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भाभी के बर्थडे पर अनोखी चुदाई भाग २


फिर मैंने अपने पैर से केक की टेबल को थोड़ा आगे कर दिया, अब मैंने भाभी से कहा कि चलो मोमबत्ती बुझाओ और केक काटो। अब भाभी थोड़ा आगे बढ़कर मोमबत्ती बुझाना चाहती थी, लेकिन मैंने उन्हें पकड़कर रखा और आगे बढ़ने ही नहीं दिया। फिर मैंने कहा भाभी थोड़ा झुककर मोमबत्ती बुझा दो। फिर भाभी थोड़ी आगे झुकी तो मैंने तुरंत अपनी पेंट उतार दी तो मेरा खड़ा लंड भाभी की सलवार से लग गया। भाभी को अपने चूतड़ों पर सलवार के ऊपर से कुछ गर्म सा लगा। तभी भाभी ने पूछा कि यह गर्म-गर्म क्या है? तो मैंने कहा कि वो आप थोड़ा झुकी तो मुझे लगा कि आपका बैलेन्स नहीं बिगड़ जाए इसलिए मैंने आपके चूतड़ पर हाथ रख दिए, लेकिन सच में वो मेरा लंड था। अब में अपने लंड को भाभी की चूत पर हल्के-हल्के से रगड़ने लगा था। मेरा लंड इतना गर्म था कि शायद भाभी को मालूम चल गया था कि में उनके चूतड़ पर अपना हाथ नहीं बल्कि अपना लंड रगड़ रहा हूँ।


अब जहाँ से मैंने उनकी सलवार कैंची से काट दी थी वहां से अब मेरा लंड उनकी चूतड़ के बीच की दरार में जाने लगा था। अब जैसे ही मेरा लंड उनकी सलवार के फटे हुए हिस्से में अंदर गांड पर टच हुआ, तो भाभी की सिसकारी निकल गई और उनके मुँह से हल्की सी, आह आह निकल गई, लेकिन उन्होंने ज़ाहिर नहीं होने दिया कि उन्होंने कुछ कहा है। अब भाभी थोड़ा और झुककर मोमबत्ती बुझाने लगी तो मैंने भी लंड को और नीचे करके सलवार के अंदर पूरा कर दिया और उनकी चूत पर टच कर दिया। तभी भाभी ने एक ज़ोर से फूँक मारी तो मैंने उसी वक़्त लंड को पूरी ताक़त से चूत में दबा दिया। जिससे मेरा लंड आधा उनकी चूत में घुस गया और अब भाभी की फूँक निकल गई और सारी मोमबत्ती बुझ गई और मुझे भी एक अजीब सा एहसास हुआ।


अब भाभी की चूत की गर्माहट मुझे महसूस हो रही थी, मेरा लंड अंदर था। फिर भाभी ने पीछे मुड़कर मुझे देखा तो उनके चेहरे पर एक हल्की सी स्माइल थी। मैंने तुरंत गाना गाया हैप्पी बर्थ डे टू यू और फिर लंड बाहर निकाल कर एक झटका दिया और लंड थोड़ा ज़्यादा अंदर चला गया और अब में भाभी की चुदाई धीरे-धीरे से करने लगा और हैप्पी बर्थ डे का गाना गाने लगा। अब भाभी भी आहह आह सी करने लगी थी। फिर मैंने भाभी से कहा कि केक तो खिलाओ। फिर भाभी ने चाकू से केक काटकर मुझे अपने हाथों से खिलाने के लिए पीछे पलटी तो मेरा लंड उनकी चूत से बाहर निकल गया, लेकिन मैंने तुरंत उनको अपनी बाहों में भर लिया और पीछे से उनके चूतड़ कसकर पकड़ लिए। अब मेरा लंड उनके पेट पर दब रहा था और फिर मैंने चाकू पर जानबूझ कर हाथ मारा तो केक का एक टुकड़ा उनके गले में कमीज़ के अंदर घुस गया, तो भाभी ने कहा कि यह क्या किया देवर जी? सब केक आपने मेरे बूब्स पर गिरा दिया।


फिर मैंने कहा कि भाभी कोई बात नहीं, में अभी इसे साफ कर देता हूँ। फिर मैंने भाभी की कमीज़ को कंधो से पकड़कर नीचे कर दिया और भाभी का पूरा सीना खुल गया। अब मुझे उनके आधे बूब्स मुझे दिख रहे थे और केक उनके बूब्स पर गिरा हुआ था। फिर में आराम से केक चाटने लगा और मैंने उनको कसकर पकड़ा था और अब में केक चाटता रहा। मेरा केक चाटना तो एक बहाना था, असल में तो में उनके सीने और उनके बूब्स को चाट रहा था। फिर मैंने थोड़ी कमीज़ और नीचे की तो उनकी कमीज़ आगे से फट गई और भाभी के दोनों बूब्स झट से बाहर आकर लटकने लगे। अब भाभी को शर्म आने लगी और उन्होंने कहा कि हाय दय्या देवर जी आपने तो मुझे ऊपर से पूरा नंगा ही कर दिया। फिर मैंने चाकू से केक का वो हिस्सा काटा जहाँ मैंने अपनी रसमलाई दबाई थी, लेकिन वो केक के बीच में दबी हुई थी और केक भी सफेद था इसलिए पता ही नहीं पड़ता था। फिर मैंने वो ही हिस्सा काटकर भाभी को पकड़ कर सोफे पर ले गया और उन्हें अपनी गोद में बैठाया। अब मैंने अपनी पेंट आधी उतार दी थी इसलिए भाभी सीधी मेरे खड़े लंड पर ही बैठ गई और लंड भाभी की गांड के नीचे दब गया।


फिर भाभी को मैंने अपने हाथों से वो केक खिलाया, अब भाभी बड़े मज़े से वो केक खाने लगी। फिर उन्होंने मुझसे पूछा भी कि केक कुछ नमकीन सा लग रहा है और बहुत चिकनाहट है, तो मैंने कहा कि शायद क्रीम ज़्यादा होगी इसलिए लग रहा है और भाभी ने बड़े आराम से मेरी मलाई से सना हुआ केक खा लिया। अब भाभी को भी क्या मालूम पड़ेगा? कि वो केक नहीं बल्कि मेरे लंड की रस मलाई खा रही है। फिर में भाभी की चूत को चाटने लगा और 15 मिनट तक ऐसे ही चूसने के बाद भाभी की चूत में से ढेर सारा रस निकलने लगा, मुझे यही तो चाहिए था। फिर मैंने उसकी एक एक बूँद रस को पी लिया, भाभी की चूत का रस बड़ा मज़ेदार था। अब भाभी पूरी शांत हो गई थी और अब उनसे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था।


फिर उन्होंने मुझे धक्का दे दिया और अपनी सलवार का नाड़ा बांधा और बिस्तर पर लेट कर आराम करने लगी और में भाभी को देख रहा था। फिर भाभी ने पूछा क्या देख रहे हो देवर जी? तो मैंने कहा भाभी आप जैसी हसीन औरत मैंने आज तक नहीं देखी है, आपके बूब्स की चूची बहुत लंबी मोटी और खूबसूरत है। तो भाभी ने कहा कि छी अपनी भाभी से ऐसा बोलने में शर्म नहीं आती क्या? तो मैंने कहा जो सच है वो मैंने बोल दिया, इसमें शर्म की क्या बात है? तो भाभी हंसने लगी। फिर अचनाक से भाभी उठने लगी तो मैंने पूछा क्या हुआ भाभी? तब भाभी ने कहा देवर जी पेशाब आ रहा है। फिर मैंने भाभी को गोद में उठाया और बाथरूम में जाकर अपनी गोद में बैठाया और उनकी सलवार का नाड़ा खोला और कहा कि भाभी अब पेशाब कर लो। अब भाभी की चूत ठीक मेरे मुँह के सामने थी, तो भाभी ने कहा मुझे शर्म आती है आप उधर मुँह करो तभी में पेशाब करूँगी।


फिर मैंने कहा क्या हुआ भाभी? जब में आपकी चूत चूस सकता हूँ तो आपको पेशाब करते नहीं देख सकता क्या? तो भाभी ने कहा कि नहीं में आपके मुँह के सामने पेशाब नहीं करुँगी, कहीं मुझे पेशाब करता देख आप फिर से मेरी चूत ना चूस लो, चलिए उधर देखिए। फिर मैंने अपना मुँह दूसरी तरफ किया। तभी भाभी ने एक तेज़ धार पेशाब की छोड़ी। अब पेशाब की आवाज़ सुनकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने भाभी की चूत में कस कर अपना मुँह लगा दिया और भाभी की चूत चूसने लगा। अब भाभी का पेशाब सीधा मेरे मुँह पर गिर रहा था और भाभी की सलवार भी थोड़ी पेशाब में भीग गई थी। फिर भाभी ने तुरंत पेशाब रोक दिया और फिर भाभी ने कहा देवर जी मैंने कहा था ना कि मुझे पेशाब करते हुए मत देखो, आपसे रहा नहीं जायेगा।


फिर मैंने कहा भाभी आपकी पेशाब की आवाज़ सुनकर मुझसे रहा नहीं गया, तभी भाभी ने कहा देवर जी आप बहुत बुरे हो चलो अब तुम बाथरूम के बाहर जाओ, में अकेले पेशाब करुँगी। मुझे गुस्सा आ गया, फिर मैंने भाभी को खड़ा किया और उनके गाल पर एक थप्पड़ लगाया और उनकी सलवार उतार दी और अपना लंड सीधे उनकी चूत में घुसा दिया और भाभी के बूब्स को ज़ोर से पकड़कर कहा कि अब करो पेशाब, मेरा लंड तुम्हारी चूत के अंदर है और अब तुम्हें इसी हालत में पेशाब करना है। भाभी ने कहा कि में कैसे पेशाब करूँ? आपने अपना लंड मेरी चूत में पूरा अंदर तक घुसा दिया है तो पेशाब नहीं निकल रहा है, प्लीज़ मेरी बूब्स की चूचीयों को छोड़ दो। फिर मैंने कहा कि ज़ोर लगाओ, ताक़त लगाओ, अपनी योनि का अपने गर्भ में दबाव डालो तो ज़रूर पेशाब बाहर आ जायेगा।


फिर उन्होंने बड़ी मेहनत से अपनी योनि और गर्भ पर ज़ोर लगाया और वो पूरी ताक़त से पेशाब करने लगी थी। अब भाभी की चूत में मेरा 9 इंच का लंड पूरा अंदर तक घुस चुका था और पेशाब चूत और लंड के किनारो से बहता हुआ बाहर आ रहा था। फिर वो 2 मिनट तक पेशाब करती रही। अब पेशाब ख़त्म होने के बाद में भाभी को कस-कस कर चोदने लगा, अब भाभी, ऊऊऊऊऊओह अहह आययययययी गईईईईई गगगईईईईईईईईईईईईईईईईईई देवर जी नहिईईईईईईईईईईईईईईईईई, देवर जी आईईईईईईईईईई प्लीज ससस्स्स्स्सस्स्स्सस्स हह अहह अहह ऊऊऊईईईईईईईईईय आआआअहह कर रही थी। दोस्तों में आपको बयान नहीं कर सकता कि मुझे भाभी की चुदाई करने में कितना मज़ा आ रहा था। फिर मैंने भाभी को अपनी गोद में उठा लिया और उनकी चुदाई करने लगा और में उन्हें कमरे में बेड पर ले आया। अब तो पलंग पर चुदाई का बड़ा ही ख़तरनाक सीन चल रहा था। फिर में भाभी को अलग-अलग स्टाइल में चोदने लगा। फिर में बाथरूम से भाभी की पेशाब में भीगी हुई सलवार ले कर आया और सलवार से भाभी के दोनों हाथ बाँध दिए। अब भाभी पलंग पर सीधी लेटी हुई थी और मैंने उनके दोनों हाथों को पलंग के ऊपर किनारे पर सलवार से बाँध दिए थे।


फिर मैंने भाभी से कहा कि अब में तुम्हे लंड का असली मज़ा देता हूँ मेरी भाभी जान। भाभी ने कहा कि देवर जी नहीं प्लीज ऐसा मत करो, तुम मुझे खोल दो और आराम से मुझे चोद लो, लेकिन ऐसे बांध कर नहीं, तुम बड़ी बेदर्दी से चोदते हो, इतना बड़ा लंड है तुम्हारा, बेरहमी से चोदोंगे तो में मर जाउंगी। फिर मैंने कस कर भाभी के बूब्स पर 4-5 थप्पड़ मारे और कहा चुप हो जा, तुझ जैसी हसीन औरत को तो बाँध कर ही चोदना चाहिए है। जब मेरा 9 इंच का लंड तेरी चूत में घुसेगा तो तेरा सारा मचलना बंद हो जायेगा। अब भाभी डर सी गई थी और अब कमरे में पूरे 1 घंटे तक भाभी की चीखने की आवाजे आती रही, लेकिन वहां पर कोई उन्हें बचाने वाला नहीं था। अब मैंने बुरी तरह से भाभी को चोद डाला था। अब मेरी मलाई निकलने वाली थी और फिर में अपनी सारी मलाई भाभी की चूत में निकालकर भाभी के साथ सो गया ।।


धन्यवाद …







भाभी के बर्थडे पर अनोखी चुदाई भाग २

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