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चूत में अंकल का लंड फंस गया


मै अपने दुसरे कजिन के साथ फॉर्म हाउस के स्वीमिंग पूल में स्वीमिंग कर रही थी. मेरे सबसे छोटे अंकल हमें स्वीमिंग सिखा रहे थे. वो सभी को बारी बारी स्वीमिंग सिखा रहे थे. हम लड़कियों ने सलवार कमीज़ पहनी थी. मैंने तो मेरी ब्रा और पैंटी भी नही पहनी थी. क्युकी यहाँ स्वीमिंग का प्रोग्राम है ये मुझे मालूम नही था. और मुझे स्वीमिंग आती भी नही इसलिए इसके बारे में सोचा नही , मेरी कजिन लोगो को थोडी स्वीमिंग आती थी. इसलिए वो तैयार हो कर आई थी. अंकल ने सिर्फ़ एक अंडरवियर. उन्होंने ऊपर कुछ नही पहना था. चूँकि ठाणे के पास पनवेल में अंकल ने अपने किसी दोस्त का ये फॉर्म हाउस बुक किया था इसलिए यहाँ हमारे आलावा और कोई नही था. शाम का समा था और आसमान पर हलके हलके बादल थे.और इसी लिए मौसम बहुत खुशगवार हो रहा था. मेरी मम्मी अपनी बहनों और दूसरी रिश्तेदार औरतों के साथ बैठी बातें कर रही थी. पापा भी उनकी उमर के मर्दों के साथ स्वीमिंग कर रहे थे, लेकिन वो बहुत दूर थे. मेरे राकेश भैय्या भाभी के साथ एक कोने में पानी में मस्ती कर रहे थे. पानी काफी ठंडा था. और गहरा भी था. हम जहाँ स्वीमिंग कर रहे थे वहां पानी हमारे गले तक था. गहरे नीले पूल में पानी भी नीला लग रहा था… अंकल ने मुझे पहले स्वीमिंग के बारे में बताया. उन्हें मालूम था की मुझे स्वीमिंग नही आती है. उन्होंने कहा वो मेरी मदद करेंगे और सिखा देंगे. उन्होंने मेरे पेट के नीचे एक हाथ लगाया और कहा हाथ और पैर की मदद ले कर उन्हें कैसे चलाना है. अंकल की उमर 26 साल की है और उनकी अभी शादी नही हुयी है. मेरी उमर 18 साल की है. अंकल मेरी दादी के साथ ही मुलुंड में रहते है. मै स्वीमिंग कर रही थी.. मैंने देखा की सब लोग अब अपनी बीवी के साथ पानी में मजा कर रहे है.. लेकिन वो सब दूर थे. अंकल बेचारे हमारे साथ ही रहे, क्युकी मेरे भैय्या जो उनसे छोटे है लेकिन शादीशुदा है , वो भी अपनी बीवी के साथ पानी में थे. मेरी मम्मी अंकल को बहुत चाहती है. क्युकी वो सबसे बड़ी भाभी है, अंकल भी मुझे बहुत चाहते है. अंकल ने मेरे पेट के नीचे हाथ रखा हुआ था. और मै स्वीमिंग के लिए हाथ पैर हिला रही थी.अंकल ने अचानक हाथ हटा लिया मेरा संतुलन बिगड़ गया और मै पानी में गिरने लगी. मैंने हाथ बढ़ा कर अंकल को पकड़ना चाह.और गलती से मेरा हाथ अंकल के लंड पर लग गया..  मै घबरा गयी लेकिन अंकल ने कोई नोटिस नही लिया. अंकल ने फ़िर मुझे स्वीमिंग करने को कहा और मै फ़िर से स्वीमिंग करने लगी. अंकल ने अब एक हाथ मेरी चूंची के नीचे रखा और दूसरा मेरी चूत के पास रखा. मै गनगना गयी. मैंने अभी १७ साल पुरे किए थे और 18 वां लगा था.. मैंने ब्रा भी नही पहनी थी और ना ही सलवार के अन्दर चड्डी थी. कपडे गीले हो कर बदन से चिपक गए थे. मुझे ऐसा लगा की मै नंगी हूँ और अंकल का हाथ मेरी नंगी चूंची और चूत पर है. पहली बार किसी का हाथ मेरी चूंची और चूत पर पड़ा था. मुझे अंकल का हाथ का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था. मै स्वीमिंग की कोशिश कर रही थी. और अंकल का हाथ वहीं लगा हुआ था. थोडी देर बाद अंकल ने कहा . वो अब हाथ हटा रहे है.. और उन्होंने अचानक हाथ हटा लिया.. मेरा फ़िर से संतुलन बिगडा और मै डूबने लगी.. मैंने ख़ुद को सम्हालने के लिए हाथ बढाया और मेरा हाथ फ़िर से अंकल के लंड पर लगा.. शायद मैंने जानबूझ कर वहीँ हाथ लगाया था.. मैंने हाथ से महसूस किया की अंकल का लंड अब कड़क हो गया था. मै अंकल के सामने गले तक पानी में खड़ी थी. और मैंने पारदर्शक पानी के अन्दर देखा अंकल का लंड अंडरवियर में एकदम टेंट जैसा खड़ा है. तभी मेरी एक कजिन ने कहा की अब उसे स्वीमिंग करना है.. तो मैंने कहा.. नही अभी मै थोडी देर और सीखूंगी. मै फ़िर स्वीमिंग करने लगी. अब मै जानबूझ कर बार बार गिरती थी और हर बार अंकल के लंड को ही हाथ लगाती थी. अंकल का लंड अब साफ़ नज़र आ रहा था.. एकदम कड़क और सीधा एक खंभे जैसा. मै एक बार डूबने लगी तो अंकल ने मुझे थाम लिया. मै खड़ी हो कर अंकल के सीने से चिपक गयी.अंकल का लंड मेरे पेट से टकरा रहा था. बहुत सख्त था. इस स्पर्श ने मुझे अन्दर से गरम कर दिया. मैंने एक बार फ़िर स्वीमिंग की कोशिश की.और अब अंकल ने मुझे पानी पर सीधा करके ख़ुद को मेरी टांगों के बीच लाया. मेरी टांगों को अच्छे से फैला दिया. मेरे पैर उनके कमर के दोनों तरफ़ थे. और वो मेरे पीछे थे. उन्होंने मेरे पेट को पकड़ लिया.और कहा पहले हाथों से प्रक्टिस करो फ़िर पैरों से करना. मैंने अंकल को दोनों टांगों के बीच में कास कर पकड़ा और हाथों से प्रक्टिस करने लगी. अंकल का लंड मेरी चूत के ऊपर सता हुआ था. और मेरे हिलने से वो चूत पर रगड़ रहा था.. उफ़ मै बता नही सकती मुझे कैसा लग रहा था.. अंकल का लंड मेरी चूत के करीब था जो की बहुत ही लाजवाब लग रहा था. अमी अंकल के लंड को महसूस करके खुश हो रही थी और मेरी चूत ज्यादा से ज्यादा लंड से रगड़ रही थी. मै गरम हो रही थी. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | अंकल का लंड हिलता हुआ महसूस हो रहा था और ठंडे पानी में मै गरम हो रही थी. ये एहसास मुझे पहली बार हो रहा था. और ये एहसास जन्नत का मजा दे रहा था. मै स्वीमिंग क्या सीखती, मै तो चुदाई की आग में गरम हो रही थी.. सोच रही थी की सलवार फाड़ कर यही अंकल मेरी चूत में लंड डाल दे. मै थक गयी थी..साँस तेज हो गई थी.. मै अब खड़ी हो गई. अंकल का हाथ अब भी मेरे पेट और कमर पर था. मेरी पीठ अंकल के तरफ़ थी. खड़े होते ही मैंने उनका लंड मेरे चूतडों पर महसूस किया. मैंने हलके से अपने चूतड उनके लंड पर दबाया और फ़िर पलट गई. मैंने अंकल की आँखों में एक अलग ही चमक देखी. उनकी आँखों में अब एक नया इशारा था. और वो मेरी चूत और बदन को और ज्यादा महसूस करना चाहते थे.. उन्होंने पूंछा की क्या और प्रक्टिस करोगी .. लेकिन ऐसा लगा उनका गला सूख रहा था और बड़ी मुश्किल से आवाज़ निकल रही थी.  अभी मै जवाब देने ही वाली थी की पापा और भैय्या ने आवाज़ दी और कहा “चलो लड़कियों अब रात होने वाली है. मै तो ये सुन कर मायूस हो गई. मै सोच रही थी की इस बार मै उनके लंड का पूरा मजा लूँगी हो सके तो मै सलवार नीचे कर के उनकी चड्डी से लंड को बहार निकाल कर अपनी चूत में लगा कर देखूंगी. लेकिन मजबूरी में जन ही पड़ा.लेकिन अंकल ने कहा वो थोडी देर बाद आयेंगे. मै समझ गयी के वोह खड़े लंड के साथ बहार नही निकल सकते उसके थोड़ा ढीला होने के बाद ही बाहर आयेंगे. हम लोग फॉर्म हाउस के हॉल में आ गए. थोडी देर बाद अंकल भी आ गए. लेकिन वो बहुत चुप चुप थे.हॉल में भैय्या और अंकल ने हाफ पंट पहनी हुयी थी. अंकल और पापा सभी ने पायजामा पहना हुआ था.मम्मी और भाभी वगैरह खाना लगा रही थी. मै बार बार अंकल की तरफ़ देख रही थी.वो भी मेरी ही तरफ़ देख रहे थे. मेरे अन्दर आग लगी हुयी थी. जब मै दूसरी सलवार कमीज़ पहनने के लिए बाथरूम में गई तो मैंने देखा मेरी चूत से कुछ लसलसा पानी निकल रहा है. मेरी चूत में अभी भी अंकल के लंड और हाथों की गर्मी महसूस हो रही थी.कुछ देर के बाद सब लोग खाना खा रहे थे. मुझे खाना अच्छा नही लग रहा था. मेरे अन्दर एक आग लगी हुयी थी.जो कम होने की जगह बढ़ रही थी. . दूसरी तरफ़ अंकल भी एकदम चुप चुप थे. शायद वो भी वही सोच रहे होंगे जो मै सोच रही थी.अंकल का कद करीब 5feet 7 इंच था, वो और भइया एक ही कद काठी के थे..दोनों ही जिम जाते थे.इसीलिए दोनों में बहुत दोस्ती भी थी. मेरी कजिन मुझ से बातें कर रही थी. लेकिन मुझे उसकी बातों में कोई दिलचस्पी नही थी.मै अपने बारे में सोच रही थी. . मै एक दुबली पतली लड़की हूँ, मेरा कद 5 फीट 2 इंच है. मेरी चूचिया 34 साइज़ की है. एकदम ठोस. निपल गुलाबी और छोटे है. चूत उभरी हुयी.. पुत्तियाँ चिपकी और चूत एकदम गुलाबी है. हलके हलके भूरे बाल है. एकदम नरम. जिन्हें मैंने छोटे किए हुए है.क्युकी माहवारी के वक्त पैड लेने के लिए जरुरी है.मेरी कमर एकदम पतली २६ की है और गांड भी ३४ की है. मेरी आँखे भूरी और मेरा रंग बहुत गोरा है. सिर के बाल लंबे और सिल्की है. कैसे अंकल मुझे चोदेंगे.. उनका वो मोटा और लंबा लंड कैसे डालेंगे. तभी सबका खाना ख़तम हो गया. खाने के बाद सबने काफ़ी का मजा लिया. थोडी गपशप की .रात के 11 बज रहे थे.तब पापा ने कहा अब सो जाओ क्युकी सुबह नाश्ता करके वापिस जाना है हॉल में कारपेट पर ही बेड लगाया सबका. मेरा बेड दीवार के पास खिड़की के नीचे लगाया. मै वहीँ लेट गयी. सभी मर्दों के बिस्तर एक साथ लगाये गए. और उनके पैरों के तरफ़ थोडी दूरी पर सब औरतों के बेड लगाए गए. मैंने देखा की अंकल का बेड मेरी खिड़की के बाद एक खिड़की छोड़ कर लगाया गया है.उनके बराबर थोडी दूर पापा का बेड था. हम सब के लेटने के बाद हॉल की लाईट बंद कर दी गई. मेरे खिड़की से चाँदनी की रौशनी अन्दर आ रही थी. और उस खिड़की के नीचे रात की रानी की खुशबू मुझे और मदहोश कर रही थी .  मै आज शाम के एक एक पल को याद कर रही थी. मैंने अपने हाथ मेरी कमीज़ के अन्दर अपनी चूची पर रखा तो मेरी चूचियां अभी भी खुशी में तनी हुई थी. छोटे निपल कड़क थे. मैंने दुसरे हाथ को सलवार के अन्दर डाला और चूत को छुआ, ओह्ह वो अब भी गीली थी. मैंने अपनी चूत के ऊपर हाथ रखा और सहलाया.. उईई . बहुत मज़ा आया…चूत से पानी बह रहा था.. मैंने सोने की बहुत कोशिश की. लेकिन मुझ से किसीभी करवट लेता नही जा रहा था.मै सिर्फ़ करवट बदल रही थी. मुझे अपने ऊपर आश्चर्य हो रहा था. मै तो बिस्तर पर गिरते ही सोने की आदि हूँ. आज नींद क्यों नही आ रही.? हाल में अब खर्राटों की आवाज़ आने लगी. सभी थक गए थे. सब गहरी नीद में थे. मै अंकल के बारे में सोच रही थी. .अब सब कुछ मेरी बर्दाश्त के बाहर हो गया.मै जानती थी की अंकल मेरे लिए ही सपना देख रहे होंगे. आज जो कुछ हुआ वो मेरे लिए अजीब था और मजेदार भी. मेरी 18 साल की कुंवारी चूत मचल रही थी. मैंने अपने ऊपर से चादर हटा दी और कमीज़ को निकाल के ऊपर का जिस्म नंगा कर लिया.फ़िर सलवार भी निकाल दी अब मै पूरी नंगी थी..मै अपने जिस्म को सहलाने लगी. हलकी चाँदनी में कुछ नही नज़र आ रहा था.अपनी उँगलियों से चूत को छुआ मुझे मज़ा आने लगा मेरे चूत से गरम भाफ निकाल रही थी. और लगा जैसे मेरा बदन पिघल रहा हो. चैन नही आ रहा था. और समझ में नही आ रहा था कि क्या करुँ बस दिल कर रहा था कि अंकल मेरे पास आ जायें और मेरे साथ लेट जाएँ. ये सोचते ही मेरे मन में एक्ख्यल आया कि क्यूँ न मै ही अंकल के पास चली जाऊं. फ़िर सोचा कि कहीं कोई गड़बड़ न हो जाए. आप यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मेरे जिस्म में और खास कर चूत में तो आग लगी थी. आराम नही मिल रहा था. मै अपने हाथों से अपनी चूंची और चूत को सहला रही थी. लेकिन मेरे इस तरह सहलाने से आग और भड़क रही थी. मैंने चारों तरफ़ देखा , सब गहरी नीद में थे. मै धीरे से उठ कर खड़ी हुई. मै पूरी नंगी थी. अंधेरे में कुछ नही दिख रहा था. चाँदनी भी गायब थी बादलों कि वजह से. अंकल जिस खिड़की के पास थे वहां पर परदा था इसलिए वहां और भी अँधेरा था. उनका बिस्तर मुश्किल से नज़र आ रहा था. मैंने अब मन में सोचा कि आज मैंने नही चुदवाया तो फ़िर ये मौका शायद कब मिले कुछ पता नही. लेकिन डर भी लग रहा था. लेकिन फ़िर भी मन को समझा कर मै आहिस्ता आहिस्ता अंकल के बिस्तर के तरफ़ बढ़ रही थी.. एकदम धीमे धीमे. एक खिड़की छोड़ी और दूसरी खिड़की के पास के बेड पर पहुँची..मै नंगी ही थी. मैंने उस बिस्तर को देखा और अंकल के बाजू में लेट गई. अंकल ने चादर ओढ़ राखी थी. वो सो रहे थे. मुझे गुस्सा आया.. मेरे अन्दर आग लगा कर कैसे आराम से सो रहे है. उनके सांसो कि आवाज़ मै महसूस कर रही थी. मैंने आहिस्ता से उनकी चादर उठाई और उसमे घुस गई. अंकल का बदन गरम था.. मेरे बदन पर भी वो महसूस किया. अंकल गहरी नीद में सीधे लेटे मैंने अपना हाथ अंकल के हाफपंट के ऊपर से उनके लंड पर रखा. वो भी अंकल कि तरह सोया हुआ था.मै करवट होकर उनके


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चूत में अंकल का लंड फंस गया

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