All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

मेरी बीवी की बुर का चूरमा बना दिया


प्रेषक: अभिषेक


मित्रो अब मैं 37 साल का हूँ; और मेरी बीवी का नाम ईशिता है | मेरा खुद का एक कंप्यूटर सेंटर है और मेरी बीवी एक बैंक में असिस्टेंट मैनेजर है | मैं हर रोज़ सेंटर पे जाने से पहले ईशिता को बैंक में छोड़ता हूँ

एक दिन ईशिता ने घर आ कर बताया के उनके बैंक ने एडवांस कंप्यूटर कोर्स के लिए क्वोटेशन्स फ्लोट की है और बिड की आखरी तारीख भी बता दी. मैंने ईशिता से कहा की अगर ये contract हमें मिल जाए बात बन जाएगी. ईशिता ने कहा की वो पूरी कोशिश करेगी. अगले दिन घर आ कर ईशिता ने फिर बताया कि सारा मामला उनके मैनेजर सिस्टम के हाथ में है और उसका नाम उदित है. ईशिता ने ये भी बताया कि उदित आज लंच के बाद उसे मिला था और चलते चलते उसने ईशिता से पूछा था कि ये कंप्यूटर कोर्स वाले मामले में क्या वो उदित को असिस्ट कर सकती है. इस पर ईशिता ने कहा कि सर आप रीजनल मैनेज सर से बात कर लो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है.. अगले दिन ईशिता ने कहा कि मैं उसे बैंक के सामने न उतारूँ क्योंकि वो कोशिश करेगी के बैंक वालों को ये पता न चले कि ये बिज़नस मैं भी करता हूँ और मैं ईशिता का पति हूँ. मैं ईशिता की प्लानिंग समझ गया और उस दिन से उसे बैंक से दूर उतारने लग गया. इसी बीच मैंने भी बैंक में अपना कोटेशन भी दाल दिया. 1 हफ्ते के बाद शाम को 4:30 बजे के करीब ईशिता ने बैंक से मुझे फोन किया और कहा “हो गया” बाकी बात शाम को. मै ख़ुशी के मारे उछल पड़ा. शाम को ईशिता आई तो हम दोनों ख़ुशी के मारे पागल हो रहे थे. ईशिता ने कहा की भूल से भी किसी को ये पता न चले की हम दोनों पति पत्नी हैं. मैंने कहा बिलकुल पता नहीं चलेगा. ईशिता ने कहा की उदित के साथ दोस्ती गांठना अब मेरी जिम्मेवारी होगी, ताकि आगे के लिए बैंक कंप्यूटर से संबंधित सर्विस करने के लिए उदित मेरा मुह ही ताके क्यों की अब सब कुछ उसी के ही हाथ में है. मैंने कहा तुम चिंता मत करो और अब मैं सब को शीशे में उतार लूँगा. और उस रात हम दोनों ने जम कर सेक्स किया धीरे धीर बैंक के लोग शाम को बैंक टाइम ख़तम होने के बाद 1 घंटा कंप्यूटर कोर्स के लिए आने लग पड़े. बीच बीच में मेरी उदित से भी बात होती रहती थी. 1 हफ्ते के अन्दर ही हम 3-4 बार मिले और 7-8 बार फोन पर बात हुई. एक दिन दोपहर 3 बजे उदित का फोन आया और उसने कहा कि उसके लिए कोर्स अटेंड करने के लिए कोई 7 बजे का टाइम फिक्स कर लो और साथ ही उदित ने ये भी कहा की कि कोई अच्छा सा इंस्ट्रक्टर भी अप्पोइंट कर दूं. मैंने कहा “सर आप आज शाम को आयिए सब अरेंजमेंट हो जायेगा” शाम 7:30 बजे के करीब उदित मेरे केबिन में आया. फिर हम दोनों बैठ कर बातें करने लगे.उदित ने कहा कि क्या किसी अच्छे इंस्ट्रक्टर को कहा मैंने. मैंने कहा कि आपको कोई ज़रूरत नहीं है क्लास अटेंड करने की और न ही इंस्ट्रक्टर की, मैं आपको यहीं अपने ऑफिस में अपने लैपटॉप पे सिखा दूंगा. 2-3 दिनों में ही हम काफी घुल मिल गए और फिर 4th day क्लास ख़तम होने पर मैंने कहा “सर आप आज मेरे साथ डिनर करिए”.उदित ने कहा- “हाँ ठीक कहते हो आज सारा दिन बहुत काम था. एक-एक बियर भी पियेंगे…तुम पी लेते हो न बियर”. मैंने कहा “चलो आज थोड़ी मस्ती करते हैं, बढ़िया वाली बियर पीते हैं” और में उदित को एक बहुत अच्छे रेस्टोरेंट में ले गया. बियर पिटे हुए हम ने इधर उधर की बातें शुरू की. फिर उदित ने कहा- “यार तुम तो सारा दिन फ्रेश रहते होओगे. हर क्लास में कितनी सुंदर सुंदर लड़कियां आती हैं”. मैं जोर से हंसा और कहा- “और हम ये सोचते हैं की आपके बैंक में एक से एक पटाका एम्प्लोयी है”. उसने हँसते हुए कहा,” हाँ और वो भी आज कल तुम्हारी स्टूडेंट्स हैं”. फिर हम दोनों हंस पड़े. उदित ने कहा- “यार अभिषेक ! हमारे बैंक का पटाका नंबर 1 तो अभी तुमने देखा नहीं है”. मैंने पूछा कब दिखा रहे हो. इस पर उदित ने कहा- “अरे जी भर के देख लेना तुम भी. मैं तो दीवाना हूँ उसका, एक बार ,तुम्हें अगर उसकी मिल जाये , सच कहता हूँ तुम्हारी लाइफ बन जाएगी”. मैंने कहा :” मतलब आप पेल चुके हो उसको.!!!” “अरे यार अभिषेक बस पूरी कोशिश में हूँ., पिछले दो हफ़्तों से ही ज्यादा इंटिमेसी हुई है बस कार में ही थोडा बहुत कर पाए हैं.” मैंने कहा: “क्या क्या कर चुके हो बताओ न, अब मेरे साथ बैठ के बियर पी सकते हो तो बता भी दो क्या क्या किया है और कौन है वो पटाका?” उदित ने हँसते हुए कहा. “नहीं यार असल में बहुत ही सेक्सी है . पता नहीं कब देगी, स्मूच तक तो बात पहुँच चुकी है और 5 -6 बार बूब्स भी दबवा चुकी है,लेकिन एक तो वो शाम को ही फ्री होती है और दूसरे हम कार में होते हैं, तीसरे वो भी शादीशुदा है और मैं भी.इसलिए दुनिया की नज़रों से भी बचना चाहते हैं. और भाई असल में तो बात ये है के कार में जगह कम होती है नहीं तो उसको कब का रगड़ दिया होता”. “अरे भाई साब मिलवाओ तो कभी उसको, आप तो सब कुछ हो बैंक में, अपने साथ ही ले आया करो ट्रेनिंग के लिए.” शाम को करीब 7 बजे उदित आ गया और साथ में थी ईशिता . मैंने उदित से हाथ मिलाया और ईशिता से अनजान बना रहा. उदित ने हमारी इंट्रोडक्शन करवाई. उदित ने ईशिता को कहा,”ईशिता मेरी नोटबुक कार कि बैक सीट पे ही रह गयी है प्लीज ले आओ”. और ईशिता उठी ओर नोटबुक लेने चली गयी.

मैंने पूछा,”आपका वो पटाका नहीं आया.”

तभी उदित ने कहा,”अरे यही तो है जो तुमने अभी देखा!”

यही है वो पटाका ! और मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी. मुझे लगा कि मेरे दिल की धड़कन रुक गयी.

मैं अभी पिछली शाम कि बातें सोच ही रहा था कि उदित ने कहा था कि— “नहीं यार असल में बहुत ही सेक्सी है ,पता नहीं कब देगी, स्मूच तक तो बात पहुँच चुकी है और 5 -6 बार बूब्स भी दबवा चुकी है”

तभी उदित ने कहा,” आज प्रोग्राम बना के आया हूँ के यहाँ से जाते हुए रास्ते में पक्का कुछ न कुछ करूंगा.” इतने में केबिन का दरवाज़ा खुला और ईशिता नोटबुक ले कर आ गयी. उससे उदित ने कहा,” तुम क्लास अटेंड कर लो मैं अभिषेक जी के साथ कुछ ज़रूरी काम कर लेता हूँ.”

ईशिता के बाहर जाते ही उदित ने कहा,” क्यों भाई कहा खो गए ?.कैसी लगी ?”

अब मैं उदित को क्या बताता कि लगी तो बहुत अच्छी लेकिन जो लगी थी वो मेरी गांड लगी थी धरती में.

मैंने कहा,”हाँ हाँ बहुत अच्छी है बिलकुल मस्त.” आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

“आज हम एक स्टेप और बढ़ गए.”

“क्या ?”

“बैंक से ले कर यहाँ तक मैंने उसका हाथ अपनी पेंट के ऊपर से ही अपने लंड पे रखवाया और कमाल तो ये हुआ कि इसने एक बार भी नहीं हटाया और मेरी पेंट के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाती रही.”

ये मैं क्या सुन रहा था वो भी ईशिता के बारे में जो पिछले 7 साल से मेरी पत्नी है. क्या वो ये सब ज़बरदस्ती सह रही है मेरे लिए!

या इस कॉन्ट्रैक्ट तो हांसिल करने के लिए, ये मैंने क्या किया? आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

अपनी पत्नी को फ़ोर्स किया?

.क्या इस सब का रीज़न मैं हूँ?

तभी उदित ने मेरा ध्यान तोडा,उसने कहा ,” आज तो पक्का इसकी चुदाई करूँगा चाहे होटल ही बुक क्यों न करवाना पड़े,”

मैंने कहा,” और ये घर पे क्या बताएगी ?”

“जो मर्ज़ी बताए लेकिन अभिषेक सच कह रहा हूँ पूरी तरह तैयार है देने को. मैं ही देर कर रहा हूँ. कोई जगह भी तो नहीं है.”

उस समय मुझे जलन और गुस्सा दोनों हो रहा था लेकिन मेरा लौड़ा भी टाइट हो गया था

तभी उदित ने कहा,”यार अभिषेक कर सको तो तुम कोई तो अरेंजमेंट करो.”

मेरे मुह से अनायास निकल पड़ा,” ऐसा है कि मेरे पास तो ये कंप्यूटर सेंटर है..और ये रात 8:30 के बाद बंद होता है और खाली रहता है.”

हे भगवान् !!!! ये मैं क्या कह रहा था…. उदित को चोदने के लिए अपनी पत्नी दे रहा था और अपनी ही जगह दे रहा था. इससे पहले मैं संभल पाता उदितने कहा,” ये हुई न बात! बस 8 :30 का बाद आज ही !”

खैर उदित के कहने से क्या होगा, जब ईशिता मानेगी तभी न !.मुझे पाता था कि ईशिता चुदने के लिए यदि तैयार तो यह कभी नहीं चाहेगी कि मुझे इस बात का पता लगे इसलिए अगर वो यहाँ चुदने के लिए तैयार हुई तो इसका मतलब कि वो जानती है कि मेरे और उदित के बीच में क्या बात है.

लेकिन ऐसा नहीं हो सकता!!!!!

तभी मेरे मन में एक विचार कौंधा. मैंने उदित से कहा कि मैं अभी आया और बाहर जा कर मैंने ईशिता के मोबाइल पे फोन किया और कहा,”मै उसे ये बताना भूल गया था कि मुझे आज रात को एक पार्टी में जाना है और पार्टी एक फार्म हॉउस में है.”

ईशिता ने कहा ,”अब क्या करें?”

मैंने कहा,” वैसे तो मैं रमेश(ऑफिस असिस्टेंट जो सबसे बाद में जाता है) को कह दूंगा कि वो ध्यान रखे, लेकिन क्या उदित को इस तरह छोड़ के जाना शालीनता होगी?”

ईशिता ने कहा ,”तुम उदित को कह दो कि कोई इमरजेंसी है और जल्दी से घर जा के तैयार हो जाओ और पार्टी में जाओ. मैं बाद में आ जाउंगी. और फिर सेंटर पे मैं तो रहूंगी ही. चिंता कि कोई बात नहीं है.”

एक पल के लिए मुझे लगा कि ईशिता कि चूत के होठों में शायद उदित को सोच कर पानी आ रहा है. फिर मुझे गिल्टी फीलिंग भी हुई कि मैं ये क्या सोच रहा हूँ.

खैर वापिस ऑफिस में आ कर मैंने उदित से कहा कि मुझे तो कोई इमरजेंसी है और अभी जाना पड़ेगा लास्ट क्लास चल रही है 15 मिनट के बाद ख़तम हो जाएगी.

उदित ने तुरंत कहा,”अभिषेक क्या रात को यहाँ पे कोई और भी रहता है ?”

“कोई नहीं बस रमेश सबसे बाद में लॉक लगा कर जाता है.”

“तुम रमेश को कह दो कि आज लॉक मैं लगा कर चाबी उसके घर दे दूंगा.”

मैंने पूछा,” पक्का आज ही करोगे और अगर उसके पति को पता चल गया तो?”

“यार वो कोई बहाना बना देगी और फिर कौन सा हमने पूरी रात बितानी है? 1 घंटे में फ्री हो जायेंगे हम दोनों.”

मैंने सोचा कि मैं ये क्या कर रहा हूँ?.क्या मेरे दिमाग में जो विचार कौंधा था क्या वो मैं देखना चाहता हूँ?

तभी न चाहते हुए भी मैंने इण्टरकॉम पे रमेश को बुलाया और कहा,” उदित सर को सेंटर कि सारी चाबियाँ दे दो और सुबह इनके घर से ले लेना अभी 1-2 घंटे इनको बैंक की कोई स्टेटमेंट्स वेरीफाई करवानी हैं मुंबई ब्रांच से.”

रमेश ने चाभियां उदित को दे दी और फिर मैं उसको बॉय बॉय कह के बाहर आ गया.

जिस बिल्डिंग में मेरा कंप्यूटर सेंटर है उसके साथ वाली बिल्डिंग नयी बन रही थी. मैं कार में बैठा और घुमा फिरा कर कार उस बिल्डिंग के पीछे ले गया. वहां अँधेरा और गन्दगी पड़ी थी. वहां पे 2 ट्रक और एक वन खड़ी रहती थी. मैंने सलीके से अपनी कार उन दोनों ट्रकों और वन के बीच खड़ी कर दी और जल्दी से कूड़े के ढेर में से होता हुआ साथ वाली बन रही बिल्डिंग के पिछले हिस्से से अन्दर घुस गया और सीढ़ियों से चढ़ कर टॉप फ्लोर पे पहुँच गया सारा शहर दिखाई दे रहा था.मैं 6th फ्लोर पे था और साथ वाली बिल्डिंग में मेरा ऑफिस 4th फ्लोर पे था.मैं जल्दी से छत के रास्ते होता हुआ अपने बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पे आ गया. और नीचे देखते हुए इंतज़ार करने लगा की कब सभी लोग सेंटर से बाहर जायेंगे. धीरे धीरे सभी बाहर आने लगे और लास्ट में १० मिनट के बाद रमेश निकला और चला गया.

अब मेरी मेरी पत्नी ईशिता और उदित सर अकेले मेरे कंप्यूटर सेंटर में थे . मैं फटा फट भाग कर 4th फ़्लू r पे आगया और कॉरिडोर से होता हुआ बिल्डिंग की पीछे वाले इलाके में चला गया . वहां पर लकड़ी का दरवाज़ा सिर्फ चिटकनी के साथ बंद था. दरवाज़ा खोल कर मैं अन्दर घुस गया और अन्दर से चिटकनी लगा ली. ये हमारे कंप्यूटर सेंटर की किचन थी. किचन में घुप अँधेरा था. थोड़ी थोड़ी लाइट बस दरवाज़े के नीचे से आ रही थी. लेकिन सर्विस विंडो के शीशे पर ब्लैक कलर का चार्ट चिपकाया हुआ था. जो की पुराना हो चूका था और थोडा थोडा सा फट रहा था. मैंने थोडा सा उसे और फाड़ा और मेरा कंप्यूटर सेंटर पूरा दिखाई दे रहा था!.

उदित और ईशिता .मेरे ऑफिस केबिन में थे. उसने ईशिता को कुछ कहा और वो उठ कर गयी और मैं दूर को लॉक कर दिया. लॉक ऐसा था जो कि बाहर से भी खुल सकता था और अन्दर से भी. उस लॉक कि एक चाबी मेरी जेब में थी. मैं चाहता तो अपनी पत्नी का भांडा फोड़ सकता था. पर पता नहीं क्यों मैं उसे किसी दूसरे मर्द से चुदने कि चाहत दिल में बिठा चुका था. और वो भी वो आदमी जिसने मेरे सामने ही मेरी पत्नी के बारे में बहुत कुछ बताया था. अब मुझे सिर्फ इस बात का इंतज़ार था कि क्या ईशिता ने ये सब मुझे ये कॉन्ट्रैक्ट दिलवाने कि लिए किया है?

इतने में ईशिता वापिस आई और उदित ने उठ कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और लगा ईशिता के होंठ चूसने. वे मुझ से करीब 25 फ़ुट कि दूरी पे थे पर साफ़ पता चल रहा था कि ईशिता भी पूरा साथ दे रही थी. अब उदित ने अपने एक हाथ ईशिता के चूतड पे रखा और उसे दबाने लगा. फिर दूसरा हाथ भी दूसरे चूतड पे रख के दबाने लगा. ईशिता के होंठ उदित के होंठों से चिपके हुए थे ओए वो उन्हें बिलकुल अलग नहीं कर रही थी. तभी उदित ने एक उंगली ईशिता के चूतडों की दरार में घुसा दी और ईशिता थोडा सा उछल पड़ी. अब धीरे धीरे उदित अपने हाथों से ईशिता की साड़ी उठाने लगा.

तभी ईशिता ने उदित को कुछ कहा और वो उस से अलग हो गयी और स्विच बोर्ड के पास जा कर लाइट बंद कर दी और मेरे केबिन में अँधेरा हो गया. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

मैंने सोच की शायद वो शरमा रही है इसलिए लाइट बंद कर दी है. अब वो दोनों थोड़े थोड़े ही दिखाई दे रहे थे क्योंकि मेन हॉल में लाइट अभी भी जल रही थी और उसकी रोशनी मेरे केबिन में भी जा रही थी. लेकिन वो दोनों मेरे केबिन से निकल कर हॉल में आ गए और अब मुझे उस दोनों कि बातें सुनाई देने लगी. उदित ने पूछा ”क्या हुआ, वहां क्यों नहीं?”

ईशिता ने कहा,” वो जो विंडो है, वहां पे लाइट जलने से नीचे सडक पे पता लगता है कि सेंटर में अभी भी कोई है, और कोई आ न जाये इसलिए इस हॉल में ज्यादा ठीक रहेगा”.

‘ ‘लेकिन यहाँ करेंगे कैसे. सोफा तो अभिषेक के केबिन में ही है”.

“अरे बाबा जब करना होगा तो वहां चल पड़ेंगे. लाइट ज्यादा ज़रूरी है क्या?”

और इतना कहते ही उदित ने ईशिता को फिर से अपने बाहों में जकड लिया और लगा चूमा चाटी करने. अब वो भी उदित को बेतहाशा चाट और चूम रही थी. एक दुसरे को चूसते चाटते हुए ही उदित ने ईशिता के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए. और थोडा सा पीछे हो कर सामने से उसके खुले ब्लाउज को देखने लगा.

“क्या देख रहे हो?”

“देख रहा हूँ कि तुम कितनी सेक्सी हो. ज़रा देखो अपने बूब्स को! कितनी सुंदर तरह से इस सेक्सी ब्रा में पैक्ड हैं.”

“तो ये गिफ्ट पैक खोल के अपना गिफ्ट ले लो!”

और उदित अपने दोनों हाथ ईशिता के पीछे ले गया और ब्रा के हुक खोलने लग गया. ब्रा के हुक खुलते ही ईशिता के बूब्स हलके से नीचे की और लहराए. अब उदित ईशिता से अलग हो गया और २-3 कदम पीछे हट कर देखने लगा.

“अब क्या हुआ आपको?” आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

“देख रहा हूँ तुम्हें के क्या लाजवाब लग रही हो. थोडा सा साड़ी का पल्लू हटाओ.”

और पल्लू हटाते ही उदित के साथ साथ मैं भी अपनी पत्नी के सौंदर्य को निहारने लगा. ब्लाउज के खुले हुक और उसमें से झांकती वाइट ब्रा जो की अब हुक खुल जाने के कारण मुश्किल से ईशिता की चूचियों को ढक पा रही थी.ईशिता के निप्पल अभी भी ब्रा के पीछे ही थे लेकिन उसके बूब्स की गोलाइयाँ और शेप साफ़ नज़र आ रही थी.

“कार में तो बड़े उतावले होते हो इनको पकड़ने के लिए?और अब खोल के भी छोड़ दिए?”

“ईशिता ! क्या तुम्हें कभी किसी ने बताया है की तुम कितनी सेक्सी हो?”

“क्या मतलब ?”

“इधर आओ.”

ईशिता उदित के पास गयी और उदित ने ईशिता की साड़ी के नीचे फिर से हाथ डाला और कुछ हलचल हुई. और ईशिता ने हलकी से मुस्कराहट के साथ हंसी की फुलझड़ी सी छोड़ी और कहा,”अरे रुको तो!”

और अब उदित ने ईशिता की साड़ी और पेटीकोट ऊपर उठाना शुरू किया. घुटनों से साडी ऊपर उठे ही मैंने देखा की ईशिता की पीले रंग की पेंटी ईशिता के घुटनों में फंसी हुई थी. मैंने सोच की ओह्ह तो वो हलचल ईशिता की पेंटी को नीचे करने की थी. उदित का एक हाथ ईशिता के चूचे को रगड़ रहा था और दूसरा हाथ साडी के अन्दर था.

क्योंकि ईशिता की पेंटी अब उसके घुटनों के आसपास थी इसलिए मुझे यकीं था की अब उदित की उंगलिया मेरी पत्नी की चूत से खेल रही थी.

तभी ईशिता ने एक हलकी सी आह भर कर अपनी आँखे बंद कर ली….

“क्या हुआ? मज़ा आया?”

ईशिता ने हाँ में सर हिलाया और अपना हाथ उदित की गर्दन में लपेट लिया.

ईशिता थोड़ी से जोर से हिली और बोली,” प्लीज़ दो उँगलियाँ नहीं,एक से ही कर लो.”

उदित मेरी पत्नी की चूत में उंगली डाल रहा था.

तभी उदित ने वहां पड़ी एक रिवॉल्विंग कुर्सी पे ईशिता को बिठाया और कहा,”ईशिता तुम्हारे हस्बैंड कितने लकी हैं, अगर मैं तुम्हारा पति होता तो दिन रात तुम्हारी साड़ी में ही घुसा रहता.”

“तुम्हें क्या पता मेरी साड़ी में क्या है?”

“मेरी इन उँगलियों ने देख लिया है की क्या है तुम्हारी साड़ी में और वो ये बता रही हैं कि साड़ी में जो छेद है वो उँगलियों से खेलने कि नहीं है.”

“तो फिर किस चीज़ से खेलने कि है?”

उदित ने अपनी जीभ की टिप निकली और कहा,”-इस से.”

ये कह कर उदित, ईशिता की पेंटी निकालने लगा. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

उदित ने ईशिता को थोडा सा कुर्सी पर और लिटाया ताकि उसके चूतड़ थोड़े से बाहर निकल आयें और ईशिता की साड़ी को ऊपर उठा दिया. अब ईशिता की गोरी गोरी पिंडलियाँ और जांघे उदित को तो क्या मुझे भी साफ़ साफ़ नज़र आने लगी. उदित ने जांघो को थोडा सा खोला और अब ईशिता की चूत , जिस पर छोटे छोटे बाल थे, नज़र आने लगी

उदित ने एक लम्बी सांस भरी और कहा-,”ओह गॉड ! ईशिता तुम्हारी चूत इतनी सुंदर है !”

“उदित !! मुझे शर्म आ रही है. प्लीज़ ऐसे मत बोलो !”

“ईशिता ! सच कह रहा हूँ, इतनी सुंदर चूत मैंने आज तक नहीं देखी.” उदित ने ईशिता की चूत की दरार में अपनी जीभ फिरानी शुरू की. और जैसे ही उदित की जीभ चूत पर नीचे से ऊपर गयी, ईशिता ने एक छोटी सी सिसकी ली. अब उदित ने अपनी जीभ पूरी बाहर निकली और ईशिता की चूत पर सबसे नीचे रखी और पूरी जीभ से ईशिता की चूत को चाटता हुआ धीर धीर ऊपर ले जाने लगा.

“आआ…ह्ह्ह्हह्ह…..प्रा ……शा ……..नत …….ओह्ह्ह …..मर जा….उंगी……मैं…..अह्ह्

ह…….उह्ह्ह बस….बस उदित….!!!”

इतना कहते ही ईशिता ने उदित के बाल पकड़ किये और सारा शरीर अकड़ने लगा. और बोली,”.प्रआस्स्श ……!!!!….ओह्ह्ह गौड़ड़ड़ !……ऑउच……….अह्ह्ह…. आई म…. कम्मिंग!! ….उदित !!!

और ये ईशिता का पहला ओर्गास्म था. ईशिता ने शायद 1 मिनट तक लम्बी लम्बी साँसे ली.

“अरे ईशिता तुम तो पहले चखने में ही निकल गयी!.इतनी जल्दी !”

और ईशिता उदित को देख कर मुस्करा दी और कहा,”.प्लीज़ डू इट अगेन!”

और अब उदित ने ईशिता की चूत को जीभ से चाटने की रेल सी चला दी. लगा मेरी बीवी की चूत को अच्छी तरह से चाटने. अब उदित मेरी पत्नी की चूत के अंदर जीभ घुसाने लगा और ईशिता की आहें तेज़ होती गयी. उदित ने अपना चेहरा थोडा सा पीछे किया और अपने हाथो की दोनों उँगलियों से ईशिता की चूत की फलको को खोलने और फिर अपनी पूरी लम्बी जीभ से अन्दर उनको को चाटने लगा.

तभी ईशिता ने कहा,” लिंक माय क्लिट प्लीज़ .”.

उसकी तरफ देख कर उदित ने कहा,”अभी चाटता हूँ ईशिता,.तुम देखती जाओ आज तुम्हारी कैसे हर तमन्ना पूरी करूँगा.” और ये कह कर उदित ने ईशिता कि चूत की क्लिट अपनी जीभ के टिप से चाटना शुरू किया.

” अह्ह्ह्ह…..हाँ ……….धीरे थोडा धीरे उदित……..आउच ……..अह्ह्ह…… अहह्म्म्म…..ओह माय गॉड . ये क्या कर रहे हो !!”और उदित ने अब ईशिता की क्लिट अपने लिप्स के बीच में पकड़ लिया और चूसने लगा.

“बस करो उदित !!!! मर जाउंगी मैं ……ऊह्ह्ह्ह …….फिर से होने वाली हूँ मैं …….आःह्ह…..ध्रुवव्वव्व.. …..आ रही हूँ मैं फिर से…….थोडा और……यहीं पे…बस यही पे…और करो …..आआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह!!!”

और ईशिता एक बार फिर से झड़ने लगी. १-२ मिनट तक अकड़ती रही और फिर निढाल हो कर कुर्सी पे अधलेटी सी हो गयी. उदित एक विजयी मुस्कान के साथ उठा और कहा,”क्या हुआ ईशिता ? थक गयी हो क्या अभी से?”

ईशिता ने एक थकी हुई मुस्कान के साथ कहा,” अगर कहूँ कि थक गयी हूँ तो क्या आप मुझे छोड़ दोगे?”

“अच्छा बाबा थोड़ी देर आराम कर लो.”

“जी नहीं अब तो एक बार ही आराम होगा.”

और उँगली से उदित को अपने पास आने का इशारा किया.

जैसे ही उदित ईशिता कि लेफ्ट साइड पे आया, ईशिता ऊपर मुंह करके उदित की और देखने लगी लेकिन उसके हाथ उदित के पैंट खोलने लगे. बेल्ट और पैंट के हुक खोलने के बात ईशिता ने उदित कि पैंट नीचे सरका दी और उदित ने सफ़ेद रंग का अंडरवियर पहना हुआ था. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

उदित ने पूछा,”क्या देख रही हो.”

“अभी तो कुछ नहीं दिखा?”

” क्या देखना चाहती हो.”

ईशिता ने कुछ नहीं बोला और उंगली से उदित के अंडरवियर के उभरे हुए हिस्से की तरफ अपनी आँखों से इशारा किया.

“कौन रोक रहा है? देख लो.”

ईशिता नीचे मुंह करके बोली, मुझे शर्म आ रही है.”

उदित ने कहा ,”जब …”फिर से होने वाली हूँ मैं …….आःह्ह……आ रही हूँ मैं फिर से…….थोडा और……यहीं पे…बस यही पे…और करो” कह रही थी तो शर्म नहीं आ रही थी क्या…मेरा लौड़ा देखने में शर्म आ रही है अब !”.

“हाय राम कितने गंदे हो आप….!!! कैसे कैसे बोलते हो”.

“अरे अगर लौडे को लौडा नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे?”

” अच्छा अब चुप भी करो.”

“तो फिर निकालो इसे बाहर नहीं तो फिर से कहता हूँ लौ..”.

इतना कहता ही ईशिता ने ध्रुव के अंडरवियर धीरे नीचे करने लगी.

अंडरवीयर नीचे आते ही उदित का कड़ा सा लंड बाहर आ गया.

लौड़े का टोपा मशरूम जैसा चिकना और मोटा.

ईशिता ने हाथ में ले कर लौड़ा थोड़ी देर तक मुठियाया….और फिर बिना कोई नोटिस दिए एक किस लंड के सुपाड़े पे दे दी.

जब से हमारी शादी हुई है ईशिता ने सिर्फ २ बार मेरे लंड पे किस की है. हाथ में ज़रूर पकड़ लेती है.

उदित ने कहा,”ईशिता एक बात पूछूं” आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

ईशिता ने लंड पकडे हुए ध्रुव की और देखा और कहा “हाँ पूछिए”

“तुम्हारे पति से बड़ा है क्या”

ईशिता ने कहा ,”नहीं मेरे पति से बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन इसका मशरूम शेप और गोरापन ज्यादा है.”

ईशिता अभी भी उदित के लुंड को मुठिया रही थी और फिर ऐसा हुआ की एक दम से अपनी जीभ निकली और लंड की लम्बाई को जीभ से चाटने लगी. नीचे से ऊपर-ऊपर से नीचे….और फिर मुह खोल के पूरा सुपाड़ा अंदर ले कर चूसने लगी.

ईशिता बड़ी मुश्किल से मेरे लंड चुस्ती थी और यहाँ मेरी बीवी किसी गैर मर्द के लैंड मुंह में डाल कर चूस रही थी. कितनी तम्मना थी मेरी की मेरी बीवी मेरा लंड चूसे. लेकिन वो आज किसी और की तम्मना पूरी कर रही थी.

ईशिता, उदित के लौड़े को ऐसे चूस रही थी मानो पता नहीं कितने सालों से लंड चूसने की प्रैक्टिस है.

उदित बड़बड़ाने लगा,” फ़क यू ईशिता ! ओह्ह माय गॉड ! लगी रहो…..बहुत अच्छा लग रहा है.” ५-७ मिनट चूसने के बाद ईशिता ने ध्लौड़ा मुंह से बहार निकाला और उदित के टट्टे चाटने लगी.

तभी उदित बोला,” बस यार…अब और नहीं…..!!!” आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

ईशिता ने ऊपर देख कर पूछा क्या हुआ?

उदित ने ईशिता को उठाया और कुर्सी पे बिठाया और कहा “चौड़ी करो अपनी टाँगे”

ईशिता ने कहा,” अरे रुको ….यहाँ नहीं……कंडोम नहीं है….प्लीज़ …बिना कंडोम के नहीं!”

उदित ईशिता के चेहरे के पास आया और होंठो से होंठ मिला कर बोला, “ईशिता आई वान्ना फ़क यु राइट नाउ! मै तुमको नंगे लंड से यही चोदना चाहता हूँ! तुम्हरी चूत मेरे लंड को पूरा महसूस करे ईशिता रानी!”.

ईशिता मिमयाती बोली,” लेकिन बिना कंडोम के? ये मेरे सेफ डेज भी नहीं हैं,प्लीज़ उदित मान जाओ !

उदित बोला,” सिर्फ एक बार कह दो तुम्हारा मन नहीं है मैं कुछ नहीं करूँगा.”

ईशिता ने शर्माते हुए कहा,”मन तो बहुत है उदित लेकिन बिना कंडोम के खतरा है,कहीं कुछ गडबड न हो जाये”

उदित ने कहा ,” ईशिता चिंता मत करो,तुम्हारे अंदर नहीं छोडूंगा ,पक्का जेंटलमैन प्रॉमिस.”

और ये कह कर ईशिता के होंठ चूसने लगा .

यह कह के उदित, ईशिता से अलग होने लगा.

.तभी ईशिता ने उदित का लौड़ा (जो अब थोडा ढीला पड़ चूका था) पकड़ा और धीरे से कहा “अरे बाबा ! मैं कह रही हूँ आज तो कर लो पर फिर कभी कंडोम के बिना मत करना”

उदित ने मुस्कुराते हुए कहा,”बहुत शरारती हो तुम.”

और फिर अपना ठीला होता लौड़ा एक बार फिर से ईशिता के मुंह में दे दिया और ईशिता फिर से उसे चूसने लगी और 1 मिनट के अंदर ही फिर से एक दम कड़क लंड बना दिया.

अब उदित ने अपना लौड़ा ईशिता के मुंह छुडवाया और ईशिता उसकी जांघे चौड़ी कर के उसकी चूत को 7-8 बड़े बड़े चुंबन दिए और ईशिता सिहरने वाली ही थी कि उदित ने उसे छोड़ दिया.

उदित जैसे ही ईशिता कि चूत पे अपना लौड़ा लगाने लगा तो ईशिता ने उदित का लंड पकड़ा और चूत के ऊपर रख दिया. जिस चूत को मेरे लंड ने चोदा था अब वो मेरे ही ऑफिस में किसी गैर मर्द के साथ चुदवाने के लिए तैयार थी. और मैं एक बेचारे की तरह छुप के देख रहा था.

तभी ईशिता ने कहा,” उदित! अगर मुझे तुमसे प्यार हो गया तो?”और कह कर हंस दी.

“ओह्ह्ह! आई लव यु ईशिता!”और कह कर अपना लंड धीरे धीरे ईशिता की चूत में घुसेड़ना लगा.

” अह्ह्ह्ह्म्म्म्म ……आह…..धी..रे …धी….रे….अहह….हाँ करो अब पूरा अंदर…..आउच …..पलीज़ .थोडा धीरे!”

और उदित ने धीरे धीरे अपना पूरा लौड़ा मेरी पतिव्रता पत्नी की चूत में जड़ तक घुसा दिया.

” कैसा लग रहा है?”

“प्लीज़ उदित अभी धक्के शुरू मत करना!” और ईशिता ने उदित की बाहों को कस के पकड़ लिया और आँखे बंद कर ली और थोड़ी तेज़ आवाज़ में फिर से कहा, “उदित अभी बाहर मत निकलना!!! मैं अह्हह्ह…..फिर से……ओह्ह्ह्ह्ह्ह….हे भगवान…….यार क्या हो तुम……आः.. अह्ह्म्म……ओह्ह गॉड …आई आम कम्मिंग उदित!!.येस्स्स .. !!! आई आम कम्मिंग अगेन!!” आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

और ईशिता एक बार फिर से झड गयी.

इधर उदित ने ईशिता के झड़ते ही चूत की चुदाई शुरू कर दी…जैसे ही उदित ने अपना लौड़ा ईशिता की चूत से बाहर निकालता तो लौड़ा ईशिता की चूत के गीलेपन से चमकता हुआ दिखाई देता. धीरे धीर उदित ने झटकों की स्पीड बढ़ा दी और लगा चूत का चूरमा बनाने.

ईशिता के मुह से आवाज निकल रही थी,” अहह..थो..डा …धीरे….अह्ह्ह..ध्रुव….. ओह्ह्ह…प्लीज़ थोड़ा रुक के !”

“क्यों …मज़ा नहीं आ रहा क्या …धीरे धीर करूँगा तो मैं सुबह तक नहीं निकलूंगा !”

“बहुत मज़ा आ रहा है !कभी ऐसा महसूस नहीं किया!मन करता है चुदते चुदते मर ही जाऊं !”

“हाँ ईशिता अब हुई हो मस्त! निकल गयी न सारी शर्म.! तुम भी बोलने लग गयी ये सब.”

इधर मुझे अपने कानो पर विश्वास नहीं हो रहा था .”चुदते चुदते मर जाऊं” ये क्या बोल रही थी मेरी ईशिता!

फिर यका यक उदित ने अपना लौड़ा ईशिता की चूत से बारह निकाला और कहा-“निकलो बाहर कुर्सी से”

ईशिता कुर्सी से बारह निकली और अपने कपडे सँभालते हुए बोली,” “क्या हुआ?”

उदित कुर्सी पे बैठा और ईशिता को कहा “बैठो अब अपने यार पे !”

“बेशरम!क्या बोल रहे हो”

उदित अपने लंड हो जड़ से पकड़ कर बोला “क्यों ये तुम्हारा यार नहीं है?अच्छा नहीं लगता ये”

ईशिता अपने चेहरे पे मुस्कान लाती हुई बोली “बहुत गंदे और बेशर्म हो” और उदित के और से मुह फिरा के अपने चूतड़ पीछे की और बहार निकाल के दोनों जांघों के बीच से अपनी कलाई को ले जा कर मदमस्त लौड़ा पकड़ लिया और अपनी चूत के मुहाने पे लगाने लगी . जैसे ही लंड के टोपे ने ईशिता की चूत के होंठों को छुआ, ईशिता ने अपने चूतड़ों को नीचे करना शुरू कियाऔर धीरे धीरे ईशिता की चिकनी चूत एक बार फिर से उदित का पूरा लौड़ा खा गयी.

ईशिता के दोनों चूंचियां अब उदित ने अपने हाथों में पकड़ रखे थे. मुश्किल से पांच मिनट चुदाई चली होगी के ईशिता ने ऊपर नीचे होना बंद कर दिया और एक झटके के साथ उदित के लौड़े पे बैठ कर लंबी लंबी साँसे लेने लगी.

“फिर झड गयी?”

“नहीं. अबकी बार थक गयी हूँ.”

“ओके उठो फिर.”

ईशिता उदित के लौड़े पे से उठ गयी और फिर उदित भी उठ गया.

उदित ने कहा,” ईशिता अपने कपडे उतर कर नंगी हो जाओ.”

“हाय राम बेशरम ! और कितनी होऊं ?सब कुछ तो देख लिया मेरा और क्या बाकी है अब?”

“बस ईशिता अब गाडी स्टेशन पे ही आ के रुकेगी”

इसके बाद दोनों ने अपने कपडे निकलने शुरू किये और बिलकुल नंगे हो गए..

उदित ने ईशिता से कहा,” तुम इस मेज़ पे दोनों हाथ टिका के कड़ी हो जाओ मैं पीछे से घुसाऊंगा.”

और ईशिता टेबल के ऊपर अपने दोनों हाथ टिका के खड़ी हो गयी. ईशिता की कमर और सुन्दर चूतड़ मेरी और थे. अब उदित, ईशिता के पीछे आया और अपना लौड़ा ईशिता के चूत पे लगाया और एक ही झटके में अंदर कर दिया. जैसे उदित का लंड उसकी चूत में घुसा, ईशिता ने कहा,”आह्ह्ह…….हर बार…जान निकल देते हो !”

और उदित ने टाप लगनी शुरू की….एक दो तीन चार …..धक् धक् धक् धक्…..लौड़ा पूरा बाहर जाता और फिर अंदर. मैं पीछे खड़ा ध्यान से यही देख रहा था….उदित के लंड ने ईशिता की चूत चौड़ी कर रखी थी. अब उसने तेज तेज चुदाई शुरू की

“आआह्ह्ह्ह……उदित … ..रुकना मत………ह्ह्ह ह्ह्ह्ह……..हाय……उफ़…. .म्म्म..मम..मम्म्म…..लगे रहो…बहुत म…जा …आह्ह्ह….आ रहा….आआऔऊउच…..है!!!”

और कस के मेज़ पकड़ कर झुक गयी, , ईशिता ने कहा का लंड एक पिस्टन की तरह अंदर बहार होता दिख रहा था .तभी उदित ने ईशिता के चूतड़ पकडे और कहा,” ईशिता,तैयार हो जाओ,बस अब आने वाला हूँ!!”

” ओह्ह……..ह्ह्ह… …अंदर नहीं बस….जहाँ मर्ज़ी कर दो…….मै भी झड़ने वाली हूँ!”

यह कह कर शायद ईशिता भी झड़ने लगी.

तभी उदित ने अपना लौड़ा निकाला और ईशिता की गांड की दरार में रख दिया और मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया. बस फिर मैंने देखा के ईशिता की गांड की दरार में से उदित का गाढ़ा वीर्य ईशिता की मांसल जांघों की ओर बहना शुरू हुआ और एक के बाद एक वीर्य की लहर ईशिता की जांघों में से होती हुई ईशिता के टखनो तक पहुँच गयी और उदित की जकड़न को देख कर लग रहा था की वो अभी भी अपने लंड को ईशिता की गांड पे अंतिम बूँद तक ईशिता के चूतडों की दरार में निकल देना चाहता था.

“बस करो उदित,अब और कितना निकलोगे!”

ओर फिर उदित , ईशिता पीछे से हटा तो ईशिता की खूबसूरत गांड, जांघे और टखने उदित के वीर्य से चमक रहे थे और वीर्य अभी भी चूतडों से नीचे की और बह रहा था.

ईशिता ने कहा,”प्लीज़ मेरी अंडरवीयर दे दो.”

उदित ने अपने लंड को सहलाते हुए ईशिता की अंडरवीयर तक गया और उठा कर सूंघने लगा और हँसते हुए ईशिता को दे दी.ईशिता ने अपनी पीली पैंटी से अपनी गांड साफ़ करने लगी और फिर धीरे धीरे अपनी जांघें और टाँगे साफ़ की.फिर अपनी पैंटी को मेज़ पे रख के अपने कपडे पहनने लगी.

उदित ने कहा,” तुमने तो साफ़ कर लिया ,मेरा क्या होगा?”

ईशिता बोली,” तुम भी मेरी ही पैंटी से साफ़ कर लो “और कह कर हँसने लगी

उदित ने ईशिता को कन्धों से पकड़ा और कुर्सी पे बिठा दिया.

” क्या कर रहे हो?”

उदित ने अपना लंड ईशिता की और किया और कहा,” चूसो और लंड लो साफ़ करो .”

ईशिता ने सर हिला कर मन किया लेकिन उदित ने ज़बरदस्ती ईशिता के होंठों पे अपना ढीला लंड लगाया और कहा- “ईशिता प्लीज़ डू ईट” और ये कह कर ईशिता के मुंह में ज़बरदस्ती ठूंसने लगा.

ईशिता ने अनमने ढंग से 7-8 चूसे मार कर ध्रुव का लौड़ा छोड़ दिया और सीधी खड़ी हो कर ज़बरदस्ती उदित के होंठो के साथ होंठ मिला कर उसे किस करने कगी और शायद सारा (saliva)जो उसने उदित के लंड से लिया था उदित के ही मुंह में दे दिया और फिर अलग हो कर हँसने लगी. और कहने लगी “टिट फॉर टाट! ” मै सब देखता रहा और अनजाने में अपने लंड को हिलाते हिलाते वही खड़ा खड़ा झड़ गया. अब तो मेरी बीवी पूरी चुदक्कड बन चुकी है और मेरे ढेर सारे दोस्त उसको चोद चुके है वो सब कहानी फिर कभी बताऊंगा दोस्तों फिर मिलुगा मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ते रहिये और भी हजारो कहानिया है |


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मेरी बीवी की बुर का चूरमा बना दिया

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