All Golpo Are Fake And Dream Of Writer, Do Not Try It In Your Life

गुलाबी बदन वाली लड़कियों की गुलाबी चुतो की चुदाई


प्रेषिका : प्रियंका


आज मै एक मजेदार कहानी लिख रही हु | अकेले लंड वाले अपने लंड हाथ में पकड़ ले और जिनके साथ उनकी चुदक्कड बिविया या गर्लफ्रेंड या कोई भी चूत जिसे वो चोदते हो उनकी चूत में डाल ले और मेरी बहनों आप अपनी अपनी चूत में लंड या तो कोई भी डिलडो विल्ड़ो डाल के हिलाती हुयी कहानी का आनंद लेगी तो काफी मजेदार होगा क्युकी मै अभी अपनी चूत में डिल्डो डाल के कहानी टाइप कर रही हु वैसे तो मै अभी अपने बेड पे पेट के बल लेटी हुयी हु अभी मेरी सहेलिया अपने घर गयी है और मै होस्टल में अकेली अपने रूम में पड़ी हु बोर्रिंग फील हो रहा था सो सोची क्यों न मै अपनी कहानी मस्तराम डॉट नेट पर पोस्ट कर दू और अपनी चूत की खुजली भी मिटा लू सो अभी मै बता रही थी की मै पेट के बल बेड पे लेटी हुयी हूँ और डिल्डो को पूरा अपनी चूत में डाल के रखी हु डिल्डो का एक सिरा पूरा मेरी चूत में है और एक सिरा बेड से लगा हुआ है सो उसे जितना दबा रही हु उतना ही मज़ा आ रहा है सो अब मै ज्यादा देर ना करते हुए अपनी कहानी पर चलती हु | प्रियंका मेरी नेहा सुस्मिता की सब से करीब की सहेली थी. सुस्मिता कनक-काया साँचे ढली अप्रतिम गदराई प्रतिमा थी तो प्रियंका केसर घुली दूधिया गुलाबी बदन की परी थी. एक का दमकता तपा रूप खींचकर बदन को पिघला छोड़ता था तो दूसरी पूनम की वह दूधिया चांदनी थी जिसमे सर से पाँव तक अपने रूप की शीतल चादर में लपेटकर होश गम कर रखने का जादुई कमाल था.

सुस्मिता ने मेरे पास आ सकने के लिये पेंटिन्ग सीखने का बहाना चुन रखा था.ज़िद करके अब सप्ताह में दो दिन प्रियंका भी उसके साथ आने लगी थी. उस रोज़ भी मौज़ के साथ हम तीनों बैठे हुए थे. दोपहर दो बजे का वक्त हो रहा था. तभी सुस्मिता का मोबाइल फोन बजा. वह प्रियंका से बोली कि मिस्टर का फोन है. वो लंच के लिये आ गये हैं. चल चलते हैं. मैं ज़ल्दी से खाना खिला दूंगी फिर अपन अभी ही लौट आते हैं.

प्रियंका बोली – “यार, तुम तो अपना काम करोगी, लेकिन मैं वहां बैठ कर भला क्या करूंगी? मैं यहीं बैठती हूं. तुम खाना खिला कर लौट आओ. तब तक मैं इनसे पहले का छूटा हुआ पाठ समझ लेती हूं.”

सुस्मिता ने प्रियंका को घूरकर देखा और फिर मेरी तरफ आंखें गड़ाती रुखसत हो गई.

सुस्मिता के पलटते ही प्रियंका ने मेरी निगाहों में झांका और मुस्कुराने लगी. मुझसे उसने पूछा – ” बताइये तो भला कि वह आप की तरफ़ आंखें गड़ाये क्यों देख रही थी?”

मैने भी उसी अन्दाज़ में जवाब लौटाया -” यह तो मैं तुमसे भी पूछ सकता हूं. आखिर पहले तो उसकी निगाह तुम पर ही गई थी. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | ” तो क्या हुआ? आप ही बताइये ना!”प्रियंका मनुहार करते हुए मचली. ” शीतल, अब कहो भी न यार. तुम्हीं ने पहेली बुझाई है तो तुम्हारी मीठी बोली में ही सुनना मुझे अच्छा लगेगा.” ” पहले आप प्लीज़. कह भी दीजिये ना..आखिर जो मैने सोचा है वह आप के मन में भी तो होगा.”

प्रियंका की अदाएं मुझे लुभा चली थीं. मैने तय कर लिया कि मन की बात बिन्दास कह दूं.

“मैं बताऊं”, झिझकते हुए मैं आगे बढ़ा – ” सुस्मिता सोच रही थी कि उसके जाने के बाद हम दोनों..”,

कहते-कहते भी मैं ठिठक चला. रुकी हुई बात प्रियंका की ज़ुबान से निकली – “मौके का फ़ायदा न उठा लें”

प्रियंका कह तो गई थी पर मुस्कुराते लबों के बावजूद उसकी निगाहें झुक चली थीं. मौसम का मिजाज बदल रहा था. मैने प्रियंका को छेड़ा- “ठीक तो सोचा उसने. जी तो सचमुच चाहता है कि..”

हौले से आंखें मिलाते उसने कहा ” क्या..?”

शीतल को हौले से अपनी ओर खींच बांहों में समेटते मैने जवाब दिया – ” कि तुम्हें बांहों में भर लूं..”

बांहों में अपने सर को छिपाएप्रियंका ने मंद-मंद स्वरों में दिल की बात उजागर की. वह बोली –

” मैने तो उसी रोज़ आप को देख लिया था जिस रोज़ किरन के यहां आप छिपे बैठे थे. मैं अनजाने में पहुंच गई थी. दरवज़ा भिड़ा होकर भी खुला रह गया था. किरन झटपट आहट सुनती यूं दौड़ी थी जैसे आफ़त आकर दरवाजे पर खड़ी हो गई हो. उसने मुझे झटपट टाला कि परेशान हूं अभी. बाद में आना प्लीज़. लेकिन मैं उससे क्या कहती कि अंदर के आईने ने मेरी आंखों को बता दिया था कि अंदर बिस्तर को खूब हिलाकर आप वहां मेरी सहेली के साथ आराम के मज़े फ़रमा रहे थे.

प्रियंका को और कसते और उसके होठों पर होठ लहराते हुए मैने भी वैसी ही लरज़ती आवाज़ में दिल में छिपे उस रहस्य की बात को उजागर कर दिया जो मुझे अधीर कर रही थी.

” अच्छा हुआ जो तुमने देख लिया था. अब यह भी जान लो कि जिस आईने ने तुम्हें मुझे दिखाया था उसी में मैने उस सुन्दरी प्रियंका को देख लिया था, जो उस रोज़ नीली साड़ी में स्वर्ग से उतरी अप्सरा लग रही थी. मेरा तो जी किया कि उसी वक्त तुम्हें लपककर बाहों में घसीट लूं और…”

“और?” -शीतल की उंगलियों ने मेरी छाती को टुहकते हुए पूछा.

” जमकर लिपटाऊं और… आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मेरा संकोच देखकर प्रियंका ने मनुहार भरी ज़िद से कहा -” बोलो ना प्लीज़. बहुत शरमाते हो. यहां कौन बैठा है? जिसे सुनना है वह तो तुम्हारी बांहों में समाई है.. “वहीं के वहीं पटक कर तुम पर चढ़ जाऊं और तुममें समाकर अपना सारा होश खो दूं.”

सामने प्रियंका का छोटा सा प्यारा चौकोर चेहरा प्यार की चढ़्ती गर्मी से लाल हुआ पड़ रहा था. उसकी शरारत मुझको चिढ़ाती हुई खिझा रही थी.प्रियंका को बिना आगे मौका दिये “अपनी प्यारी प्रियंका को चोद डालूं” कहता सोफे पर ही उसपर पिल पडा. मैने उसकी पतली कमर को बांहों में लपेटते हुये उसकी गोल-गोल छातियों को जकड़कर अपनी छाती में समेत लिया था. मेरे ओठ प्रियंका के बारीक गुलाबी होठों की फांक पर टूट पडे थे. कभी मेरे और कभी उसके ओठ आपस में होड़ लगते एक दूसरे को निगल रहे थे. भारीभारी सांसों दे साथप्रियंका की कोमल छातियां मेरी कठोर छाती पर मचल रही थीं.प्रियंका अपने को संभाल नहीं पा रही थी और उसकी”आह..आह” की दबीदबी आवाज मुझको आगे बढ़कर दोनों बदनों की प्यास बुझाने उत्तेजित किये जा रही थी. सोफे में बदन समाये नही पड़ रहे थे और मैं बेकाबू हुआ जा रहा था.प्रियंका की नाजुक कमर को झटके से अपनी तरफ खींचते हुए छातियों को कसकर जकड़े हुये और बगैर अलग किये बार-बार पूरी आवाज के साथ बेतहाशा चूमता हुआ मैने दोनों के चिपके बदनों को दीवार से सटाया. दीवार से चिपककर अब खड़े-खड़ेप्रियंका और मेरा बदन खूब अकड़ते एक-दूसरे को दबाते ऎंठे जा रहे थे.प्रियंका और मै इस प्रकार गुंथे पड़ रहे थे जैसे दो डोरियां बारबार लिपटती हुईं एक-दूसरे को बुन रही हों. हम दोनों पर मदहोशी की तारी छाई जा रही थी. मेरा एक हाथ प्रियंका की साड़ी को ऊपर सरकाता उंगलियों से उस जगह को कुरेद रहा था जहां उसकी छोटी किरन जीभ लपलपाती लार तपका रही थी और प्रियंका उसी तरह अपना एक हाथ नीचे करके छोटी किरन के चहेते राजा को मुठ्ठी में थाम प्यार से खींच-खींचकर शिकायत कर रही थी कि बहुत दिनों में तुमको पाया है. क्यों इतना तड़पाया है तुमने मुझको. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

” सहा नहीं जा रहा है. अब मुझको थामकर बिस्तर पर ले चलो प्लीज़.”

प्रियंका उसी प्वाइंट पर आ गई थी जहां मेरा दिल भी पहुंचा हुआ था. मेरा एक हाथ उसके घुटनों पर पहुंचा और दूसरा हाथ उसकी पीठ पर. प्यारी प्रियंका के खूबसूरत कोमल बदन को बाहों में थामे मैं बिस्तर की ओर चला. बाहों में थमे हुए गुलाई में ढला प्रियंका का बदन मुझसे चिपक चला था.प्रियंका की आंखों की पुतलियां एकटक मेरी आंखों में डूबी मुझे निहार रही थीं और उसके मादक रसीले होठ बिला-संकोच आवाज करते मेरे होठों को लगतार चूमे जा रहे थे.

प्रियंका उस वक्त मुझे अत्यंत खूबसूरत और प्यारी लग रही थी. “ये पल फिर न जाने हासिल हों” मैने सोचा कि उसके एकएक अंग को मै आज जी भरकर निहार लूं. उसकी छरहरी देह जैसे बड़ी फुरसत में गढ़ी गई नक्काशी की प्रतिमा थी. सिर से पैर तक बदन का हर अंग मन को मोह लेने वाले इतने खूबसूरत कटाओं से भरा था कि प्यारी प्रियंका की समूची देहयष्टि में हिमालय की कंदराओं से अपनी उछ्लती तरंगों के साथ चट्टानों के बीच से आड़ी-तिरछी दौड़ती निर्मल, चंचल उस मानभरी सरिता की सुन्दर छबि दिखाई पड़ती थी जिसका स्निग्ध, शीतल, पारदर्शी जल चाहे जितना-जितना पिया जाता रहे, वह मन में और-और पीते जाने की तृष्णा जगाता उसे सदैव अतृप्त्ता में अधीर बनाये रखता है.

प्रियंका का समूचा बदन मेरे सामने संगमरमर की खूबसूरत नक्काशीदार ऐसी दूधिया मूरत की मानिन्द बिछी थी जिसे गुलाबी रंग में नहलाया गया हो. चित्त लेटी हुई प्रियंका के बदन पर मैं पेट के बल पूरी लंबाई में सवार हो चला था. उसके पैरों की उंगलियों से लेकर उसके खूबसूरत चेहरे तक मेरा हर अंग प्रियंका किरन के अंगों से चिपका था. उसके हाथों की अंगुलियों में मैने अपनी उंगलियां फंसाते हुए सिर के पार फैलाकर पूरी लंबई मे चिपक लिया था.उसका छोटा सा कोमल मुख बड़ा प्यारा लग रहा था जिसपर पतली नाक के नीचे बारीक लाल होठों की नाजुक फांक सजी थी. मेरे होठों उन होठों पर बेताबी से खेल रहे थे. हम दोनों में एक दूसरे के होठों को निगल जने की होड़ लगी थी.शीतल की खू्बसूरत सुराहीदार गरदन को अपने गले से रगड़ता और जीभ से चाटता हुआ मैंने अपनी हथेलियों से उसके कन्धों को दबाया. अब म्रेरी निगाह शीतलकिरन के उन कोमल उभारदार संगमरमरी स्तनों पर पहुंची, जिनपर गुलाबी बेरियां सजी थीं. उन्हे अपने गालों से खिलाता बारी-बारी से होठों में दबाता मै चूसता हुआ हौले से यूं चबा जाता था किप्रियंका किरन की सुरीली सिसकियां निकल आती थीं.

” हाय, धीरे..” वह कहती और शरारत में उन्हे मेरे दांत और जोर से काट जाते थे. मेरे हाथ उस प्यारी के स्तनों को कसकर थामे पहाडी़ के तले से उसकी चोटी तक मालिश किये जा रहे थे. प्रियंका किरन के बदन का खूबसूरत पहाडी़ दरिया हौले-हौले कांपता लहरें लेने लगा था. उसकी नाजुक गुलाबी एड़ियां मुझको नीचे उतरने का न्यौता दे रही थीं. गालों और होठों को मैने धीरे-धीरे नीचे उतारता हुआ मैं नदी की उस संकरी घाटी में पहुंच चला था जो मेरी किरन की बाईस इन्ची कमर थी. प्रियंकाकिरन के पुठ्ठों को दबाकर घेरते हाथों के पन्जों ने उसकी क्षीण कटि को खूब कसकर जकड़ रखे था और नाभि के दायें-बायें मचलते गालों के बीच मेरे ओठ पुच्च-पुच्च.. की ध्वनि के यौनत्तेजक स्वरों के साथ नाभि में डूब-डूब कर नहा रहे थे. काया की नदी में तरंगें उठीं.प्रियंका की बाहों ने मेरी गरदन को घेरते मेरे माथे, मेरे गालों और फिर लबों को ताबड़-तोड़ ठीक वैसी ही आतुरता से चूम डाला. उसके कांपते हुए लबों का बेताब संगीत मेरे कानों में मिठास घोलता गुनगुना रहा था – आह, मेरे प्यारे प्रियहरि,…आह, तुम मुझे पागल किये जा रहे हो… मैं तुम्हारी दीवानी हो गयी हूं ….अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है…मैं भीगी जा रही हूं.प्रियंका की सांसें भारी हो रही थीं और उखडे़-उखडे़ स्वरों में वह मेरे कानों में बुदबुदाए जा रही थी- हाय मेरी किस्मत ….तूने मेरे मन के राजा से मिलाया भी तो कितने छोटे लम्हे के लिये…वो आती होगी …मेरे राजा..आज इस मौके को मै अधूरा नही छोड़ना चाहती.

प्रियंका ने उठकर अपनी बाहों में भींचते हुए अपनी छाती में कसकर मुझे जकड़ लिया. धक्का देती मुझे धकेलकर उसने मुझे चित्त कर दिया था. उसकी फुर्ती की मन ही मन तारीफ करता हुआ मैने कहा- मेरी प्यारी जंगली बिल्ली. मौका भले आज मिला है लेकिन ख्वाबों में तो तुम्हारी झाडी़ में उस लम्हे में ही घुस पडा़ था, जब पहली बार तुमसे मेरी आंखें टकराई थीं. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | हां, मुझे भी वह लम्हा हमेशा याद रहेगा.

इस बीच मेरी प्यारी सुन्दरी प्रियंका के हाथ मेरे तन्नाए हथियार को उसकी मूठ से उस चमकते तिकोने गोल सिरे तक खींच रहे थे जो अपनी लाली में लार टपकाता मचल रहा था.प्रियंका बार-बार होठों से उसे चूमती नीचे से ऊपर तक जुबान फिराती प्यार से चाटे जा रही थी. इधर मेरी अंगुलियां अपनी किरन की बेदाग, चिकनी, पतली और सुडौल टांगों पर फिसलतीं नरम और ताजगी से चुस्त जंघाओं के बीच घुंघराली झाड़ियों में उस बारीक फांक को टोह रही थीं, जहां अपने आप को बडे़ जतन से घूंघट में छिपाये किरनप्रियंका की लाल लचीली कोमल कली लजाती उस राजकुमार का इन्तिज़ार कर रही थी जो इस वक्त उसकी मालकिन की हथेलियों पर खेलता बार-बार दुलार से चूमा जा रहा था. मैने पास ही रखे जैम में अपनी उंगलियां डालते किरन की आंखों में झांका.

ज़रा फिरा दूं. मिठास आ जाएगी?

आंखों में आंखें डुबोती वह धीरे से बोली-वह स्वाद तो जुबान पर यूं ही चढा़ रहता है. मुझे यही बहुत प्यारा है, जो ताजिन्दगी मुझमें बसा रहेगा.

आंखों के जादू ने फौरन यूं असर किया कि प्रियंका और मेरी छातियों ने कसकर भिड़ते हुए एक-दूसरे को बांध लिया. हम दोनों गाल सटाए इक-दूजे के गले से लिपटे थे.प्रियंका मेरे कानों में बुदबुदा रही थी – मैने पहली बार में ही आप को अपने अंदर प्रवेश करता देख लिया था…


कहानी जारी है….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे दिए गए पेज नंबर पर क्लिक करे ….


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