All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

दोस्त की बुआ ने गुलाम बनाया


हैल्लो दोस्तों, में विक्की आपके लिए एक और सच्ची कहानी लेकर आया हूँ। ये कहानी तीन साल पहले की है और में एक कॉंट्रेक्टर हूँ, उस समय मेरी उम्र 25 साल की थी और मुझे एक कांट्रेक्ट मिला था, जिसके लिए मुझे 5 लाख की ज़रूरत थी। मेरा एक बचपन का दोस्त है, उसका नाम विशाल है और यहाँ उसके परिवार वाले और उसके सारे रिश्तेदार मुझे अच्छी तरह से जानते है।  मैंने उसे अपनी ज़रूरत के बारे में बताया तो उसने कहा कि इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करना तो बहुत मुश्किल है। फिर वो अचानक बोला कि हाँ अगर मेरी बुआ चाहें तो मिनटो में ये काम कर सकती है।


दोस्तों उसकी बुआ का नाम सुषमा है, उम्र लगभग 53 साल होगी और वो दिखने में अच्छी सुंदर औरत है, गोरा रंग, भारी भरकम कूल्हे, बड़े-बड़े बूब्स साईज़ है और वो रेल्वे में ऊँचे पद पर जॉब करती है। उनके पति मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करते है और ज्यादातर विदेश में ही रहते है, उनका बड़ा बेटा दुबई में है और छोटा बेटा अमेरिका में पढ़ता है। में अक्सर उनके घर अपने दोस्त के साथ गया हूँ और उनकी नज़र में मेरी अच्छी इज्जत है और में भी उनकी इज़्ज़त दिल से करता था, ग़लत ख्याल का तो सवाल ही नहीं था। फिर उसने अपनी बुआ को मेरी दिक्कत के बारे में फोन पर बताया तो उन्होंने मुझसे भी बात की तो मैंने उन्हें बताया कि मुझे दो महीनों के लिए 5 लाख रूपये की ज़रूरत है। फिर वो बोली कि बेटा रकम बड़ी है तो में कोशिश करती हूँ और 5 लाख का ब्याज लगेगा, ये सुनकर मुझे थोड़ी राहत मिली तो मैंने झट से कहा कि बुआ थैंक यू, मुझे मंज़ूर है। फिर उन्होंने कहा कि तू शाम को घर आ जाना तो फिर में विशु के साथ उनके घर शाम को पहुंचा।


अब बुआ बातचीत करते हुए बड़ी अजीब नज़रो से मुझे देख रही थी, खासकर मेरे लंड का उंभार जो कि  मेरी जीन्स के ऊपर से साफ महसूस रहा था। फिर मैंने सोचा कि बुआ ऐसी थोड़ी है। फिर बुआ ने मुझे 2 दिन बाद आने को कहा और बोली कि बेटा तू मुझे अपना फोन नंबर दे दे, में तुझे फोन करके बुला लूँगी तो मैंने कहा कि ठीक है। फिर हम वहाँ से आ गये। फिर 2 दिन के बाद बुआ का फोन आया जब रात के कोई 9 बज रहे थे तो मैंने फोन उठाकर बुआ को नमस्ते कहा तो वहाँ से आवाज़ आई कि विक्की तेरा काम हो गया है अपने पैसे ले जा। फिर मैंने कहा कि बुआ अभी काफ़ी लेट हो गया है और में कल सुबह पैसे ले लूँगा। फिर वो बोली कि नहीं तुझे अभी आना होगा, सुबह में ऑफिस होती हूँ तो मैंने मजबूरी में कहा कि ठीक है बुआ में अभी आता हूँ और जब सर्दियो के दिन थे। फिर में अपनी कार में बैठा और चल पड़ा और में बहुत खुश था कि चलो चिंता खत्म हो गई।


अब इतने में बुआ का फोन दोबारा आया तो वो बोली कि विक्की एक काम है तो मैंने कहा कि बुआ हुक्म करो। फिर वो बोली कि बेटा वाईन शॉप से एक विस्की की बोतल लेता आना तो मैंने हैरानी से पूछा कि बुआ फुफाजी घर पर आए है क्या? फिर वो बोली कि अरे नहीं बेटा, घर पर अमेरिका से मेरी नंनद आई हुई है और उसी के लिए चाहिए, कोई दिक्कत है क्या? फिर मैंने कहा कि अरे नहीं बुआ में ले आऊंगा। ये कहकर मैंने फोन रख दिया और वाईन शॉप से एक विस्की की बोतल और एक शेम्पियन की बोतल भी ले ली ताकि वो खुश हो जाए। अब मेरे दिमाग़ में अभी भी कोई शैतानी नहीं थी। फिर मैंने 10 बजे उनके घर की डोर बेल बजाई तो दरवाज़ा बुआ की नंनद ने खोला, वो भी लगभग 50 साल के आस पास थी, उन्होंने ब्लेक कलर की लेगी पहनी थी और ऊपर बड़ी सी टी-शर्ट पहनी थी और उनकी टी-शर्ट के ऊपर से उनके बड़े-बड़े निप्पल के दाने साफ दिख रहे थे, जिससे पता चल रहा था कि उन्होंने अन्दर ब्रा नहीं पहनी है, वो मोटी ताज़ी और सेक्सी औरत थी और उनका फिगर साईज 36-32-40 था।


फिर मैंने कहा कि मुझे बुआ ने बुलाया था तो वो बोली कि बेटा आजा सुषमा दीदी किचन में है तू बैठ तो में ड्रॉयग रूम में बैठ गया और टी.वी. के चैनल पलटने लगा। फिर थोड़ी देर में बुआ आकर मेरे पास बैठ गयी। फिर मैंने उनके पैर छूए। अब वो मेरे सामने ही बैठ गई और रात का समय था तो वो नाईटी में थी और उनके ऊपर के तीनों बटन खुले थे तो मुझे उनके बूब्स साफ नज़र आ रहे थे। मेरी नज़र उन पर पड़ी तो मैंने एकदम से अपनी निगाहे नीचे कर ली। फिर उन्होंने खाने के लिए पूछा तो मैंने कह दिया कि में खाना खाकर आया हूँ। फिर बुआ ने अपनी नंनद से मेरा परिचय करवाया, विक्की ये मेरी नंनद स्वाती है तो मैंने उन्हें नमस्ते कहा। फिर बुआ बोली कि ले स्वाती आ गई तेरी विस्की। फिर मैंने कहा कि बुआ में इनके लिए शेम्पियन भी ले आया हूँ तो ये सुनकर स्वाती आंटी खुश हो गयी और बोली थैंक यू बेटा। फिर स्वाती आंटी उठी और किचन से तीन ग्लास और स्नेक्स ले आई।


फिर मैंने कहा कि बुआ में शराब कभी-कभी किसी प्रोग्राम या त्यौहार पर ही पीता हूँ। फिर एकदम से स्वाती आंटी बोली कि आज भी तो त्यौहार है तो मैंने हंसकर बोला कि नहीं स्वाती आंटी में शराब पीकर घर नहीं जा पाउँगा, घर पर बहुत सख्ती है। फिर उन्होंने कहा कि तो क्या हुआ? तू यही रुक जा सुबह चले जाना। फिर मेरा दिमाग़ घूम गया और अब पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लग रहा था? कि दाल में कुछ काला है, लेकिन मुझे यक़ीन नहीं हो रहा था। फिर बुआ बोली कि देख बेटा अगर पैसे चाहिए तो हमें कंपनी दे, हम तुझे खा थोड़ी जायेंगे और में भी शराब नहीं पीती, लेकिन आज में भी स्वाती की वजह से पी रही हूँ, बेफ़िक्र रहो, हम बूढी औरतें तुझे बोर नहीं होने देंगे तो में शर्माकर बोला कि ऐसी कोई बात नहीं है बुआ, आप जो बोलोगे वैसा ही होगा। फिर मैंने घर पर फोन किया और झूठ कह दिया कि में विशाल के घर पर हूँ और सुबह आऊंगा तो इतने में बुआ ने तीन पटियाला पैग बना लिए।







दोस्त की बुआ ने गुलाम बनाया

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