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Hindi Sex Stories मस्तानी हसीना 10


जिस लड़के को देखने हम कानपुर गये थे उसके साथ मेरी शादी पक्की हो गयी.


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Antarvasna एक महीने के अंडर ही शादी करना चाहते थे. आअख़िर वो दिन भी आ गया जब मेरी


डॉली उठने वाली थी. धूम धाम से शादी हुई. आख़िर वो रात भी आ गयी जिसका हर


लड़की को इंतज़ार रहता है. सुहाग रात को मैं खूब सजी हुई थी. मेर गोरा


बदन चंदन सा महक रहा था. दिल में एक अजीब सा डर था. मैं शादी का जोड़ा


पहने पति के आने का इंतज़ार कर रही थी. तभी दरवाज़ा खुला और मेरे पति


अंडर आए. मेरे दिल की धड़कन बढ़ गयी. हाई राम, अब क्या होगा. मुझे तो


बहुत शर्म आएगी. बहुत दर्द होगा क्या. क्या मेरा बदन मेरे पति को पसंद


आएगा. कहीं पूरे कपड़े तो नहीं उतार देंगे. इस तरह के ख़याल मेरे दिमाग़


में आने लगे. मेरे पति पलंग पर मेरे पास बैठ गये और मेरा घूँघट उठा के


बोले,


” कंचन तुम तो बहुत ही सुन्दर लग रही हो.” मैं सिर नीचे किए बैठी रही.


” कुच्छ बोलो ना मेरी जान. अब तो तुम मेरी बीवी हो. और आज की रात तो


तुम्हारा ये खूबसूरत बदन भी मेरा हो जाएगा.” मैं बोलती तो क्या बोलती.


उन्होने मेरे मुँह को हाथों में ले कर मेरे होंठों को चूम लिया.


” ऊओफ़! क्या रसीले होंठ हैं. जिस दिन से तुम्हें देखा है उसी दिन से


तुम्हें पाने के सपने देख रहा हूँ. मैने तो अपनी मा से कह दिया था कि


शादी करूँगा तो सिर्फ़ इसी लड़की से.”


” ऐसा क्या देखा आपने मुझमे?” मैने शरमाते हुए पूछा.


” हाई , क्या नहीं देखा. इतना खूबसूरत मासूम चेहरा. बरी बरी आँखें. लंबे


काले बाल. वो कातिलाना मुस्कान. तराशा हुआ बदन. जितनी तारीफ़ करूँ उतनी


कम है.”


” आप तो बिकुल शायरों की तरह बोल रहे हैं. सभी लड़कियाँ मेरे जैसी ही होती हैं.”


” नहीं मेरी जान सभी लड़कियाँ तुम्हारे जैसी नहीं होती. क्या सभी के पास


इतनी बड़ी चूचियाँ होती हैं?” वो मेरी चूचिओ पर हाथ फिराते हुए बोले. मैं


मर्द के स्पर्श से सिहर उठी.


” छ्चोड़िए ना, ये क्या कर रहे हैं.?”” कुच्छ भी तो नहीं कर रहा. बस देख रहा हूँ कि क्या ये चूचियाँ दूसरी


लड़कियो जैसी ही हैं” वो मेरी चूचिओ को दोनो हाथों से मसल रहे थे. फिर


उन्होने मेरे ब्लाउस का हुक खोल कर मेरा ब्लाउस उतार दिया. अब मैं सिर्फ़


ब्रा में थी. मुझे बाहों में भर के वो मेरे होंठों को चूसने लगे और मेरी


नंगी पीठ सहलाने लगे. अचानक मेरे ब्रा का हुक भी खुल गया और मेरी बड़ी


बड़ी चूचियाँ आज़ाद हो गयी.


” है कंचन क्या ग़ज़ब की चुचियाँ हैं.” काफ़ी देर चूचाईओं से खेलने के


बाद उन्होने मेरी सारी को उतरना शुरू कर दिया. मैं घबरा गयी.


” ये, ये क्या कर रहे हैं प्लीज़ सारी मत उतारिये.”


वो मुझे चूमते हुए बोले,


” मेरी जान आज तो हमारी सुहाग रात है. आज भी सारी नहीं उतरोगी तो कब


उतारोगी? और बिना सारी उतारे हमारा मिलन कैसे होगा? शरमाना कैसा ? अब तो


ये खूबसूरत बदन मेरा है. लड़की से औरत नहीं बनना चाहती हो.?” मेरी सारी


उतर चुकी थी और मैं सिर्फ़ पेटिकोट में थी.


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