा है।“ अहदाफ़ ने कहा, “मेरा भी यहीं हाल है।“ मैंने कहा, “अहदाफ़ क्या आज कि रात मेरे साथ रुक सकते हो….. मैं अकेली हूँ और अमन भी शायद एक वीक के बाद ही आयेगा!” तो उसने कहा, “हाँ रुक तो सकता हूँ पर एक शर्त है अगर तुम रेडी हो गयी तो मैं आज की रात क्या, अमन के आने तक तुम्हारे पास ही रुक सकता हूँ।“ एक वीक तक हर रात मेरे साथ गुज़ारने का सुन के मैं तो जैसे खुशी से पागल हो गयी और कहा कि, “अहदाफ़ तुम एक वीक तक मेरे साथ गुज़ारोगे तो मुझे तुम्हारी हर शर्त मंज़ूर है और अगली बार के लिये भी सारी शर्तें मंज़ूर हैं…. बस तुम आ जाओ और मेरे साथ एक वीक की सारी रातें गुज़ारो…. मैं तुम्हारे लिये कुछ भी कर सकती हूँ….. अपनी शर्त बोलने की ज़रूरत नहीं है…. ओके!” तो अहदाफ़ ने कहा, “देखो सोच समझ के जवाब दो और मेरी शर्त तो सुन लो”, तो मैंने कहा “मुझे कुछ नहीं सुनना है…. बस मैंने कह दिया ना कि मुझे तुम्हारी हर शर्त बिना सवाल के मंज़ूर है।“ उसने कहा, “ठीक है अगर तुमहारा यहीं फ़ैसला है तो…. ओके मैं आज से एक वीक की सारी रातें तुम्हारे ही साथ गुज़ारुँगा। और हाँ! तुम आज सारा दिन रेस्ट ले लो और सो जाओ क्योंकि मैं आज की रात से एक वीक तक की रातें तुम्हें सोने नहीं दुँगा।“ ये सुन के मेरा दिल खुशी के मारे उछलने लगा और मैं बच्चों की तरह से खुश हो गयी। अहदाफ़ ने कहा “तो ठीक है मैं ऑफिस खतम कर के सीधे तुम्हारे पास ही आ जाऊँगा और तुम डिनर तैयार नहीं करना, मैं पिज़्ज़ा हट से सूपर सुप्रीम पिज़्ज़ा लेकर आ रहा हूँ।“ मैंने कहा, “ठीक है” और वेट करने लगी। वॉव अहदाफ़ एक वीक तक मेरे साथ ही रहेगा तो खुशी के मारे मुझसे खाना भी नहीं खाया गया। मैं बेसब्री से रात का और अहदाफ़ का इंतज़ार करने लगी। जैसे-तैसे लंच किया और सोने के लिये बेड पे लेट गयी पर नींद कहाँ आती। मेरा सारा दिमाग तो अहदाफ़ के लंड में अटक के रह गया था। बस बेड पे लेटी रेस्ट करती रही और चुदाई का खयाल आते ही मुस्कुरा देती। शाम को पाँच बजे के आसपास मैं तैयार होने उठी। पहले मैंने अपनी टाँगों, बाँहों, चूत और गाँड पर वैक्सिंग की और फिर खूब अच्छे से नहाई। बालों को शैंपू करके हेयर ड्रायर से सुखाया। फिर शिफॉन का पिंक रंग का सलवार-कमीज़ पहना। कमीज़ स्लीवलेस और बेहद गहरे गले का था। साथ में मेल काते काले रंग के साढ़े-चार इंच हाई-हील के स्ट्रैपी सैंडल पहने। फिर थोड़ा सा मेक-अप किया।


कहानी जारी रहेगी ….. पढ़ते रहिये मस्तराम डॉट नेट पर और भी हजारो कहानिया है |


 


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अनीसा की चूत से गांड तक-4

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