All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

मेरी आग को आज ठंडा कर दो


दोस्तों मस्तराम डॉट नेट पे ढेर सारी कहानियां पढ़ी मैंने मेरे मन में भी जिज्ञासा हो रही थी की कहानी लिखू पर हिंदी में टाइप नही कर पा रहा था तो मैंने मस्तराम को ईमेल किया उन्होंने मुझे बताया की कहानी हिंदी में कैसे लिखना है सो आज मै अपनी रियल कहानी आप लोगो को लिख रहा हु  दोस्तों चाहे लड़का हो या लड़की 16 से 21, इसी उम्र में सेक्स की तरफ सब बढ़ते हैं | मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था । जब मैं 18 साल का था तब मुझे भी कुछ कुछ होता था । अक्सर रात को सोते वक्त मेरा हाथ मेरे अंडरवियर के अंदर चला जाता था। मैं अनजाने में ही काफी देर तक अपना लंड सहलाता रहता था। जवान लड़कियों को देख कर अक्सर तन जाता। फिर रात को उन्हें याद करके अपना लंड सहलाया करता था | शादी की रात थी । मेरे मामा के बेटे की शादी थी । वो लड़की भी आई थी बहुत बन-ठन के । उम्र उसकी करीब 18 या 19 साल थी । पर वो मुझ से एक क्लास आगे थी, बोले तो एक साल बड़ी थी, नाम था किर्ती । उसकी खूबसूरती एक दम गजब की थी – गोरा रंग, कसा हुआ शरीर, तनी हुई चूचियाँ ज्यादा बड़ी नहीं थी पर इतनी मस्त थी कि मेरा लंड उसे देखते ही सलामी देने लगता था। मैं उसे अपने दिल की बात बता चुका था पर वो कभी उसका ढंग से जवाब नहीं देती थी। मेरे मामा की एक लड़की है सुमोना । मैंने सुमोना को किर्ती से बात करने को कहा, सुमोना मेरी हम-उम्र थी इसीलिए हम दोनों एक दूसरे से खुल कर बात करते थे । कोई भी बात नहीं छुपाते थे। इस लिए मैंने किर्ती को लेकर अपने दिल की बात सुमोना को बता दी, और उससे कहा की वो मेरी इस मामले में मदद करे | शादी की रात था, नाच – गाना खत्म होने के बाद सब सोने की जगह देख रहे थे। जिसको जहाँ जगह मिली, वो वहीं लेट गया। पर मेरी नजर तो किर्ती का पीछा नहीं छोड रही थी, में सिर्फ उसके पीछे पीछे जा रहा था | सुमोना मेरे पास आई और बोली – मैं और किर्ती ऊपर वाले स्टोर-रूम में सोने जा रहे हैं, तुम भी वहीं पर सोने आ जाना। मुझे मेरा काम कुछ बनता नजर आ रहा था। मेरे दिमाग में एक बात आई और मैं उनसे पहले ही स्टोर रूम में जा कर लेट गया। तभी आवाज के साथ किर्ती और सुमोना स्टोर में आई। दोनों किसी बात पर जोर-जोर से हंस रही थे | आपको एक बात बताना तो में भूल गया वो यह कि सुमोना किर्ती से भी ज्यादा सेक्सी थी। वो ज्यादा गोरी तो नहीं थी पर उसका फिगर बहुत मस्त था। एक दम तनी हुई किर्ती से बड़ी चूचियाँ थी सुमोना की। पर क्योंकि वो मेरी बहन जेसी थी तो कभी उसके बारे में नहीं सोचा था। कमरे में आते ही दोनों बातें करने लगी। स्टोर रूम में लाइट तो थी पर मैंने ऑन नहीं किया था । कुछ देर के बाद सुमोना किर्ती को बोली कि तुमने तो प्रदीप (मैं) पर जादू कर दिया है तुम्हारा पागल दीवाना बना फिरता हैं, और तुम हो कि उसे भाव नहीं दे रही हो | किर्ती – यार, प्रदीप पसंद तो मुझे भी है पर गडबड वाली बात यह है की वो मुझ से उम्र में छोटा है । कल अगर शादी की बात आयेगी तो सब मना कर देंगे। सुमोना : यार तू भी ना कहाँ शादी तक पहुँच गई, अभी तो प्यार लेने और देने की उम्र है शादी में तो बहुत समय बाकी है। अभी तो तुम सिर्फ प्यार करो और जिंदगी के मजे लो। एक बात बता, अगर प्रदीप तुम्हें चूमना चाहे तो तुम चूमने दोगी ? किर्ती : सोचना पड़ेगा, और तू कह रही हे उसके बारे में तो कल सोचती हूँ उसके बारे में, अब मुझे सोने दे । नाच-नाच कर बदन की लग गयी हे | एक काम कर, मेरा बदन दबा दे। इतना उसके मुह से सुनते ही सुमोना किर्ती से लिपट गई और दोनों एक दूसरे का बदन दबाने लगे | जिसे देख कर मेरा और मेरे लंड का बुरा हाल हो रहा था। मैं भी अपने अंडरवियर में झट से हाथ डाल कर अपना लंड हिलाने लगा। थोड़ी देर बाद वो दोनो सो गई। कमरे में बहुत अंधेरा था। हम तीनों की अलावा कमरे में कोई नहीं था। जब लगा कि वो सो गई हैं तो मैं उनके बगल में जाकर लेट गया। दोनों लिपट कर सो रही थी। अँधेरे के कारण पता ही नहीं चल रहा था कि कौन किर्ती है और कौन सुमोना है। दोनों एक उम्र की और लगभग एक ही फिगर की थी और आज दोनों ने कपड़े भी एक जैसे पहने हुए थे। मैं काफी देर लेटा सोचता रहा, मैं क्या करूँ क्या ना करूँ ! फिर मैंने हिम्मत करके दोनों में से एक की चूचियों पर हाथ रख दिया। मुझे कुछ नंगापन सा महसूस हुआ जब हाथ को पूरा सरका के देखा तो पता लगा कि पूरी चूची बाहर थी। जीवन में पहली बार किसी की नंगी चूची को छुआ था। मेरी तो हालत खराब हो रही थी। पर हिम्मत करके मैंने उस नंगी चूची को सहलाना शुरु कर दिया। वो थोड़ा सा कसमसाई पर मैंने चूची को सहलाना चालू रखा क्योंकि मैं अपने आप को काबू नहीं कर प् रहा था | थोड़ा और उसके करीब गया और जाकर मैंने उसके होठों पर अपनी उंगली फेरना शुरू कर दिया। अचानक उसने मेरी ऊँगली अपने मुँह में ले ली और चूसने लगी । पहले तो मैं थोड़ा घबराया पर जब वो मेरी उंगली को चूसने लगी तो मेरा डर निकल गया। मैंने उसकी चूची को जोर जोर से दबाना शुरू कर दी। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी। मैं पूरी मस्ती में था, मैंने आवाज पहचानने की कोशिश भी नहीं की। अगर करता तो पता चल जाता कि वो किर्ती नहीं सुमोना थी। पर मैं तो मस्ती में उसकी चूचियाँ दबा रहा था, वो भी तो मस्त हो कर दबवा रही थी । मेरी हिम्मत धीरे धीरे और बदने लगी तो फिर मेने उसकी चूची को मुँह में ले लिया और चूसने लगा। वो और भी मस्त हुई जा रही थी और मैं भी पागलो की तरह चुसे जा रहा था, पहली बार किसी की चूची को मसल मसल के चूस रहा था | अचानक किर्ती ने अंगडाई ली तो मुझे पता चल गया की जिसे किर्ती समझ कर में मस्ती कर रहा था वो मेरी अपनी बहन जेसी थी। मुझे बहुत जानदा लगा और शर्म आई और मैं वहाँ से उठ कर भाग गया | अगली सुबह मुझे बहुत शर्मिन्दगी महसूस हो रही थी कि मैं अपनी बहन के साथ ही मस्ती कर रहा था रात को । एक तरफ मुझे गन्दा लग रहा था मगर दूसरी तरफ मुझे उसकी चुचिया भी याद आ रही थी | तभी सुमोना मेरे पास आई, उसे देख कर तो मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था। सुमोना मेरे पास बैठ गई। उसके बैठने के बाद मुझे गन्दा लग रहा था तो मैं उठ कर जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे बैठने के लिए कहा। मैं चुपचाप किसी चोर के तरह सिर झुका कर उसके बाजु में बैठ गया। मैं चुपचाप किसी चोर के तरह सिर झुका कर बैठ गया। आप लोग यह कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | अचानक वो हुआ जो मेने कभी सोचा ना था, सुमोना मेरे नजदीक आई और मेरे होठों पर अपने होंठ रख दिए। कहाँ मैं शर्म से मरा जा रहा था पर अचानक मेरे उपर यह हमला मेरी शर्म पर भारी पड़ गया और मैं भी सुमोना के होंठ चूसने लगा । कोई पांच मिनट एक दूसरे के होंठ चूसने के बाद सुमोना मुझ से दूर हुई और बोली- प्रदीप तुम्हें किसी बात पर शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है। मैं खुद यही चाहती थी, की तुम मेरे साथ यह करो जो कल हुआ । सुमोना के मुँह से यह बात सुनने के बाद रही सही शर्मिन्दगी और झिझक की चिता जल गयी | मैंने सुमोना को पकड़ा और एक कोने में ले गया और उसकी चूचियाँ दबाते हुए उसके होठों पे अपने होंठ रख दिए। अगर किसी के आ जाने का डर नहीं होता हो शायद मैं उसे वही नंगा कर देता, में इतना पागल हो चूका था वहा पे | किसी तरह शादी निपट गई, और रात हो आई । रात होने से पहले जब भी मौका मिला सुमोना और मैं लिपट लिपट कर एक दूसरे को प्यार करते रहे । रात को काफी देर तक सुमोना की चूचियाँ चूसी, होंठ चूसे, बस चूत नहीं मारी । कीर्ति आज हम दोनों के साथ नहीं थी, आज कमरे में हम दोनों अकेले थे। दो दिन ऐसे ही निकल गए । तीसरे दिन भाभी के मायके में जागरण का कार्यक्रम था । सब लोग को वहा जाना था कि अचानक सुमोना के सर में दर्द होने लगा । उसने जाने से मना कर दिया । उसे अकेले नहीं छोड़ सकते थे इसीलिए मैं भी रुक गया । अब घर में मैं ओर सुमोना अकेले थे। उन लोगो को गए पांच मिनट भी नहीं हुए थे कि सुमोना के सर का दर्द ठीक हो गया। मुझे सब समझ आ गया की कोनसा दर्द था उसके सर में | मैं सुमोना के पास धीरे धीरे गया तो वो मुझ से लिपट गई और बोली – मेरी जान प्रदीप, मैं कई दिनों से एक अजीब सी आग में जल रही हूँ। प्लीज मेरी आग को आज ठंडा कर दो। इतना कहते ही उसने अपने गर्म गर्म और नरम नरम होंठ मेरे होंठों पर रख दिए । मैं खुद एक आग बन कर जल रहा था । मैं भी उसके होंठ चूसने लगा । आज पूरी रात थी हमारे पास अकेले रहने के लिए क्यूंकि सब सुबह ही आने वाले थे। मैंने सुमोना को गोद में उठा लिया और भैया के कमरे में ले गया ।


कहानी जारी है…. आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए गये पेज नंबर को क्लिक करे …..


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मेरी आग को आज ठंडा कर दो

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