All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

8 दिन की मनमोहक चोदाइ


सभी पाठको को मेरा नमस्कार मेरा नाम रवींद्रन पिल्लै है, मैं केरलियन हूँ | Hindi Sex Stories Antarvasna Kamukta Sex Kahani Indian Sex Chudai Antarvasna मैं फ्री सेक्स मैं विश्वास रखता हूँ, मैं देकने मे स्मार्ट नही हू, पर मेरा शरीर तगड़ा है, लॅंड ९” इंच लंबा है धनुष के आकार का| मैं जिस कंपनी मे काम करता हूँ, वहाँ अक्सर नयी नयी जगहों मे घूमने का मौका मिलता है| इसी भ्रमण के दौरान मेरा नयी नयी लड़कियों और औरतो से परिचय हुआ और मैने उनकी सेक्स या चोदाई के प्रति रुझान और अतृपत्ता को जाना| मैं आज आपको सिंगरौली (म.प्र.) का अनुभव बताने जा रहा हूँ|यहाँ मैं तीन महीने था, मैने कई लड़कियो और भाभियो को | लेकिन उन सबसे अलग थी एक लड़की, जिससे मैने चोदाइ की नई परिभाषा सीखी सिर्फ़ 8 दीनो मे| तो प्रस्तुत है मेरे जिंदगी के 8 मनमोहक दिन|

तो मेरी कहानी शुरू होती है कुछ ऐसे| तब मैं अपने 1 और दोस्त के साथ एक रूम ले के रहता था| लाइफ बहुत अच्छी चल रही थी| फिर हमने झाड़ू पोछा वग़ैरह के लिए एक कामवाली को रखा| उसका नाम सुनीता बगिया था| देखने मे ठीक-ठाक थी बहुत ज़्यादा गोरी नही थी और ना ही काली थी, उसका फिगर बड़ा ही सेक्सी था| पतली सी थी, उरूजो का साइज लगभग 34 होगा पर गांन्ड बड़े बड़े थे| जब भी वो चलती थी उसके गांन्ड के उभार सॉफ दिखाई देते थे, उस समय मेरा लंड खड़ा हो जाता था|

सुबह कोई 8 से 8.30 तक आ जाती और एक घंटे मे वो अपना सारा काम ख़तम कर के चली जाती | कभी कभी उसके आने मे देर हो जाती तो हममे से कोई रुक जाता रूम पे, ताकि वो काम ख़तम कर ले फिर हम रूम बंद करके निकले, और रूम पे रुकने वाला मैं होता था क्योंकि मेरा काम बाहरी था और मैं ऑफीस कभी भी आ-जा सकता था|

जब भी वो देर से आती मैं पूरा तैयार होके रहता था, ताकि उसका काम ख़तम हो तो मैं ऑफीस जाउ| जब वो झाड़ू लगती थी तो अपना दुपट्टा उतार के रख देती थी और झुकने के वजह से उसके उभार सॉफ दिखते थे| कभी कभी तो बिना ब्रा के ब्लौस पहन के आती थी जिससे एकदम अंदर तक दिखता था जब उसके पिछे होता था उसकी गांन्ड को घूरा करता था| कई बार मैने ध्यान कीया की जब भी मैं उसके उरूजो को देख रहा होता हू तो वो मुझे देख कर मुस्कुराती थी| ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा मैं उसके उरूजो को और गांन्ड घूरता रहता कभी कभी उसकी नज़रे मिल जाती घूरते हुए, वो बस एक स्माइल दे के रह जाती, ढकने की कोई कोशिश नही करती, इससे मेरी हिम्मत बढ़ने लगी|

एक दिन मैं ऑफीस नही गया क्योंकि मेरा मूड नही था| मेरा दोस्त ऑफीस जा चुका था| इसलिए सुबह सुबह मैं स्नान वग़ैरह कर के मैने अपना लॅपटॉप चालू किया और ब्लू फिल्म देखने लगा और मूठ मरने लगा, थोड़ी देर मे जब मैं झड़ने वाला था तो उठ के बाथरूम मे गया और पानी निकालने लगा तभी मुझे किचन मे बर्तन सॉफ करने की आवाज़ आई| मुझे लगा की कहीं ये आ तो नही गयी और वो अगर आई होगी तो पक्का मुझे मूठ मरते देखा होगा क्योंकि रूम का दरवाजा खुला था और जहा वो अपना बैग और दुपट्टा रखती थी, वहाँ से मैं साफ दिखाई देता था| मैं जल्दी से पानी निकाल के लंड सॉफ किया और किचन के तरफ गया तो देखा वो आ चुकी थी और बर्तन साफ कर रही थी| मैने पूछा कब आई उसने कहा 5 मिनिट पहले और उसने एक कातिल से स्माइल दी, मैं समझ गया इसने सारा प्रोग्राम देखा है| वो ज़्यादा कुछ नहीं बोली, पर हाँ उसके बाद से वो मेरे से ज़्यादा खुलने लगी जब भी देखती एक सेक्सी सी स्माइल देती और खुलकर अपने उरूजो और गांन्ड को दिखाती थी|

कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा, मैं उसके चुचियो और गांन्ड के दर्शन करता और उसको याद कर के मूठ मारता| फिर कुछ दीनो बाद मुझे शहर चेंज करना था, सो मैने ट्रान्स्फर ले ली, मुझे 8 दिन की मुहलत मिली ताकि मैं कुछ दिन आराम करके दूसरे शहर जा सकूँ| | मेरे पास सिर्फ़ 8 दिन थे इन 8 दिनों मे मुझे उसे चोद्ना था, मैने तो ठान लिया था की अब तो जाने से पहले इसे चोद के ही जाया जायगा | मैं इस वजह से ऑफीस नही जा रहा था और मैं रूम पे अकेला था क्योंकि मेरा दोस्त सुबह ऑफीस चला जाता था| मैने सोच लिया जो करना था इन 8 दिन मे ही करना है|

पहला दिन (सोमवार) : सुबह सुबह मेरे दोस्त ऑफीस के लिए रेडी हो रहा था | यही कोई सुबह के 9 बजने वाले थे वो निकालने ही वाला था की सुनीता आ गयी| वो आते ही काम मे लग गयी और अगले 10 मिनिट मे मेरा दोस्त भी ऑफीस के लिए निकल गया| मैं हाल मे टीवी देख रहा था और वो बर्तन सॉफ कर रही थी, और मैं वहाँ टीवी चालू कर रखा था पर मेरा ध्यान तो उसकी गांन्ड पे था| जब उसने बर्तन साफ कर लिया, तो फिर उसने झाड़ू उठाया और कमरे की सफाई करने के लिए जाने लगी| उसने मुझे तैयार ना होते हुए देख के पूछा “ऑफीस नही गये?” मैने कहा “इस हफ्ते पूरी छुट्टी हैं” वो एक प्यारी सी स्माइल दे के चली गयी झाड़ू लगाने, तब मैने सोचा अब उरूजो को देखने का टाइम आ गया है|

मैं वही हाल मे स्टूल लगा के बैठ गया| जब वो हाल मे झाड़ू लगाने लगी तो उसके उरूजो के दर्शन हुए, आज वो अपनी चुचिया कुछ ज़्यादा ही झुक के दिखा रही थी और बीच बीच मे मेरे तरफ देखती, मैं तो एकटक उसकी चुचियो को घूर रहा था वो बस हंस कर के फिर से झाड़ू लगाने लग जाती थी| जब वो काम ख़तम कर ली तो उसने अपना बैग और दुपट्टा उठाया फिर बोली “मैं जा रही हूँ” मैने कहा “कुछ देर और रुक जाती” और उसने बोला “क्या?”

मैने कुछ नही कहा, दुबारा कहने की मेरी हिम्मत नही हुई, और वो चली गयी| तब मुझे पता चला की, खड़े लॅंड पे धोखा क्या होता है| मैं फिर क्या करता ब्लू फिल्म देखा और मूठ मार के रह गया|

दूसरा दिन(मंगलवार) – सोमवार की तरह कुछ ख़ास नही रहा, पर कुछ चीज़े अलग थी जैसे की आज वो जानबूझ के देर से आई लगभग 10 बजे क्योंकि उसे मालूम था मैं रूम पे ही हू और दूसरा मैने जाने के टाइम मे उसे रुकने के लिए नही बोला क्योंकि मेरी फट रही थी|

तीसरा दिन (बुधवार) – मेरा दोस्त जा चुका था| सुबह के 9:30 हो रहा था और अब तक वो नही आई थी मैने सोचा चलो ब्लू फिल्म देखते है, फिर मैने सोचा उस दिन की तरह दरवाजा खुला छोड़ देता हू और उसी तरह बैठ के फिल्म देख रहा था| हेडफोन आज भी लगा था, साउंड बंद था की उसे लगे मुझे बाहर की आवाज़ सुनाई नही दे रही है पर असल मे मुझे सुनाई दे रही थी| वो लगभग 10 बजे तक आई| मैने गेट के खुलने की आवाज़ सुनी, वो आई मैं दिखाने लगा की मैं फिल्म मे खो गया हूँ| उसने आके ठीक उसी जगह पे दुपट्टा और अपना बेग रखा फिर मुझे उसकी कोई आवाज़ सुनाई नही दी माने वो वहाँ खड़ी होके देख रही थी | मैं फिल्म देख रहा था और अपने लोवर के उपर से लंड मसल रहा था|

फिर वो 2 मिनिट के बाद किचन मे चली गयी और मुझे बर्तनों के आवाज़े आने लगी| फिर 5 मिनिट बाद बर्तन की आवाज़ बंद हो गयी मैं सतर्कत हो गया, फिर से कही आ तो नही गयी और मैं अपना लंड लोवर से बाहर निकल के उसे हिलने लगा| फिर मुझे दरवाजे के पास थोड़ी आहट सुनाई दी जो की उसकी पायल की आवाज़ थी, मैं समझ गया वो दरवाजे पे चुप के देख रही है| मेरा लंड पूरा टाइट हो गया था और मैं पूरा उत्तेजित हो चुका था, मन तो किया की उसे अभी खीच के लाउ और अपना लंड उसके गांन्ड मे डाल दू, पर मैने इंतजार करना सही समझा | थोड़ी देर बाद कुछ अजीब सी आवाज़ और वो बाथरूम मे चली गयी और दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुनाई दी मुझे| मैं जल्दी से उठा और लॅपटॉप बंद कर के बाहर हॉल मे आ गया| उसने बाथरूम का दरवाजा लॉक किया था | फिर अंदर से मुझे उसके उल्टी करने की आवाज़ आई मैने सोचा इसे क्या हो गया|

फिर वो थोड़ी देर मे बाहर आई मैने पुछा “तुम ठीक हो?” उसने जवाब दिया “हाँ” और फिर से वो बाथरूम मे भागी और इस बार उसने दरवाजा आधा खुला छोड़ रखा था उसे फिर से उल्टी होने लगा| मैने उसकी मद्द करने की सोची और मैं बाथरूम मे गया और पूछा “तुम ठीक हो, दावा लाउ,?” उसने कहा “नही ठीक है” उसे उल्टी तो लग रही थी पर वो कर नही पा रही थी| मैने उसके पीठ सहलाने सुरू किया तो उसे थोड़ा अच्छा लगा|

मैने उससे पूछा “क्या हुआ” तब उसने बताया की वो माँस मछली नही खाती है, उसे उनसे घिन्न है | असल मे पिछली रात को मैने और मेरे दोस्त ने दारू का प्रोग्राम रखा था और साथ मे चिकन 65 बनाया था जिस को तेल मे फ्राइ किया गया था वो खाने के बाद कुछ बाकी पड़ा था किचन मे| फिर उसे उल्टी जैसी लगी तो मैं फिर से उसका पीठ सहलाने लगा और उसे थोडा अच्छा लगा, मेरा एक हाथ उसके कंधे पे था और दूसरे हाथ से उसकी पीठ सहला रहा था| मेरे हाथ के दबाव पड़ने से वो थोड़ा मेरे और करीब आ गयी और थोड़ा मुझसे सॅट कर खड़ी हो गयी| मेरा लंड अब उसके कमर पे लगने लगा जिससे मेरा लंड खड़ा होने लगा| मैं उसके पीठ को सहलाता रहा और वो थोड़ा थोड़ा कर के मेरी तरफ झकने लगी| मैने धीरे से अपना एक हाथ थोडा नीचे किया जो लगभग उसके उरूजो को छु रहा था और अपना दूसरा हाथ से उसके कमर और गांन्ड को सहलाने लगा|

फिर वो मेरे से पूरी तरह से चिपक गयी और मैने दीवाल पे टीका के उसे चूमने चाटने लगा| होंटो को चूमने लगा, जीभ से उसके होंटो को चाटने लगा, उसकी आँखे बंद होने लगी| वो अपने उरजो और चूत को मेरे लॅंड पे खड़े खड़े रगड्ने लगी, जिससे मैं और उत्तेजित होकर उसे होंटो के बीच अपनी जीभ डाल दी, वो भी खुल के मेरा साथ दे रही थी| फिर मैं उसके चुचियो को मसालने लगा, उसने इशारा किया की दरवाजा खुला है| मैने जल्दी से जाके दरवाजा अंदर से लॉक किया, उसे रूम के अंदर लेके आया और उसे बेड पे बैठा दिया, जैसे ही मैने उसे बेड पर बिठाया, उसने मुझे अपनी ओर खिचा और मेरे से चिपक गयी, मैं उसे फिर से चूमने लगा और उसकी चुचियो को मसालने लगा|


फिर मैने उसका हाथ अपने लंड पे रखा और वो मेरा लंड मेरे लोवर के उपर से ही सहलाने लगी| मैने उसकी कुरती और ब्रा निकल दिया फिर उसके चुचिया मेरे सामने आ गाई, बस मैं टूट पड़ा और उसको लीटा के उसकी चुचियो को चूसने लगा वो भी मेरा सर पकड़ के अपने चुचियो दबाए जा रही थी| फिर मैने उसके सलवार का नाडा खोला और उसके सलवार को उसकी पेंटी के साथ थोड़ा नीचे किया और एकदम चिकनी गुलाबी चूत मेरे सामने दिखाई दिया मैने तुरंत उसके चूत पे अपने होठ रख दिए, उसके शरीर मे जैसे सिहरन पैदा हो गयी|

मेरे नाक मे जैसी ही उसके चूत की खुशबू आई, मेरा रोम रोम खिल गया. मैने धीरे से उसकी चूत पे हाथ रखा तो वो एकदम से गन्गन हो उठी. मैं हौले से उसकी चूत को फैलाया और अंदर तक का नज़ारा लिया| चुकी कमरे मे बहुत अच्छी लाइट थी, मुझे सॉफ सॉफ दिखयी दे रहा था| मैने उसकी तरफ देखा तो वो मुस्कुरा के बोली “क्या खोज रहे हो?” मैने कहा “अमृत” “ऐसे हे नही मिलता है अमृत, इसके लिए कट्टोर तपस्या करना पड़ता है” उसने कहा| फिर मैने उसकी सलवार पूरी उतार दी|

“बताओ मुझे क्या करना होगा” कहते हुए मैने अपनी लोवर और बनियान भी उतार दी|

“वो जो आप रोज देखते हो, क्या वैसे कर सकता है? उसने पूछा”

“क्यो नही, करना चाहे तो कर सकते है”|

अब हम दोनो नंगे एक दूसरे के सामने थे, मैने महसूस किया की उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो गयी|

वो मेरे पास आ गयी और मेरे लंड के सुपाडे को सहलाने लगी, उसने लंड की चॅम्डी को पूरा नीचे तक खिच लिया| मुझे दर्द तो हुआ पर जब उसे लंड को पूरा मूह मे लिया तो एक पल के लिए लगा की मैं स्वर्ग मे हू| मैं पलंग पे लेट गया, कुछ इस तरह से की उसकी चूत टीक मेरे सामने थी. अब हम दोनो 69 पोज़ मे थे. मैने धीरे से इसी चूत के अग्र भाग को चाटा, तो को पूरी हिल गयी और मेरे लंड को पूरा गले तक उतार लिया| उसने मुझे धक्का दिया, और मेरे उपर बैट गयी| वो अपनी चूत को मेरे मूह मे घुसाने लगी| “पूरा अंदर तक चाटो” और अपने चूत को मेरे मूह मे रगड़ने लगी और मेरा लंड तेज़ी से चूसने लगी| मैं अपनी जीभ से उसी चूत चाटने लगा, कुछ देर बाद वो चिल्लाने लगी “उः…आह…ह………..चोदो ..आहहहह…” और ज़ोर ज़ोर से अपनी कमर उछाल उछाल कर मेरे मूह मे रगड़ने लगी|

“आह…ज़ोर से चाटो, आ..मैं गयी..मैं गयी….” उसने मेरी गंण्ड को भिच लिया और लंड को ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी और वो मेरे मूह मे ही झॅड गयी|

चूत से बहते पानी को मैं पूरा पी गया और चूत को चाट चाट कर साफ कर दी|

“मैं तो गयी…तुमने तो मेरी चूत पूरी साफ कर दिया, अब तुम्हारी बारी है” कहते हुआ वो मेरे अंडकोष मेरे गांन्ड तक को चाटने लगी | उसने अपने दोनो हाथ से मेरी गंण्ड को उठा लिया और लंड को मुहसे चूसने लगी|

उसकी इस हरकत से मुझे बड़ा मज़ा आया, अब मेरे से कंट्रोल नही हो पा रहा था ”बस निकल गया…आह” कहकर मैं उसे हटाने लगा, की कही मैं उसके मूह मे ना झाड़ गऊ. पर वो नही हटी…”आह……………………..म्म्म्म……………” और मैं झड़ गया|

उसने मेरा पूरा वीर्य पी लिया, पूरा लंड को चाट-चाट कर साफ कर दिया |

“हिसाब बराबर” कहते हुए अपने कपड़े पहने लगी |

कपड़े पहने के बाद बोली “आज लेट हो गयी हूँ, बाकी कल” और जो जल्दी से दरवाजा खोल के निकल गयी.

पालक झपकते ही इतना कुछ हो गया, मुझे यकीन ही नही हुआ. खैर कल तो वो आएगी, सोच कर मैने भी मन को तसली दी|

चौथा दिन (गुरुवार): मेरा दोस्त 9.30 तक जा चुका था |सुबह का 10.30 हो रहा था और अबतक वो नही आई, मैं बड़ा बेचैन हो रहा था, क्योकि आजतक वो इतना लेट कभी नही आई| मैने सोचा चलो नंगी फिल्म देखते है फिर मैने लॅपटॉप चालू किया, तभी गेट खुलने की आवाज़ आई | वो आ चुकी और आज बड़ी खुश दिख रही थी. वो अंदर आई दरवाजा बंद किया और मेरे बगल मे बैठ गयी

“मेरा लंड लोवर से बाहर निकल कर पकड़ते हुए बोली “क्यो सवेरे सवेरे इस नन्ही सी जान की दुख दे रहे हो”. मैने धीरे से कहा “तुम ही लेट हो, सवेरे से ये बेचारा तुम्हारा इंतजार कर रहा था”.

कहते हुए मैने उसके उरूजो को दबाना चाहा, तो वो मेरे लंड को चिकोटी काट के खड़ी हो गयी और बोली “रुक बदमाश पहले काम कर लू, फिर तेरी खबर लेती हूँ” और किचन मे काम करने चली |

10 मिनिट बाद वो आई, टीक उस समय मैं झुक कर पलंग के नीचे से कुछ निकल रहा था, मेरी लोवर कुछ ढीली थी, और झुकने की वजह से लोवर सरक गयी थी और मेरी गांन्ड नंगे और फैली थे और छेद दिख रहा था. वो कब मेरे पीछे आ के खड़ी हो गयी मुझे पता ही नही चला |

वो मेरे गांन्ड को देख रही थी, धीरे से उसने मेरी गांन्ड को सहलाना शुरू किया और एक उंगली गंण्ड की छेद मे डाल दिया. मैने चौक कर पीछे देखा तो वो मुखे देख कर मुस्कुरा रही थी|

“उठो मत, ऐसे ही बैठे रहो” कहते हुआ उसने मेरी लोवर पूरी उतार दी|

वो एक हाथ से मेरी गांन्ड मे थूक लगा कर धीरे धीरे उंगली अंदर बाहर कर रही थी, और दूसरे हाथ से मेरे अंडकोष और लंड हिला रही थी, मेरा ये पहला अनुभव था की कोई लड़की मेरी गांन्ड मे उंगली कर रही हो|

उसे उंगली करना बंद कर मेरा गांन्ड और अंडकोष को चाटने लगी और दोनो हाथो से अपने कपड़े उतरने लगी. अब वो पूरी नंगी हो चुकी थी उसे अपने दोनो उरूजो को से मेरा गांन्ड पर रगड़ना सहलाना और दबाना शुरू किया |

मैं उस समय क्या कहूँ ऐसा मज़ा मुझे आज तक नही आया| ये मेरा इस तरह का पहला अनुभव था की कोई लड़की इतनी मज़ा भी दे सकती है|

“तुम इतनी चुड़क्कड़ हो मुझे मालूम नही था”

“क्यो मेरा मन तो बहुत करता है, पर शरम के कारण नही कर पाती, नही तो सब तुम्हारी तरह सोचते, देखो मेरी चूत कितनी गीली हो गयी है” कहते हुए वो खड़ी हो गयी और मुजसे भी उठने को कहा|

मैं पलंग पर लेट गया और वो बाथरूम चली गयी| जब वो आई तब तक मेरा लंड मुरझा गया था|

ये देख कर की मेरा लंड मुरझा गया है, मेरा लंड सहलाने लगी| फिर लंड को चाटने लगी , फिर धीरे धीरे चूसने लगी| तकरीबन 2 मिनिट तक उसने मेरा लंड चुसकर एकदम से कड़ा कर दिया, अब मेरे से कंट्रोल नही हो पा रहा था| मैने उसे लेटने को कहा और वो लेट के अपना पैर फैला दी| फिर क्या था मैने अपना लंड उसके चिकनी सी चूत पे रखा और एक ज़ोर का झटका दिया पर निशाना ग़लत रहा और लंड फिसल गया उसके जाँघो पे| उसने तुरंत मेरा लंड पकड़ा और अपने चूत के छेद पे रखा और मैने दूसरा ट्राइ किया और इस बार एक ही बार मे मेरा पूरा लंड उसकी चूत मे चला गया|

फिर क्या था मैने ज़ोर ज़ोर के झटके लगाने चालू कर दिए| वो भी अपनी गांन्ड उठा उठा के पूरा साथ दे रही थी बीच बीच मे मैं उसके गले पे किस करता कभी उसकी चुचिया चूस्ता तो कभी कभी उसके निपल्स पे हल्के से काट लेता वो पूरा मज़ा ले रही थी|

वो भी दोनो हाथो से मेरा गांन्ड कस कर पकड़ी हुए थी, जब मैं कमर हिलाते हुए नीचे करता, तो वो मेरे गांन्ड को अपनी तरफ दबाती और अपनी गांन्ड को उपर उठा लेती | जिससे की पूरा लंड उसकी चूत मे चले जाए| कभी कभी मेरे गांन्ड मे उंगली करती, जिससे मैं जोश मे आ कर अपनी स्पीड बढ़ा देता.

कुछ देर मे मुझे थकता देख कर, इसने हटने का इशारा किया|फिर मैं उठ कर साइड मे लेट गया और उसको अपने उपर चड़ाया |वो मेरे खड़े लंड को अपने चूत पे टीका के बैठी और मेरा लंड एक बार फिर से उसके चूत मे पूरा चला गया फिर वो उपर नीचे होने लगी|

मैं उसके चुचियो से खेलता और साथ साथ उसकी गांन्ड पे हाथ रख के उसको झटके लगाने मे मदद भी कर रहा था| वो तो मुजसे भी तेज अपनी गांन्ड हिला हिला कर पूरा लंड का मज़ा ले रही| उसने अपने दोनो पैरो को उपर उठाकर मेरे कंधो पर रख लिया, कुछ दस बारह झटको के बाद अचानक “आह..एम्म्म…..एम्म्म…. अहह” कहते हुए उसका शरीर एटने लगा.

“रूको मैं भी आ रहा हूँ….आह..एम्म्म” कहते हुए मैं उसकी कमर पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से चोद्ने लगा.

“आह…आ……………………….” मेरा वीर्या फवरे की तरह बहने| ह्मने एक दूसरे को कसकर पकड़ा और एक साथ झड़ गये| वीर्य और रज के संगम से मुझे उस समय जो तृप्ति मिली की क्या बताऊ| मेरा लॅंड अभी भी उसके चूत मे था, उसकी पूरी चूत वीर्य और रज से भर गयी थी और बह रहा था| वो निढाल हो कर मुझ पर पड़ी थी|

वो झड चुकी थी फिर भी उसके चूत की खुजली नही मिटी थी, अब भी अपनी गांन्ड आगे पीछे कर ही रही थी| कुछ देर मे मेरा लॅंड फिर से खड़ा होने लगा, उत्साह बढ़ाने के लिए मैने उसके दोनो चुचियो को बारी बारी चूस रहा था, जिस से उसे और मज़ा आता और वो और ज़ोर ज़ोर से उपर नीचे हो रही थी तो कभी गोल गोल घूम रही थी| वो थॅकी दिख रही थी, तो उसको लिटा दिया और उसके उपर आके और पूरे ताक़त से चोद्ने लगा अब उसे इससे थोडा दर्द होने लगा पर साथ मे मज़ा भी आने लगा| मैं पूरे ज़ोर ज़ोर से झटके लगा रहा था जिससे वो पूरी तरह से हिल जा रही थी| कुछ देर तक यू ही झट्के देता रहा, फिर वो मुझे ज़ोर से पकड़ ली और अपनी गांन्ड उठा उठा के झटके खाने लगी मैं समझ गया वो झड़ने वाली है तब तक मैं भी झड़ने के करीब था और मैने झटको की रफ़्तार और बढ़ा दी |

“आह… छोड़ो राजा आह….ओह मा….मैं तो गयी……फाड़ दो आज…. गयी ..मैं गयी…”

“आह..रानी…….गया…..मैं गया……निकल गया.”

कुछ ही झटको मे हम दोनो एक साथ फिर झड गये| हमारी तकरीबन 45 मिनिट की चुदाई चली थी, फिर मैं कूछ देर तक ऐसे ही उसके चूत मे लंड डाले पड़ा रहा| उसकी चूत पूरा वीर्य का तालाब नज़र आ रहा था, उसके गांन्ड तक वीर्य बह रहा था|

अचानक वो उठ कर पलंग पर पैर फैला कर खड़ी हो कर अपने चूत को मसले लगी, उसके खड़े होते ही उसे की चूत से वीर्य बहने लगा जिसे मेरे मुख के पास लाती हुए बोली “आख़िर तुम्हे तुम्हारी तपस्या का फल मिल ही गया” और उसने अपना हाथ चूत मे घुसाया और निकाल कर अपनी उंगलिओ पर पर लगे वीर्य को दिखाते हुए चाटने लगी |

उसके उपर फिर हम दोनो उठे और बाथरूम मे जाके अपना अपना सॉफ किया फिर उसने कहा “लेट हो गयी हूँ..बाकी कल”| “ठीक है…मेरी रानी” और फिर वो अपने कपड़े पहन के चली गयी|

बाकी के चार दीनो मे, मैने उसकी गांन्ड मारी, उसकी बहन को चोदा, ये सब आपको अगली कहानी मे बताऊंगा| आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी, मुझे ज़रूर मेल करिए, मेरा ई-मेल हैलड़किया या औरते मुझसे रिश्ता बनाना चाहती है, वो भी मुझे ई-मेल या फोन कर सकती है, जिसे मैं गुप्त रखूँगा|


The post 8 दिन की मनमोहक चोदाइ appeared first on Hindi Sex.




8 दिन की मनमोहक चोदाइ

No comments:

Post a Comment

Facebook Comment

Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks