All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

पतियों की अदला बदली कर चुदाई


हेल्लो दोस्तो कैसे है मै हु मस्तराम आज हमारे ही एक पाठक ने बड़े प्यार से ईमेल कर कहा गुरूजी मेरी कहानी जरुर प्रकाशित कीजियेगा वैसे तो डेली हजारो कहानिया आती रहती है पर प्रकाशित नही हो पाती फिर भी मै अपलोगो के प्यार को देखकर अब इस सन्डे से रोज १० अपलोगो की मनपसन्द कहानिया प्रकाशित करुगा तो दोस्तों आप लोग एसे ही प्यार से अपनी कहानिया gurumastaram@gmail.com पर ईमेल करते रहिये और अपने भी एन्जॉय कीजिये और लोगो को भी एन्जॉय करने दीजिये और मस्त रहिये मस्तराम डॉट नेट के साथ..तो दोस्तों कहानी कुछ एसी है …..  आँखों पे बँधी पट्टी कमरे में होने वाली हर रोशनी को रोक रही थी, पट्टी वाकई में काफ़ी अच्छी थी, शालिनी ने महसूस किया. आज उसका जनम दिन था और उसके पति ने उसे एक अनोखा तोहफा देने का वादा किया था. शालिनी अपने कान खड़े कर दूसरे कमरे में से आने वाली आवाज़ को सुनने की कोशिस कर रही थी. थोड़ी देर पहले ही फोन की घंटी बज़ी थी जब नीरज ने उसकी आँखों पर पट्टी बाँध उसे बेडरूम में लेकर आया था. “में फोन सुनकर अभी गया और अभी आया,” नीरज बोला. शालिनी सुनने की कोशिश कर रही थी कि नीरज क्या कह रहा है पर आँखों के साथ थोड़ी पट्टी कानो पर भी थी जिससे उसे सुनने और समझने में तकलीफ़ हो रही थी. शालिनी ने कमरे मे आती कदमों की आवाज़ सुनी. “क्या तुम अपने अनोखे तोहफे के लिए तय्यार हो?” नीरज ने कमरे में रखे रेडियो की आवाज़ तेज करते हुए पूछा. “हां में तय्यार हूँ” शालिनी थोड़ा हिक्किचाते हुए बोली. “अब ये याद रखो कि ना ही तुम कुछ बोल सकती हो और ना ही कोई सवाल पूछ सकती हो.” नीरज ने कहा. इसके पहले दोनो ने एक अच्छे रेस्टोरेंट में रात का खाना खाया था. खाने के साथ दो दो पेग भी पिए थे जिससे महॉल थोड़ा खुशनुमा हो जाए. नीरज ने आज शाम को ही इस तोहफे का इंतेज़ाम किया था. उसकी उत्सुकता और बढ़ गयी थी कि ऐसा कौन सा तोहफे का इंतेज़ाम किया है नीरज ने उसके जनम दिन पर. नीरज ने उसकी पट्टी को एक बार और दुरुस्त किया और फिर उसे चूमने लगा. कमरा अंधेरे में डूबा हुआ था सिवाय कुछ मोमबतियों के जो कमरे को सुरमई रंग दे रही थी. शालिनी बेड के पास खड़ी थी और नीरज उसे बाहों में भरे उसको चूम रहा था. वो कभी उसके होटो पर चूमता और फिर उसकी गर्दन पर चूमने लगता. उसके चूमने की अदा ने शालिनी को गरमा दिया था. नीरज जब उसे उसके कुल्हों से पकड़ अपनी और खींच ओर ज़ोर से चूमता तो वो महसूस करती कि नीरज का लंड उसकी जांघों पर टक्कर मार रहा है. नीरज ने धीरे से उसके टॉप को उपर उठा निकाल दिया, ये ध्यान रखा कि उसकी पट्टी आँखों से ना हटे. फिर उसे घुमा कर उसकी ब्रा के हुक खोल कर वो भी निकाल दी. उसकी चुचियों को भींचते हुए उसने शालिनी को और अपने करीब किया और जांघों को उसकी जांघों के साथ रगड़ने लगा. नीरज अपने हाथों को शालिनी की नंगी पीठ पर फेर रहा था, फिर उसने अपने हाथ से शालिनी की जीन्स के बटन खोले और उसकी जीन्स को नीचे खस्का दिया.आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | नीरज ने उसे बिस्तर के किनारे पर बिठा दिया और खुद अपने कपड़े उतारने लगा. फिर घुटनो के बल हो उसने उसकी जीन्स उतार दी. नीरज ने उसे हल्का सा धक्का दे बिस्तर पर लिटा दिया, “अब असली मज़ा शुरू होता है.” नीरज ने कहा. नीरज ने बेड के नीचे से रस्सी निकाल ली, और शालिनी के हाथों को उसके सिर के पीछे कर उसके दोनो हाथ बेड के किनारे से बाँध दिए. “ये तुम क्या कर रहे हो और मेरे हाथ क्यों बाँधे है?” शालिनी ने पूछा. “मेने तुमसे कहा था ना कि तुम सवाल नही कर सकती !” नीरज ने कहा. शालिनी सोच रही थी कि वो कितनी मजबूर है इन सब चीज़ो से पर उसने अपने शरीर में फिर गर्मी महसूस की जब उसने पाया की नीरज ने उसे फिर चूमना शुरू कर दिया है. नीरज अब उसकी चुचियों को चूम रहा था. एक हाथ उसके एक मम्मो को दबा रहा था और दूसरे मम्मे पर वो अपनी ज़ुबान फेर रहा था. जब उसकी जीभ निपल के चारों और घूमती तो शालिनी के शरीर में एक थिरकन सी उत्पन्न हो जाती. वो नीरज को अपनी बाहों में भर उसे चूमना चाहती थी पर अपने हाथ बँधे होने से वो लाचार थी. नीरज उसकी चुचियों को चूस नीचे की ओर बढ़ रहा था, उसने उसकी नाभि पर ज़ुबान फेरनी शुरू कर दी. अब वो ज़्यादा समय उसकी नाभि में ज़ुबान डाल उसे चूम रहा था. महक उत्तेजना के मारे कांप रही. नीरज की यातना ने उसे और कामातुर कर दिया था. नीरज ने उसकी पॅंटी की एलास्टिक में अपनी उंगली फँसा उसे भी उतार दिया और उसे पूरा नंगा कर दिया. नीरज उठा और एक बड़ा सा तकिया ले आया. “शालिनी ज़रा अपने कुल्हों को उठाओ जिससे में ये तकिया तुम्हारे नीचे लगा सकु.” नीरज ने कहा. शालिनी अपने आप को उपर उठाने में दिक्कत महसूस कर रही थी, नीरज ने उसकी मदद की और तकिया उसके नीचे लगा दिया. अब शालिनी की चूत उपर को उठ चुकी थी. नीरज अब उसकी जांघों के बीच आ उसकी जांघों को चूस्ते हुए उपर की और बढ़ा. अब उसने अपनी ज़ुबान चूत के आजू बाजू फिराने लगा. शालिनी की उत्तेजना बढ़ रही थी, उससे अब सहन नही हो रहा था. नीरज अपनी ज़ुबान उसकी चूत में डाल उसे चोद रहा था, शालिनी ने चाहा कि वो नीरज के सिर को पकड़ उसे और अपनी चूत पर दबौउ पर हाथ बँधे होने के कारण वो ऐसा ना कर सकी. “हे भ्ाआआगवान” वो ज़ोर से सिसकी. “आवाज़ नही मेने कहा था ना !” नीरज बोला. नीरज ज़ोर से अपनी जीभ को शालिनी की चूत के अंदर बाहर कर रहा था, शालिनी अपनी कुल्हों को उठा उसकी इस अदा मे उसका साथ दे रही थी. शालिनी ने अपने शरीर को अकड़ता पाया और उसकी चूत ने उस दिन का पहला पानी छोड़ दिया. शालिनी की चूत में जोरों की खुजली हो रही थी और वो नीरज से कहना चाहती थी कि वो उसे कसके चोदे पर नीरज ने कुछ कहने से मना किया था ये सोच वो चुप रह गयी. नीरज उसकी जांघों के बीच से उठ खड़ा हुआ और उसके होठों को चूमने लगा. नीरज का एक हाथ उसके मम्मो को दबा रहे थे और दूसरा हाथ उसके सिर को ज़ोर से पकड़ा हुआ था. नीरज ने अपनी ज़ुबान शालिनी के मूह में डाल दी और उसकी जीभ से खेलने लगा. इतने मे शालिनी ने अपनी जांघों के बीच किसी को महसूस किया, ये कैसे हो सकता है जब नीरज उसे चूम रहा है तो उसकी जांघों के बीच कौन है.


कहानी जारी है…. आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए गये पेज नंबर को क्लिक करे …..


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