All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

नशे में बेटे से प्यास मिटाई


दोस्तों ये कहानी एक माँ और बेटे के बिच की है इस कहानी को पढने से पहले लड़के अपने हाथ अंडर वियर में डाल ले और लडकिया अपनी अंगुली चूत की क्लिट पर रख ले और फिर इस कहानी को पढ़े अगर मज़ा ना आया तो आज के बाद मै मस्तराम डॉट नेट पर कहानी लिखना बंद कर दुगा और हा अगर मज़ा आया तो एक कमेन्ट कर मुझे जरुर बता दीजियेगा |”तुम ऐसा कुछ नही करोगे आलोक” आयशा फोन पर चिल्लाई

“मैं ऐसा ही करूँगा मोम” दूसरी तरफ से आलोक की बेचैन आवाज़ आई “अगर मैं आपके साथ नही जी सकता तो फिर जीने का कोई मतलब ही नही बनता”

“तुम मेरे साथ ही तो जी रहे हो मेरे बच्चे” आयशा का जैसे रोना छूट पड़ा “मैं माँ हूँ तेरी, हमेशा तेरे साथ हूँ, ज़िंदगी भर”

“नही मोम” आलोक ज़िद पर अड़ा हुआ था “आप जानती हैं मैं क्या कह रहा हूँ. माँ बेटे का रिश्ता तो हमने उसी रात ख़तम कर दिया था जब पहली बार मैं और आप एक मर्द और औरत की तरह साथ थे”

“चुप हो जा आलोक. प्लीज़ …. मैं हाथ जोड़ती हूँ तेरे” आयशा ने पानी से भरी आँखें बंद करते हुए कहा

“नही माँ. अब चुप नही हो सकता मैं. 1 महीने से घुट घुट कर जी रहा हूँ पर अब और नही. अब नही जी पाऊँगा मैं”

और तब पहली बार आयशा को एहसास हुआ के वो लड़का कितना सीरीयस था. वो एमोशनल होकर यूँ ही बकवास नही कर रहा था. उसकी आवाज़ में शामिल संजीदगी पहली बार आयशा पर ज़ाहिर हुई. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | “नही आलोक. तुझे मेरी कसम है. कुछ उल्टा सीधा मत करना” आयशा ने कहा

“बहुत देर हो चुकी माँ. बहुत देर हो चुकी”

“कोई देर नही हुई आलोक. मेरी बात सुन ….” आयशा ने समझाने की कोशिश की

“आप मेरी बात सुनो माँ” आलोक ने बात बीच में ही काट दी “क्या चाहती हो आप? मैं तो दोनो तरफ से पिस रहा हूँ ना. अगर मैं सब भूल कर फिर आपके साथ माँ बेटे का रिश्ता बना लूँ तो सारी ज़िंदगी अपने आप से आँख नही मिला पाऊँगा के मैने अपनी माँ के साथ जिस्मानी रिश्ता बनाया था. दूसरी तरफ से मैं अगर ये सोचूँ के मैं कितना चाहता हूँ आपको, कितना तरसता हूँ आपके लिए, एक बेटे की तरह नही पर एक मर्द की तरह तो भी नुकसान मेरा ही है क्यूंकी आपका कहना है के हम एक नही हो सकते “तूँ अच्छी तरह जानता है के हम क्यूँ एक नही हो सकते. समझाया था मैने तुझे उस दिन” आयशा लगभग चिल्लाति हुई बोली “क्या सिर्फ़ वही एक वजह है?” आलोक ने पुछा “तू मेरा बेटा है और मैं तेरी माँ. इससे बड़ी वजह और क्या हो सकती है?” आयशा इस बार चिल्ला ही पड़ी “पाप है ये. घोर पाप” “तो ठीक है माँ. फिर एक पाप और कर लेने दो मुझे. इस तरह से ज़िंदा नही रह सकता मैं. बस अब बर्दाश्त नही होता” “आलोक सुन. कुछ उल्टा सीधा नही करना. मेरी कसम है तुझे. अपने साथ तूने कुछ भी किया तो …..” इससे पहले के आयशा बात पूरी करती, आलोक फोन काट चुका था.

आयशा ने फ़ौरन दोबारा फोन मिलाया, आलोक का सेल पर वो स्विच्ड ऑफ था.

उसने फ़ौरन अपने घर का लॅंडलाइन नंबर मिलाया, पर बिज़ी टोन आती रही. यानी किसी ने रिसीवर को उठाकर एक तरफ रखा हुआ था. वो बेचैन हो उठी. समझ नही आया की क्या करे. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

एक बार को उसने किसी और को फोन करने की सोची पर फिर ये ख्याल आते ही रुक गयी के क्या कहेगी? के उसका बेटा स्यूयिसाइड कर रहा है, जाके रोको उसको? क्यूँ करना चाहता है स्यूयिसाइड?

झल्लाकर वो जल्दी से उठी और अपना बेग उठाकर होटेल रूम से बाहर निकली. सामान पॅक करने का टाइम था नही इसलिए रूम से चेक आउट नही किया. लॉबी मे आकर उसने अपनी गाड़ी निकाली और तेज़ी से अपने घर की तरफ भगा दी.

“हे भगवान !!!! प्लीज़ आलोक. कुछ करना मत बेटा” दिल ही दिल में वो सोचती जा रही थी.

वो उस रात एक किटी पार्टी में थी जब पहली बार उसका और उसके बेटे आलोक का रिश्ता बदल गया था.

हर महीने वो और उसकी कुछ दोस्त मिलकर एक किटी पार्टी रखते थे जहाँ पर सिर्फ़ औरतें होती है, और वो सब आयशा की अच्छी दोस्त थी. पार्टी के दौरान शराब बहुत ही आम बात थी. पार्टी में मौजूद सारी औरतें पीती थी और उसके बाद पॉर्न मूवीस और गंदी बातों का का सिलसिला चलता. जब वहाँ मौजूद औरतें अपना मुँह खोलती, तो शरम के सारे पर्दे हटाकर बात करती.

अपने ग्रूप में एक आयशा को छोड़कर सब औरतों के बॉयफ्रेंड थे, ज़्यादातर जवान लड़के और वहाँ सब अपने एक्सपीरियेन्सस शेयर करती. कौन किस पोज़ में किससे चुदी, कब चुदी, कितनी देर चुदी, कैसे चुदी, सब खुलकर बताया जाता. पार्टी में चॅलेंज था के कौन सी औरत एक साथ कितने मर्दों को झेल सकती है और उसका रेकॉर्ड फिलहाल मिसेज़. रधुवंशी के नाम था जिन्होने एक साथ एक ही बिस्तर पर चार मर्दों से चुदवाया था. प्रूफ के तौर पर उन्होने अपनी खुद की बनाई हुई एक फिल्म लाकर दिखाई थी जिसमें वो अपने बेडरूम में चार चार के साथ अकेली भिड़ी पड़ी थी.

उस रात भी यही हाल था. शराब और वासना हवा में थी और बेशर्मी हर औरत की ज़ुबान पर. पर हद तब हो गयी जब मिसेज़. वर्मा ने अपने पर्स से नशे की सिगरेट्स निकाली.

आयशा स्मोक तो करती थी पर ड्रग्स उसने पहली बार उस पार्टी में ली थी. पूरी सिगरेट ख़तम होने के बाद उसे अपना कोई होश नही था पर साथ ही साथ वो ये जानती थी के वो क्या कर रही है. सिगरेट में मौजूद ड्रग्स ने उसकी हालत अजीब कर दी थी. वो अपने होश में थी भी और नही भी. आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

“निकल रही हो?” रात के 1 बजे जब आयशा ने अपना समान पॅक करना शुरू किया तो पास ही खड़ी मिसेज़. पाण्डेय ने पुछा

“हां” आयशा ने जवाब दिया

“कौन पिक कर रहा है?”

“मेरा बेटा आलोक” आयशा बोली

उसकी बात सुनकर मिसेज़. पाण्डेय थोड़ा नज़दीक होकर बैठ गयी.


कहानी जारी है…….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे ….


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